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Startups के लिए S Ravi की सलाह - 'अच्छा शेयरहोल्डर एग्रीमेंट' बनाएं 

'शेयरधारकों की असहमति आज आम बात हो गई है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वे एक-दूसरी की भूमिका को सही से रेखांकित नहीं करते; वे दूसरों की भूमिका को पहचानना नहीं चाहते'.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के पूर्व चेयरमैन और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) फर्म रवि राजन एंड कंपनी के फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर सेथुरत्नम रवि (एस रवि) ने हाल ही में अपनी पेशेवर यात्रा के 34 साल पूरे किए हैं. BW Businessworld के साथ एक इंटरव्यू में एस रवि ने अपनी इस यात्रा से जुड़े अनुभव साझा किए. साथ ही उन्होंने नए-नए आईडियाज के साथ स्टार्टअप्स की दुनिया में कदम रखने वाले युवाओं को सलाह भी दी. 

1989 में हुई थी स्थापना
1989 में स्थापित, रवि राजन एंड कंपनी को बैंकों, वित्तीय संस्थानों, NBFCs और अन्य संगठनों के साथ काम करने का व्यापक अनुभव है. बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में कुछ प्रमुख कार्यों में सीएसआर गतिविधियों के लिए मल्टी-डोनर फंड स्थापित करने में तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए विश्व बैंक द्वारा इसकी नियुक्ति और भारतीय रिजर्व बैंक - जीएसटी ऑडिट शामिल है. आज कंपनी के 16 पार्टनर हैं और 150 से अधिक सदस्यों की एक टीम है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवर शामिल हैं. इसके नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, नोएडा और गुरुग्राम में कार्यालय हैं.

आपकी पेशेवर यात्रा के 34 वर्ष पूरे होने पर बधाई. यदि आपको इस दौर के कुछ सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों को चुनना हो, तो वे क्या होंगे?
परंपरागत रूप से अकाउंटिंग फर्म ऑडिट, टैक्सेशन आदि करती हैं, लेकिन मैंने कुछ अच्छे फैमिली सेटलमेंट किए और कुछ ऐसा किया जो लोगों के लिए उपयोगी रहा. तो, यह मेरे लिए गेम चेंजर था. जांच से जुडी कुछ प्रतिष्ठित असाइनमेंट मुझे मिले थे, जो आज बहुत प्रसिद्ध हैं, लेकिन 2000 की शुरुआत में नहीं थे. तो, मैंने वह काम किया, और वे महत्वपूर्ण जांच थीं जिन्हें अब फोरेंसिक कहा जाता है. हमने अलग-अलग काम भी किए, जैसे कुछ विलय, मूल्यांकन और ड्यू-डेलिजेंस, लिहाजा कहा जा सकता है कि बहुआयामी थे. हमने अपने ज्ञान के आधार का इस्तेमाल किया. तो, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक नॉलेज बेस अत्यंत आवश्यक है.

आप कई कंपनियों के बोर्ड में रहे हैं और आगे भी रहेंगे. क्या आपको बोर्ड के सदस्य के रूप में कंपनी को सही दिशा में चलाने का कोई उदाहरण याद है?
मैं UCO बैंक का भी हिस्सा रहा हूं, जिसे सबसे कठिन बैंकों में से एक माना जाता है. उस दौर में यूको बहुत ही मुश्किल समय से गुजर रहा था. Dena Bank के हालात भी खास जुदा नहीं थे. मैं यह नहीं कहूंगा कि मैं एकमात्र था, लेकिन मैंने इस सुधार में एक बड़ी भूमिका निभाई. एक समिति बनाई गई थी, और हमने बहुत सारे सुझाव दिए. पंजाब सिंध बैंक में एक तकनीकी विशेषज्ञ समिति थी, जो खुद उस समय संकट के दौर से गुजर रही थी. हमारे  सुझावों को भारत सरकार द्वारा स्वीकार और लागू भी किया. एक बोर्ड के सदस्य के रूप में, मैंने ऑपरेशनल मुद्दों के बजाए नीति स्तर पर भूमिका निभाई और इसे सही दिशा में आगे बढ़ाया.

आप कॉरपोरेट गवर्नेंस को कैसे अधिक महत्व प्राप्त करते हुए देख रहे हैं?
कॉरपोरेट गवर्नेंस एक नया मंत्र है, क्योंकि गवर्नेंस एक बड़ा मुद्दा रहा है. यह इसलिए मुद्दा है क्योंकि पूर्णकालिक प्रबंधन दिन-प्रतिदिन के कार्यों में शामिल होता है, और स्वतंत्र निदेशकों का जोर निरीक्षण पक्ष पर अधिक रहता है. वे बिना किसी पक्षपात के अपने अधिकारों के दायरे में जो कुछ चाहें कर सकते हैं। कॉरपोरेट गवर्नेंस यही है, कंपनी के हित के लिए निष्पक्ष रूप से काम करना. कंपनी अधिनियम का पालन करना ही गवर्नेंस नहीं है; यह उससे कहीं ज्यादा  है. यह सही और कभी-कभी कठिन निर्णय लेने के बारे में है. उदाहरण के लिए, यदि कंपनी में कर्मचारियों की संख्या अधिक है, तो उसे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति सेवा (VRS) शुरू करनी चाहिए. ऐसा देना बैंक और यूको बैंक और कई अन्य जगहों पर हुआ है. उन दिनों अकाउंटिंग स्टैण्डर्ड भी उस स्तर के नहीं थे जो आज हमारे पास IFRS आदि के साथ हैं. इसलिए, गवर्नेंस की जिम्मेदारी सिर्फ सही काम करना थी.

युवा कंपनियों को आपकी क्या सलाह है, आज के स्टार्टअप जो कल के बड़े संगठन होंगे, उन्हें संरचित और लचीले विकास के लिए किन क्षेत्रों ध्यान देना चाहिए?
शेयरधारकों की असहमति आज आम बात हो गई है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वे एक-दूसरी की भूमिका को सही से रेखांकित नहीं करते; वे दूसरों की भूमिका को पहचानना नहीं चाहते. इसलिए, यदि कोई एक दूसरों की भूमिका को नहीं पहचानता, तो कंपनी को दीर्घकाल में काफी नुकसान उठाना होगा. इन स्टार्टअप कंपनियों में, प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका जैसे मूलभूत सिद्धांत बहुत स्पष्ट होने चाहिए. यही सफलता की कुंजी है. हमने संस्थापकों को खुद अपनी सीट खोते देखा है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपके फंडामेंटल या मूलभूत सिद्धांत स्पष्ट नहीं होते. बिजनेस मॉडल केवल तभी सर्वाइव करेगा, जब आप प्रतिस्पर्धी हैं, टेक्नोलॉजी में सबसे आगे हैं, और सबसे महत्वपूर्ण, आपके पास पर्याप्त पूंजी है. टीम को एक साथ लाने के दौरान एक दूसरे को पहचानना अधिक महत्वपूर्ण है. इन सभी नई कंपनियों और स्टार्टअप्स को मेरी यही सलाह है कि एक अच्छा शेयरहोल्डर एग्रीमेंट तैयार करें.

अपने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के अनुभवों के बारे में हमें बताएं और साथ ही यह भी कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए व्यवसाय विकास में ऐसे संस्थानों की भूमिका को आप कैसे देखते हैं?
पहली भूमिका एक नियामक होने की है. यह मूल रूप से एक मंच है, और सेबी द्वारा निर्धारित नियमों और विनियमों का एक सेट है, और आपको यह देखना होगा कि सभी बाजार मध्यवर्ती संस्थाओं (market intermediaries) के ढांचे का पालन किया जाता है. इसके बाद यह एसएमई लिस्टिंग में जा सकता है, अन्य चैनलों को देख सकता है, उदाहरण के लिए, म्यूचुअल फंड का वितरण. इसलिए विकास के मद्देनजर हम कई नियम बना सकते हैं. इसमें शिक्षित करने की भी भूमिका है. निवेशक जागरुकता और वित्तीय साक्षरता महत्वपूर्ण हैं.

इक्विटी बाजार में हाल के कुछ घटनाक्रमों और नियामक की छवि पर इसके प्रभाव पर आपकी राय?
मैं केवल उसी के आधार पर बात करूंगा जो सार्वजनिक रूप से हमें ज्ञात है और विभिन्न रिपोर्टों में लिखा गया है. यदि वे सच हैं, तो हमें पूछना चाहिए कि हम इसे एक प्रणाली के रूप में इससे कैसे निपट रहे हैं. और यदि वे झूठे हैं तो इस प्रकार की रिपोर्ट्स की भी जांच की जानी चाहिए और इन मुखबिरों की विश्वसनीयता प्रमाणित की जानी चाहिए.

हमारा GST कलेक्शन 1.87 लाख करोड़ रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया है. आप CAs की भूमिका को भारत के आर्थिक विकास के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में कैसे देखते हैं?
GST कुछ समय पहले ही अस्तित्व में आया है, इसे सिर्फ साढ़े पांच साल हुए हैं. इसे लेकर बहुत सारे मुद्दे थे. CAs ने अपने ग्राहकों को इस बारे में बहुत जागरुक किया है और उनकी काफी मदद की है. बहुत कम लोग ही इसे समझते हैं. यहां तक कि सरकारी विभागों को भी कुछ चीजों पर स्पष्ट दृष्टिकोण की जरूरत थी, क्योंकि वे भी सीख रहे थे. इसके अलावा,  टेक्नोलॉजी और प्लेटफॉर्म से जुड़ी बुनियादी समस्याएं भी थीं. इसलिए, CAs ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और विशेष रूप से उस SME सेगमेंट के लिए उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है, जहां वे बहुत महंगे सीए और सलाहकारों की सेवाएं नहीं ले सकते. 

साढ़े तीन दशक लगभग एक युग के समान है. इस यात्रा में आपको सबसे अधिक प्रेरित करने वाले लोग कौन हैं?  
मेरी सूची में तीन लोग हैं: नारायणन वाघुल, एक बेहतरीन बैंकर जिन्होंने बेहतरीन संस्थान स्थापित किए. इंफोसिस के के. वी. कामथ और नारायण मूर्ति ने भी मुझे काफी प्रेरित किया है. उन्होंने कुछ समय के लिए इंफोसिस को संभाला, प्रबंधन को पेशेवर लोगों को दे दिया, और हितधारक बन गए, इससे काफी कुछ सीखने को मिलता है. ये तीनों मेरे लिए प्रेरणा रहे हैं.


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