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पत्नी को उपहार में दी गई राशि से कमाए ब्याज पर क्या पति पा सकता है TDS क्रेडिट का हक?
आयकर विभाग की अपीलीय अदालत ने हाल ही में माना कि एक पति अपनी पत्नी को उपहार में दी गई राशि से अर्जित ब्याज पर TDS (स्रोत पर कर कटौती) क्रेडिट का हकदार होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
इनकम टैक्स विभाग की अपीलीय अदालत ने एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसे सुनकर आप थोड़ा सोचने पर मजबूर जरूर हो जाएंगे. आयकर विभाग की अपीलीय अदालत (आईटीएटी) की बेंच में जिसमें बतौर उपाध्यक्ष आर.एस. सयाल और एसएस विश्वनेत्र रवि जो कि बतौर न्यायिक सदस्य के रूप में मौजूद थे, उन्होंने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. दोनों जजों की बेंच ने माना कि एक पति अपनी पत्नी को उपहार में दी गई राशि से अर्जित ब्याज पर टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) क्रेडिट का हकदार होगा.
आखिर क्या था ये पूरा मामला
इस मामले में के तथ्य यह हैं कि पति ने 8,42,68,650 रुपये की कुल आय की घोषणा करते हुए रिटर्न दाखिल किया और आयकर अधिनियम की धारा 143(1) के तहत एक सूचना जारी की गई जिसमें उसने कहा कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट 2,80,456 रुपये के ब्याज आय पर TDS को स्वीकार नहीं कर रहा है. फार्म 26 एएस के अनुसार पत्नी ने कुल रु. 39,26,260 रुपये ब्याज आय से हासिल की जिस पर उन्हें 2,94,474 का TDS देना पड़ा.
ये पैसा पति द्वारा दिए गए उपहार से जमा किया गया था, यही कारण है कि पत्नी ने अधिनियम की धारा 64 के तहत अपनी आय में ब्याज आय को शामिल किया और TDS के अनुपात में कर के लिए क्रेडिट का दावा कर दिया. सीआईटी (ए) ने देखा था कि नियम 37बी (2) के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया है और परिणामस्वरूप पत्नी TDS के क्रेडिट का हकदार नहीं थी. इसीलिए पत्नी ने आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) से संपर्क किया.
ट्रिब्यूनल ने मामले में क्या पाया
ट्रिब्यूनल ने इस पूरे मामले में अधिनियम के नियम 37बीए के धारा 199(1) आर/डब्ल्यू उप नियम 2 के माध्यम से इस पूरे मामले को देखा और पाया कि जिस सोर्स की आय पर टैक्स काटा गया है, वो उसके हाथ में होने की बजाए जिसके एमाउंट से कटा उसके एक्सेस में है, तो सोर्स पर काटे गए कर के लिए क्रेडिट ऐसे अन्य व्यक्ति को दिया जाएगा न कि डिडक्टी को दिया जाएगा. ट्रिब्यूनल ने आगे कहा कि उप नियम 2 का प्रावधान डिडक्टी के लिए डिक्लेरेशन दाखिल करने के लिए प्रदान करता है, जिसमें डिडक्टर के साथ अन्य व्यक्ति का विवरण दिया जाता है, जिसे क्रेडिट दिया जाना है.
ट्रिब्यूनल ने कहा कि दूसरे व्यक्ति को क्रेडिट देने की इस कवायद का पूरा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्रोत पर कर कटौती का लाभ एक बार लिया जाए और वह भी सही व्यक्ति द्वारा जो ऐसी आय के संबंध में इस तरह के कर के लिए जिम्मेदार हो. ट्रिब्यूनल ने आगे कहा कि उप नियम 2 का प्रावधान डिडक्टी के लिए डिक्लेरेशन दाखिल करने को कहता है जिसमें डिडक्टर के साथ अन्य व्यक्ति का विवरण दिया जाता है, जिसे क्रेडिट दिया जाना है.
पत्नी ने बैंक को नहीं दी सूचना
इस पूरे मामले को देखने के बाद, न्यायाधिकरण ने पाया कि TDS के लाभ का दावा इसलिए किया गया है क्योंकि पत्नी ने नियम 37 बीए (2) के प्रावधान के अनुसार बैंक को घोषणा प्रस्तुत नहीं की. ट्रिब्यूनल ने ये भी कहा कि जिस व्यक्ति की आय से टीडीएस कटा है उसे विभाग के पास नहीं रहने दिया जा सकता है. ट्रिब्यूनल ने कहा कि ऐसे टीडीएस के लिए क्रेडिट की अनुमति उस व्यक्ति को दी जानी चाहिए जो इस तरह की आय के संबंध में कर के अधीन है.
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