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Qatar में Bharat की कूटनीतिक जीत, 8 पूर्व नौसैनिकों की फांसी पर रोक; अब क्या होगा आगे?
कुछ महीने पहले कतर की एक अदालत ने 8 पूर्व भारतीय नौसैनिकों को फांसी की सजा सुनाई थी, जिसका भारत ने विरोध किया था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
Dahra Global Case: कतर (Qatar) से एक बड़ी खबर सामने आई है. यहां जेल में बंद 8 पूर्व भारतीय नौसैनिकों की मौत की सजा पर रोक लगा दी गई है. इसे भारतीय कूटनीति की बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है. भारत सरकार लगातार पूर्व नौसैनिकों को राहत दिलवाने के लिए काम कर रही है. उसने मौत की सजा के फैसले पर भी आपत्ति जताई थी. भारत सरकार ने इसके खिलाफ अपील की थी, जिसके बाद अब सभी की मौत की सजा पर रोक लगा दी गई है.
मदद का किया था ऐलान
कतर की अदालत ने एक अज्ञात मामले में इन पूर्व भारतीय नौसैनिकों को मौत की सजा सुनाई थी. उस समय दावा किया गया था कि इन पूर्व भारतीय नौसैनिकों को जासूसी मामले में कतरी कोर्ट ने यह सजा दी है. लेकिन आधिकारिक तौर पर कभी जासूसी वाली बात नहीं की गई. भारत ने फांसी की सजा पर आपत्ति जताई थी और पूर्व भारतीय नौसैनिकों को हर संभव मदद का ऐलान किया था. सरकार अपील के साथ-साथ कूटनीतिक स्तर पर भी भारतीयों की फंसी रुकवाने का प्रयास कर रही थी, जिसमें अब सफलता मिल गई है.
कॉपी का है इंतजार
विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि हमें विस्तृत फैसले की कॉपी का इंतजार है. हमारी कानूनी टीम अगले कदम को लेकर भारतीयों के परिवारों के संपर्क में हैं. कतर में हमारे राजदूत और अन्य अधिकारी परिवार के सदस्यों के साथ अपील अदालत में उपस्थित रहे. हम मामले की शुरुआत से ही अपने भारतीय नौसैनिकों के साथ खड़े हैं. हम उन्हें सभी कांसुलर और कानूनी सहायता देना जारी रखेंगे. हम इस मामले को कतरी अधिकारियों के समक्ष भी उठाना जारी रखेंगे. कार्यवाही की गोपनीय और संवेदनशील प्रकृति के कारण, इस समय कोई और टिप्पणी करना उचित नहीं होगा.
उम्र कैद में बदली सजा!
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इन पूर्व भारतीय नौसैनिकों की मौत की सजा को उम्र कैद में बदल दिया गया है. हालांकि, पूरी स्थिति अदालत के विस्तृत आदेश की प्रति सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी. गौरतलब है कि कतर की एक अदालत ने अक्टूबर में आठ सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारियों और एक नाविक को मौत की सजा सुनाई थी. ये सभी अल दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज (Dahra Global Technology) के कर्मचारी थे. ये एक निजी कंपनी है, जो कतर के सशस्त्र बलों और सुरक्षा एजेंसियों को प्रशिक्षण और अन्य सेवाएं प्रदान करती है. सभी भारतीयों को पिछले साल अगस्त में अज्ञात आरोपों के चलते गिरफ्तार किया गया था. यह भी कहा गया कि गिरफ्तारी जासूसी की आरोप में हुई है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है.
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