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1,300 करोड़ का निवेश: PM मोदी ने किया सफरान MRO हब का उद्घाटन, विमानन सेक्टर को मिलेगी नई उड़ान
सफरान का यह MRO प्लांट भारत के एविएशन सेक्टर के लिए सिर्फ एक औद्योगिक निवेश नहीं है, बल्कि आने वाले दशक की रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने वाला कदम है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
देश के तेजी से बढ़ते विमानन सेक्टर को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी सफरान के नए मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) प्लांट का वर्चुअली उद्घाटन किया. हैदराबाद में स्थित यह हाई-टेक सुविधा आने वाले वर्षों में विमान इंजन सर्विसिंग के लिए भारत को वैश्विक केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
हैदराबाद में शुरू हुआ सफरान का MRO हब
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत आज विश्व का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार बन चुका है और घरेलू एविएशन सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है. इसी वृद्धि को ध्यान में रखते हुए सफरान एयरक्राफ्ट इंजिन सर्विसेज इंडिया (SAESI) ने हैदराबाद में अपना बड़ा MRO प्लांट स्थापित किया है, जो 2026 से पूरी तरह ऑपरेशनल होगा. यह सुविधा देश में विमान इंजन मरम्मत व देखभाल क्षमता को बढ़ाएगी और भारत को एक वैश्विक एविएशन सर्विसिंग हब बनने की दिशा में ले जाएगी.
1,300 करोड़ रुपये का निवेश, LEAP इंजनों पर मुख्य फोकस
सफरान की यह नई सुविधा 1,300 करोड़ रुपये के शुरुआती निवेश से तैयार की गई है. प्लांट में LEAP (लीडिंग एज एविएशन प्रोपल्शन) इंजन की सर्विसिंग होगी, यह वही इंजन है जो एयरबस A320neo और बोइंग 737 MAX जैसे लोकप्रिय नैरो-बॉडी विमानों को पावर देता है. LEAP इंजन का निर्माण CFM इंटरनेशनल करता है, जो सफरान एयरक्राफ्ट इंजन और GE एयरोस्पेस का संयुक्त उपक्रम है. भारत के घरेलू एयरलाइंस अब तक 1,500 से अधिक नए विमानों का ऑर्डर दे चुकी हैं, ऐसे में MRO क्षमता का बढ़ना उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
हर वर्ष 300 LEAP इंजन की सर्विस होगी
प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि SAESI फैसिलिटी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां हर साल 300 LEAP इंजनों की सर्विसिंग की जा सकेगी. 2035 तक पूर्ण क्षमता पर पहुंचने के बाद यहां 1,000 से अधिक भारतीय इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ काम करेंगे. यह न केवल उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियों के अवसर पैदा करेगा, बल्कि देश में एयरक्राफ्ट MRO के लिए स्वदेशी क्षमताओं को भी मजबूत करेगा.
भारत को ग्लोबल एविएशन हब बनाने में मदद
MRO सुविधा की स्थापना से विदेशी मुद्रा के बाहर जाने में कमी आएगी, क्योंकि अब एयरलाइंस को इंजन सर्विसिंग के लिए विदेश नहीं जाना पड़ेगा. इससे सप्लाई-चेन मजबूत होगी और भारत वैश्विक एविएशन इंडस्ट्री में बड़ी भूमिका निभा सकेगा. सफरान का यह बड़ा निवेश देश के विमानन इंफ्रास्ट्रक्चर को गति देने के साथ-साथ मेक इन इंडिया पहल को भी मजबूती प्रदान करेगा.
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