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टैक्स पेयर्स को मिली राहत, 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा तक का ब्याज हो पाएगा माफ!

Income Tax के नए नियम के अनुसार पीआरसीआईटी रैंक के अधिकारी अब टैक्सपेयर्स के 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा तक के बकाया ब्याज को कम करने या माफ करने का फैसला कर सकते हैं. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

अगर आप इनकम टैक्स भरते हैं, तो ये खबर आपके काम की है. दरअसल, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने देय टैक्स नहीं चुकाने पर लगने वाले ब्याज को माफ करने या कम करने की मंजूरी दे दी है. इनकम टैक्स के इस नए नियम के अनुसार अब टैक्स अधिकारी टैक्सपेयर्स के 1.5 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया ब्याज को कम करने या माफ करने का फैसला कर सकते हैं. हालांकि इस छूट के लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं, उनके पूरा होने पर ही ब्याज माफ हो पाएगा. तो आइए जानते हैं टैक्सपेयर्स को ये छूट किन शर्तों पर मिलेगी? 

इतना ब्याज माफ करने की छूट

सीबीडीटी ने इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 220(2) के तहत चुकाए गए या देय ब्याज को घटाने या माफ करने के संबंध में अधिकारियों के लिए एक सर्कुलर में जारी करके मॉनेटरी लिमिट तय करने का आदेश दिया है. यह आदेश इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 119(1) के तहत जारी किया गया है. सर्कुलर में ब्याज की रकम की सीमा की जानकारी भी दी गई है, जिसे माफ करना या घटा सकना टैक्स अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में होगा. इस रकम को तीन भागों में बांटा गया है, जैसे-

1. प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर रैंक के अधिकारी डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक के देय ब्याज को माफ करने या घटाने के बारे में फैसला कर सकते हैं.
2. देय ब्याज 50 लाख से डेढ़ करोड़ रुपये तक हो, तो चीफ कमिश्नर रैंक के अधिकारी फैसला कर सकते हैं.
3. देय ब्याज 50 लाख रुपये तक हो तो इसे घटाने या माफ करने के बारे में प्रिंसिपल कमिश्नर या कमिश्नर रैंक के अधिकारी निर्णय कर सकते हैं.

ब्याज में छूट के लिए इन तीन शर्तों को करना होगा पूरा
1. सर्कुलर के अनुसार ब्याज माफ करने की पहली शर्त यह है कि अगर ब्याज की रकम ऐसी हो, जिसे चुकाने में बहुत मुश्किल हुई हो या होने वाली हो. 
2. दूसरी शर्त यह है कि अगर शख्स ऐसी वजह के चलते ब्याज नहीं चुका सका, जो उसके कंट्रोल में नहीं थी. 
3. वहीं, तीसरी शर्त यह है कि टैक्सपेयर ने किसी भी बकाया रकम की रिकवरी या असेसमेंट से जुड़ी जांच में अधिकारियों से सहयोग किया हो.

टैक्स न चुकाने पर इतना लगता है ब्याज
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 220(2) के तहत अगर टैक्सपेयर सेक्शन 156 के तहत डिमांड नोटिस में दर्ज टैक्स न चुकाए तो उसे उस रकम पर देरी वाले हर महीने के लिए 1 प्रतिशत महीने की साधारण दर से ब्याज चुकाना होता है. सेक्शन 220(2A) के तहत प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर या चीफ कमिश्नर या प्रिंसिपल कमिश्नर या कमिश्नर रैंक के अधिकारियों को यह अधिकार है कि वे चुकाए जाने वाले ब्याज की रकम घटा दें या उसे माफ कर दें.


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