NVIDIA जैसी कंपनियों की रिकॉर्ड कमाई, HBM और AI प्रोसेसर की बढ़ती मांग और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश आने वाले वर्षों में वैश्विक टेक इंडस्ट्री की दिशा तय करेंगे.
मजबूत आईपीओ मार्केट, बढ़ते एग्जिट्स और मुनाफे में आते यूनिकॉर्न्स भारत को वैश्विक टेक इनोवेशन का अहम केंद्र बना रहे हैं.
ईरान-इजरायल तनाव ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक राजनीतिक घटनाओं का असर भारतीय कृषि और निर्यात बाजारों पर कितनी तेजी से पड़ सकता है.
यह साझेदारी न केवल भारतीय निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगी, बल्कि दीर्घकालिक व्यापार वृद्धि, रोजगार सृजन और भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को भी मजबूती देगी.
क्रिसिल रेटिंग के अनुसार वेनेज़ुएला में राजनीतिक और सैन्य घटनाओं का भारत की अर्थव्यवस्था, व्यापार या तेल सुरक्षा पर फिलहाल कोई गंभीर असर नहीं दिख रहा है.
भारत एक निर्णायक मोड़ पर है. रणनीतिक सुधारों के साथ गिग वर्क कम वेतन वाली भूमिका से अवसरों की संरचित सीढ़ी में बदल सकता है.
एक सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में आई बड़ी गिरावट अल्पकालिक उतार-चढ़ाव को दर्शाती है. मजबूत आयात कवर और दीर्घकालिक ट्रेंड यह संकेत देते हैं कि भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति फिलहाल संतुलित और मजबूत बनी हुई है.
FY25 में भारत के पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात में मात्रा के स्तर पर मजबूती देखने को मिली है, लेकिन कमजोर वैश्विक कीमतों ने निर्यात आय पर दबाव बनाए रखा है.
सोमवार को BSE सेंसेक्स 301.93 अंक की तेजी के साथ 83,878.17 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, NSE निफ्टी भी 106.95 अंक चढ़कर 25,790.25 के स्तर पर बंद हुआ.
दिसंबर में महंगाई में वृद्धि के बावजूद, कुल मिलाकर यह दर अभी भी नियंत्रण में मानी जा रही है और RBI के अनुमान के दायरे में बनी हुई है.
TCS के Q3FY26 नतीजे दिखाते हैं कि कंपनी का नेट प्रॉफिट इस तिमाही में 14% गिरा है, लेकिन राजस्व और AI बिजनेस में मजबूत बढ़त ने निवेशकों और बाजार को संतोषजनक संकेत दिया है.
भारत और जर्मनी के बीच हुए ये चार ऐतिहासिक समझौते दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को नई मजबूती देते हैं.
डॉ. त्रुसर डी. बागुल की स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्ति शिवटेक स्पेकेमी इंडस्ट्रीज की वैज्ञानिक गवर्नेंस और नवाचार रणनीति को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है.
DMart Q3FY26 में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दिखाया है. मुनाफे और रेवेन्यू दोनों में अच्छी बढ़त से साफ है कि कंपनी का बिजनेस लगातार मजबूती पकड़ रहा है.
चीनी तकनीक हस्तांतरण पर बढ़ी सख्ती ने भारतीय कंपनियों की योजनाओं को प्रभावित किया है और इससे देश की ग्रीन एनर्जी रणनीति के सामने नई चुनौतियां खड़ी हुई हैं.
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि कंपमी विलय में शेयर प्राप्ति पर केवल तभी टैक्स लगेगा जब वास्तविक वाणिज्यिक लाभ उत्पन्न हो.
मुकेश अंबानी का यह ऐलान साफ संकेत देता है कि भारत अब सिर्फ टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता नहीं, बल्कि ग्लोबल AI लीडर बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है.
आगामी बजट में यदि टैक्स शेयरिंग, सेस-सरचार्ज और राज्यों की विशेष जरूरतों पर ठोस फैसले लिए जाते हैं, तो इससे केंद्र-राज्य वित्तीय रिश्तों को मजबूती मिल सकती है.
PLI स्कीम, सप्लाई चेन में विविधता और भारतीय कंपनियों की सक्रिय भागीदारी ने Apple के लिए भारत को रणनीतिक रूप से बेहद अहम बना दिया है.
शुक्रवार को BSE बीएसई का सेंसेक्स 604.72 अंक गिरकर 83,576.24 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, NSE निफ्टी भी 193.55 अंक टूटकर 25,683.30 पर बंद हुआ.