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ग्रीन हाइड्रोजन की ओर बड़ा कदम: H2 Carbon Zero को मिला 8.5 लाख डॉलर का निवेश

इस फंडिंग से कंपनी अपनी गीगावॉट-स्तरीय फैक्ट्री की शुरुआत करेगी, इंजीनियरिंग टीम का विस्तार करेगी और टेलीकॉम, रक्षा व कंस्ट्रक्शन क्षेत्रों में तकनीक का परीक्षण करेगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago

भारत के अग्रणी अर्ली-स्टेज निवेशक और इंटीग्रेटेड इनक्यूबेटर वेंचर कैटालिस्ट्स ने आज घोषणा की कि उसने उमैजिन हाइड्रोजन प्राइवेट लिमिटेड (ब्रांड नाम H2 Carbon Zero) में 8.5 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब ₹7 करोड़) के सीड राउंड का नेतृत्व किया है. यह कंपनी हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित स्थिर ऊर्जा उत्पादन प्रणालियों का निर्माण करती है जो पूरी तरह भारत में डिजाइन और विकसित की गई हैं.

इस निवेश दौर में फाड नेटवर्क्स ने भी भागीदारी की है, जिससे कंपनी को भारत की पहली गीगावॉट-स्तरीय हाइड्रोजन फ्यूल सेल फैक्ट्री स्थापित करने में मदद मिलेगी. इसका उद्देश्य देश भर में टेलीकॉम टावर्स, डेटा सेंटर्स, दूरदराज के माइक्रो-ग्रिड और रक्षा चौकियों पर डीज़ल जनरेटर की जगह पर्यावरण-अनुकूल विकल्प उपलब्ध कराना है.

H2 Carbon Zero डिफेंस उपकरणों के लिए सब-किलोवॉट मॉड्यूल से लेकर ग्रिड-स्तरीय, मल्टी-मेगावॉट लॉन्ग ड्यूरेशन एनर्जी स्टोरेज समाधानों तक विभिन्न आकारों की फ्यूल सेल प्रणालियाँ डिजाइन और तैयार करती है. इनकी मालिकाना प्रणाली ग्राहकों को हाइड्रोजन, बैटरी और सोलर सिस्टम को आसानी से जोड़ने की सुविधा देती है, जिससे इंस्टॉलेशन का समय और लागत दोनों में भारी कटौती होती है. हर यूनिट पूरी तरह भारत में तैयार की जाती है, जो भारत सरकार के राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है.

कंपनी की स्थापना केमिकल इंजीनियर संतोष गुरुनाथ और सिविल इंजीनियर लक्ष्मीकांत बंजारें ने की है, जो गहरी तकनीकी समझ और स्टार्टअप अनुभव रखते हैं. संतोष गुरुनाथ के पास हाइड्रोजन, सोलर, ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑयल-गैस में 13 वर्षों का अनुभव है. वह शेल की हाइड्रोजन पहल और मैकिन्से व BCG में सलाहकार रह चुके हैं. लक्ष्मीकांत बंजारें ने 2014 में Arcatron Mobility (Frido) की सह-स्थापना की थी और वे क्लाइमेट-टेक तथा मोबिलिटी उत्पादों में नवाचार के लिए जाने जाते हैं.

वेंचर कैटालिस्ट्स के सह-संस्थापक डॉ. अपूर्व रंजन शर्मा ने कहा "भारत की नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली में 'स्वच्छ और भरोसेमंद' बैकअप पावर की कमी अब तक बनी हुई थी. H2 Carbon Zero की स्वदेशी तकनीक हरित हाइड्रोजन को बिजली में बदलती है, जिससे सिर्फ पानी उत्सर्जित होता है न धुआं, न शोर, न प्रदूषण. यह डीज़ल जनरेटर की विश्वसनीयता को पर्यावरण-अनुकूल विकल्प में बदल देता है."

"यह टीम भारत की नवाचारी इंजीनियरिंग और विश्वस्तरीय इलेक्ट्रोकेमिस्ट्री का मेल है. इससे हम 1.5 अरब डॉलर के घरेलू बाजार और 25 अरब डॉलर के वैश्विक बाजार में जीवाश्म ईंधनों से सीधी प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं. यह भारत को ग्रीन हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था में अग्रणी बना सकता है."

H2 Carbon Zero के सह-संस्थापक संतोष गुरुनाथ ने कहा "Venture Catalysts और Faad Networks के साथ यह नई शुरुआत बेहद उत्साहजनक है. जैसे-जैसे समाज और नीतियाँ स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रही हैं, हमारा लक्ष्य डीज़ल जनरेटर को पूरी तरह अप्रचलित करना है."

"नया फंड हमें गीगावॉट फैक्ट्री की साइट पर काम शुरू करने, इंजीनियरिंग व ऑपरेशंस टीम का विस्तार करने और टेलीकॉम, निर्माण तथा रक्षा क्षेत्रों में प्रारंभिक ग्राहकों के साथ फील्ड ट्रायल पूरे करने में मदद करेगा."

यह निवेश इस बात का संकेत है कि क्लाइमेट-टेक हार्डवेयर, जो मजबूत इकाई लागत अर्थशास्त्र पर आधारित हो, वह प्रभावशाली सामाजिक परिवर्तन के साथ-साथ अच्छा निवेश रिटर्न भी दे सकता है.

Venture Catalysts, अपनी 5,500 से अधिक मेंटर नेटवर्क और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला सहयोगियों के साथ, H2 Carbon Zero को रेगुलेटरी सर्टिफिकेशन, मैन्युफैक्चरिंग स्केल-अप और निर्यात बाजार में प्रवेश में सहायता करेगा, जिससे यह स्टार्टअप भारत के 2070 तक नेट-जीरो अर्थव्यवस्था लक्ष्य में एक अहम भूमिका निभा सकेगा.

 


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