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DoT ने TRAI को भेजा नया प्रस्ताव, सैटेलाइट कंपनियों को देना पड़ सकता है 5% AGR शुल्क
सरकार का यह कदम डिजिटल कनेक्टिविटी को सशक्त करने की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है. हालांकि, फीस बढ़ोतरी से कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, लेकिन लंबे समय में यह सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए बेहतर नियामक ढांचा तैयार करेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago
भारत सरकार सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं देने वाली कंपनियों से स्पेक्ट्रम इस्तेमाल के लिए अधिक फीस लेने की योजना पर काम कर रही है. दूरसंचार विभाग (DoT) ने सुझाव दिया है कि सैटेलाइट कंपनियों को अपने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) का 5 फीसदी शुल्क देना चाहिए. यह दर टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) द्वारा सुझाए गए 4 फीसदी से अधिक है. इस कदम का असर एलन मस्क की स्टारलिंक, अमेजन की कुइपर और भारत की जियो सैटेलाइट जैसी कंपनियों पर पड़ेगा.
DoT का प्रस्ताव TRAI के पास समीक्षा के लिए जाएगा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, DoT जल्द ही संशोधित प्रस्ताव TRAI को भेजेगा. समीक्षा के बाद यह प्रस्ताव कैबिनेट के पास अंतिम मंजूरी के लिए जाएगा. TRAI ने पहले सुझाव दिया था कि शहरों में ग्राहकों से सालाना ₹500 अतिरिक्त शुल्क लिया जाए ताकि कंपनियां ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा बढ़ा सकें. हालांकि, DoT ने इसे ठुकरा दिया क्योंकि शहर-गांव के आधार पर अलग-अलग शुल्क लागू और ऑडिट करना व्यावहारिक नहीं है.
रेवेन्यू बढ़ने के साथ फीस बढ़ाना उचित: DoT
DoT का तर्क है कि अब सैटेलाइट इंटरनेट केवल व्यावसायिक उपयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाला है. इसलिए, बढ़ते बाजार और मुनाफे के अनुरूप फीस में वृद्धि उचित है. वर्तमान में जीएसओ (GSO) ऑपरेटर्स जैसे ह्यूजेस और नेल्को AGR का 3-4% शुल्क देते हैं, जबकि नई नॉन-जीएसओ कंपनियों के लिए 5% दर प्रस्तावित है. IN-SPACe की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का स्पेस इकोनॉमी सेक्टर 2033 तक 44 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो वैश्विक बाजार का लगभग 8% हिस्सा होगा.
परमिट मिले, पर स्पेक्ट्रम आवंटन बाकी
स्टारलिंक, वनवेब और जियो सैटेलाइट को भारत में सेवा देने के परमिट मिल चुके हैं, लेकिन स्पेक्ट्रम आवंटन तभी होगा जब मूल्य निर्धारण तय हो जाएगा. वहीं, अमेजन कुइपर को अभी अनुमोदन का इंतजार है. टेलीकॉम एक्ट के तहत, जीएसओ और नॉन-जीएसओ दोनों कंपनियों को एडमिनिस्ट्रेटिव तरीके से स्पेक्ट्रम दिया जाएगा.
डिजिटल भारत निधि से सब्सिडी का प्रस्ताव खारिज
TRAI ने सुझाव दिया था कि डिजिटल भारत निधि (DBN) से ₹20,000–₹50,000 के सैटेलाइट टर्मिनल पर सब्सिडी दी जाए ताकि दूरदराज के इलाकों में सेवाओं का प्रसार बढ़े. लेकिन DoT ने यह प्रस्ताव खारिज कर दिया क्योंकि DBN में सीधे सब्सिडी देने की व्यवस्था मौजूद नहीं है.
आगे की प्रक्रिया
TRAI की प्रतिक्रिया के बाद DoT स्पेक्ट्रम प्राइसिंग और अलॉटमेंट नियमों को अंतिम रूप देगा. इसके बाद देशी और विदेशी कंपनियों को स्पेक्ट्रम वितरण पर स्पष्टता मिलेगी. यह कदम भारत को सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे ले जाने और ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने में अहम साबित हो सकता है.
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