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SBI ने ग्राहकों को दिया झटका! इन लोन पर बढ़ी ब्याज दरें
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक ने करोड़ों ग्राहकों को झटका दिया है, अब लोन लोन की किश्त ग्राहकों की जेब पर ज्यादा भारी पड़ने वाली हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
अगर आप भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ग्राहक हैं और लोन लेने का प्लान बना रहे हैं, तो आपको झटका लग सकता है. दरअसल, एसबीआई ने अपने लोन की ब्याज दरें बढ़ा दी हैं. ऐसे में अब आपको कार, होम या पर्सनल लोन लेना थोड़ा महंगा पड़ेगा. तो चलिए जानते हैं अब आपको लोन लेने के लिए कितनी ज्यादा कीमत चुकानी होगी?
MCLR से लोन लेना महंगा
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेडिंग रेट्स (MCLR) से ल लोन लेना अब महंगा हो गया है. दरअस्ल, बैंक ने अपनी एमसीएलआर में बढ़ोतरी कर दी है. बैंक के इस कदम से एमसीएलआर से जुड़े सभी तरह के लोन की ईएमआई बढ़ जाएगी. बैंक की तरफ से बढ़ाई गई यह दर 15 जून से लागू हो गई हैं, हालांकि स्टेट बैंक के इस फैसले से रेपो रेट से जुड़े लोन पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
अब इतना चुकाना होगा लोन
एसबीआई ने एमसीएलआर में 10 बेसिस पॉइंट्स यानी 0.10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है. इस बढ़ोतरी के साथ एमसीएलआर से जुड़े सभी लोन जैसे होम लोन (Home loan), पर्सनल लोन (Personal loan) और कार लोन (Car loan) इन सभी की ईएमआई बढ़ाई गई हैं. एमसीएलआर में ये हुए बदलाव
1. ओवरनाइट एमसीएलआर बढ़कर 8.10 प्रतिशत हो गया है, जो पहले 8 प्रतिशत था.
2. एक और 3 महीने का एमसीएलआर 8.30 प्रतिशत हो गया, जो पहले 8.20 प्रतिशत था.
3. छह महीने का एमसीएलआर 8.65 प्रतिशत हो गया, जो पहले 8.55 था.
4. एक साल का एमसीएलआर बढ़कर 8.75 प्रतिशत हो गया है, जो पहले 8.65 था.
5. दो साल का एमसीएलआर 8.85 प्रतिशत हो गया, जो पहले 8.75 था.
6. तीन साल का एमसीएलआर 8.95 प्रतिशत हो गया, जो पहले 8.85 था.
क्या है एमसीएलआर?
कोई भी बैंक दो तरह से लोन देता है, पहला रेपो लिंक्ड लोन या लेंडिंग रेट (RLLR) बेस्ड और दूसरा MCLR बेस्ड होता है. RLLR रिजर्व बैंक आधारित रेपो रेट से जुड़ा होता है. अगर रेपो रेट में बदलाव होगा तो इससे जुड़े लोन की ईएमआई भी बदल जाती है. वहीं, दूसरी ओर एमसीएलआर वह दर होती है जो बैंक अपनी तरफ से तय करते हैं. यह बैंक का इंटरनल बेंचमार्क होता है, इसमें बैंक अपने फंड लागत के हिसाब से तय करते हैं कि लोन की ब्याज क्या होगी. इसमें कई तरह के फैक्टर शामिल होते हैं. इसमें बैंक अपने खर्चे और दूसरी लागत जोड़कर ईएमआई बनाते हैं. एमसीएलआर बेस्ड लोन की समीक्षा 6 महीने या एक साल में होती है.
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