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पूरी होने को है Musk की मुराद, Tesla की भारत में एंट्री के लिए योजना तैयार!
यदि सबकुछ ठीक रहा, तो भारत की सड़कों पर जल्द ही Elon Musk की टेस्ला की कारें देखने को मिलेंगी. केंद्र सरकार ने इसके लिए एक नई खोजना का खाका तैयार किया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
ऑटोमोबाइल कंपनी Tesla के मालिक Elon Musk जल्द से जल्द अपनी इलेक्ट्रिक कारों को भारत की सड़कों पर देखना चाहते हैं. उनकी ये बेकरारी कई मौकों पर सामने आई है, लेकिन भारत सरकार के साथ बात न बन पाने के चलते उनका ये ख्वाब अभी तक हकीकत में तब्दील नहीं हो पाया है. अब खबर है कि केंद्र सरकार ने टेस्ला जैसे हाई टेक्नोलॉजी वाले वाहन निर्माताओं के लिए योजना को फास्ट ट्रैक पर डाल दिया है. यानी उस पर तेजी से काम चल रहा है और जल्द ही कोई घोषणा भी हो सकती है. इसके तहत घरेलू स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक फ्रेमवर्क बनाया जाएगा, जिसमें स्थानीय सोर्सिंग शामिल है.
इतना कम होगा शुल्क
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस योजना में ग्रीन कारों पर आयात शुल्क में भारी कटौती का प्रावधान होगा. इस शुल्क को मौजूदा 100% से कम करके 15% तक लाने का विचार है. हालांकि, शर्त ये रहेगी कि कंपनियां जल्द ही भारत में मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने के लिए सहमति जताएं और बड़े स्तर पर लोकल सोर्सिंग पर जोर दें. इसके अलावा, सरकार आपूर्तिकर्ताओं के लिए एक ईको सिस्टम निर्मित करने की गारंटी भी कंपनियों से लेगी. वहीं, इम्पोर्ट ड्यूटी में कमी से टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी कंपनियों की महत्वाकांक्षी ग्रीन योजना को झटका लग सकता है. क्योंकि ये कंपनियां इलेक्ट्रिक्स विनिर्माण के लिए काफी खर्चा कर रही हैं. ग्लोबल मॉडल पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटने से उन्हें आकर्षक दामों में बेचा जा सकेगा. ऐसे में टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियों को कड़ी प्रतियोगिता का सामना करना पड़ेगा.
सस्ती होंगी विदेशी EV
बताया जा रहा है कि मोदी सरकार स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग के नतीजों से उत्साहित है. उसने Apple जैसी दिग्गज कंपनियों को देश में निवेश के लिए विशेष प्रोत्साहन दिया है और इसके परिणाम भी अच्छे रहे हैं. अब सरकार चाहती है कि Tesla भारत में अपनी फैक्ट्री स्थापित करे. टेस्ला 5 लाख यूनिट की वार्षिक वाहन क्षमता वाली फैक्ट्री स्थापित कर सकती है, जिसका इस्तेमाल निर्यात के लिए भी किया जाएगा. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यदि सरकार नई पॉलिसी अमल में लाती है, तो इससे देश में विदेशों से इम्पोर्ट की गई EV कारों की कीमत में भारी गिरावट आना निश्चित है. इससे दूसरी विदेशी ऑटो कंपनियां के लिए भी भारत आना आसान हो जाएगा. मौजूदा समय में कई विदेशी कंपनियां अपनी EV कारों को इसलिए भारत नहीं ला रहीं, क्योंकि इम्पोर्ट टैक्स के चलते उनकी कारों की कीमत काफी ज्यादा हो जाएगी और इस वजह से उन्हें खरीदार नहीं मिलेंगे. बता दें कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है, लेकिन हमारे यहां EV कारों की सेल महज 2 प्रतिशत है.
2030 तक शुरू होगी फैक्ट्री
Elon Musk काफी लंबे समय से टेस्ला को भारत लाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने 2021 में भारत में एंट्री की कोशिश की थी, इलेक्ट्रिक कारों पर इम्पोर्ट टैक्स की दर से उनके पैर उखड़ गए. सरकार ने दो-टूक शब्दों में कहा था कि टेस्ला को पहले भारत में मैन्युफैक्चरिंग का वादा करना होगा, उसके बाद इम्पोर्ट ड्यूटी में कमी पर विचार किया जाएगा. इसके बाद यह मामला लगभग अटक गया था, लेकिन इसी साल जून में Elon Musk की अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद टेस्ला की भारत में एंट्री की बातें फिर शुरू हो गईं. बताया जा रहा है कि टेस्ला ने सरकार को आश्वासन दिया है कि 2030 तक भारत में उसकी फैक्ट्री पूरी क्षमता के साथ काम करना शुरू कर सकती है.
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