होम / ऑटोमोबाइल / ईवी निर्माण योजना के दिशानिर्देश जारी, निवेश पर मिलेगी सीमा शुल्क छूट
ईवी निर्माण योजना के दिशानिर्देश जारी, निवेश पर मिलेगी सीमा शुल्क छूट
योजना के तहत न्यूनतम 4,150 करोड़ रुपये के निवेश पर सीमित ईवी आयात के लिए 15% रियायती कस्टम ड्यूटी दी जाएगी, जिससे 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा मिलेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago
भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने और देश को वैश्विक ईवी विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए एक नई ऐतिहासिक योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के जरिए सरकार न केवल देश के 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को भी गति देने की तैयारी में है।
घरेलू ईवी उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने “भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कारों के विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजना” (एसपीएमईपीसीआई योजना) के विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस योजना के तहत वैश्विक ईवी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया जाएगा, जिससे देश में यात्री इलेक्ट्रिक कारों का उत्पादन बढ़ेगा और स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह पहल भारत को ऑटोमोटिव नवाचार और निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के दृष्टिकोण से तैयार की गई है। यह पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने और टिकाऊ आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए निर्णायक कदम है।”
सीमा शुल्क में छूट और निवेश की शर्तें
योजना के तहत अनुमोदित आवेदकों को न्यूनतम 4,150 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। बदले में, उन्हें अगले पांच वर्षों के लिए 15 प्रतिशत की रियायती सीमा शुल्क दर पर कम-से-कम 35,000 अमेरिकी डॉलर के सीआईएफ मूल्य वाली ईवी कारों (सीबीयू) के आयात की अनुमति दी जाएगी। इसके तहत:
हर वर्ष अधिकतम 8,000 ईवी कारों के आयात की अनुमति होगी
यदि सालाना कोटा पूरा नहीं होता, तो उसे अगले साल में स्थानांतरित किया जा सकेगा
कुल सीमा शुल्क छूट 6,484 करोड़ रुपये या आवेदक द्वारा किए गए निवेश—जो भी कम हो—तक सीमित रहेगी
घरेलू निर्माण और डीवीए पर विशेष जोर
एमएचआई द्वारा अनुमोदित परीक्षण एजेंसियां देश में निर्मित वाहनों के घरेलू मूल्य संवर्धन (डीवीए) का मूल्यांकन करेंगी। निवेश को मुख्यतः नई प्लांट्स, मशीनरी, उपकरण, अनुसंधान और विकास (ईआरएंडडी) में खर्च करना अनिवार्य होगा। भूमि पर किया गया खर्च योजना में नहीं जोड़ा जाएगा, लेकिन संयंत्र भवन की लागत निवेश का हिस्सा हो सकती है, बशर्ते यह कुल निवेश का 10 प्रतिशत से अधिक न हो। चार्जिंग अवसंरचना पर किया गया व्यय भी प्रतिबद्ध निवेश के 5 प्रतिशत तक मान्य होगा।
सर्कार के अनुसार यह योजना भारत को ईवी टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अग्रणी बनाकर न केवल वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाएगी, बल्कि घरेलू नवाचार और रोजगार को भी मजबूती देगी। यह भारत की हरित गतिशीलता क्रांति में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।
टैग्स घरेलू ईवी उत्पादन मेक इन इंडिया’