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नए लेबर कोड से 77 लाख नई नौकरियां, अर्थव्यवस्था को ₹75,000 करोड़ का फायदा: SBI रिसर्च

SBI की रिपोर्ट के अनुसार, नए श्रम कोड भारतीय श्रम बाजार को अधिक सुरक्षित, उत्पादक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago

भारतीय अर्थव्यवस्था में श्रम सुधार बड़ा बदलाव ला सकते हैं. SBI रिसर्च की नई रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि चार नए श्रम संहिताओं के लागू होने से देश में रोजगार अवसर तेजी से बढ़ेंगे, फॉर्मलाइजेशन में उछाल आएगा और घरेलू उपभोग में भी उल्लेखनीय सुधार होगा. सरकार ने 21 नवंबर को वेज कोड, इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड और ऑक्युपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड को लागू करने की अधिसूचना जारी की. इन चारों कोड का उद्देश्य देश के श्रम ढांचे में पारदर्शिता लाना और पुरानी जटिल व्यवस्थाओं को सरल बनाना है.

SBI का अनुमान: मध्यम अवधि में 77 लाख नई नौकरियां

SBI की इकोरैप रिपोर्ट के अनुसार चारों श्रम संहिताएं, जो 29 पुराने कानूनों की जगह लेती हैं, मध्यम अवधि में लगभग 77 लाख अतिरिक्त रोजगार पैदा कर सकती हैं. रिपोर्ट ने 3.2 प्रतिशत मौजूदा बेरोजगारी दर के आधार पर तीन अनुमान तैयार किए हैं, जिनमें बेरोजगारी में 0.3 से 1.3 प्रतिशत तक की गिरावट संभव मानी गई है.

फॉर्मलाइजेशन 75.5% तक पहुंचने का अनुमान

भारत में करीब 44 करोड़ असंगठित श्रमिक हैं, जिनमें से 31 करोड़ ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत हैं. SBI का कहना है कि नियम सरल होने के बाद बड़ी संख्या में श्रमिक औपचारिक क्षेत्र की तरफ बढ़ेंगे. PLFS डेटा के आधार पर रिपोर्ट अनुमान लगाती है कि फॉर्मलाइजेशन रेट 60.4 प्रतिशत से बढ़कर 75.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. इससे लगभग 10 करोड़ श्रमिक सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं भविष्य निधि, बीमा और पेंशन के दायरे में आ जाएंगे.

मिनिमम वेज से बढ़ेगी आय

वेज कोड सभी श्रमिकों के लिए 546 रुपये प्रति दिन का वैधानिक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करता है. रिपोर्ट के अनुसार इससे श्रमिकों की दैनिक उपलब्ध आय में 95 रुपये की बढ़ोतरी होगी. अगर 30 प्रतिशत बचत दर मानें, तो प्रति व्यक्ति ₹66 की अतिरिक्त दैनिक खपत होगी, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर 75,000 करोड़ रुपये की खपत बढ़ने का अनुमान है.

नियोक्ताओं के लिए अनुपालन बोझ कम

हालांकि सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ने से नियोक्ताओं पर शुरुआती लागत बढ़ सकती है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार नए कोड अनुपालन प्रावधानों को काफी सरल बनाते हैं. इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड में नियमों की संख्या 105 से 51, फॉर्म्स की संख्या 37 से 18 कर दी गई है और रजिस्टर रखने की अनिवार्यता पूरी तरह समाप्त कर दी गई है.

आसान नियमों से रोजगार सृजन को मिलेगा सहारा

SBI का कहना है कि सरल और स्पष्ट ढांचा देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर करेगा और लंबे समय में रोजगार सृजन को समर्थन देगा. रिपोर्ट यह निष्कर्ष निकालती है कि शुरुआती संक्रमण काल के बाद नए लेबर कोड भारत के श्रम बाजार को अधिक मजबूत, सुरक्षित और उत्पादक बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएंगे.

 


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