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मुंबई को मिला एक और तोहफा, Island City को मिलेगी ट्रैफिक से निजात?
Island City में केबल आधारित स्टील ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है, 4 महीनों के भीतर ही पुराने Bellasis Bridge को ढहा दिया जाएगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
मुंबई का बेलासिस ब्रिज (Bellasis Bridge) काफी पुराना हो चुका है और अब इसे बदलने की जरूरत है. इसके साथ ही मुंबई काफी तेज रफ्तार से आगे बढ़ने वाला शहर है और जितनी तेजी से ये शहर बढ़ रहा है उतनी ही तेजी से इस शहर में ट्रैफिक की समस्या भी बढ़ रही है. लेकिन अब मुंबई को ट्रैफिक की बढ़ती समस्या से निजात दिलाने के लिए एक खुबसूरत केबल ब्रिज (Cable Bridge) का निर्माण किया जा रहा है और यह ब्रिज ही मुंबई के Island City में मौजूद बेलासिस ब्रिज (Bellasis Bridge) की जगह लेगा.
ढहा दिया जाएगा Bellasis Bridge
मुंबई के भीड़ भरे Island City में केबल पर आधारित एक स्टील ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है. आने वाले 4 महीनों के भीतर ही पुराने बेलासिस ब्रिज (Bellasis Bridge) को ढहा दिया जाएगा. आपको बता दें कि बेलासिस ब्रिज शहर के पूर्व में स्थित नागपाड़ा और पश्चिम में स्थित Tardeo नामक जगहों को आपस में जोड़ेगा. इतना ही नहीं, बेलासिस ब्रिज एक रेलवे ओवरब्रिज (ROB) की भूमिका भी निभाता है और यह रेलवे की पटरियों के ऊपर स्थित है.
क्या होगी नए पुल की खासियत?
नए पुल का डिजाईन केबल पर आधारित होगा और इन केबलों का निर्माण मजबूत स्टील से किया जाएगा जिसका फाउंडेशन कंक्रीट से बनाया जाएगा. इस पुल के दोनों कैरिजवे (गाड़ियों के चलने की जगह), पुराने पुल के मुकाबले काफी चौड़े होंगे जिससे ट्रैफिक का आवागमन ज्यादा आसानी से हो पाएगा. इसके साथ ही रेलवे की पटरियों से पुल की ऊंचाई को बढ़ाकर 6.5 मीटर कर दिया गया है. पुराना पुल रेलवे की पटरियों से 5 मीटर ऊंचा हुआ करता था. बेलासिस ब्रिज (Bellasis Bridge) की एक अन्य खासियत ये है कि इस पुल का आधा हिस्सा पश्चिमी रेलवे के न्यायक्षेत्र में आता है और बाकी बचा आधा हिस्सा BMC (वृहन् मुंबई म्युनिसिपल कारपोरेशन) के न्यायक्षेत्र में आता है. बेलासिस ब्रिज (Bellasis Bridge) को ढहाने का काम भी आधा पश्चिमी रेलवे के द्वारा और आधा BMC के द्वारा किया जाएगा.
नए पुल से क्या होगा फायदा?
नए पुल के कैरिजवे ज्यादा चौड़े हैं जिनसे ट्रैफिक का आवागमन ज्यादा सुचारू रूप से हो पाएगा और साथ ही जबरदस्त और मजबूत स्टील केबल के इस्तेमाल से इस पुल का लाइफटाइम भी ज्यादा बड़ा हो जाएगा. BMC द्वारा 65 करोड़ रुपयों की लागत से यह पुल बनाया गया है जबकि रेलवे ने इस पुल के लिए 40 करोड़ रुपयों का बजट आवंटित किया है. इसका मतलब ये है कि 105 करोड़ रुपयों की लागत से यह पुल बनाया जा रहा है.
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