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साथ तो आए हैं, लेकिन कब तक साथ रहेंगे नीतीश, वादों से मुकरने का पुराना है इतिहास

नीतीश कुमार का इतिहास ऐसा है कि भाजपा के लिए उन पर विश्वास करना मुश्किल होगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

केंद्र में NDA की सरकार भले ही बन रही है, लेकिन सभी निगाहें बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार पर टिकी हुई हैं. नीतीश मोदी 3.0 की एक ऐसे कड़ी हैं, जिसके टूटते ही सरकार संकट में पड़ जाएगी. वैसे, नीतीश भरोसा दिला रहे हैं कि वे हर समय पीएम (Nitish Kumar) नरेंद्र मोदी और एनडीए के साथ रहेंगे, लेकिन उनका इतिहास कई शंकाओं को जन्म देता है. नीतीश ने शुक्रवार को कहा कि हम लोग पूरे तौर पर सब दिन पीएम मोदी के साथ रहेंगे. उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उन लोगों ने आज तक कोई काम नहीं किया, देश की कोई सेवा नहीं की है. 

कई बार मारी है पलटी 
नीतीश कुमार ने गारंटी देते हुए कहा कि अब हम हमेशा साथ रहेंगे. हालांकि, थोड़ा पीछे मुड़कर देखें तो ऐसी बातें वह कई बार अलग-अलग लोगों से कह चुके हैं. इसलिए पीएम मोदी और भाजपा के लिए भी उन पर आंख मूंदकर विश्वास करना मुश्किल होगा. इसी जनवरी में नीतीश लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और महागठबंधन (INDIA अलायन्स) से रिश्ता तोड़कर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल हुए थे. नीतीश आरजेडी के समर्थन से मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन रिश्ता तोड़ने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा. वे एनडीए की मदद से फिर से बिहार के सीएम बने गए. यह कोई पहला मौका नहीं था, जब उन्होंने पाला बदला. अपने करीब पांच दशक के राजनीतिक जीवन में कई बार पलटी मार चुके हैं.

किए थे दोस्ती के दावे 
अगस्त 2022 में नीतीश कुमार ने NDA हिस्सा रहते हुए भाजपा पर हमला बोला था. उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी पार्टी JDU भाजपा के पीछे चलने को मजबूर है. राज्य विधानसभा में जेडीयू की सीटें घटने और भाजपा की सीटें बढ़ने से वह नाराज थे. उन्होंने कई मुद्दों पर भाजपा से असहमति जाहिर की थी. इसी के चलते उन्हें NDA का साथ छोड़कर RJD से रिश्ता कायम कर लिया था. उस समय नीतीश ने कहा था कि अब वो कभी भाजपा के साथ नहीं जाएंगे. उन्होंने RJD से दोस्ती को लेकर कई दावे भी किए थे, लेकिन समय के साथ उनके दावे हवा हो गए. आज वह फिर से भाजपा के साथ खड़े हैं और NDA की सरकार में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

जनता दल से हो गए थे अलग
नीतीश ने 1974 के छात्र आंदोलन के जरिए राजनीति में कदम रखा था. 1985 में वह पहली बार विधायक बने. लालू प्रसाद यादव जब 1990 में बिहार के मुख्यमंत्री बने, लेकिन 1994 आते-आते नीतीश ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया. नीतीश और लालू एक साथ जनता दल में थे, लेकिन महत्वकांक्षा के चलते दोनों अलग हो गए. 1994 में नीतीश ने जनता दल छोड़कर जार्ज फर्नांडीस के साथ मिलकर 'समता पार्टी' का गठन किया. 1995 में वह वामदलों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़े, लेकिन नतीजे उनके पक्ष में नहीं आए. नतीजतन नीतीश ने लेफ्ट से गठबंधन तोड़ लिया और 1996 में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के खेमे में आ गए.  

2014 में अकेले लड़ा चुनाव
बिहार में नीतीश और भाजपा का रिश्ता सालों तक मजबूत रहा. लेकिन नरेंद्र मोदी को बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया, तो उनका भाजपा से मोहभंग हो गया. नीतीश ने BJP से रिश्ता तोड़ते हुए 2014 का लोकसभा चुनाव अकेले लड़ा. हालांकि, नतीजे उनके पक्ष में नहीं आये. इसके बाद उन्होंने आरजेडी और कांग्रेस के साथ हाथ मिलाया. 2015 विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने RJD, कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा. इस गठबंधन ने राज्य 243 में से 178 सीटों पर जीत हासिल की. नीतीश सीएम बने और तेजस्वी यादव ने डिप्टी सीएम बनाया गया. लेकिन 2017 में नीतीश ने महागठबंधन से नाता तोड़ लिया और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली.  

फिर थामा कमल का फूल
नीतीश कुमार ने भाजपा संग मिलकर 2017 से लेकर 2022 तक राज्य में सरकार चलाई. 2020 का बिहार विधानसभा चुनाव भी दोनों ने साथ लड़ा. लेकिन चुनावी नतीजों ने नीतीश को आहत कर दिया. इस चुनाव में जेडीयू को 43 सीटें मिलीं और भाजपा को 74. हालांकि, इसके बावजूद BJP ने उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाया. मगर भाजपा का अपने दो डिप्टी सीएम बनाना नीतीश को रास नहीं आया. करीब दो साल सरकार चलाने के बाद नीतीश कुमार ने 2022 में फिर पलटी मारी और आरजेडी-कांग्रेस के पास वापस लौट गए. इस दौरान, नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने और तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम. आदत से मजबूर नीतीश इस बार भी गठबंधन में ज्यादा देर तक रुके. डेढ़ साल के बाद उनका मन फिर बदला और उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया. 

कितने अमीर हैं नीतीश कुमार?
चलिए अब यह भी जान लेते हैं पलटूराम का टैग पाने वाले नीतीश कुमार कितने अमीर हैं? साल 2023 के आखिरी में नीतीश कुमार ने अपने मंत्रियों के साथ अपनी संपत्ति का भी ब्यौरा दिया था. बिहार के CM नीतीश कुमार ने बताया था कि वह 1.64 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति के मालिक हैं. उनके पास 22,552 रुपए कैश और अलग-अलग बैंक खातों में 49,202 रुपए जमा हैं. उनके नाम पर 11.32 लाख रुपए की एक फोर्ड इकोस्पोर्ट कार है. इसके अलावा नीतीश के पास 1.28 लाख की दो सोने की अंगूठियां, एक चांदी की अंगूठी, 1.45 लाख रुपए की 13 गायें और 10 बछड़े आदि भी हैं. नितीश के पास नई दिल्ली के द्वारका में एक अपार्टमेंट है, जिसकी कीमत 1.48 करोड़ रुपए है.


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