होम / पर्सनल फाइनेंस / EMI होगी कम ! रेपो रेट में कटौती के बाद 4 बड़े सरकारी बैंकों ने घटाई ब्याज दरें
EMI होगी कम ! रेपो रेट में कटौती के बाद 4 बड़े सरकारी बैंकों ने घटाई ब्याज दरें
RBI द्वारा रेपो रेट में कटौती के बाद चार PNB सहित 4 बड़े सरकारी बैंकों ने लोन ब्याज दरें घटा दी है. इससे मौजूदा और नए लोन धारकों को बड़ी राहत होगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में कटौती की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर देश के चार प्रमुख सरकारी बैंकों ने अपने ग्राहकों को बड़ी राहत दी है. इंडियन बैंक (Indian Bank), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ इंडिया (BOI) और यूको बैंक (UCO Bank) ने अपने लोन की ब्याज दरों में 35 बेसिस प्वाइंट तक की कटौती का ऐलान किया है. इससे लाखों कर्जदारों की EMI में कमी आने की उम्मीद है. हालांकि डिपॉजिट रेट्स में अभी कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, जिससे बैंकों के फंडिंग स्ट्रक्चर पर सवाल उठ रहे हैं. आइए जानते हैं बैंक ने ब्याज में कितनी कटौती है और इससे आपको कितना फायदा होगा?
सरकारी बैंकों ने कितनी घटाई ब्याज दरें?
RBI के निर्णय के बाद पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक और यूको बैंक ने अपनी रीपो लिंक्ड ब्याज दरों (RBLR) में 35 बेसिस प्वाइंट तक की कटौती की है.
- इंडियन बैंक ने RBLR को 9.05% से घटाकर 8.70% कर दिया है. यह नई दर 11 अप्रैल से लागू होगी.
- PNB ने ब्याज दर 9.10% से घटाकर 8.85% की है, जो 10 अप्रैल से लागू हो गई है.
- बैंक ऑफ इंडिया ने भी अपनी दर 9.10% से घटाकर 8.85% कर दी है, जो RBI की घोषणा वाले दिन से ही लागू हो चुकी है.
- यूको बैंक ने अपनी रीपो लिंक्ड दर को घटाकर 8.80% कर दिया है. यह बदलाव गुरुवार से प्रभावी होगा.
डिपॉजिट रेट्स में बदलाव धीमा
हालांकि ब्याज दरों में कटौती हो चुकी है, लेकिन बैंकों ने डिपॉजिट रेट्स में अपेक्षित तेजी से बदलाव नहीं किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इसका मुख्य कारण बैंकों को फंड जुटाने में आ रही दिक्कतें हैं. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ग्रुप चीफ इकनॉमिक एडवाइजर सौम्य कांति घोष ने बताया कि पॉलिसी रेट्स में कटौती के बावजूद सेविंग्स डिपॉजिट रेट्स में मामूली ही बदलाव आया है. फरवरी में RBI द्वारा रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती के बाद पब्लिक सेक्टर बैंकों ने डिपॉजिट रेट्स में केवल 6 बेसिस प्वाइंट की कमी की, वहीं विदेशी बैंकों ने 15 बेसिस प्वाइंट घटाए. उल्टा, कुछ प्राइवेट बैंकों ने इसे 2 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ा दिया.
MCLR में बदलाव की संभावना कम, क्यों?
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक डिपॉजिट रेट्स में बड़ी कमी नहीं होती, तब तक MCLR (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट) में भी बड़ी कटौती की संभावना नहीं बनती. MCLR सीधे बैंक की फंडिंग कॉस्ट से जुड़ी होती है और इससे मिड व बड़े कारोबारियों को मिलने वाले लोन प्रभावित होते हैं. RBI की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने हाल ही में रीपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर इसे 6% कर दिया है. यह लगातार दूसरी बार है जब केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में कटौती की है. इसके साथ ही, RBI ने अपनी नीतिगत दिशा को 'समर्थनकारी' (Accommodative) बना दिया है, जिससे आगे और दरों में कटौती की गुंजाइश बनी हुई है.
GDP और महंगाई के अनुमान में बदलाव
RBI ने FY26 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से घटाकर 6.5% कर दिया है. वहीं, खुदरा महंगाई दर का अनुमान भी 4.2% से घटाकर 4% कर दिया गया है. RBI का कहना है कि महंगाई में निर्णायक सुधार देखने को मिला है, और अगले 12 महीनों में महंगाई दर इसके 4% लक्ष्य के आसपास रह सकती है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था पर इनका असर सीमित रहेगा. उन्होंने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 की पहली छमाही में ग्रोथ उम्मीद से कमजोर रही थी, परंतु अब रिकवरी का संकेत मिल रहा है. ऐसे में, RBI का फोकस महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखते हुए विकास को बढ़ावा देने पर है.
टैग्स