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फॉर्म 26AS या AIS में आखिर कौन सा दस्‍तावेज है सबसे जरूरी?

दरअसल 26AS एक ऐसा दस्‍तावेज है जो पहले से सिस्‍टम में चला आ रहा है. जबकि AIS को सरकार ने 2021 में लॉन्‍च किया था.आज भी 26AS को ज्‍यादा सटीक माना जाता है. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

31 जुलाई टैक्‍स जमा करने की आखिरी तारीख है. इन दिनों सभी अपने दस्‍तावेज जमा करने में जुटे हुए हैं. इनमें फॉर्म 16 से लेकर सैलरी स्लिप और साल भर अपने द्वारा की गई बचत का ब्‍यौरा हर कोई समय पर जुटा लेना चाहता है. लेकिन एक चीज के बारे में कई लोगों के मन में सवाल बना हुआ है कि आखिर फॉर्म 26 AS या AIS में से कौन सा दस्‍तावेज जरूरी है. टैक्‍स फाइल करते वक्‍त आपको किसकी जरूरत होगी. आज हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे हैं. 

सबसे पहले जानते हैं क्‍या होता है 26AS 
दरअसल केन्‍द्र सरकार के द्वारा AIS को लॉन्‍च करने से पहले 26AS की ही व्‍यवस्‍था हुआ करती थी. 26AS वो दस्‍तावेज होता था, जिसमें एक साल में आपके पैन नंबर पर काटे गए सभी टैक्‍स की जानकारी का ब्‍यौरा होता था. इसे टैक्‍स डिडक्‍शन की पासबुक भी कहा जाता है.  26AS की जांच करना इसलिए भी आवश्‍यक था क्‍योंकि एक वित्तीय वर्ष में काटे गए सभी टैक्‍स, फॉर्म 26AS के माध्यम से आयकर विभाग के रिकॉर्ड में दिखाई दें.

क्‍या होता है AIS 
AIS को एनुअल इनफॉरमेशन स्‍टेटमेंट भी कहा जाता है. इसे आयकर विभाग ने नवंबर 2021 में लॉन्च किया था. इसमें फॉर्म 26AS के मुकाबले बहुत ज्‍यादा जानकारी होती है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि इसमें टैक्‍स की पूरी जानकारी के साथ-साथ इसमें विभिन्न सोर्स जैसे वेतन, ब्याज आय, लाभांश, पूंजीगत लाभ से होने वाली इनकम का ब्‍यौरा भी शामिल रहता है जो किसी भी करदाता को एक वित्तीय वर्ष के दौरान मिलते हैं.

AIS लॉन्च होने पर आयकर विभाग ने ये जानकारी देते हुए कहा था कि यदि किसी भी शख्‍स की टैक्‍स डिडक्‍शन या TDS/TCS की जानकारी जोकि TRACES पोर्टल पर दिखाए गए फॉर्म 26AS में या compliance portal पर दिख रहे AIS की जानकारी में कोई अंतर आता है, तो ऐसे में टैक्‍सदाता ट्रेसेस पोर्टल जोकि 26AS को दिखाता है उस पर विश्‍वास कर सकता है और अपना रिटर्न फाइल कर सकता है. हालांकि AIS में होने वाली गलतियों को ठीक किए जाने को लेकर अब तक सवाल उठता रहता है. 

कौन सा दस्‍तावेज है इस साल जरूरी 
मीडिया रिपोर्ट में जानकार कहते हैं कि एक आईटीआर फाइलिंग वेबसाइट का कहना है कि एक व्यक्ति को अपना आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए AIS और फॉर्म 26AS दोनों का जिक्र करना चाहिए. आयकर विभाग ने कहा है कि फॉर्म 26AS में अब केवल टीडीएस और टीसीएस ही दिखेगा. जमा किया गया कोई भी अन्य कर जैसे सेल्‍फ वैल्‍यूएशन टैक्‍स, एडवांस टैक्‍स अब AIS में दिखाई देगा. इसलिए, आईटीआर दाखिल करने के लिए दोनों दस्तावेज महत्वपूर्ण हैं.

मीडिया रिपोर्ट में जानकार कहते हैं कि AIS और फॉर्म 26AS दोनों महत्वपूर्ण हैं और टैक्‍सपेयर को अपने आयकर रिटर्न दाखिल करते समय इसका उल्लेख करना चाहिए. ऐसा होने की संभावना काफी कम है कि फॉर्म 26AS और AIS की जानकारी में किसी तरह का अंतर हो क्‍योंकि दोनों की जानकारी का सोर्स एक ही है. वो ये भी कहते हैं कि हालांकि, यह देखा गया है कि AIS, कई बार, कुछ जानकारियों जैसे जैसे वेतन से टीडीएस, म्यूचुअल फंड से होने वाले फायदे के लिए दोहरी जानकारी को दर्शाता है.

यदि AIS और फॉर्म 26AS दोनों में त्रुटियां हैं तो क्या होगा?
जानकार कहते हैं कि ऐसा हो सकता है कि AIS और फॉर्म 26AS दोनों में गलतियां हों. ऐसे में किसी भी करदाता को उस वित्तीय वर्ष के दौरान उसके द्वारा किए गए लेनदेन के लिए हमेशा प्रासंगिक दस्तावेज जैसे बैंक स्टेटमेंट/पासबुक, डीमैट स्टेटमेंट, लेनदेन समझौते जैसे खरीद/बिक्री कार्य आदि बनाए रखना चाहिए. अगर करदाता के पास ये हैं तो उसे किसी तरह की दुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा. इन पर कोई भी विश्‍वास कर सकता है. अगर 26AS में किसी तरह की गलती है तो वो इसे कटौतीकर्ता के ध्‍यान में ला सकता है. इसमें सुधार करने के लिए टीडीएस रिटर्न में सुधार करने की जरूरत होती है. लेकिन यदि टैक्‍स काटने वाला उसमें सुधार करने से आनाकानी करता है तो टैक्‍स देने वाला अपने इस दस्‍तावेजों के आधार पर अपनी बात रख सकता है.
 


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