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ITR Filling: ITR रिफंड प्राप्त करने में कितना समय लगता है?

अगर आप जल्‍दी अपना आयकर रिफंड पाना चाहते हैं तो आपको अपना ITR भी जल्‍दी दाखिल करना चाहिए. क्‍योंकि आप जितनी देर करेंगे आपके रिटर्न को आने में उतनी ही देरी होगी. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

इनकम टैक्‍स का रिटर्न दाखिल करना एक बेहद महत्‍वपूर्ण प्रक्रिया है. आय कमाने वाले हर व्‍यक्ति को दाखिल करना होता है. आयकर विभाग चाहता है कि अगर आप उसके बनाए तय दायरों के अंतर्गत आय की श्रेणी में आते हैं तो भी ITR फाइल करें और नहीं भी आते हैं तो वो आपके लिए ही कई मायनों में फायदेमंद होता है. मसलन आपको बैंक लोन लेना हो या कई तरह की दूसरी सुविधा के लिए ये फायदेमंद होता है. लेकिन एक सवाल सभी के मन में होता है कि आखिर आयकर दाखिल करने के बाद रिटर्न कितने दिन में आता है. इसको आने में कई बार इतना समय क्‍यों लग जाता है. 

आखिर क्‍या होता है ITR रिफंड 
इससे पहले कि हम ये जानें कि इसे आने में इतना समय क्‍यों लगता है, उससे पहले आपको ये जानना चाहिए कि आखिर रिटर्न के पात्र कौन-कौन से लोग होते हैं. ये किन्‍हें मिलता है? आखिर ये कैसे काम करता है? जब कोई भी करदाता अपने तय कर से अधिक का भुगतान करते हैं, चाहे वह टीडीएस के रूप में हो या एडवांस टैक्‍स के रूप में तो वे रिफंड के लिए पात्र होते हैं. व्यक्ति द्वारा अपना ITR दाखिल करने के बाद आयकर विभाग दावे का सत्यापन करता है और रिफंड का प्रबंधन किया जाता है. आयकर विभाग रिफंड को करदाता के बैंक खाते में भेजता है. इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और समय पर रिफंड देने के लिए आईटी विभाग ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया है. इससे रिफंड प्रोसेसिंग समय काफी कम हो गया है, जिससे प्रक्रिया अधिक कुशल और आयकर दाताओं के लिए आसान हो गई है. 

आखिर किन कारणों से होती है इसमें देरी
रिफंड आने में देरी के कई कारण हैं. इनमें सबसे प्रमुख कारण है आपके द्वारा विभाग को सटीक जानकारी न देना. अगर आपने रिटर्न दाखिल करते वक्‍त गलत जानकारी मुहैया कराई तो ये देरी का एक कारण बन सकता है. जब कभी भी आप अपना ITR फाइल करें उसमें दिए गए टैक्‍स की जानकारी को सही से भरें. भरने के बाद उनकी जांच करना बेहद जरूरी है. एक सामान्य गलती जिसके परिणामस्वरूप अक्सर टैक्स रिफंड में देरी होती है, वह है टैक्स दाखिल करने वालों द्वारा गलत या पुराने बैंक खाते की जानकारी प्रदान करना. उसी बैंक एकाउंट का नंबर दें जो आपके चलन में हो.

क्‍या होती है रिफंड की प्रक्रिया 
आपका आयकर रिटर्न फाइल होने के बाद उसका विभाग के द्वारा सत्‍यापन किया जाता है. सत्‍यापन की प्रक्रिया पूरा करने के बाद ही रिफंड की प्रक्रिया शुरू होती है. सत्‍यापन की प्रक्रिया पूरा होने के बाद उसकी एक बार और जांच होती है उसमें क्‍लीयरेंस मिलने के बाद ही आपके रिफंड को प्रोसेस किया जाता है. इसके बाद लगने वाला समय कई बार इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपके रिटर्न के साथ कितने लोगों ने रिटर्न प्रोसेस फाइल किया है. लेकिन इसमें बहुत ज्‍यादा समय नहीं लगता है क्‍योंकि अब ज्‍यादातर काम ऑनलाइन तरीके से होता है. 

ई-फाइलिंग का ले सकते हैं सहारा
अगर आप अपना रिफंड जल्‍दी पाना चाहते हैं तो आप अपना रिटर्न ई-फाइलिंग के तरीके से दाखिल करें. आयकर विभाग ज्‍यादातर लोगों को इसी प्रोसेस को अपनाने के लिए प्रोत्‍साहित करता है. ई- फाइलिंग, पेपर फाइलिंग के मुकाबले ज्‍यादा आसान होती है और इसमें रिफंड भी जल्‍दी आता है. इसमें गलतियां भी काफी कम हो जाती हैं. सीनियर सिटीजन को छोड़कर ज्‍यादातर लोगों को कोशिश करनी चाहिए कि वे इस तरीके का ही इस्‍तेमाल करें. ITR को या तो आधार ओटीपी का उपयोग करके ऑनलाइन सत्यापित किया जाना चाहिए या आईटीआर-वी की एक साइन की हुई कॉपी बेंगलुरु में केंद्रीकृत प्रसंस्करण केंद्र को भेजकर सत्यापित की जानी चाहिए. सफल सत्यापन के बाद ही प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया की जाती है. वेरिफिकेशन में देरी के कारण रिफंड में देरी हो सकती है.
 


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