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क्या सीधा बैंकों से लेने चाहिए Mutual Funds? जानिए फायदे और नुकसान!

अगर आप बैंक के माध्यम से म्युचुअल फंड्स में इन्वेस्ट करते हैं तो आपको कोई अतिरिक्त फीस नहीं देनी पड़ती.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

हर व्यक्ति चाहता है कि वह अपनी कमाई में से ठीक-ठाक रकम किसी न किसी रूप में इन्वेस्ट कर सके. आज कल इन्वेस्टमेंट के बहुत सारे माध्यम उपलब्ध हैं लेकिन कम समय में ज्यादा बेहतर रिटर्न्स प्राप्त करने के लिए म्युचुअल फंड्स (Mutual Funds) को ही इन्वेस्टमेंट का सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है. 

प्रियंका की कहानी
मुंबई की प्रियंका शाह एक बार पैसे ट्रान्सफर करने के लिए नेट बैंकिंग का इस्तेमाल कर रही थीं और इसी बीच उनकी नजर बैंक की साईट पर मौजूद म्युचुअल फंड सेक्शन पर गई. जब उन्होंने बैंक की साईट पर यह विकल्प देखा तो उन्हें समझ आया कि वह सीधा उस साईट से ही म्युचुअल फंड्स में इन्वेस्ट कर सकती हैं. 

क्या करना चाहिए बैंक का इस्तेमाल?
प्रियंका को काफी हैरानी हुई क्योंकि अब तक उन्हें म्युचुअल फंड्स में पैसे इन्वेस्ट करने के लिए अपने डिस्ट्रीब्यूटर के पास जाना पड़ता था. बैंक की साईट का इस्तेमाल करके म्युचुअल फंड्स में इन्वेस्ट करना काफी आसान होता है. सुविधा के नजरिये से देखें तो भी यह तरीका काफी उपयोगी भी है. लेकिन क्या प्रियंका को म्युचुअल फंड्स में इन्वेस्ट करने के लिए बैंक का इस्तेमाल करना चाहिए? 

ये तरीका बचाएगा आपके पैसे
अगर आप बैंक के माध्यम से म्युचुअल फंड्स में इन्वेस्ट करते हैं  तो सबसे पहला फायदा जो आपको मिलता है वह है आपको कोई अतिरिक्त फीस नहीं देनी पड़ती. इसके विपरीत अगर आप किसी फाइनेंशियल एडवाइजर या डिस्ट्रीब्यूटर के माध्यम से म्युचुअल फंड्स में इन्वेस्ट करते हैं तो आपको फीस देनी ही पड़ती है. ऐसा भी नहीं होता कि आपको बैंक से बिलकुल मुफ्त में ही म्युचुअल फंड्स मिल जाते हैं. बैंक से म्युचुअल फंड खरीदने के लिए भी आपको कुछ पैसे देने ही पड़ते हैं बस एक डिस्ट्रीब्यूटर या फिर एडवाइजर के मुकाबले यह पैसे काफी कम होते हैं. 

इस तरह से कर सकते हैं म्युचुअल फंड्स में इन्वेस्ट
म्युचुअल फंड में आप दो तरीकों से इन्वेस्ट कर सकते हैं- रेगुलर प्लान या फिर डायरेक्ट प्लान. डायरेक्ट प्लान किसी भी कंपनी की वेबसाइट से खरीदा जा सकता है. दूसरी तरफ रेगुलर प्लान्स को डिस्ट्रीब्यूटर्स या फिर फाइनेंशियल एडवाइजर्स से भी खरीदा जा सकता है. कंपनियां इन फाइनेंशियल एडवाइजर्स को कमीशन देती हैं और ये आप से ही प्लान की फीस के रूप में वसूली जाती है. इस एक वजह से रेगुलर प्लान्स ज्यादा महंगे होते हैं. 

कौन सा प्लान प्रदान करते हैं बैंक?
अब बैंक क्या करते हैं कि वह आपको रेगुलर प्लान्स में ही इन्वेस्ट करवाते हैं. डायरेक्ट प्लान्स के मुकाबले इन प्लान्स में खर्चा थोड़ा ज्यादा होता है. आप अपनी मर्जी से खुद ही पैसे इन्वेस्ट कर सकते हैं या फिर एक एडवाइजर की मदद भी ले सकते हैं. अगर आप इसके लिए एक फाइनेंशियल एडवाइजर की मदद ले रहे हैं तो आपको उन्हें भी उनकी मदद के लिए फीस देनी होगी. 

बैंक क्यों बेच रहे हैं म्युचुअल फंड्स?
लेकिन एक सवाल और है कि आखिर बैंकों द्वारा म्युचुअल फंड्स को बेचने के लिए इतनी ज्यादा मेहनत क्यों की जा रही है? दरअसल म्युचुअल फंड्स में लोगों का इंटरेस्ट काफी तेजी से बढ़ रहा है. बैंकों के माध्यम से म्युचुअल फंड्स में इन्वेस्ट करने में कोई परेशानी वाली बात नहीं है. बैंक आपको बेहतर सुविधा और विशेष ध्यान प्रदान कर सकते हैं. लेकिन आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आप फंड की परफॉरमेंस और उसमें की जाने वाली अपनी इन्वेस्टमेंट की कैलकुलेशन  कर लें और उसके बाद ही कोई फैसला लें. 
 

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