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किस्से कुछ खास: भारत की समृद्ध खाद्य परंपराओं को कहानियों में पिरोती एक अनोखी पुस्तक

‘किस्से कुछ खास’ एक ऐसी पुस्तक है जो सुगंधित बासमती चावल के बहाने हमें अपने अतीत, संस्कृति और स्वाद की जड़ों से जोड़ती है.

रितु राणा 11 months ago

भारतीय खाद्य संस्कृति और उसकी अनमोल धरोहर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड (पूर्व में अडानी विलमर लिमिटेड) ने भारत मंडपम प्रगति मैदान में शनिवार को वर्ल्ड फूड इंडिया 2025 के अवसर पर अपनी नई कॉफी टेबल बुक ‘किस्से कुछ खास’ का भव्य लोकार्पण किया. इस ऐतिहासिक पुस्तक का विमोचन केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान,  एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ अंगशु मलिक, पद्मश्री प्रो. पुष्पेश पंत और सेलेब्रिटी शेफ कुणाल कपूर द्वारा किया गया.

पुस्तक के रचनाकार: परंपरा और स्वाद का संगम

‘किस्से कुछ खास’ की रचना पद्मश्री प्रो. पुष्पेश पंत द्वारा की गई है, जो एक ख्यातिप्राप्त खाद्य इतिहासकार हैं. उन्होंने इस पुस्तक को न केवल एक दस्तावेज के रूप में रचा, बल्कि एक पाक-सांस्कृतिक यात्रा की तरह बुना है, जो चावल के दानों में छुपे भारत के इतिहास, परंपरा और स्वाद की कहानियों को जीवंत कर देती है. इस मौके पर प्रो. पंत ने कहा, “बासमती चावल शायद भारत की पाक पहचान का सबसे मुखर उदाहरण है. शाही रसोइयों से लेकर सामान्य रसोईघरों तक, इसकी यात्रा एक सजीव सांस्कृतिक दस्तावेज है, जिसे भविष्य की पीढ़ियों के लिए सहेजना आवश्यक था.” 

उन्होंने कहा ‘किस्से कुछ खास’ एक साधारण पुस्तक नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक दस्तावेज है, जो चावल के हर दाने में छिपे भारत के इतिहास को बयान करती है. यह पहल, न केवल इतिहासकारों और पाक विशेषज्ञों के लिए, बल्कि हर उस भारतीय के लिए महत्वपूर्ण है जो अपने भोजन से जुड़ी विरासत को सहेजना चाहता है.

स्वाद से संस्कार तक की कथा

अंगशु मलिक ने कहा, 'किस्से कुछ खास’ के माध्यम से हमने एक ऐसे अनाज की कथा कही है, जो केवल भोजन नहीं, बल्कि हमारी परंपरा, हमारी विरासत और हमारे जीवन की कहानी है. यह सिर्फ व्यंजनों की किताब नहीं है, बल्कि उनके पीछे छिपी कहानियों का संग्रह है. हर पकवान के साथ एक कथा जुड़ी होती है और बासमती की यही ताकत है कि यह लोगों को स्वाद के साथ-साथ भावनाओं और यादों से जोड़ता है. उन्होंने कहा बासमती चावल केवल भोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और खानपान की अमूल्य धरोहर है, जिसे संरक्षित और आगे बढ़ाना हम सबकी जिम्मेदारी है.

शेफ कुणाल कपूर ने कहा बासमती चावल अपनी बहुमुखी विशेषताओं के कारण अलग पहचान रखता है. चाहे खीर हो, बिरयानी हो या कोई और व्यंजन हर पकवान के लिए अलग किस्म के चावल का चयन किया जाता है. बासमती की लंबाई, उसका सुगंधित होना और पानी सोखने की क्षमता उसे अन्य चावलों से अलग बनाती है. यही वजह है कि कभी घर में साधारण दाल-चावल बनाने के लिए तो कभी किसी आलीशान दावत की बिरयानी के लिए बासमती को ही प्राथमिकता दी जाती है.

उन्होंने कहा चावल का भारतीय जीवन और संस्कृति में एक विशेष स्थान है. यह सिर्फ भोजन ही नहीं बल्कि धार्मिक और सामाजिक परंपराओं का भी हिस्सा है. घर में पूजा-पाठ हो, दुकान का उद्घाटन हो या शादी-ब्याह का कोई अवसर, हर जगह चावल का प्रयोग शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है कि चावल को सिर्फ़ खाने का साधन नहीं, बल्कि हमारी परंपरा का अहम हिस्सा समझा जाता है.

कहानियों के माध्यम से 15 विशेष रेसिपीज का संगम

‘किस्से कुछ खास’ न केवल इतिहास की बातें करती है, बल्कि बासमती चावल की बहुआयामी प्रतिभा को भी दर्शाती है. पुस्तक में सम्मिलित 15 विशेष रेसिपीज, चावल के विविध रूपों में प्रयोग की झलक देती हैं, कभी बिरयानी की राजसी खुशबू में, तो कभी त्योहारों की मिठास में. यह रचनात्मक संकलन पाठकों को भोजन के माध्यम से भारत की आत्मा को महसूस करने का अवसर देता है. इसमें चावल से जुड़ी अनसुनी कहानियाँ, अनुष्ठानों में उसकी भूमिका, और भोजन के सामाजिक-सांस्कृतिक पहलुओं को खूबसूरती से पिरोया गया है.

इस बुक में बासमती से जुड़ी कई रोचक कहानियां शामिल की गई हैं. इसमें बताया गया कि निजाम-ए-हैदराबाद के समय में भी चावल को विशेष महत्व दिया जाता था. वहीं, एक दिलचस्प जिक्र रूमी के ‘मीटलैस पुलाव’ का हुआ, जिसमें मांस की जगह ओट्स, ड्राई फ्रूट्स और अंडे मिलाकर एक पौष्टिक और अनोखा व्यंजन बनाया गया था. इसे एक स्वस्थ और नवीन प्रयोग माना गया, जो बासमती की विविधता को दर्शाता है. इसी तरह, ‘अक्षय पात्र’ की पौराणिक कथा भी साझा की गई, जिसमें भगवान कृष्ण ने rice bowl का आशीर्वाद दिया था कि घर में कभी भोजन की कमी न हो. यह कहानी इस बात की प्रतीक है कि चावल सिर्फ आहार नहीं, बल्कि आस्था और आशीर्वाद का भी रूप है. 


 


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