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ज्यादा किराया देने वालों के लिए नया नियम: रेंट रूल्स 2025 लागू, TDS और एग्रीमेंट में बदलाव
नए रेंट रूल्स 2025 से किराए पर रहना दोनों पक्षों के लिए आसान और सुरक्षित होगा. अब टैक्स, एग्रीमेंट और किराए के नियमों में पारदर्शिता आ गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago
सरकार ने किराएदारों और मकान मालिकों के लिए रेंट रूल्स 2025 लागू कर दिए हैं. नए नियमों के तहत किराए पर रहना अब आसान, सुरक्षित और व्यवस्थित होगा. 50,000 रुपये से अधिक किराए पर TDS का प्रावधान, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और किराया बढ़ाने पर नोटिस जैसे बदलाव अब अनिवार्य हैं.
50,000 रुपये से ज्यादा किराए पर TDS जरूरी
नए नियमों के मुताबिक, अगर कोई किराएदार हर महीने 50,000 रुपये से ज्यादा किराया देता है, तो उसे 2% TDS काटना अनिवार्य होगा. यह TDS साल में एक बार या किराएदारी खत्म होने वाले महीने में जमा करना होगा. इसके अलावा, फॉर्म 26QC भरना और मकान मालिक को फॉर्म 16C देना भी जरूरी है. नियमों की अनदेखी करने पर भारी जुर्माना, ब्याज और कानूनी कार्रवाई हो सकती है.
नियम तोड़ने पर पेनल्टी
नियमों का पालन न करने पर रोजाना 200 रुपये लेट फीस लग सकती है, TDS न काटने पर 1% और TDS न जमा करने पर 1.5% ब्याज देना होगा. इसके अलावा 10,000 से 1 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है और गंभीर मामलों में 3 महीने से 7 साल तक जेल भी जाना पड़ सकता है.
ऑनलाइन रेंट एग्रीमेंट जरूरी
अब रेंट एग्रीमेंट सिर्फ कागज पर नहीं रहेगा. साइन होने के 60 दिनों के भीतर इसे ऑनलाइन रजिस्टर करना अनिवार्य है. समय पर रजिस्ट्रेशन न करने पर 5,000 रुपये तक जुर्माना लगेगा. इससे बिना लिखित या मनमाना एग्रीमेंट की परेशानी खत्म होगी.
किराया बढ़ाने और घर खाली करवाने के नियम
मकान मालिक अब अचानक किराया नहीं बढ़ा सकेंगे और न ही बिना कारण घर खाली करवा सकेंगे. किराया बढ़ाने के लिए 90 दिन पहले लिखित नोटिस देना होगा. इसके अलावा, बिना रेंट ट्रिब्यूनल के आदेश किसी को घर खाली नहीं कराया जा सकता. पुराने नियमों के तहत अचानक घर खाली कराने की प्रैक्टिस अब खत्म हो जाएगी.
मरम्मत और इंस्पेक्शन के नए नियम
मकान मालिक को घर में मरम्मत या जांच के लिए 24 घंटे पहले सूचना देना जरूरी होगा. जरूरी मरम्मत 30 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी. अगर मरम्मत समय पर नहीं होती है, तो किराएदार किराया घटा सकता है या खुद मरम्मत करवा कर पैसे एडजस्ट कर सकता है. इसके अलावा, विवादों को 60 दिनों के भीतर निपटाना अनिवार्य होगा.
किराएदार और मकान मालिक दोनों के फायदे
नए नियमों के तहत किराएदारों को कम सिक्योरिटी डिपॉजिट, किराए में बढ़ोतरी पर नियंत्रण, डिजिटल और साफ-सुथरा पेपरवर्क और विवादों का तेज निपटारा मिलेगा. वहीं मकान मालिकों के लिए यह कानूनी रूप से मजबूत कॉन्ट्रैक्ट, डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए विवाद कम और भुगतान तथा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने में मदद करेगा.
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