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इन कारणों ने लगाई आलू, प्याज और टमाटर की कीमत में आग, हो गया 100 फीसदी से ज्यादा इजाफा
रिजर्व बैंक अपनी मासिक एमपीसी बैठक में इस महंगाई को लेकर पहले ही एलर्ट जारी कर चुका है. रिजर्व बैंक इस बात से भी चिंतित है कि इसका असर महंगाई दर पर पड़ सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
देश के सभी राज्यों में इस वक्त बारिश हो रही है, उसके चलते एक ओर जहां कई जगह बाढ़ से हालात हैं तो फसलों को भी बड़ा नुकसान हुआ है. उसी का नतीजा है सब्जियों के दामों में आग लग गई है. आलू, प्याज टमाटर के दामों में 100 प्रतिशत से ज्यादा का इजाफा हुआ है. पहले से जारी महंगाई के बीच सब्जियों की महंगाई ने आम आदमी को ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जब आलू, प्याज और टमाटर महंगे हो गए हैं तो खाएं क्या?
कितने फीसदी हुआ है दामों में इजाफा?
पिछले साल से कम आवक के कारण पहले ही आलू, प्याज और टमाटर के दामों में इजाफा हुआ. इस बार अप्रैल में पड़ी भीषण गर्मी ने भी फसलों को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाया है, जिसके कारण सप्लाई और काफी हद तक प्रभावित हो गई. इसके कारण आलू, प्याज और टमाटर के दामों में इजाफा हो गया. इसका नतीजा ये हुआ है कि आलू और प्याज की खुदरा कीमतों में इजाफा देखा गया है और जबकि टमाटर की कीमतों में सालाना बढ़ोतरी के बाद इजाफा देखा गया है. अगर प्याज की कीमतों को ही देख लें तो पिछले साल से इसमें 106 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला है. वहीं आलू की कीमत में 96 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला है. वहीं थोक टमाटर की कीमतों में सालाना आधार पर 40 प्रतिशत की कमी दिख रही है. लेकिन अभी की स्थिति देखें तो जून में जो टमाटर 35 रुपये किलो बिक रहा था वो आज 55 रुपये किलो बिक रहा है.
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उत्पादन में कितनी आई है कमी?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दामों में हुए इस इजाफे की जो बड़ी वजह है वो ये है कि अनियमित बारिश के कारण प्याज के उत्पादन में 20 प्रतिशत कमी आई है जबकि खराब मानसून के कारण 2024 की सर्दियों में जो प्याज बोई जाएगी उसमें 20 प्रतिशत की कमी हो जाएगी. अकेली ये तीनों सब्जियां नहीं हैं जिनके दामों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, लौकी, भिंडी, बीन्स, गोभी, शलजम जैसी सब्जियों के दामों में भी कमी देखने को मिल रही है. सब्जियों के सड़ने की दर में भी इजाफा हुआ है क्योंकि गर्म हवाएं चल रही हैं.
रिजर्व बैंक पहले ही कह चुका है ये बात
इससे पहले रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की हर दो महीने में होने वाली मासिक बैठक में वो साफ कर चुका है कि भले ही मार्च- अप्रैल में महंगाई दर में कमी देखने को मिली हो. लेकिन असाधारण मौसम और पानी की कमी के कारण सब्जियों और फलो के दामों में तेजी देखने को मिल सकती है. रिजर्व बैंक पहले ही दालों से लेकर सब्जियों की आवक पर नजर रखने की बात कह चुका है. रिजर्व बैंक पिछले आठ बार से रेपो रेट को स्थिर रखे हुए है. क्योंकि महंगाई दर 4 प्रतिशत के लेवल पर नहीं पहुंच रही है. इस महंगाई के कारण वो लक्ष्य एक बार फिर बाधित हो सकता है.
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