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सरकार का फोकस EV पर लेकिन हाइब्रिड कारों की बढ़ रही डिमांड, आखिर क्या है वजह? 

हाइब्रिड कारों की संख्या में इजाफा हो रहा है, इस वजह से कंपनियों का फोकस भी इन पर बढ़ गया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

केंद्र सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है. इसी के मद्देनजर नई EV पॉलिसी भी बनाई है. सरकार EV पर सब्सिडी भी देती आती है, ताकि इनके प्रति लोगों को आकर्षित किया जा सके. सरकारी प्रयासों की बदौलत सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में इजाफा भी हुआ है, लेकिन हाइब्रिड कारों की तुलना में ये इजाफा कम है. एक रिपोर्ट बताती है कि हाइब्रिड कारों पर लोगों का भरोसा EV की तुलना में ज्यादा बढ़ रहा है. पिछले एक साल में हाइब्रिड व्हीकल की बिक्री EV से अधिक रही है.

इतनी बढ़ी हाइब्रिड की बिक्री
रिपोर्ट में वाहन डैशबोर्ड डेटा के हवाले से बताया गया है कि पिछले साल अप्रैल से इस 11 जून के बीच कुल 15000 EV बिकीं, जबकि हाइब्रिड कारों की बिक्री 59,814 रही. यहां गौर करने वाली बात ये है कि हाइब्रिड कारों की कीमत EV ज्यादा है. इसके बावजूद लोगों का भरोसा इन पर बढ़ रहा है. बात केवल हमारे देश तक ही सीमित नहीं है. मॉर्गन स्टेनली की मानें, तो फरवरी महीने में अमेरिका में भी EV बिक्री की तुलना में हाइब्रिड की बिक्री करीब पांच गुना अधिक रही है. लोगों की पसंद में आ रहा ये बदलाव सरकार और वाहन कंपनियों दोनों के लिए संकेत है कि उन्हें EV को लेकर बड़े बदलाव करने होंगे.

इस वजह से बढ़ रहा भरोसा
भारत में EV के मुकाबले हाइब्रिड को अधिक पसंद किए जाने की कई वजह है. सबसे पहली तो यही है कि हमारे देश में EV के लिए पर्याप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है. दिल्ली जैसे बड़े शहरों चार्जिंग स्टेशन की संख्या बढ़ाने पर भले ही काम हो रहा हो, लेकिन छोटे शहरों में ये नदारद हैं. जबकि हाइब्रिड कारों के साथ ऐसी कोई परेशानी नहीं है. इन कारों में इंटर्नल सिस्टम के जरिए ही बैटरी चार्ज हो जाती है. यानी बैटरी को अलग से चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती. हाइब्रिड कारें फ्यूल और बैटरी दोनों से चल सकती है. लिहाजा, बैटरी के चार्ज न होने की स्थिति में पारंपरिक ईंधन से भी गाड़ी चल सकती है. कुछ एक्सपर्ट्स का तो यहां तक कहना है कि लंबी अवधि में हाइब्रिड कारों की रनिंग कॉस्ट इलेक्ट्रिक कारों से कम होती है. EV की मेंटनेंस कॉस्ट अपेक्षाकृत काफी ज्यादा रहती है. हाइब्रिड कारें EV की तुलना में ज्यादा शक्तिशाली होती हैं. यानी उनका पिलअप और स्पीड अधिक होती है.   

EV में टाटा का दबदबा 
मारुति जैसी सभी कार कंपनियां हाइब्रिड पर ज्यादा फोकस करने लगी हैं. मारुति की ग्रैंड विटारा सक्सेस रही है. ये SUV स्ट्रॉन्ग और माइल्ड हाइब्रिड दोनों विकल्पों के साथ उपलब्ध है. 'सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटो मोबाइल मैन्युफैक्चरर्स' के आंकड़े बताते हैं कि देश में हाइब्रिड कारों की बिक्री पिछले साल 30% से ज्यादा बढ़ी है. इस वजह से मारुति सुजुकी के साथ-साथ टोयोटा जैसे कार निर्माता EV के बजाए हाइब्रिड पर जोर दे रहे हैं. हुंडई (Hyundai) भी 2026 तक भारत में अपनी पहली हाइब्रिड कार लॉन्च कर सकती है. फिलहाल भारत के EV बाजार में टाटा का दबदबा है. कंपनी के पोर्टफोलियो में 4 इलेक्ट्रिक कारें हैं. टाटा नेक्सन ईवी, टाटा टियागो ईवी और टाटा टिगॉर ईवी के बाद अब कंपनी के पोर्टफोलियो में पंच EV भी शामिल हो गई है.


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