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Tax Harvesting: जानिए कैसे निवेशक कर सकते हैं अपनी टैक्स देनदारी कम?

टैक्स हार्वेस्टिंग एक प्रभावी तरीका है, जिसके द्वारा निवेशक अपनी टैक्स देनदारी को कम कर सकते हैं. हालांकि, इसके लिए सही समय पर और सही रणनीति के साथ निवेश की आवश्यकता होती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

अगर आप शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो ये खबर आपके काम की हो सकती है. दरअसल, निवेशक टैक्स बचाने के लिए टैक्स हार्वेस्टिंग (Tax Harvesting) का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह तरीका अमेरिका, यूरोप, और भारत जैसे देशों में निवेशकों के बीच लोकप्रिय है. टैक्स हार्वेस्टिंग द्वारा निवेशक अपनी टैक्स देनदारी को कम कर सकते हैं, और यह विशेष रूप से तब फायदेमंद होता है जब उनके पोर्टफोलियो में कुछ निवेश घाटे में हो. इस खबर में हम जानेंगे कि टैक्स हार्वेस्टिंग क्या होती है, और इसके माध्यम से कैसे निवेशक अपनी टैक्स देनदारी को कम कर सकते हैं? 

टैक्स हार्वेस्टिंग क्या होती है?  
जब कोई निवेशक किसी स्टॉक या म्यूचुअल फंड में निवेश करता है, तो उस निवेश से होने वाले मुनाफे पर उसे कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है, लेकिन अगर किसी निवेश में घाटा हो रहा है, तो उस घाटे को टैक्स बचाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे टैक्स हार्वेस्टिंग कहा जाता है. इसके लिए निवेशक को अपनी घाटे वाली पोजीशन को उसी वित्तीय वर्ष में बेचना होता है, ताकि वह टैक्स बचा सकें. उदाहरण के तौर पर, कई निवेशक मार्च 31, 2025 से पहले अपनी घाटे वाली पोजीशन को बेचकर अपनी टैक्स देनदारी कम करने का प्रयास कर रहे हैं.  

टैक्स हार्वेस्टिंग का तरीका  
एक्सपर्ट्स के अनुसार, टैक्स हार्वेस्टिंग एक ऐसी स्ट्रैटेजी है, जिससे निवेशक अपनी टैक्स देनदारी को कम कर सकते हैं. अमेरिका जैसे देशों में यह तरीका बहुत लोकप्रिय है और भारतीय निवेशक भी इसका फायदा उठा सकते हैं. टैक्स हार्वेस्टिंग का तरीका इस प्रकार काम करता है:  

1. अंडरपरफॉर्मिंग स्टॉक्स या फंड को बेचना: निवेशक को कैपिटल लॉस दिखाने के लिए उन स्टॉक्स या फंड को बेचना होता है जो अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं.  
2. कैपिटल गेन से ऑफसेट करना: इस लॉस को आप इक्विटी, रियल एस्टेट, या अन्य निवेशों के कैपिटल गेन से ऑफसेट कर सकते हैं.  
3. लॉस को कैरी फॉरवर्ड करना:  अगर इस वित्तीय वर्ष में कोई कैपिटल गेन नहीं है, तो आप इस लॉस को अगले 8 साल तक कैरी फॉरवर्ड कर सकते हैं. इसका मतलब है कि भविष्य में जब भी आपको मुनाफा होगा, तो आपकी टैक्स देनदारी घट जाएगी.  
4. इक्विटी की खरीद: अगर आप अपना निवेश जारी रखना चाहते हैं, तो आप वही असेट दो दिन बाद फिर से खरीद सकते हैं.  

टैक्स हार्वेस्टिंग के महत्वपूर्ण पहलू 
टैक्स हार्वेस्टिंग के दौरान कुछ महत्वपूर्ण बातें ध्यान में रखनी चाहिए:  

- सैलरी इनकम पर ऑफसेट नहीं: आप लॉस को सैलरी इनकम के बदले ऑफसेट नहीं कर सकते. इसका मतलब यह है कि सैलरी पर टैक्स छूट नहीं मिल सकती.  
- केवल कैपिटल असेट्स के लिए: यह सिर्फ इक्विटी, रियल एस्टेट और अन्य कैपिटल असेट्स के लिए लागू है.  
- डेरिवेटिव गेन: डेरिवेटिव गेन में लॉस को कैरी फॉरवर्ड करने की रियायत नहीं मिलती है.  

म्यूचुअल फंड्स और ETFs में टैक्स हार्वेस्टिंग
अगर बात करें म्यूचुअल फंड्स या ETFs की, तो टैक्स हार्वेस्टिंग इनमें बहुत आसान होती है. इन फंड्स को बेचकर उसी कैटेगरी में दूसरा फंड खरीदा जा सकता है. वहीं, स्टॉक निवेशकों को दो दिन का इंतजार करना पड़ता है, या फिर वे उस इंडस्ट्री की किसी प्रतिस्पर्धी कंपनी का स्टॉक खरीद सकते हैं.  

 


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