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नए साल में दुनिया का सबसे महंगा सैटेलाइट लॉन्च करेगा भारत, जानिए क्या होंगी इसकी खूबियां?
इसरो नए साल में दुनिया का सबसे महंगा सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी में है. इसे ISRO और NASA ने मिलकर तैयार किया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
नया साल पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) दुनिया का सबसे महंगा सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहा है. ये क्षण भारतीयों के लिए बहुत गौरव का क्षण होगा. इस सैटेलाइट को इसरो (ISRO) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने मिलकर बनाया है. इसकी लागत 12,505 करोड़ रुपये है और इसे दुनिया का अब तक का सबसे महंगा सैटेलाइट बताया जा रहा है. इसकी मदद से धरती पर आने वाली प्राकृतिक आपदाओं का काफी हद तक पहले ही अनुमान लगाया जा सकेगा. तो आइए जानते हैं ये कब लॉन्च होगा और इसमें और क्या खूबियां शामिल हैं?
कब लॉन्च होगा सेलेलाइट?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसरो और नासा द्वारा मिलकर तैयार किए गए इस सैटेलाइट को मार्च 2025 में लॉन्च किया जाएगा. इस सैटेलाइट का नाम नासा इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) रखा गया है. इसका वजन 2,600 किग्रा है. नासा और इसरो ने सितंबर 2014 को NISAR मिशन पर सहयोग करने और इसे लॉन्च करने के लिए एक साझेदारी की थी. इस मिशन को साल 2024 में लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसमें देरी हुई. नासा इस मिशन के लिए L-बैंड सिंथेटिक अपर्चर रडार, विज्ञान डेटा के लिए एक हाई रेट कम्युनिकेशन सबसिस्टम, GPS रिसीवर, एक सॉलिड-स्टेट रिकॉर्डर और पेलोड डेटा सबसिस्टम प्रदान कर रहा है. इसी तरह इसरो इस मिशन के लिए अंतरिक्ष यान, S-बैंड रडार, लॉन्च वाहन और संबंधित लॉन्च सेवाएं प्रदान कर रहा है.
सैटेलाइट में होंगी ये खूबियां
इस सैटेलाइट पर 1.5 अरब डॉलर की लागत आने का अनुमान है, जो इसे दुनिया का सबसे महंगा सैटेलाइट बनाता है. यह 5 से 10 मीटर के रिजॉल्यूशन पर महीने में दो से ज्यादा बार पृथ्वी की जमीन और बर्फ को उन्नत रडार इमेजिंग के जरिए मैप करेगा. यह धरती, समुद्र और बर्फ की सतह को भी मैप करेगा और छोटी से छोटी गतिविधि को भी पकड़ लेगा. यह सैटेलाइट हर 12 दिन में धरती की एक-एक इंच जमीन को स्कैन करेगा. यह इकोसिस्टम में गड़बड़ी और दुनिया भर में बदल रहे मौसम का निरीक्षण करेगा. वैज्ञानिकों का दावा है कि इसके जरिए सतह के नीचे होने वाली गतिविधियों की भी थाह मिल सकेगी.
हर समय और मौसम में मिलेगा रियल टाइम डेटा अपडेट
इस सैटेलाइट को इसरो के जीएसएलवी-एमके 2 रॉकेट के जरिए सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा. सैटेलाइट में एल-बैंड और एस-बैंड रडार सिस्टम लगाए गए हैं. L-बैंड रडार छोटी सतह की हलचलों का पता लगाने में सक्षम है जबकि इसरो का एस-बैंड रडार इमेज रिजॉल्यूशन को बढ़ाने का काम करेगा. साथ ही इसमें 39 फुट का एंटीना रिफ्लेक्टर लगाया गया है, जो सोने की परत वाली जाली से बना है. यह हर समय और मौसम में रियल टाइम डेटा प्रदान कर सकेगा.
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