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सेबी ने किया MF ट्रांसफर आसान: अब परिवार को यूनिट स्थानांतरित करना होगा सहज, जानिए नई शर्तें

सेबी का यह कदम निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड निवेश को और अधिक लचीला और परिवार-केंद्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है. इससे निवेशकों को अपनी संपत्ति के प्रबंधन और पीढ़ीगत हस्तांतरण में अधिक सुविधा मिलेगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड यूनिट ट्रांसफर की प्रक्रिया को और सरल बना दिया है. अब निवेशक अपनी यूनिट को परिवार के सदस्यों को आसानी से ट्रांसफर कर सकेंगे, साथ ही नाबालिग के बालिग होने पर संयुक्त खाता जोड़ने की भी सुविधा दी गई है.

अब डीमैट खाते की जरूरत नहीं

सेबी के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, म्यूचुअल फंड यूनिट को परिवार के सदस्यों के बीच स्थानांतरित करने के लिए अब डीमैट खाते की अनिवार्यता नहीं रहेगी. निवेशक अपने स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट (SOA) के माध्यम से यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. हालांकि, यह सुविधा केवल उन्हीं निवेशकों के लिए उपलब्ध होगी जिनके पास यूनिट SOA मोड में हैं.

नाबालिग निवेशकों के लिए नए नियम

नाबालिग निवेशक केवल अपने नाम पर यूनिट रख सकते हैं, लेकिन जैसे ही वे 18 वर्ष के हो जाते हैं और उनका खाता ‘माइनर’ से ‘मेजर’ में बदल जाता है, वे अपने फोलियो में माता-पिता या भाई-बहन जैसे संयुक्त खाताधारक जोड़ सकते हैं. हालांकि, नाबालिग के नाम पर या नाबालिग को यूनिट ट्रांसफर करना अभी भी संभव नहीं है.

ट्रांसफर प्रक्रिया कैसे करें

ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी. इसके लिए निवेशक को रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर एजेंट (RTA) की वेबसाइट पर अपने पैन नंबर से लॉगिन करना होगा.

1. स्कीम का चयन करें.
2. ट्रांसफर करने वाले और पाने वाले खाते की जानकारी भरें.
3. सभी यूनिट धारकों की *ओटीपी के जरिए सहमति* ली जाएगी.

ट्रांसफर पर लागू होंगी ये शर्तें

1. ट्रांसफर की जाने वाली यूनिट किसी लॉक-इन पीरियड, बंधक, या फ्रीज स्थिति में नहीं होनी चाहिए.  उदाहरण के तौर पर, टैक्स-सेविंग स्कीम की यूनिट्स जिनका तीन साल का लॉक-इन पूरा नहीं हुआ है, उन्हें ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा.
2. ट्रांसफर करने वाला और पाने वाला, दोनों एक ही म्यूचुअल फंड हाउस में वैध फोलियो रखते हों. अगर ट्रांसफर पाने वाले का फोलियो नहीं है, तो पहले उसे ‘जीरो बैलेंस फोलियो’ खुलवाना होगा.
3. दोनों पक्षों का KYC पूरी तरह सत्यापित होना जरूरी है.
4. ट्रांसफर के बाद 10 दिनों तक यूनिट्स को रिडीम (बेचा) नहीं जा सकेगा. यह एक तरह का कूलिंग-ऑफ पीरियड होगा ताकि किसी दुरुपयोग या जल्दबाजी को रोका जा सके.

कराधान पर ध्यान जरूरी

सेबी ने निवेशकों को चेताया है कि यूनिट ट्रांसफर से होने वाले पूंजीगत लाभ (Capital Gains) पर टैक्स देय होगा. इक्विटी फंड्स पर अल्पकालिक लाभ पर 15% और दीर्घकालिक लाभ पर 10% टैक्स लगेगा.

 


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