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म्यूचुअल फंड नियमों में SEBI ने किया बड़ा बदलाव, निवेशकों को जुर्माने से मिलेगी राहत
अगर आप भी म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं तो ये खबर आपके बहुत काम की हो सकती है जिसका सीधा असर आपके जेब पर दिखाई देगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
सेबी ने म्युचुअल फंड निवेशकों के लिए नियमों में बदलाव किया है. इस नियम को दिसंबर से लागू कर दिया गया है. जिसका फायदा अब निवेशक उठा सकेंगे. अब निवेशक SIP को भुगतान की तारीख से 3 दिन पहले बंद कर सकेंगे. या फिर चाहें तो उसे रोक सकेंगे. जिसके बाद म्युचुअल फंड कंपनी को (T+2) के भीतर इसमें जो भी प्रक्रिया होती हैं उसे पूरा करना होगा. इसका फायदा ये होगा कि निवेशक जुर्माना या किसी भी अन्य प्रकार की वित्तीय समस्याओं से बच सकेंगे.
पहले कैसी थी प्रक्रिया?
इस नियम से पहले SIP को रद्द कराने के लिए निवेशकों को 10 दिन पहले (वर्किंग डे) पहले आवेदन करना होता था. जिसके कारण कभी-कभी किस्त बाउंस तक हो जाती था. जिससे निवेशकों को ECS या फिर मैंडेट रिटर्न चार्ज देना होता था. जिसका असर निवेशकों पर पड़ता था. इसको देखते हुए सेबी ने नियमों में बदलाव किया है.
निवेशकों के लिए कैसे होगा फायदेमंद?
मान लीजिए कि किसी के निवेशक को 10,000 रुपये का किस्त हर महीने देना है. जिसकी तारीख 1 है. अगर उसके पास इस तारीख तक पर्याप्त पैसे नहीं हैं तो ऐसे कंडीशन में निवेशक 1 तारीख से 3 दिन पहले अपने SIP को रोकने के लिए आवेदन कर सकता है. जिससे वह किसी भी अतिरिक्त शुल्क से बच सकेगा.
म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए निर्देश
• कंपनियों को अब 2 वर्किंग डे के भीतर ऑटो डेबिट या ECS निर्देशों को रद्द करना होगा.
• फर्स्ट टाइम SIP की किस्त छूटने पर उसे निवेशक को सूचित करना होगा.
• अगर निवेशक लगातार 3 किस्त चूक जाता है तो उसकी SIP बंद कर दी जाएगी. ये सब उसे, निवेशक को बताना होगा.
• जब SIP रद्द होगी उसकी सूचना मैसेज के जरिए निवेशकों को देनी होगी.
• सभी प्लेटफॉर्म पर SIP रद्द करने का विकल्प उपलब्ध कराना होगा.
निवेशकों के लिए बड़ी राहत
सेबी का यह फैसला म्यूचुअल फंड उद्योग में पारदर्शिता और निवेशकों के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. जानकारों का कहना है कि इस नए नियम से एसआईपी निवेशकों को बड़ा फायदा मिलेगा. अब उन्हें जुर्माने का डर नहीं रहेगा और वे अपने निवेश पर बेहतर नियंत्रण रख सकेंगे. यह कदम न केवल निवेशकों की सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि उन्हें वित्तीय योजना बनाने में भी मदद करेगा.
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