मीडिया में इस बात को लेकर रिपोर्ट्स आ रही थीं कि लोकसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद नई सरकार इनकम टैक्स सिस्टम में व्यापक बदलाव किया जा सकता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
आयकर नियमों में बदलाव से जुड़ी खबरों को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने इसे अफवाह करार देते हुए कहा कि यह पूरी तरह अटकलों पर आधारित है. दरअसल, मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया जा रहा था कि लोकसभा चुनाव के बाद आयकर विभाग कुछ नियमों में बदलाव की योजना बना रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र की नई सरकार बनते ही ये बदलाव लागू हो जाएंगे.
क्या कहा वित्त मंत्री ने
निर्मला सीतारमण ने एक न्यूज चैनल की रिपोर्ट पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि मैं आश्चर्यचकित हूं कि यह बातें कहां से आ रही हैं. इन्हें चेक क्यों नहीं किया जाता. यह कोरी अफवाह के सिवाय कुछ नहीं है. चैनल ने ट्वीट कर दावा किया था कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट नए नियम लाने की तैयारी में जुटा हुआ है. फिलहाल शेयर और इक्विटी आधारित म्युचुअल फंड से होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) के 1 लाख रुपये से ज्यादा होने पर 10 फीसदी के रेट से टैक्स लगता है. उधर, एफडी से होने वाली आय पूरी तरह टैक्स के दायरे में आती है.
Wonder where this is come from. Was not even double checked with @FinMinIndia . Pure speculation.
— Nirmala Sitharaman (Modi Ka Parivar) (@nsitharaman) May 3, 2024
Sorry, @CNBCTV18Live speculation, particularly during #LokSabhaElection2024 https://t.co/Qk0socShVU
क्या कहा गया था रिपोर्ट में
रिपोर्ट में दावा किया गया था कि नई सरकार के कार्यभार संभालने के बाद आयकर विभाग टैक्स बेस में कमी को रोक सकता है. इसके साथ ही आयकर के दंड से जुड़े कानूनों में सुधार किया जा सकता है. इसके साथ ही रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि नई सरकार सभी एसेट पर यूनिफॉर्म टैक्स लागू करने की योजना बना रही है. वर्तमान में एसेट पर अलग-अलग टैक्स प्रावधान है.
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नियम बदले तो इक्विटी निवेशकों को होगा नुकसान
इनकम टैक्स नियमों के अनुसार, डेट म्यूचुअल फंड निवेशकों को 36 महीने के भीतर होल्डिंग अवधि के लिए शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स का भुगतान करना पड़ता है. दूसरी ओर डेट फंड पर एलटीसीजी इंडेक्सेशन लाभ के साथ 20 फीसदी है. यदि इन नियमों में कोई बदलाव किया जाता है तो इक्विटी निवेशकों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा. नए नियम डेट इनवेस्टर्स के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित होंगे.
4 जून को आएंगे लोकसभा चुनाव के नतीजे
गौरतलब है कि लोकसभा चुनावों के नतीजे 4 जून को आएंगे. जिसके बाद सत्ता में आने वाली नई सरकार जुलाई 2024 में मुख्य बजट सत्र आयोजित करेगी. इस साल फरवरी में अंतरिम बजट 2024 पेश किए जाने के बाद, वित्त मंत्री ने कहा था कि यह उनके लिए आय पर फैसला लेने का समय नहीं है. टैक्स रीबेट छूट या टैक्स स्लैब में संशोधन. सीतारमण ने कहा था कि कई क्षेत्रों की तरह, टैक्स स्लैब्स में संशोधन अंतरिम बजट के लिए नहीं है.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया गया था. पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करते हुए विपक्षी नेताओं, कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दिल्ली में शनिवार को कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की. मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया. इस कार्रवाई में विपक्षी नेता, पार्टी कार्यकर्ता, छात्र, पत्रकार और अन्य प्रदर्शनकारी शामिल थे. राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई, बैरिकेडिंग लगाई गई और सार्वजनिक परिवहन पर भी प्रतिबंध लगाए गए.
यह प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) में कथित अनियमितताओं के विरोध में बुलाया गया था. दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं और सार्वजनिक प्रदर्शनों की शर्तों का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था. हालांकि, CJP ने प्रतिबंधों के बावजूद आंदोलन जारी रखने की बात कही थी.
CJP के नेताओं समेत कई विपक्षी नेता हिरासत में
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरव दास तथा अशुतोष रांका को मुंबई से दिल्ली पहुंचने के बाद इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हिरासत में ले लिया गया. यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी गुरुग्राम स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया.
तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और पार्टी के पांच अन्य नेताओं को साउथ एवेन्यू के पास धरना देने के बाद हिरासत में लिया गया. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को भी प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश के दौरान हिरासत में लिया गया. इसके अलावा कई विपक्षी नेताओं, छात्र संगठनों के सदस्यों और प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया.
धरने के दौरान मुंह पर बैंडेज लगाए ममता बनर्जी ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की. पुलिस बस के भीतर रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में उन्होंने कहा कि सरकार उनके साथ दुर्व्यवहार कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि INDIA गठबंधन लोगों की आवाज को मजबूत करने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगा.
प्रदर्शन को कवर कर रहे कुछ पत्रकारों को भी थोड़े समय के लिए हिरासत में लिया गया. वहीं, सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन कर रहे वकीलों को हिरासत में लेने के बाद रिहा कर दिया गया. कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए. विभिन्न रिपोर्टों में यह संख्या 2,000 से लेकर 3,000 से अधिक बताई गई. CJP ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की निंदा करते हुए उनकी रिहाई की मांग की.
दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, मेट्रो और ट्रेन सेवाएं प्रभावित
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में 35,000 से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया. मध्य दिल्ली की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों, सार्वजनिक स्थलों और प्रवेश बिंदुओं पर सुरक्षा बढ़ाई गई. प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग, जांच चौकियां और वाहनों की जांच की व्यवस्था की गई.
दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाए गए. इसके अलावा जंतर-मंतर के चार किलोमीटर के दायरे में 9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं.
प्रदर्शन के कारण रेल सेवाएं भी प्रभावित हुईं. रिपोर्ट के मुताबिक, 250 से अधिक ट्रेन सेवाओं को रद्द किया गया या उनके समय में बदलाव किया गया. इससे राजधानी के कई हिस्सों में आवागमन बाधित हुआ और प्रमुख सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ गया.
सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद कुछ प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर के बाहर अन्य स्थानों पर एकत्र हुए. इनमें एक शिल्प बाजार और महात्मा गांधी के स्मारक के आसपास के इलाके शामिल थे. प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए. इसके बाद पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में ले लिया. प्रतिबंधों का असर मध्य दिल्ली के कुछ बाजारों और सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं पर भी पड़ा.
मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विवाद
CJP का प्रदर्शन चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों की बढ़ती आलोचना के बीच हुआ. विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं और इससे चुनावी नतीजे प्रभावित हो सकते हैं. यह विवाद उन राज्यों में भी राजनीतिक टकराव का मुद्दा बना है, जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुनावी जीत हासिल की है.
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, सत्यापन प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ प्रविष्टियां हटाई गईं. इनमें लगभग 6.3 करोड़ ऐसे लोगों की प्रविष्टियां थीं, जो अपना निवास स्थान बदल चुके थे. करीब तीन करोड़ लोगों का पता नहीं चल सका, जबकि लगभग 2.8 करोड़ प्रविष्टियां मृत मतदाताओं से संबंधित थीं. ये नाम मतदाता सूची को अपडेट करने की व्यापक प्रक्रिया के तहत हटाए गए.
चुनाव आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची की सटीकता बढ़ाना है. आयोग के मुताबिक, जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हट गए हैं, वे दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं.
BJP और चुनाव आयोग ने अनियमितताओं के आरोपों को खारिज किया है. सत्तारूढ़ पार्टी ने विपक्ष पर चुनावी हार के बाद गलत जानकारी फैलाने का आरोप भी लगाया है.
CJP के प्रदर्शन ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े विवाद को व्यापक राजनीतिक टकराव में बदल दिया है. जहां विपक्षी दल चुनाव आयोग से अधिक जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस की कार्रवाई ने राजनीतिक प्रदर्शनों पर प्रतिबंध और नेताओं की हिरासत को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं.
मंदिर में पूजा के बाद प्रधानमंत्री ने भगवान गणेश को ‘विघ्नहर्ता’ बताते हुए देश के निरंतर विकास और सभी के कल्याण की कामना की. उन्होंने कहा कि विघ्नहर्ता की कृपा से सभी का कल्याण हो और देश लगातार प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ता रहे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 7 अक्टूबर को नई दिल्ली के सरोजिनी नगर स्थित श्री विनायक मंदिर में पूजा-अर्चना की. यह दौरा ऐसे समय हुआ जब प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक जीवन में सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 साल पूरे किए हैं. उन्होंने भगवान गणेश से देशवासियों की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की.
प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर में भगवान गणेश की पूजा की और देश के कल्याण की प्रार्थना की. पूजा-अर्चना के बाद उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इसकी जानकारी साझा की. उन्होंने लिखा कि उन्होंने नई दिल्ली के श्री विनायक मंदिर में पूजा-अर्चना की और भगवान श्री गणेश से देशभर के अपने परिवारजनों की सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की.
25 साल पहले शुरू हुआ था सरकार के प्रमुख के तौर पर सफर
प्रधानमंत्री मोदी के सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 साल पूरे होने का यह पड़ाव 7 अक्टूबर 2001 से जुड़ा है. इसी दिन उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. इसके बाद मई 2014 में वह देश के प्रधानमंत्री बने और तब से इस पद पर हैं.
इस मौके पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भी प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के लगातार नेतृत्व को लेकर एक प्रस्ताव पारित कर उन्हें बधाई दी. प्रस्ताव में गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक के उनके राजनीतिक सफर का उल्लेख किया गया.
भगवान गणेश से देश की प्रगति की कामना
मंदिर में पूजा के बाद प्रधानमंत्री ने भगवान गणेश को ‘विघ्नहर्ता’ बताते हुए देश के निरंतर विकास और सभी के कल्याण की कामना की. उन्होंने कहा कि विघ्नहर्ता की कृपा से सभी का कल्याण हो और देश लगातार प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ता रहे.
करीब 65 साल पुराना है मंदिर
सरोजिनी नगर स्थित श्री विनायक मंदिर का इतिहास दक्षिण भारतीय समुदाय से जुड़ा है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में रह रहे दक्षिण भारतीय समुदाय के लोगों ने 1950 के दशक की शुरुआत में ऐसे मंदिर की जरूरत महसूस की थी, जहां पारंपरिक पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकें. मंदिर की मुख्य विनायक प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा 24 अगस्त 1961 को हुई थी.
प्रधानमंत्री का मंदिर दौरा उनके सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे होने के मौके पर हुआ. इस दौरान उन्होंने धार्मिक अनुष्ठान के साथ देशवासियों के सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और देश की निरंतर प्रगति की कामना की.
गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरुआत से प्रधानमंत्री के तीन कार्यकाल तक का सफर, सुधारों, कल्याण योजनाओं, बुनियादी ढांचे और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर रहा फोकस
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 7 अक्टूबर को सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 साल पूरे कर लिए. यह सफर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से शुरू हुआ और प्रधानमंत्री के तौर पर तीन कार्यकाल तक पहुंचा. इस दौरान उनकी सरकारों की आर्थिक नीतियों में औद्योगिक निवेश, बुनियादी ढांचे, कल्याण योजनाओं, डिजिटल भुगतान और कारोबार से जुड़े कई बड़े सुधार प्रमुख रहे हैं.
इस मौके पर मोदी ने दिल्ली के सरोजिनी नगर स्थित श्री विनायक मंदिर में पूजा-अर्चना कर दिन की शुरुआत की. इससे एक दिन पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक प्रस्ताव पारित कर उनके कार्यकाल में कल्याण योजनाओं, बुनियादी ढांचे, तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए कामों का उल्लेख किया था.
2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे मोदी
नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी. उन्होंने केशुभाई पटेल की जगह यह जिम्मेदारी संभाली थी. उस समय गुजरात एक विनाशकारी भूकंप के बाद पुनर्निर्माण के दौर से गुजर रहा था.
मुख्यमंत्री के तौर पर मोदी सरकार ने औद्योगिक निवेश, बिजली आपूर्ति और बुनियादी ढांचे पर जोर दिया. वर्ष 2003 में शुरू हुआ वाइब्रेंट गुजरात समिट निवेशकों को आकर्षित करने और गुजरात को कारोबारी निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में पेश करने का एक महत्वपूर्ण मंच बना.
2014 में प्रधानमंत्री बने, 2024 में तीसरा कार्यकाल
मोदी ने 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लोकसभा चुनाव में बहुमत हासिल किया था. वर्ष 2019 में BJP को इससे भी बड़ा जनादेश मिला.
उनका तीसरा कार्यकाल 9 जून 2024 को शुरू हुआ. इस बार राजनीतिक समीकरण बदला हुआ था और BJP अपने दम पर बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई. इसके बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार बनी.
GST और IBC से बदला कारोबारी माहौल
मोदी सरकार के कार्यकाल में कारोबार से जुड़े कई बड़े नीतिगत बदलाव हुए. जुलाई 2017 में लागू वस्तु एवं सेवा कर (GST) ने कई अप्रत्यक्ष करों को एक व्यवस्था के तहत लाने का काम किया.
वहीं इन्सॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्टसी कोड यानी IBC ने कंपनियों की वित्तीय मुश्किलों के समाधान के लिए एक ढांचा तैयार किया. इससे कॉरपोरेट दिवालियापन और कर्ज समाधान की प्रक्रिया को एक व्यवस्थित कानूनी आधार मिला.
डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के विस्तार ने भी देश में रोजमर्रा के लेनदेन का तरीका बदल दिया. इसका इस्तेमाल उपभोक्ताओं से लेकर छोटे कारोबारियों तक तेजी से बढ़ा.
कल्याण योजनाओं के जरिए बढ़ी सरकारी पहुंच
कल्याण योजनाएं भी मोदी सरकार की नीतियों का प्रमुख हिस्सा रही हैं. जन धन बैंक खाते, आवास सहायता, LPG कनेक्शन, स्वच्छता और स्वास्थ्य कवरेज जैसी योजनाओं के जरिए बड़ी आबादी तक सरकारी सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया गया.
बैंक खातों को आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी से जोड़ने से डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (DBT) के विस्तार में मदद मिली. इसके जरिए सरकारी सहायता को सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया.
इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग पर बड़ा दांव
बुनियादी ढांचा निवेश भी सरकार की आर्थिक रणनीति का प्रमुख हिस्सा रहा है. हाईवे, रेलवे और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में लगातार निवेश किया गया. मेक इन इंडिया और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं के जरिए घरेलू उत्पादन और निवेश बढ़ाने की कोशिश की गई.
इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में भी भारत की महत्वाकांक्षाएं बढ़ी हैं. केंद्रीय मंत्रिमंडल के प्रस्ताव में कहा गया कि मोदी के नेतृत्व के दौरान सार्वजनिक पूंजीगत व्यय 2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया. हाईवे विस्तार और रेलवे विद्युतीकरण को भी सरकार के बुनियादी ढांचा निवेश के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया गया.
G20 अध्यक्षता से वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 2023 में भारत की G20 अध्यक्षता मोदी सरकार की कूटनीतिक प्राथमिकताओं का एक प्रमुख हिस्सा रही. इस दौरान ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी गई. अफ्रीकी संघ को G20 में शामिल किया जाना भी भारत की अध्यक्षता के प्रमुख परिणामों में रहा.
अब 2047 तक विकसित भारत की चुनौती
सरकार अब 2047 तक भारत को विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य पर जोर दे रही है. ऐसे में अगले चरण में आर्थिक विकास के साथ रोजगार की गुणवत्ता, उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और विकास का व्यापक स्तर पर लाभ लोगों तक पहुंचना महत्वपूर्ण होगा.
मोदी के सरकार प्रमुख के तौर पर 25 साल पूरे होने के मौके पर उनके आर्थिक रिकॉर्ड को देखें तो सुधार, कल्याण, बुनियादी ढांचा और डिजिटल अर्थव्यवस्था उनके लंबे राजनीतिक कार्यकाल के प्रमुख आर्थिक आयाम रहे हैं. अब आने वाले वर्षों में इन पहलों का असर रोजगार, उत्पादकता और व्यापक आर्थिक समृद्धि के स्तर पर कितना दिखाई देता है, यह महत्वपूर्ण होगा.
17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 76 वर्ष के हो गए हैं. उनके जन्मदिन के मौके पर BJP देशभर में महीने भर चलने वाला ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू करेगी.
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रितु राणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन इस बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं है. 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक देशभर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जाएगा. BJP के मुताबिक अभियान के तहत रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य शिविर, स्वच्छता अभियान, लाभार्थियों से संपर्क, पदयात्रा, बाइक रैली और जनभागीदारी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. पार्टी ने इसे प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन की यात्रा से भी जोड़ा है. 17 सितंबर को ‘सेवा दिवस’ के तौर पर कार्यक्रमों की शुरुआत होगी. BJP की ओर से लोगों से घरों में ‘आशीर्वाद का दिया’ जलाने की अपील भी की गई है. वहीं, पार्टी की योजना वडनगर और वाराणसी को जोड़ने वाली ‘सेवा संकल्प’ यात्राओं समेत कई कार्यक्रम आयोजित करने की है.
मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था. RSS के संगठनात्मक काम से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचा और 2014 में उन्होंने देश के प्रधानमंत्री के तौर पर राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश किया. 2019 में दूसरी बार और 2024 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के साथ उनका राजनीतिक सफर भारतीय राजनीति के पिछले ढाई दशकों के एक महत्वपूर्ण दौर से जुड़ गया है.
वडनगर से RSS तक का सफर
नरेंद्र मोदी का जन्म गुजरात के मेहसाणा जिले के वडनगर में हुआ. शुरुआती जीवन के बाद वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और संगठन के लिए काम किया. यहीं से उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई. RSS में लंबे समय तक संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाने के बाद उनका राजनीतिक सफर भारतीय जनता पार्टी के साथ आगे बढ़ा. BJP के संगठन में काम करते हुए उन्होंने गुजरात से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पार्टी की गतिविधियों में भूमिका निभाई.
उनके राजनीतिक सफर की शुरुआती खासियत यह रही कि लंबे समय तक वे सीधे चुनावी राजनीति में रहने के बजाय संगठन के स्तर पर काम करते रहे. यही अनुभव आगे चलकर उनकी चुनावी राजनीति का आधार बना.
2001: गुजरात के मुख्यमंत्री बने
नरेंद्र मोदी के राजनीतिक करियर में सबसे बड़ा मोड़ 7 अक्टूबर 2001 को आया, जब उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. वे अक्टूबर 2001 से मई 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे. प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, यह गुजरात में किसी मुख्यमंत्री का सबसे लंबा कार्यकाल रहा है.
मुख्यमंत्री के तौर पर मोदी के कार्यकाल में गुजरात के औद्योगिक विकास, निवेश, बिजली, सड़क और बुनियादी ढांचे को प्रमुख मुद्दों के रूप में आगे रखा गया. इसी दौर में ‘गुजरात मॉडल’ राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना.
समर्थकों ने गुजरात में निवेश और विकास को मोदी सरकार की उपलब्धियों से जोड़ा, जबकि आलोचकों ने राज्य में सामाजिक और मानव विकास से जुड़े सवाल उठाए. इस तरह गुजरात का उनका 13 साल का कार्यकाल आज भी उनके राजनीतिक सफर का अहम और बहस वाला अध्याय है.
2002 के दंगे और सबसे बड़ा राजनीतिक विवाद
मोदी के गुजरात कार्यकाल की चर्चा 2002 के सांप्रदायिक दंगों के बिना पूरी नहीं होती. फरवरी 2002 में गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एक कोच में आग लगने के बाद गुजरात के कई हिस्सों में हिंसा हुई. हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका को लेकर लंबे समय तक राजनीतिक और कानूनी विवाद चलता रहा.
मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल यानी SIT गठित किया गया. 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने जकिया जाफरी की याचिका को खारिज करते हुए SIT की जांच और क्लोजर रिपोर्ट को बरकरार रखा. अदालत ने बड़े आपराधिक षड्यंत्र के आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सामग्री नहीं पाए जाने की बात कही. इस मामले के बावजूद 2002 की हिंसा मोदी के राजनीतिक जीवन का ऐसा मुद्दा रहा जिस पर उनके समर्थकों और आलोचकों के बीच राजनीतिक मतभेद बने रहे.
गुजरात में लगातार चुनावी जीत
2002 के बाद गुजरात विधानसभा चुनाव में BJP ने सत्ता बरकरार रखी. इसके बाद 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में भी BJP ने सरकार बनाई और नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री बने रहे. करीब 13 वर्षों तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान मोदी की राष्ट्रीय पहचान लगातार मजबूत हुई. निवेश सम्मेलन, औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचा और प्रशासनिक मॉडल उनके राजनीतिक प्रोफाइल के प्रमुख हिस्से बन गए.
2013 में BJP ने उन्हें 2014 लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया. इसके साथ ही गुजरात के मुख्यमंत्री से राष्ट्रीय स्तर के नेता के रूप में उनकी भूमिका पूरी तरह बदल गई.
2014: गुजरात से दिल्ली तक
2014 का लोकसभा चुनाव नरेंद्र मोदी के राजनीतिक करियर का निर्णायक पड़ाव रहा. BJP ने 2014 में 282 लोकसभा सीटें जीतीं और अपने दम पर बहुमत हासिल किया. इसके बाद 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. यहां से उनका राजनीतिक सफर राज्य की राजनीति से निकलकर पूरी तरह राष्ट्रीय राजनीति में बदल गया.
2014 के चुनाव अभियान में विकास, रोजगार, भ्रष्टाचार और मजबूत सरकार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे. बड़े पैमाने पर चुनावी रैलियों और डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल ने भी इस चुनाव में मोदी की राजनीतिक संचार शैली को अलग पहचान दी.
पहले कार्यकाल में बड़े फैसले
प्रधानमंत्री के पहले कार्यकाल में कई बड़े आर्थिक और सामाजिक कार्यक्रम शुरू हुए. इनमें प्रधानमंत्री जनधन योजना, स्वच्छ भारत मिशन, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना प्रमुख रहे.
2016 में नोटबंदी का फैसला लिया गया. 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर करने के फैसले को सरकार ने काले धन, नकली मुद्रा और आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक लगाने जैसे उद्देश्यों से जोड़ा. 2017 में GST लागू हुआ. इसका उद्देश्य देश में कई अप्रत्यक्ष करों को एक साझा कर व्यवस्था में लाना था.
2019: दूसरी बार प्रधानमंत्री
2019 के लोकसभा चुनाव में BJP ने 303 सीटें जीतीं और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक बार फिर अपने दम पर बहुमत हासिल किया. इसके बाद मोदी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में BJP ने मोदी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत हासिल किया था. ([PM India][3])
दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही सरकार ने जम्मू-कश्मीर से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों में बड़ा बदलाव किया. अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष प्रावधानों में बदलाव और राज्य के पुनर्गठन का फैसला हुआ. इसी कार्यकाल में नागरिकता संशोधन कानून, तीन तलाक कानून और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़े घटनाक्रम भी राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख मुद्दे बने.
अयोध्या से राम मंदिर तक
अयोध्या विवाद पर नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ. अगस्त 2020 में प्रधानमंत्री मोदी ने राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया. जनवरी 2024 में अयोध्या में राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई. यह घटना 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP के राजनीतिक और सांस्कृतिक विमर्श में एक प्रमुख मुद्दा बनी.
कोविड महामारी का दौर
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौतियों में कोरोना महामारी शामिल रही. मार्च 2020 में देशव्यापी लॉकडाउन लागू किया गया. इसके बाद आर्थिक गतिविधियों को धीरे-धीरे खोला गया. सरकार ने गरीबों, छोटे कारोबार और विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों के लिए राहत उपायों की घोषणा की. इसके बाद भारत में बड़े पैमाने पर कोविड टीकाकरण अभियान चलाया गया. महामारी के दौरान लॉकडाउन, आर्थिक नुकसान, प्रवासी श्रमिकों की स्थिति और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार की नीतियों पर व्यापक बहस हुई.
आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक मंच पर भारत
महामारी के बाद ‘आत्मनिर्भर भारत’ सरकार के प्रमुख आर्थिक अभियानों में शामिल हुआ. विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उत्पादन और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया. इसी दौरान भारत की वैश्विक कूटनीतिक भूमिका पर भी सरकार ने जोर दिया. 2023 में भारत ने G20 की अध्यक्षता की और नई दिल्ली में G20 शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ.
2024: तीसरी बार प्रधानमंत्री
2024 का लोकसभा चुनाव मोदी के राजनीतिक सफर का एक और अहम पड़ाव रहा. इस चुनाव में BJP को 240 सीटें मिलीं और वह अपने दम पर बहुमत के 272 के आंकड़े से नीचे रही. हालांकि BJP के नेतृत्व वाले NDA ने बहुमत हासिल किया और नरेंद्र मोदी ने 9 जून 2024 को लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. इस तरह 2014 और 2019 में BJP के अकेले बहुमत वाली सरकार के बाद 2024 में केंद्र में NDA गठबंधन की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई. प्रधानमंत्री कार्यालय भी मोदी को जवाहरलाल नेहरू के बाद लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने वाले दूसरे व्यक्ति के रूप में दर्ज करता है.
मोदी की राजनीतिक संचार शैली
मोदी के राजनीतिक सफर में संगठन के साथ-साथ संचार शैली भी महत्वपूर्ण रही है. बड़ी जनसभाएं, सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ‘मन की बात’ जैसे माध्यमों के जरिए सीधे जनता से संवाद उनकी राजनीति का हिस्सा रहे हैं. उनके समर्थक इसे सीधे जनसंवाद की शैली मानते हैं, जबकि आलोचक प्रधानमंत्री-केंद्रित राजनीतिक संचार और सत्ता के केंद्रीकरण जैसे मुद्दे उठाते रहे हैं. इन दोनों दृष्टिकोणों ने मोदी के राजनीतिक विमर्श को आकार दिया है.
25 साल सरकार के मुखिया
मोदी के राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव अक्टूबर 2026 में आएगा. 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद से वे लगातार किसी न किसी सरकार के प्रमुख रहे हैं. इस लिहाज से 7 अक्टूबर 2026 को सरकार के प्रमुख के रूप में उनके 25 वर्ष पूरे होंगे. इसी उपलब्धि को BJP ने इस साल के ‘सेवा संकल्प अभियान’ से जोड़ा है. अभियान 17 सितंबर से शुरू होकर 17 अक्टूबर तक चलाया जा रहा है. यानी इस बार जन्मदिन समारोह का दायरा सिर्फ 17 सितंबर तक सीमित नहीं रहेगा. BJP ने इसे एक महीने के देशव्यापी कार्यक्रम के रूप में तैयार किया है.
सेवा संकल्प अभियान में क्या-क्या होगा?
BJP के मुताबिक ‘सेवा संकल्प अभियान’ में देशभर में कई तरह की गतिविधियां आयोजित की जाएंगी. इनमें रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य जांच और चिकित्सा शिविर, स्वच्छता अभियान, लाभार्थियों से संपर्क, जनजागरूकता कार्यक्रम, पदयात्रा और बाइक रैली शामिल हैं.
युवा, महिला सशक्तिकरण, स्टार्टअप, ‘लखपति दीदी’ और सरकार की विभिन्न योजनाओं से जुड़े कार्यक्रमों को भी अभियान में जगह दी गई है. BJP ने सांस्कृतिक विरासत से जुड़े मुद्दों को भी अभियान का हिस्सा बनाया है.
17 सितंबर को ‘आशीर्वाद का दिया’ जलाने की अपील भी की गई है. वहीं अलग-अलग राज्यों में अभियान के स्थानीय कार्यक्रमों की रूपरेखा अलग है. उदाहरण के तौर पर हरियाणा में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक अभियान चलाने और विधानसभा क्षेत्रों में 30,000 ‘आशीर्वाद दीये’ जलाने की योजना बताई गई है.
वडनगर से वाराणसी तक
मोदी के जन्मस्थान वडनगर और उनके लोकसभा क्षेत्र वाराणसी को जोड़ते हुए ‘सेवा संकल्प’ बाइक यात्राओं की भी योजना बनाई गई है. रिपोर्टों के मुताबिक इन यात्राओं के जरिए पार्टी कार्यकर्ता विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर सरकार की योजनाओं और मोदी के सार्वजनिक जीवन की यात्रा को लोगों तक पहुंचाएंगे. यह कार्यक्रम मोदी के राजनीतिक सफर के दो महत्वपूर्ण पड़ावों को जोड़ता है-वडनगर, जहां उनका जन्म हुआ, और वाराणसी, जहां से वे लोकसभा सांसद हैं.
76 साल की उम्र में मोदी के सामने तीसरा कार्यकाल
17 सितंबर 2026 को 76 वर्ष पूरे करने वाले नरेंद्र मोदी के सामने अब प्रधानमंत्री के रूप में तीसरा कार्यकाल है. 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुई उनकी सरकार के प्रमुख के रूप में यात्रा 2026 में 25 साल के पड़ाव तक पहुंच रही है. इस दौरान वे गुजरात की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में पहुंचे, तीन लोकसभा चुनावों में BJP के नेतृत्व में सरकार बनाने में भूमिका निभाई और 2024 में गठबंधन सरकार के साथ तीसरी बार प्रधानमंत्री बने.
वडनगर के एक संगठनात्मक कार्यकर्ता से गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचा यह सफर भारतीय राजनीति के पिछले करीब ढाई दशकों की कई महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ा रहा है. 2026 का ‘सेवा संकल्प अभियान’ इसी लंबे सार्वजनिक जीवन को BJP द्वारा जनभागीदारी और सेवा गतिविधियों के जरिए रेखांकित करने की कोशिश है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच दोनों नेताओं की यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है. दोनों नेताओं की यह बैठक SCO शिखर सम्मेलन से इतर हुई. यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर दुनियाभर की नजर है. हालांकि, मोदी और पेजेशकियन के बीच हुई बातचीत के एजेंडे और चर्चा के प्रमुख मुद्दों की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है. SCO शिखर सम्मेलन में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के अलावा सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा होनी है.
प्रधानमंत्री ने सोमवार को एक्स पर अपनी और ईरान के राष्ट्रपति की मुलाकात की फोटो शेयर करते हुए लिखा, 'उन्होंने बिश्केक में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की. ईरान के साथ विभिन्न क्षेत्रों में भारत की लंबे समय से चली आ रही मित्रता को और मजबूत करने की हमारी प्रतिबद्धता दोहराई. आने वाले समय में हम अपने व्यापार के दायरे को बढ़ाने और उसमें विविधता लाने के इच्छुक हैं. हमने क्षेत्र में मौजूदा स्थिति पर चर्चा की. भारत स्थायी शांति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन जारी रखेगा.'
Met President Masoud Pezeshkian in Bishkek. Reiterated our commitment to strengthening India’s long standing friendship with Iran across diverse sectors. We want to expand and diversify our trade basket in the times to come.
— Narendra Modi (@narendramodi) August 31, 2026
We had a discussion on the prevailing situation in… pic.twitter.com/qagQy5o108
मार्च में फोन पर हुई थी मोदी-पेजेशकियन की बातचीत
इस मुलाकात से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच मार्च में फोन पर बातचीत हुई थी. उस दौरान पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री मोदी को ईरान की स्थिति और क्षेत्र में चल रहे घटनाक्रम की जानकारी दी थी. बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत का रुख दोहराते हुए कहा था कि सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए किया जाना चाहिए. मोदी ने ईरान सहित पूरे क्षेत्र में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर भी जोर दिया था. इसके अलावा भारत ने ऊर्जा और सामान की आवाजाही को बिना किसी रुकावट के जारी रखने को महत्वपूर्ण बताया था.
युद्ध को लेकर पेजेशकियन ने क्या कहा?
SCO सम्मेलन में शामिल होने के लिए बिश्केक रवाना होने से पहले ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा था कि ईरान युद्ध नहीं चाहता है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर ईरान पर कोई हमला होता है तो उसका मजबूती से जवाब दिया जाएगा. पेजेशकियन ने कहा था कि क्षेत्र में अस्थिरता किसी भी देश के हित में नहीं है. उन्होंने आर्थिक और सुरक्षा से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए क्षेत्रीय देशों के बीच अधिक सहयोग की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के देशों का इतिहास और सभ्यता हजारों साल पुरानी है और ये देश लंबे समय से एक-दूसरे के संपर्क और सहयोग में रहे हैं.
पेजेशकियन ने SCO को बताया महत्वपूर्ण मंच
ईरानी राष्ट्रपति ने SCO सम्मेलन को भी काफी महत्वपूर्ण बताया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पेजेशकियन ने कहा कि सम्मेलन में क्षेत्र के ज्यादातर नेता मौजूद रहेंगे और यह दुनिया में अलग-अलग और स्वतंत्र आवाजों की मौजूदगी का प्रतीक है. उन्होंने क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के साथ-साथ आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया.
पुतिन से भी मिल सकते हैं पीएम मोदी
SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें होने की उम्मीद है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएम मोदी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात कर सकते हैं. इसके अलावा किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री मोदी छठे विश्व घुमंतू खेलों के उद्घाटन समारोह में भी शामिल हो सकते हैं.
नितिन नबीन की टीम में 8 राष्ट्रीय महामंत्रियों में शामिल स्मृति ईरानी, 2027 यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अहम भूमिका में नजर आएंगी
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाकर संगठन में उनकी दमदार वापसी कराई है. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम में आठ राष्ट्रीय महामंत्रियों में शामिल स्मृति ईरानी अब पार्टी के शीर्ष संगठनात्मक ढांचे का हिस्सा होंगी. 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले उनकी नियुक्ति को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. चुनावी रणनीति, संगठन को मजबूत करने और पार्टी के संदेश को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में उन्हें अहम जिम्मेदारी मिल सकती है.
दो दशक से ज्यादा का राजनीतिक अनुभव
स्मृति ईरानी ने 2003 में बीजेपी से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी. इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र बीजेपी की युवा इकाई में काम किया और संगठन में आगे बढ़ते हुए राष्ट्रीय महामंत्री बनीं. वह बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. वर्ष 2011 में उन्हें राज्यसभा भेजा गया. करीब दो दशक से अधिक के राजनीतिक सफर में स्मृति ईरानी ने संगठन, संसद, सरकार और चुनावी राजनीति में अलग-अलग भूमिकाएं निभाई हैं.
अमेठी में राहुल गांधी को हराकर बनीं ‘जायंट किलर’
स्मृति ईरानी की राजनीतिक पहचान को सबसे बड़ी मजबूती अमेठी से मिली. 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के गढ़ अमेठी से राहुल गांधी को चुनौती दी. हालांकि उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अगले पांच वर्षों तक क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहकर संगठन और मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत की. 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने राहुल गांधी को 55,120 वोटों के अंतर से हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया. इस जीत के बाद उन्हें बीजेपी की ‘जायंट किलर’ के तौर पर पहचान मिली.
मोदी सरकार में संभालीं कई अहम जिम्मेदारियां
स्मृति ईरानी का केंद्रीय मंत्रिमंडल का अनुभव भी उनकी नई जिम्मेदारी में अहम भूमिका निभाएगा. उन्होंने मानव संसाधन विकास, कपड़ा, सूचना एवं प्रसारण, महिला एवं बाल विकास और अल्पसंख्यक मामलों जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले. मोदी सरकार में वह पार्टी और सरकार की प्रमुख एवं मुखर आवाजों में शामिल रहीं. संसद से लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और राष्ट्रीय मंचों तक उनकी प्रभावी संवाद क्षमता ने उन्हें बीजेपी के प्रमुख महिला नेताओं में स्थापित किया.
यूपी चुनाव से पहले नियुक्ति का खास महत्व
स्मृति ईरानी की नई जिम्मेदारी का महत्व उत्तर प्रदेश के संदर्भ में और बढ़ जाता है. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी को ऐसे नेताओं की जरूरत है, जिनके पास राष्ट्रीय पहचान के साथ संगठनात्मक अनुभव और जमीनी राजनीति की समझ हो. अमेठी से उनका पुराना जुड़ाव, महिला मोर्चा की कमान संभालने का अनुभव और महिला एवं बाल विकास मंत्री के रूप में उनकी भूमिका उन्हें महिला मतदाताओं के बीच पार्टी का संदेश पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण चेहरा बनाती है.
संगठन में वापसी से बढ़ेगा राजनीतिक प्रभाव
राष्ट्रीय महामंत्री की भूमिका में स्मृति ईरानी से राजनीतिक संदेश को संगठन और जमीनी कार्यकर्ताओं तक पहुंचाने की अपेक्षा होगी. उनकी राष्ट्रीय लोकप्रियता और कार्यकर्ताओं से जुड़ने की क्षमता इस भूमिका में उनके लिए बड़ी ताकत साबित हो सकती है. यह नियुक्ति इस बात का भी संकेत है कि बीजेपी चुनावी राजनीति के साथ-साथ संगठन को मजबूत करने के लिए अपने अनुभवी नेताओं को फिर से सक्रिय भूमिका में ला रही है.
‘जायंट किलर’ से राष्ट्रीय संगठन की अहम जिम्मेदारी तक
स्मृति ईरानी का राजनीतिक सफर बीजेपी के संगठनात्मक मॉडल की एक मिसाल भी माना जा सकता है. पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर शुरुआत करने से लेकर राष्ट्रीय स्तर की नेता, केंद्रीय मंत्री और अब राष्ट्रीय महामंत्री बनने तक उन्होंने कई महत्वपूर्ण पड़ाव तय किए हैं. नई जिम्मेदारी के साथ वह एक बार फिर पार्टी निर्माण और चुनावी रणनीति के केंद्र में लौट आई हैं. बीजेपी में उनकी यह वापसी ऐसे समय हुई है जब पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव समेत आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए संगठन को मजबूत करने में जुटी है.
नितिन नवीन ने की राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नई टीम की घोषणा, 13 उपाध्यक्ष और 8 महासचिव शामिल
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा कर दी. नई टीम में कई बड़े और अनुभवी नेताओं को अहम संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है, जबकि राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और भाजपा के वरिष्ठ नेता राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है. नई राष्ट्रीय टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और 8 राष्ट्रीय महासचिव शामिल हैं. पार्टी ने विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों के नेताओं को जगह देकर संगठनात्मक और क्षेत्रीय संतुलन बनाने की कोशिश की है.
ये बने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
नई टीम में वसुंधरा राजे सिंधिया, तीरथ सिंह रावत, राम माधव, बैजयंत जय पांडा, डी. पुरंदेश्वरी, रेखा वर्मा, वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोषी, डॉ. भारती प्रवीण पवार, मनप्रीत सिंह बादल, लाल सिंह आर्य, प्रो. एम. नागराजा, प्रो. तारिक मंसूर और डॉ. मधुचंद्र कर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है.
बीएल संतोष संगठन महासचिव, शिवप्रकाश को भी अहम जिम्मेदारी
बीएल संतोष राष्ट्रीय संगठन महासचिव के पद पर बने रहेंगे. वहीं शिवप्रकाश को राष्ट्रीय सह-संगठन महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है.
स्मृति ईरानी को बड़ी जिम्मेदारी
स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है और उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभार भी सौंपा गया है. उनकी नियुक्ति को भाजपा की नई संगठनात्मक टीम में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
पीयूष गोयल बने कोषाध्यक्ष
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को भाजपा का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है. पार्टी ने इसके साथ विभिन्न मोर्चों और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के लिए भी नई नियुक्तियां की हैं. भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम को आगामी चुनावों और संगठन के विस्तार की रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है. पार्टी ने इस फेरबदल में अनुभवी नेताओं, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और नई पीढ़ी के नेतृत्व के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया है.
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने गुरुवार को अपने X प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें उनके बायो से 'नेशनल स्पोक्सपर्सन, BJP' हट चुका था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रोफाइल बायो में बदलाव के बाद उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं. पूनावाला ने अपने बायो से 'नेशनल स्पोक्सपर्सन, BJP' हटा दिया है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनके इस्तीफे को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं. हालांकि, अब तक न तो BJP और न ही शहजाद पूनावाला की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है.
बायो में किया ये बदलाव
नए बायो में उन्होंने लिखा है, "धर्म: इस्लाम, संस्कृति: हिंदू, विचारधारा: भारतीय, लेखक: GST की यात्रा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आजीवन अनुयायी."
दिलचस्प बात यह है कि उनके इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर अब भी उन्हें BJP का राष्ट्रीय प्रवक्ता बताया गया है. X पर भी पहले यही जानकारी दर्ज थी. इसके अलावा उन्होंने अपने कुछ पुराने इंटरव्यू के वीडियो भी दोबारा साझा किए हैं, जिनमें वे सक्रिय राजनीति छोड़ने पर विचार करने की बात करते नजर आते हैं.
हालांकि, इन बदलावों के बावजूद यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने वास्तव में BJP या सक्रिय राजनीति से इस्तीफा दिया है. पार्टी और पूनावाला, दोनों की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान सामने नहीं आया है.
कांग्रेस से BJP तक का सफर
पेशे से वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शहजाद पूनावाला ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी. वर्ष 2017 में कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव पर सवाल उठाने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी और बाद में BJP में शामिल हो गए. वर्ष 2021 में उन्हें दिल्ली BJP के सोशल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई. इसके बाद वे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने और टीवी बहसों में BJP का पक्ष रखने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल रहे.
फिलहाल, X बायो में बदलाव के आधार पर उनके इस्तीफे की चर्चा जरूर तेज है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि होने तक इसे केवल अटकल के तौर पर ही देखा जा रहा है.
ट्रंप के अनुसार, इस समझौते के तहत हमास का निरस्त्रीकरण और इजरायली सैनिकों की गाजा से वापसी चरणबद्ध तरीके से होगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि बोर्ड ऑफ पीस (Board of Peace) ने गाजा में हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के पूर्ण निरस्त्रीकरण को लेकर समझौता कर लिया है. यह समझौता गाजा के लिए ट्रंप के व्यापक राजनीतिक और सुरक्षा ढांचे को लागू करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
ट्रंप के अनुसार, इस समझौते के तहत हमास का निरस्त्रीकरण और इजरायली सैनिकों की गाजा से वापसी चरणबद्ध तरीके से होगी. इसके बाद एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (International Stabilization Force) और नई फिलिस्तीनी पुलिस बल सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि एक फिलिस्तीनी प्रशासन गाजा के शासन का संचालन करेगा.
इजरायली सेना की वापसी होगी चरणों में
ट्रंप ने कहा कि यह व्यवस्था गाजा के लिए उनके 20-सूत्रीय शांति प्लान का हिस्सा है. इस योजना में सशस्त्र समूहों के निरस्त्रीकरण को इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी से जोड़ा गया है. उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा, "यह एक ऐतिहासिक दिन है. हम युद्धविराम के बाद से जिस लक्ष्य की दिशा में काम कर रहे थे, यह उसकी ओर एक महत्वपूर्ण कदम है और मेरे 20-सूत्रीय प्लान को लागू करने की दिशा में बड़ी प्रगति है."
प्रस्तावित ढांचे के तहत जैसे-जैसे निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे इजरायली सेना गाजा से पीछे हटेगी. अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल नई फिलिस्तीनी पुलिस के साथ मिलकर काम करेगा और धीरे-धीरे सुरक्षा की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन को सौंपी जाएगी.
ट्रंप ने कहा कि अंतिम लक्ष्य फिलिस्तीन के नेतृत्व वाली सरकार की स्थापना करना है, जो इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को भी ध्यान में रखेगी. उन्होंने कहा, "गाजा का शासन एक नई फिलिस्तीनी सरकार के जरिए चलाया जाएगा, जो गाजा के लोगों की सेवा के लिए बोर्ड ऑफ पीस के साथ मिलकर काम करेगी."
मिस्र, कतर और तुर्किये की भूमिका की सराहना
अमेरिकी राष्ट्रपति ने वार्ता में भूमिका निभाने के लिए मिस्र, कतर और तुर्किये का धन्यवाद किया. उन्होंने अपने प्रशासन के अधिकारियों की भी सराहना की, जो इस प्रक्रिया में शामिल रहे.
ट्रंप ने कहा कि एक साल पहले की स्थिति की तुलना में काफी प्रगति हुई है, जब गाजा में युद्ध जारी था, बंधक कैद में थे और मानवीय संकट गहरा रहा था. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि अभी कई महत्वपूर्ण काम बाकी हैं. उन्होंने कहा, "हम एक साल पहले की स्थिति से काफी आगे आ चुके हैं, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है."
समझौते के क्रियान्वयन पर कई सवाल बाकी
हालांकि, इस घोषणा के बाद भी कई अहम मुद्दों का समाधान होना बाकी है. इनमें निरस्त्रीकरण की समयसीमा, इजरायली सेना की वापसी का कार्यक्रम, हथियारों के समर्पण की पुष्टि और सुरक्षा जिम्मेदारियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया शामिल हैं.
2025 में संयुक्त राष्ट्र ने दी थी गाजा ढांचे को मंजूरी
यह घोषणा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा 17 नवंबर 2025 को प्रस्ताव 2803 पारित किए जाने के बाद आई है. इस प्रस्ताव में गाजा संघर्ष को समाप्त करने के लिए ट्रंप की व्यापक योजना का समर्थन किया गया था. इस प्रस्ताव को 13 देशों का समर्थन मिला था, जबकि चीन और रूस ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया था.
प्रस्ताव में बोर्ड ऑफ पीस को अंतरिम प्रशासन के रूप में मान्यता दी गई थी और गाजा में अस्थायी अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की तैनाती को मंजूरी दी गई थी. इसके तहत संक्रमण काल के दौरान रोजमर्रा के नागरिक प्रशासन के लिए एक फिलिस्तीनी तकनीकी समिति बनाने का भी प्रावधान किया गया था.
जनवरी 2026 में इस ढांचे को और आगे बढ़ाया गया, जब अली शआथ (Ali Sha’ath) को गाजा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति का प्रमुख नियुक्त किया गया और मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स को अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल का कमांडर बनाया गया.
हमास के हथियार बने सबसे बड़ी चुनौती
प्रशासनिक ढांचे में प्रगति के बावजूद हमास के हथियारों का भविष्य इस योजना को लागू करने में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बना हुआ था.
बोर्ड ऑफ पीस की मई में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को दी गई रिपोर्ट में हथियारों के सत्यापित निष्क्रियकरण और हमास से नियंत्रण हस्तांतरण को प्रमुख लंबित मुद्दों के रूप में बताया गया था.
रॉयटर्स के अनुसार, मार्च में बोर्ड ऑफ पीस ने हमास को लिखित निरस्त्रीकरण प्रस्ताव दिया था. यह प्रस्ताव युद्ध के बाद की सुरक्षा व्यवस्था और गाजा में सत्ता हस्तांतरण को लेकर चल रही बातचीत का हिस्सा था.
ट्रंप की ताजा घोषणा इस योजना के सबसे विवादित हिस्सों में से एक पर प्रगति का संकेत देती है. हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निरस्त्रीकरण, इजरायली सेना की वापसी और गाजा में सुरक्षा व प्रशासनिक जिम्मेदारियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार लंबे समय से परीक्षा प्रणाली में सुधार, तकनीक के बेहतर इस्तेमाल और मजबूत कानूनी प्रावधानों के जरिए पारदर्शी एवं प्रभावी व्यवस्था बनाने पर काम कर रही है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद से पारित संशोधित एंटी-पेपर लीक विधेयक का स्वागत करते हुए इसे देश की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया है. उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और पेपर लीक माफियाओं व संगठित गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्रधानमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था से सार्वजनिक परीक्षाएं अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और भरोसेमंद बनेंगी.
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार लंबे समय से परीक्षा प्रणाली में सुधार, तकनीक के बेहतर इस्तेमाल और मजबूत कानूनी प्रावधानों के जरिए पारदर्शी एवं प्रभावी व्यवस्था बनाने पर काम कर रही है. उन्होंने बताया कि परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए बेहतर सिस्टम, फास्ट-ट्रैक व्यवस्था और राज्यों के साथ लगातार विचार-विमर्श किया गया है.
पेपर लीक पर और सख्त होगी सजा
संशोधित विधेयक को गुरुवार को राज्यसभा ने ध्वनिमत से पारित किया, जबकि लोकसभा इसे एक दिन पहले मंजूरी दे चुकी थी. यह संशोधन सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनुचित गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए मौजूदा कानून को और मजबूत बनाता है.
यह कानून संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सोनल सेलेक्शन (IBPS) और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) जैसी संस्थाओं द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होगा.
10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माना
संशोधित कानून के तहत सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक या अनुचित साधनों का दोषी पाए जाने पर पांच से 10 वर्ष तक की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. वहीं, संगठित अपराध या पेपर लीक गिरोहों के मामलों में कम से कम सात वर्ष की सजा और न्यूनतम 10 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है.
'पेपर माफियाओं को नहीं बख्शा जाएगा'
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पेपर लीक कई वर्षों से देश के लिए गंभीर चुनौती रहा है, जिससे केंद्र और राज्यों की विभिन्न परीक्षाएं प्रभावित हुई हैं और लाखों युवाओं के भविष्य पर असर पड़ा है. उन्होंने कहा कि सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन, फास्ट-ट्रैक तंत्र और राज्यों से सुझाव लेने जैसे कई कदम उठाए हैं. प्रधानमंत्री ने कहा, "पेपर माफिया और पेपर लीक में शामिल गिरोह, जो देश के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करते हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा."
परीक्षा प्रणाली को और पारदर्शी बनाने की कोशिश
सरकार का मानना है कि संशोधित कानून से सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता बढ़ेगी. हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में पेपर लीक की घटनाओं के बाद परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की मांग लगातार उठ रही थी. नए संशोधन को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.