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टमाटर की 'लाली' कम नहीं हुई और आंसू निकालने को तैयार हो गई प्याज!
आशंका जताई जा रही है कि अगले महीने तक प्याज के दाम 60 से 70 रुपए प्रति किलो के स्तर तक पहुंच सकते हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
आसमान पर पहुंच चुके टमाटर के दाम अभी नीचे आए भी नहीं हैं और प्याज ने आंसू निकालने की तैयारी शुरू कर दी है. बाधित आपूर्ति के चलते अब प्याज की कीमत (Onion Price) खुदरा बाजार में बढ़ने की आशंका है. माना जा रहा है कि अगले महीने तक प्याज के दाम 60-70 रुपए किलो तक पहुंच सकते हैं. यानी महंगाई से पहले से ही त्रस्त चल रही जनता के अभी और बुरे दिन आने वाले हैं. गौरतलब है कि टमाटर के दाम अब भी कई शहरों में 100 रुपए के पार चल रहे हैं और जल्द इनके नीचे आने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है.
इस वजह से बढ़ेंगे दाम
क्रिसिल मार्केट इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स की रिपोर्ट (CRISIL Report) के मुताबिक, डिमांड और सप्लाई का बैलेंस बिगड़ने का असर अगस्त के अंत में प्याज की कीमतों पर दिखने को मिल सकता है. सितंबर की शुरुआत से खुदरा बाजार में कीमतों में अच्छी-खासी वृद्धि की आशंका है. जिसकी वजह से प्याज की कीमतें 60-70 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती हैं. हालांकि, दाम 2020 के उच्चतम स्तर से नीचे ही बने रहेंगे. रिपोर्ट में बताया गया है कि रबी प्याज के भंडारण और उपयोग की अवधि एक-दो महीने कम होने और इस साल फरवरी-मार्च में आशंका के बीच हुई बिकवाली से, खुले बाजार में रबी स्टॉक में अगस्त के अंत तक काफी गिरावट आने की आशंका है. इससे प्याज की खपत में बढ़ोतरी होगी, लेकिन सप्लाई पर्याप्त न होने के कारण इसकी कीमत बढ़ जाएगी.
अक्टूबर में मिल सकती है राहत
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अक्टूबर से खरीफ की आवक शुरू होने पर प्याज की आपूर्ति बेहतर होगी और कीमतों में नरमी की उम्मीद की जा सकती है. बता दें कि इस साल जनवरी-मई के दौरान प्याज की कीमतों में गिरावट से उपभोक्ताओं को जरूर राहत मिली थी, लेकिन इससे किसान खरीफ मौसम में बुवाई के लिए हतोत्साहित हुए. लिहाजा अनुमान है कि इस साल रकबा 8% घटेगा और प्याज का खरीफ उत्पादन सालाना आधार पर 5 प्रतिशत कम होगा. वार्षिक उत्पादन 2.9 करोड़ टन होने की उम्मीद है. हालांकि, ये पिछले पांच साल (2018-22) के औसत उत्पादन से करीब सात प्रतिशत ज्यादा है.
महंगाई ने कर रखा है बेहाल
महंगाई ने पिछले कुछ समय से आम आदमी का बजट बिगाड़कर रख दिया है. टमाटर के साथ ही कई सब्जियां और दालें भी महंगी हो चुकी हैं. रसोई गैस सिलेंडर के दाम कई शहरों में 1100 रुपए के पार जा चुके हैं. वहीं, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी पिछले एक साल से कमी देखने को नहीं मिली है. इस एक साल में कई ऐसे मौके आए हैं जब कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल के दामों में नरमी आई, लेकिन तेल कंपनियों ने इसका फायदा जनता को नहीं दिया और न ही सरकार ने इस बारे में कुछ किया. इतना ही नहीं, यह आशंका भी जताई जा रही है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ब्याज दरों में इजाफा कर सकता है. यदि ऐसा हुआ, तो कर्ज भी महंगा हो जाएगा.
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