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महंगाई के मोर्चे पर मोदी सरकार का पहला इम्तिहान, 5 माह के टॉप पर पहुंच सकती है इन्फ्लेशन

मोदी सरकार के अब तक के कार्यकाल में महंगाई शिखर पर जा पहुंची है. पेट्रोल-डीजल के दाम भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

लोकसभा चुनाव में भाजपा (BJP) को भले ही सबसे ज्यादा सीटें मिली हों, लेकिन वो मोदी लहर नजर नहीं आई, जो पिछले दो चुनावों में देखने को मिली थी. भाजपा बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई और उसे सहयोगियों के कन्धों पर सवार होकर सत्ता की कुर्सी तक पहुंचना पड़ा. भाजपा के ऐसे प्रदर्शन के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं, जिसमें से एक महंगाई को नजरंदाज करना भी है. लिहाजा, इस बार उसके लिए महंगाई से मुंह फेरना मुश्किल होगा. इस मोर्चे पर भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकार की टेंशन बढ़ाने वाली खबर सामने आई है. माना जा रहा है कि महंगाई फिर से रफ़्तार पकड़ सकती है.

इतना हो सकता है इजाफा
खाने-पीने की वस्तुओं और खासकर फल-सब्जियों की कीमतों में वृद्धि से खुदरा महंगाई दर मई 2024 में बढ़कर 5.14% पर पहुंच सकती है. यदि ऐसा हुआ तो यह दिसंबर 2023 के बाद इसका पांच महीने का उच्च स्तर होगा. पिछले साल दिसंबर में खुदरा महंगाई 5.69% थी. जबकि इस साल अप्रैल में यह घटकर 11 महीने के निचले स्तर 4.83 प्रतिशत पर आ गई थी. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (CMII) के अनुसार, बढ़ते तापमान ने सब्जियों और फलों की फसल को प्रभावित किया है. इससे खाद्य महंगाई मई में बढ़कर 9.1% पर पहुंच सकती है, जो अप्रैल में 8.7% थी. इसका असर कुल महंगाई पर भी देखने को मिल सकता है. 

कल जारी हो सकते हैं आंकड़े
मोदी सरकार कल यानी बुधवार को खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी कर सकती है. इसी तरह, मुख्य महंगाई (खाद्य और ऊर्जा को छोड़कर) भी 3.3% से बढ़कर मई में 3.5% पहुंच सकती है. सीएमआईई का कहना है कि फलों और सब्जियों की महंगाई दर में करीब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है. इससे मई में फलों की महंगाई अप्रैल के 3.5% से बढ़कर 5.5% हो सकती है. फलों की कीमतें पिछले महीने में ही 2.5 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं. वहीं,  सब्जियों की महंगाई दर भी मई में बढ़कर 30% के आसपास पहुंच सकती है, जो अप्रैल में 27.7% थी. पिछले महीने सब्जियों के दाम मासिक आधार पर 5.2% बढ़े हैं. खासकर आलू, फूलगोभी और पत्तागोभी की कीमतों में भी भारी वृद्धि देखने को मिली है.

मोदीराज में लगातार बढ़े दाम 
मोदी सरकार के अब तक के कार्यकाल में महंगाई शिखर पर जा पहुंची है. दालें जहां 200 रुपए से ऊपर बिक रही हैं. वहीं, आटे के भाव भी काफी चढ़ चुके हैं. पेट्रोल-डीजल भी मोदी राज में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुका है. इसी तरह, गैस सिलेंडर की कीमतें भी आम आदमी का दम निकाल रही हैं. सबसे ज्यादा मार मिडिल क्लास पर पड़ रही है. कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन को सत्ता से बाहर महंगाई ने ही करवाया था. महंगाई को मुद्दा बनाकर ही मोदी सरकार अस्तित्व में आई थी, लेकिन बाद में उसने भी महंगाई को पूरी तरह नज़रंदाज कर दिया. नतीजा, इस बार के चुनाव में भाजपा की कम सीटों के रूप में सामने आया है. लिहाजा, उम्मीद की जा सकती है कि मोदी सरकार इस बार पहले वाली गलती नहीं करेगी.  


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