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भारत में नवाचार को नई उड़ान, प्रधानमंत्री मोदी ने की ₹1 लाख करोड़ के RDI फंड का शुरुआत
₹1 लाख करोड़ का RDI फंड भारत के तकनीकी भविष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है. यह फंड रिसर्च और इनोवेशन को गति देगा, डीप-टेक स्टार्टअप्स को सशक्त बनाएगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश में निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाले शोध और नवाचार को गति देने के लिए ₹1 लाख करोड़ के “शोध, विकास और नवाचार (RDI) फंड” की शुरुआत की. यह घोषणा इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC) 2025 के उद्घाटन के दौरान की गई. इस फंड के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को नोडल मंत्रालय बनाया गया है जो दो-स्तरीय फंडिंग संरचना के तहत कार्य करेगा.
अनुसंधान से उद्योग तक सहयोग का पुल
पहले स्तर पर, यह फंड नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (NRF) के तहत बनाए गए स्पेशल पर्पस फंड (SPF) के रूप में काम करेगा. यह सीधे कंपनियों या स्टार्टअप्स में निवेश नहीं करेगा बल्कि फंडिंग की जिम्मेदारी दूसरे स्तर के फंड मैनेजरों को सौंपी जाएगी. इसमें वैकल्पिक निवेश फंड (AIFs), विकास वित्त संस्थान (DFIs), गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) और फोकस्ड रिसर्च ऑर्गनाइजेशंस (FROs) जैसे टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB), बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) और IIT रिसर्च पार्क शामिल हो सकते हैं.
फंडिंग के तरीके और लक्ष्य क्षेत्र
RDI फंड के तहत कम या शून्य ब्याज दर पर दीर्घकालिक ऋण, पूंजी निवेश (विशेष रूप से स्टार्टअप्स के लिए) और डीप-टेक फंड ऑफ फंड्स में योगदान जैसे प्रावधान होंगे. यह फंड अनुदान या अल्पकालिक ऋण का समर्थन नहीं करेगा. सरकार ने जिन प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है उनमें ऊर्जा सुरक्षा, क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष, बायोटेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शामिल हैं.
भारत विज्ञान और नवाचार के नए युग में प्रवेश कर रहा है : पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि विश्व व्यवस्था तेजी से बदल रही है और भारत इस परिवर्तन के केंद्र में है. उन्होंने कहा, “हमारा स्टार्टअप इकोसिस्टम इस दिशा में बड़ा योगदान दे रहा है. RDI फंड जैसी पहल भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक नवाचार में अग्रणी बनाने में सहायक होगी.”
उद्योग जगत ने फंड का स्वागत किया
स्टार्टअप और वैकल्पिक पूंजी उद्योग ने इस कदम को ‘भविष्यदर्शी और ऐतिहासिक’ बताया. विशेषज्ञों का कहना है कि यह फंड भारत में नवाचार पूंजी के ढांचे को मजबूत करेगा और सार्वजनिक-निजी सहयोग का नया युग शुरू करेगा. यह फंड शुरुआती विचारों और बाजार-उपयुक्त तकनीक के बीच की खाई को पाटेगा और एक सहयोगी तंत्र बनाएगा जिसमें अकादमिक जगत, उद्योग और उद्यमी मिलकर कार्य कर सकेंगे.
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