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नकली दवाओं के कारोबार पर लगेगी नकेल, सरकार उठाने जा रही है ये कदम
सरकार ने नकली और घटिया दवाओं के उपयोग को रोकने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सबसे अधिक बिकने वाली दवाओं के लिए 'ट्रैक एंड ट्रेस' व्यवस्था शुरू करने की योजना बनाई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
अब कंज्यूमर जल्द ही यह जांच कर पाएंगे कि जिस दवा को उन्होंने खरीदा है, वह सुरक्षित है और नकली तो नहीं है. सरकार ने नकली और घटिया दवाओं के उपयोग को रोकने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सबसे अधिक बिकने वाली दवाओं के लिए ‘ट्रैक एंड ट्रेस’ व्यवस्था शुरू करने की योजना बनाई है. भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनियों ने नकली दवाओं की समस्या से निपटने के अपने प्रयास तेज कर दिए हैं. इसके तहत दवाओं की पैकेजिंग अनूठे तरीके से की जा रही है और निजी जांच एजेंसियों को भी शामिल किया जा रहा है. नकली दवाओं का जोखिम काफी ज्यादा है. यह उपभोक्ताओं को नुकसान तो होता ही है प्रमुख ब्रांडों की साख भी खराब हो जाती है.
कई राज्यों में हुआ नकली दवाईयों का भंडाफोड़
सितंबर की शुरुआत में कुछ सरकारी अस्पतालों में नकली ऐंटीबायोटिक्स पहुंचाने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ हुआ, जो कई राज्यों में काम कर रहा था. यह दवा टेलकम पाउडर की तरह थी और उसमें कुछ भी नहीं था. इसे हरिद्वार में पशुओं की दवा की एक प्रयोगशाला में टेलकम पाउडर और स्टार्च मिलाकर बनाया गया था. नकली ऐंटरीबायोटिक दवाएं उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में भेजी गई थीं, नागपुर ग्रामीण पुलिस ने इसका भंडाफोड़ किया था.
CDSCO ने दवाईओं की सूची जारी की
अगस्त में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने गुणवत्ता जांच में नाकाम रहने वाली दवाएओं की सूची जारी की थी. इसके बाद टॉरंट फार्मा, सन फार्मा और अलकेम लैबोरेटरीज सहित कई बड़ी देसी दवा कंपनियों ने फौरन सफाई पेश की थी. उन्होंन कहा था कि बताई गई दवाएं नकली थीं और उनका उत्पादन कंपनियों द्वारा नहीं किया गया था. सीडीएससीओ ने जिन दवाओं के नाम जारी किए थे उनमें पैन-डी, क्लैवन 625, पैन्टोसिड और शेल्कल 500 जैसे लोकप्रिय ब्रांड शामिल थे.
एनएसक्यू-नकली के बीच फर्क समझें
दवा कंपनियों का संगठन इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (IPA) ने सीडीएससीओ से कहा है कि वह नकली दवाओं और गुणवत्ता मानक पर खरी नहीं उतरने वाली दवाओं (NSQ) के बीच स्पष्ट अंतर करें. आईपीए ने चिंता जताई कि मीडिया खबरों में दोनों शब्दों को मिलाने से साख को नुकसान पहुंचता है. आईपीए के महासचिव सुदर्शन जैन ने आगाह किया कि इस तरह की गलतबयानी के गंभीर परिणाम हो सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘एनएसक्यू और नकली दवाओं के बीच अंतर स्पष्ट करना जरूरी है. भारत की वैश्विक स्थिति और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा दोनों के लिए यह बहुत जरूरी है.’
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