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IWD: जानें, योग शिक्षिका से सफल उद्यमी बनीं ईशु सैनी (शिवा) की प्रेरणादायक कहानी

ईशु सैनी की सफलता यह संदेश देती है कि जब महिलाएं अपने सपनों की ओर बढ़ती हैं, तो वे न केवल अपने जीवन को बदल सकती हैं, बल्कि समाज में भी एक स्थायी परिवर्तन ला सकती हैं.

रितु राणा 1 year ago

महिला दिवस के अवसर पर हम उन महिला उद्यमियों की बात करते हैं जिन्होंने न केवल अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त की, बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव की लहर बनाई. ऐसी ही एक प्रेरणास्त्रोत हैं ईशु सैनी (शिवा), जिनकी मेहनत और दृष्टिकोण ने उन्हें समाज में जागरूकता फैलाने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मिसाल बना दिया है.

यहां से मिली प्रेरणा

ईशु शिवा का जन्म जयपुर के एक कारोबारी परिवार में हुआ था, जहाँ उन्हें बचपन से ही व्यापार और उसका महत्व समझने का अवसर मिला. शारीरिक शिक्षा और योग में रुचि रखने वाली ईशु के जीवन का मोड़ तब आया जब उन्हें अपनी छात्राओं की स्वास्थ्य समस्याओं का पता चला. मासिक धर्म से जुड़ी समस्याएं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि कुछ ऐसा किया जाए, जिससे महिलाएं स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हों.

जीवन अर्थ फाउंडेशन' की स्थापना

इसी सोच से प्रेरित होकर, ईशु ने 2017 में 'जीवन अर्थ फाउंडेशन' की शुरुआत की. इस फाउंडेशन का उद्देश्य महिलाओं को मासिक धर्म और स्वच्छता के बारे में जागरूक करना था. शुरूआत में ईशु स्कूलों में जाकर बच्चों और महिलाओं को मासिक धर्म और स्वच्छता के प्रति जागरूक कर उन्हें मुफ्त सैनिटरी पैड वितरित करती थीं. लेकिन जल्द ही उन्हें यह एहसास हुआ कि यह एक स्थायी समाधान नहीं हो सकता था, क्योंकि पैड खत्म होते ही महिलाएं फिर से अस्वस्थ विकल्पों की ओर लौट जाती थीं.

इको फ्रेंडली 'Sanitree' पैड ब्रैंड

ईशु ने बताया कि उन्होंने खुद के सैनिटरी पैड बनाने का सोचा, जिस पर काम करते हुए, उनकी मुलाकात 'मार्था' नाम की एक स्कॉटलैंड की महिला से हुई, जो पुन: उपयोग किए जाने वाले सैनिटरी पैड्स पर काम कर रही थी. दोनों की सोच मेल खाई और उन्होंने मिलकर 'Sanitree' ब्रैंड की शुरुआत की. Sanitree के सैनिटरी पैड्स पूरी तरह से ऑर्गेनिक, बायोडिग्रेडेबल और पर्यावरण के अनुकूल हैं. इन पैड्स को दो साल तक इस्तेमाल किया जा सकता है, और इनका उत्पादन 7 लेयर तकनीक से किया जाता है. ये पूरी तरह से क्लोथ पैड हैं, जोकि 4 से 12 घंटे तक चलते हैं. इनके लार्ज साइज के पैड की कीमत 200 है. वहीं, एक डिगनिटी KIT जिसमें 1  लार्ज, 2 मीडियम पैड होते हैं, उसकी कीमत 620 और 4 पैड की एक फुल साइकल किट की कीमत 840 रुपये है. ये पैड मार्केट में उपलब्ध पैड्स से काफी सस्ते पड़ते हैं, जोकि 150-200 वॉश के साथ पूरे 2 साल तक चलते हैं.

महिलाओं को दिया रोजगार 

ईशु ने Sanitree के उत्पादों को सिर्फ एक प्रोडक्ट तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने इसे 'रोजगार' और 'महिला सशक्तिकरण' से जोड़ा. 2019 में जयपुर में स्थित 'Her Shakti Centre' में एक प्रोडक्शन यूनिट स्थापित किया, जिसमें '7 महिलाएं' काम करती हैं. यह महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आई हैं, और अब वे न केवल अपनी आजीविका कमा रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भी बन गई हैं. यहाँ महिलाओं को सैनिटरी पैड बनाने के साथ-साथ 'बिजनेस और मार्केटिंग स्किल्स' भी सिखाई जाती हैं. ईशु का उद्देश्य है कि Sanitree भारत का सबसे बड़ा इको-फ्रेंडली सैनिटरी ब्रांड बने और हर गांव और शहर की महिलाएं इससे जुड़ें.

देश-विदेश में सप्लाई हो रहे Sanitree पैड

ईशु ने बताया कि आज Sanitree भारत के 18 राज्यों में बेचे जा रहे हैं, और 7 देशों में इनका इस्तेमाल हो रहा है. उनकी प्रोडक्शन यूनिट में हर महीने 3000 पैड्स का प्रोडक्शन होता है. उन्होंने पैड्स की सप्लाई के लिए टाटा ट्रस्ट और कई संस्थाओं के साथ टाई अप किया है. इसके अलावा india mart, Flipkart, Amazon,  Zero Waste Store के जरिये भी ये पैड सेल करते हैं. 


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