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जन्मदिन विशेष: छात्र राजनीति से उपमुख्यमंत्री तक, ऐसा रहा ब्रजेश पाठक का राजनीतिक सफर

पेशे से वकील रहे ब्रजेश पाठक ने 2000 के दशक की शुरुआत में सक्रिय राजनीति में कदम रखा. वर्ष 2004 में उन्होंने उन्नाव लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का राजनीतिक जीवन संघर्ष, जनसंपर्क और प्रशासनिक अनुभव की एक लंबी यात्रा का प्रतीक रहा है. छात्र राजनीति से शुरुआत कर प्रदेश की सत्ता के शीर्ष पदों तक पहुंचने वाले ब्रजेश पाठक आज राज्य की राजनीति के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं. आज ब्रजेश पाठक अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं, तो आइए इस खास अवसर पर आज हम उनके राजनीतिक और प्रशासनिक सफर पर एक नजर डालते हैं.

छात्र राजनीति से हुई सार्वजनिक जीवन की शुरुआत

25 जून 1964 को उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के मल्लावां में जन्मे ब्रजेश पाठक ने लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की. छात्र जीवन के दौरान ही उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी थी. वर्ष 1990 में वह लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए, जिसने उनके सार्वजनिक जीवन की मजबूत नींव रखी.

वकालत से संसद तक का सफर

पेशे से वकील रहे ब्रजेश पाठक ने 2000 के दशक की शुरुआत में सक्रिय राजनीति में कदम रखा. वर्ष 2004 में उन्होंने उन्नाव लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया. इसके बाद वर्ष 2008 से 2014 तक उन्होंने राज्यसभा में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया.

राज्यसभा सदस्य के रूप में उन्होंने विधि, वित्त, विदेश मामलों, गृह मामलों और लोक शिकायतों से जुड़ी संसदीय समितियों में काम किया. इन जिम्मेदारियों ने उन्हें शासन और प्रशासन के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर दिया.

राज्य राजनीति में वापसी और मंत्री पद की जिम्मेदारी

वर्ष 2017 में ब्रजेश पाठक ने राज्य राजनीति में सक्रिय वापसी की और लखनऊ मध्य विधानसभा सीट से विधायक चुने गए. इसके बाद उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया. उन्होंने कानून एवं न्याय विभाग की जिम्मेदारी संभाली. बाद में उन्हें संसदीय कार्य और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग का दायित्व भी सौंपा गया. इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर कई महत्वपूर्ण कार्यों का नेतृत्व किया.

उपमुख्यमंत्री के रूप में बढ़ी जिम्मेदारी

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में ब्रजेश पाठक ने लखनऊ कैंट सीट से जीत दर्ज की. इसके बाद उन्हें उत्तर प्रदेश का उपमुख्यमंत्री बनाया गया. वर्तमान में वह चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और चिकित्सा शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, मेडिकल शिक्षा के विस्तार और स्वास्थ्य ढांचे में सुधार को लेकर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है.

स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार पर विशेष फोकस

हाल के वर्षों में ब्रजेश पाठक राज्य की स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं और सुधारों के केंद्र में रहे हैं. उन्होंने अस्पतालों की व्यवस्थाओं, चिकित्सा शिक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया है. उन्होंने कई बार कहा है कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदेश के दूरदराज और पिछड़े क्षेत्रों तक पहुंचनी चाहिए. इसी दिशा में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार और सुधार के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं.

जनता से संवाद उनकी पहचान

प्रशासनिक जिम्मेदारियों के अलावा ब्रजेश पाठक की पहचान एक ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में भी बनी है जो आम लोगों से लगातार संवाद बनाए रखते हैं. जन शिकायतों की सुनवाई, अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें और लोगों से सीधे संपर्क उनकी कार्यशैली का अहम हिस्सा रहे हैं. हाल ही में लखनऊ में हुई भीषण आग की घटना में कई युवाओं की मौत के बाद उन्होंने अपना जन्मदिन नहीं मनाने का निर्णय लिया था. उन्होंने कहा था कि शोकाकुल परिवारों के बीच उत्सव मनाना उचित नहीं होगा. उनके इस फैसले को जनभावनाओं के प्रति संवेदनशीलता के रूप में देखा गया.

राजनीति और प्रशासन का लंबा अनुभव

छात्र राजनीति से लेकर संसद, विधानमंडल और उत्तर प्रदेश सरकार के शीर्ष पदों तक का ब्रजेश पाठक का सफर भारतीय राजनीति के कई चरणों का साक्षी रहा है. एक छात्र नेता, सांसद, मंत्री और उपमुख्यमंत्री के रूप में उनकी यात्रा लगातार चर्चा में रही है. उत्तर प्रदेश के विकास और प्रशासनिक प्राथमिकताओं के बीच उनकी भूमिका आने वाले समय में भी महत्वपूर्ण बनी रहने की संभावना है.
 


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