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एविएशन इंडस्ट्री को मिलेगा जबरदस्त तोहफा, Rolls Royce ने शुरू की रिसर्च!
दोनों ही कंपनियां हाइड्रोजन कंबशन इंजन तकनीक को विकसित करने के लिए दुनिया भर में प्रमुख रूप से काम कर रही हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
पर्यावरण को लेकर दुनिया भर के देश काफी तेजी से जागरूक हो रहे हैं और साथ ही कई जानी-मानी कंपनियां भी पर्यावरण संरक्षण को लेकर काफी महत्त्वपूर्ण कदम उठा रही हैं. अब हाल ही में जानी-मानी लग्जरी कार निर्माता और एयरक्राफ्ट निर्माता कंपनी रोल्स रोय्स (Rolls-Royce) को लेकर इस वक्त एक काफी बड़ी खबर सामने आ रही है. रोल्स रोय्स ने घोषणा कर जानकारी दी है कि कंपनी हाइड्रोजन से संबंधित बहुत से महत्त्वपूर्ण रिसर्च टेस्ट शुरू कर दिए हैं.
Rolls Royce और Easyjet ने शुरु की रिसर्च
आपको बता दें कि रोल्स-रोय्स (Rolls-Royce) की पार्टनर कंपनी का नाम ईजीजेट (Easyjet) है और ये दोनों ही कंपनियां हाइड्रोजन कंबशन इंजन तकनीक को विकसित करने के लिए दुनिया भर में प्रमुख रूप से काम कर रही हैं. दोनों ही कंपनियों का मुख्य उद्देश्य साथ मिलकर एक ऐसा इंजन विकसित करना है जो विभिन्न प्रकार के एयरक्राफ्ट्स को ताकत प्रदान कर सके. इन कंपनियों द्वारा ऐसे इंजनों को भी विकसित किया जा रहा है जो नैरो-बॉडी (Narrowbody) मार्केट में मौजूद एयरक्राफ्ट को भी ताकत प्रदान कर सकें और माना जा रहा है कि कंपनियों द्वारा यह इंजन 2030 तक पूरी तरह से विकसित कर लिया जाएगा.
Rolls Royce के सामने है ये चुनौती
एयरोस्पेस क्रायोजेनिक लिक्विड हाइड्रोजन पंप सिस्टम की क्षमता को साबित करने के लिए नए टेस्ट किये जा रहे हैं और ब्रिटेन के सोलीहल में मौजूद रोल्स-रोय्स (Rolls-Royce) के केंद्र में इन परीक्षणों की शुरुआत की जा चुकी है. कम प्रेशर वाली लिक्विड हाइड्रोजन को -250 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर चिल्ड करके उसमें प्रेशर बनाकर उसे इंजन तक पंप करने और कंबशन की प्रक्रिया को पूरा करना ही इन टेस्ट का उद्देश्य होगा. इस टेस्ट के दौरान मौजूद इंजीनियरों के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती रहेगी.
Rolls-Royce ने साबित की हाइड्रोजन की उपयोगिता
रोल्स-रोय्स (Rolls-Royce) ने एविएशन इंडस्ट्री द्वारा हाइड्रोजन के इस्तेमाल के लिए टेक्नोलॉजी से संबंधित तीन प्रमुख चुनौतियों की पहचान की है. ये तीन चुनौतियां फ्यूल कंबशन, फ्यूल डिलीवरी और इंजन के साथ फ्यूल सिस्टम इंटीग्रेशन से संबंधित हैं. यह आवश्यक है कि पहले सुनिश्चित किया जाए कि सभी कारकों को सुरक्षापूर्वक ऑपरेट किया जा सकता है. सितंबर में रोल्स-रोय्स (Rolls-Royce) ने पहली बार एक पर्ल 700 इंजन का इस्तेमाल किया था और यह इंजन पूरी तरह से हाइड्रोजन पर ही काम कर रहा था. इस तरह दुनिया में पहली बार यह साबित हो गया कि हाइड्रोजन को फ्यूल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है और यह इतना थ्रस्ट पैदा कर सकता है जिससे एक विमान उड़ान भर सके.
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