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जानिए किराए के बांड कैसे आपकी संपत्ति की सुरक्षा के लिए हो सकते हैं अहम

अगर आपका किराएदार किसी भी स्थिति में डिफॉल्‍टर हो जाता है तो ऐसे में किराए के बांड आपके लिए मददगार साबित हो सकते हैं. समझने की बात ये है कि आप इससे कैसे फायदा ले सकते हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

क्‍या आप अपना मकान किराए पर देते हैं, तो इस बात की चिंता मकान मालिक को हमेशा बनी रहती है कि किराएदार कैसा निकलेगा। पूरी पेमेंट करेगा या नहीं करेगा, कहीं ऐसा तो नहीं होगा कि किसी दिन चला जाएगा। इन सभी समाधानों के लिए कई शहरों में रेंटल बांड का सिस्‍टम चल रहा है। इस रेंटल बांड से जहां मकान मालिक को अपनी पेमेंट की पूरी गारंटी मिल जाती है वहीं किराएदार को इसके लिए मामूली पेमेंट करनी पड़ती है. इससे दोनों को फायदा होता है. जानकारों का कहना है कि भारतीय आवासीय बाजार 50,000 करोड़ रुपये तक बढ़ने का अनुमान है। हालाँकि, मेट्रो या टियर-1 शहरों में आवासीय संपत्ति किराए पर लेना संपत्ति मालिकों और किरायेदारों दोनों के लिए एक कठिन काम है।

किराए का बांड मालिक के पक्ष में गारंटी
अपनी संपत्ति को किराए पर देने का फैसला करने के बाद किसी भी मकान मालिक को इसके लिए कम समय मिलता है कि वो अपने किराएदार का सत्‍यापन कर पाए. क्‍या वो समय पर किराया दे पाएगा या नहीं, क्‍या वो सही है या नहीं, किराएदार का पिछला रिकॉर्ड कैसा रहा है. इन सभी सवालों का जवाब जानने के लिए किसी भी मकान मालिक के पास कम समय होता है. इस समस्‍या के समाधान के लिए किराये का बांड एक समाधान बनकर उभरा है. ये मकान मालिक के पक्ष में एक गारंटी है कि अगर किराएदार किसी भी स्थिति में डिफॉल्‍टर हो जाए तो ये किरायेदार के वित्तीय दायित्वों को कौन पूरा करेगा.  बांड सुरक्षा जमा की गारंटी बनता है और मकान मालिक को किराए और इस्‍तेमाल किए गए बिल के भुगतान में चूक सहित संपत्ति के नुकसान के लिए कवर करता है.

कई शहरो में चल रहा है ये सिस्‍टम
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जानकारों का कहना है कि मौजूदा समय में किराएदार और मकानमालिक के बीच में मौजूद सभी तरह की परेशानियों को ये बांड खत्‍म करता है। जानकार ये भी कहते हैं कि बेंगलुरु और दिल्ली एनसीआर जैसे बाजारों में फैमिली होम सेगमेंट में किराये के बांड का विकल्प चुनने वाले मकान मालिकों की संख्या 35-40 प्रतिशत तक है. उन्होंने कहा, ऐसे में परिवार के घरों की हिस्सेदारी महीने-दर-महीने आधार पर बढ़ रही है.

किराएदारों के लिए भी होते हैं फायदेमंद
ऐसा नहीं है कि किराए के बांड केवल मकान मालिकों के लिए ही फायदेमंद होते हैं. ये किरायेदारों के लिए भी फायदेमंद हैं. इसका बड़ा फायदा उन्‍हें ये होता है कि वो सिक्‍योरिटी राशि से बच जाते हैं. एकमुश्‍त कई महीने का एडवांस देने से उनके लिए प्रॉपर्टी भी मकान मालिक के व्‍यवहार के तौर पर बेहतर हो जाती है. ऐसा करने के बाद वो सुरक्षा राशि का उपयोग या अन्य तरीकों से निवेश करके कर सकते हैं. इसके अलावा, एक किरायेदार किसी भी वृद्धिशील धनराशि को लॉक किए बिना एक संपत्ति से दूसरी संपत्ति में जाने में सक्षम है. किराये के बांड से उनकी मकान मालिक के साथ पेमेंट की जो हिस्‍ट्री बनती है उससे उनकी विश्‍वसनीयता बढ़ती है, और आगे नया मकान मिलने में आसानी होती है.

क्‍या करती है इकारो गारंटी
इकारो गारंटी किरायेदारों से उनकी ओर से मकान मालिक को दी जाने वाली गारंटी के लिए शुल्क लेती है. ये शुल्‍क उनके द्वारा दिए जा रहे किराए का 6-8 प्रतिशत है, जो उनकी सुरक्षा जमा राशि से काफी कम है. बदले में इसके वो किराएदार की ओर से मकानमालिक को किराएदार की गारंटी देती है. मकान मालिक और किराएदार के बीच के कांट्रैक्‍ट का वार्षिक नवीनीकरण किया जाता है और यदि किराया बढ़ाया जाता है, तो गारंटी के लिए शुल्क बाद में बढ़ा दिया जाता है. कंपनी का कहना है कि इसमें मकान मालिक के लिए कोई शुल्क नहीं है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कंपनी के प्रमुख खंडेलवाल ने कहा कि हम को-अकोमोडेशन के साथ-साथ पारिवारिक घरों के लिए किराये के बांड की पेशकश करते हैं. हम वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे में इस कारोबार को कर रहे हैं, लेकिन देश के बाकी हिस्सों में भी विस्तार करने की योजना बना रहे हैं.


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