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AI के दौर में भारतीय IT, दुनिया की कंपनियों की मजबूत रीढ़ है- आर. श्रीकृष्णा

BW Businessworld को दिए एक खास इंटरव्यू में Hexaware Technologies के CEO और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आर. श्रीकृष्णा ने बताया कि कैसे उनकी कंपनी अब AI को प्राथमिकता देने वाली कंपनी बन गई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

आपने Hexaware को 11 सालों तक अच्छे और बुरे समय में संभाला है. जब आपने कंपनी की कमान संभाली थी, तब आपकी पहली जिम्मेदारी क्या थी, और AI के आने के बाद वह कैसे बदली?

मैं हमारे उस समय के मालिक Baring Private Equity का शुक्रिया अदा करता हूँ कि उन्होंने मुझे कोई कड़ा या तय काम नहीं दिया. अगर ऐसा होता, तो शायद मैं यह जिम्मेदारी नहीं लेता. उन्हें बस एक ऐसा इंसान चाहिए था जो कंपनी को अच्छी तरह से चला सके. पहले दिन ही मैंने अपने लिए एक सीधा और मजबूत लक्ष्य तय किया – एक बेहतरीन कंपनी बनाना. आज भी यही मकसद हमें आगे बढ़ाता है. तब लोग Hexaware को सिर्फ एक PeopleSoft कंपनी के तौर पर जानते थे. लेकिन अब हमने खुद को पूरी तरह बदल लिया है. अब हम एक AI-फर्स्ट कंपनी हैं – यानी हमारी सबसे बड़ी ताकत AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) है.  हम अभी भी हर काम नहीं करते – शायद हम अभी इतने बड़े नहीं हैं. लेकिन कुछ काम हम बहुत अच्छी तरह करते हैं – जैसे सॉफ्टवेयर बनाना, डेटा और AI से जुड़ा काम करना, और टेक्नोलॉजी को संभालना. बीते सालों में हमें लगातार बदलाव करने पड़े हैं, और यह सिलसिला अब भी जारी है.

आजकल AI के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर IT सेक्टर की भूमिका पर काफी ध्यान दिया जा रहा है. ऐसे में, जब मुनाफा कम हो रहा है और इनोवेशन तेज़ी से बढ़ रहा है, तो भारतीय IT की क्या स्थिति है?

आज दुनिया में कोई भी ऐसा बिज़नेस नहीं है जिसमें IT (सूचना तकनीक) ज़रूरी न हो. हाल ही में मैं एक कचरा प्रबंधन कंपनी के COO से मिला. वे AI और सेंसर का इस्तेमाल करते हैं ताकि कचरे को छांटा जा सके, आग लगने का खतरा पहले ही पता चल सके, और सुरक्षा बनी रहे. सोचिए, एक कचरा उठाने वाली कंपनी भी अब इतनी हाई-टेक हो गई है. यही बात दिखाती है कि आज हर बिज़नेस टेक्नोलॉजी पर चलता है. सच कहूं तो दुनिया में इतने सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं हैं जो इस बदलाव की ज़रूरतों को पूरा कर सकें. जहां तक भारतीय IT की बात है – यह पूरी दुनिया की कंपनियों की रीढ़ की हड्डी है. 80 से 90 प्रतिशत बड़ी-बड़ी ग्लोबल कंपनियां भारतीय IT पर निर्भर हैं. कई कंपनियां तो हमारे बिना चल ही नहीं सकतीं – Hexaware भी उनमें से एक है. दुनिया की अर्थव्यवस्था और भारतीय IT एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं, और यह जल्दी बदलने वाला नहीं है.

पिछले 2–3 सालों में भारतीय IT में जनरेटिव AI को अपनाने की रफ्तार को आप कैसे देखते हैं? और जब भारत में GCCs (Global Capability Centers) बढ़ रहे हैं, जो कि एक तरह का कॉम्पिटिशन भी हैं, तो क्या IT इंडस्ट्री तेजी से बदल रही है?

AI बहुत तेजी से चीज़ें बदल रहा है. मेरी नजर में IT सेक्टर का काम यह नहीं है कि वह नई तकनीक बनाए – वो तो किसी और का काम है. हमारा काम है कि जब कोई नई तकनीक आती है, तो हम उसे जल्दी से जल्दी बड़े स्तर पर कंपनियों में इस्तेमाल के लायक बना सकें. आमतौर पर इसमें बहुत वक्त लग जाता है. जैसे स्मार्टफोन को ही देख लीजिए – पहले ये सिर्फ आम लोगों के लिए एक खिलौने जैसे थे. लेकिन बिज़नेस ने इसे सही मायने में अपनाने में 5 से 10 साल लगा दिए. यह एक पैटर्न होता है – पहले तकनीक बनती है, फिर लोग उसे अपनाते हैं, और आखिर में कंपनियां उसे अपनाती हैं. हमारा काम है कि इस पूरे चक्र को छोटा करना.

सच कहें तो हर नई तकनीक के साथ यह चक्र अपने आप छोटा हो रहा है. इसलिए मैं नहीं मानता कि AI को अपनाने की रफ्तार धीमी है. आज AI को कंपनियों में इस्तेमाल करने में सबसे बड़ी रुकावट तकनीक या हमारी जैसी सर्विस कंपनियां नहीं हैं. पहले तकनीक आती है, फिर हम जैसे लोग उसे कंपनियों में लाते हैं. लेकिन असली रुकावट तब आती है जब कंपनियों को खुद अपनी कार्यशैली और सोच को बदलना होता है. यही सबसे धीमा और मुश्किल हिस्सा है – और यही रफ्तार को रोकता है.

आपने Hexaware का लक्ष्य रखा है कि वह 2029 तक 3 अरब डॉलर (USD 3 billion) की कमाई (revenue) तक पहुँचे. लेकिन कोविड के बाद जो वैश्विक (geopolitical) बदलाव आ रहे हैं, उनके बीच आप इसे कैसे हासिल करना चाहते हैं? इसका रोडमैप क्या है?

हमने 2029 तक 3 अरब डॉलर की कमाई का लक्ष्य रखा है, और इसमें कुछ कंपनियों का अधिग्रहण (acquisition) भी शामिल होगा. इस लक्ष्य तक पहुँचने के लिए हमने 4 बड़े कदम तय किए हैं, जो हमारी ग्रोथ को तेज़ कर सकते हैं.

पहला है – पुरानी तकनीकों को नए ज़माने के मुताबिक बदलना (legacy modernisation). इस पर हमने जनवरी में काम शुरू किया, और अब तक 40 कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाई है. अभी ये सब शुरुआत के स्टेज पर हैं, लेकिन यह एक अच्छी शुरुआत है. हमें उम्मीद है कि इस साल की दूसरी तिमाही से इसका असर दिखने लगेगा.

दूसरा है – प्राइवेट इक्विटी को एक नया बिज़नेस चैनल बनाना. अब तक हमने इस रास्ते पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन अब हम इसे एक बड़े मौके के रूप में देख रहे हैं. हमारे कुछ प्रतिस्पर्धियों ने इससे अच्छी कमाई की है, और अब हम भी इसमें रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं.

तीसरा है – हाई टेक और ISVs (Independent Software Vendors) के क्षेत्र में विस्तार करना. अभी यह हमारे लिए एक छोटा सा हिस्सा है और किसी अलग वर्टिकल के तौर पर नहीं है. अब हम इसे अलग करके इसके लिए एक खास लीडर नियुक्त करेंगे – संभवतः इस साल के बीच तक.

चौथा कदम है – खासतौर पर मिडिल ईस्ट और भारत में अपना दायरा बढ़ाना. मिडिल ईस्ट हमेशा से हमारे लिए तेज़ी से बढ़ने वाला मार्केट रहा है. मौजूदा वैश्विक हालातों को देखते हुए, मुझे लगता है कि भारत और मिडिल ईस्ट दुनिया की मंदी से थोड़े अलग रहेंगे, और इसलिए ये मार्केट्स अब और भी ज़्यादा अहम हो गए हैं.

(BW रिपोर्टर- रोहित चिंतापल्ली, BW Businessworld में रीजनल एडिटर (टेक्नोलॉजी और साउथ) हैं.)
 


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