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ओला इलेक्ट्रिक में क्यों हो रही है इस्तीफों की बारिश? यहां समझें पूरी कहानी
ओला ने इलेक्ट्रिक स्कूटर के बाज़ार में अच्छी-खासी पकड़ बना ली है. इसके बावजूद ओला इलेक्ट्रिक से एक के बाद एक बड़े अधिकारियों का इस्तीफा देना चौंकाने वाला है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
इलेक्ट्रिक स्कूटर की बात करते ही सबसे पहला नाम जो दिमाग में आता है, वो है ओला. पिछले कुछ वक्त में ही कंपनी ने इलेक्ट्रिक वाहनों के बाज़ार में अच्छी-खासी पकड़ बना ली है. इसके बावजूद ओला इलेक्ट्रिक से एक के बाद एक बड़े अधिकारियों का इस्तीफा देना चौंकाने वाला है. कंपनी को अलविदा कहने वालों में अब सीनियर डायरेक्टर और हेड ऑफ चार्जिंग नेटवर्क यशवंत कुमार का नाम भी जुड़ गया है.
लिस्ट में और भी कई नाम
IIT बॉम्बे से पढ़े यशवंत कुमार ने 2021 में ओला इलेक्ट्रिक जॉइन की थी और माना जाता है कि कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाने में उन्होंने अहम किरदार निभाया. यशवंत से पहले ओला इलेक्ट्रिक के HR डायरेक्टर रंजीत कोंदेशन में भी इस्तीफा दिया था. कंपनी के साथ उनका रिश्ता करीब 14 महीने पुराना था. बात इन दोनों पर ही खत्म नहीं होती. इस लिस्ट में और भी कई नाम शामिल हैं.
ओला छोड़ अमेज़न चुना
ओला इलेक्ट्रिक की रीजनल हेड निधि चतुर्वेदी भी कंपनी छोड़ चुकी हैं. उन्होंने अपनी नई पारी अमेज़न के साथ शुरू की है. अप्रैल में कंपनी के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर वरुण दुबे ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था. इतना ही नहीं, कुछ महीनों पहले चीफ टेक्निकल ऑफिसर दिनेश राधाकृष्णन ने भी कंपनी छोड़ दी थी. उन्होंने पिछले साल मई में ओला इलेक्ट्रिक जॉइन की थी.
IPO से पहले उथल-पुथल
इलेक्ट्रिक के अलावा कंपनी के दूसरे वेंचर्स में बेचैनी देखी जा सकती है. ओला कार्स के प्रमुख रहे अरुण सिर्देश्मुख अब कंपनी का हिस्सा नहीं हैं. ओला में ये उथल-पुथल ऐसे समय हो रही है जब कंपनी अपना आईपीओ लाने की तैयारी में है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि जिस तरह से एक के बाद एक बड़े अधिकारी ओला छोड़ रहे हैं, उसे देखते हुए अभी कंपनी का आईपीओ लाना अच्छा नहीं होगा. इसलिए उसे थोड़ा इंतजार करना चाहिए और मार्केट में यह संदेश पहुंचाना चाहिए कि ‘ऑल इज वेल’.
ये है इस्तीफे की वजह!
अब सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्या हो रहा है कि ओला इलेक्ट्रिक में इस्तीफों की बारिश हो रही है? इसकी सबसे प्रमुख वजह है कंपनी का अपने कई वेंचर्स को बंद करना. ओला ने हाल ही में अपना यूस्ड कार का बिज़नेस 'ओला कार्स' और क्विक-कॉमर्स बिज़नेस 'ओला डैश' बंद कर दिया है. 'ओला कार्स' पर लॉन्च के एक साल के भीतर ही ताला लगा दिया गया. इसके अलावा कंपनी ओला कैफे, फूड पांडा, ओला फूड्स भी बंद कर चुकी है. इससे कहीं न कहीं कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं.
गिर सकते हैं और विकेट?
भले ही ओला इलेक्ट्रिक बेहतर स्थिति में है, लेकिन स्कूटरों आग लगने की घटनाओं और जून में सेल्स फिगर में कमी से चिंता का माहौल है. इसलिए बड़े अधिकारी किसी अनहोनी से पहले ही अपना ठिकाना बदल रहे हैं. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यदि आगामी कुछ महीनों में सेल्फ फिगर नहीं सुधरे तो कुछ और इस्तीफे देखने को मिल सकते हैं. बता दें कि ओला अब अपना ध्यान इलेक्ट्रिक कार, Cell Manufacturing और फाइनेंशियल सर्विस बिज़नेस पर लगाना चाहती है.
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