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सोफोस रिपोर्ट: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रैनसमवेयर एन्क्रिप्शन कम हुआ, लेकिन डाटा चोरी और धमकी के मामले बढ़े
रिपोर्ट में पाया गया कि मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर हुए रैनसमवेयर हमलों में से केवल 40% मामलों में ही डाटा एन्क्रिप्शन हुआ
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago
साइबर सुरक्षा कंपनी Sophos की नई रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पहले से अधिक रैनसमवेयर हमलों को एन्क्रिप्शन चरण तक पहुंचने से पहले ही रोकने में सफल हो रहा है. हालांकि, हमलावर अब अपनी रणनीति बदलते हुए डाटा चोरी और एक्सटॉर्शन पर अधिक निर्भर हो रहे हैं, जिससे खतरा कम होने के बजाय दिशा बदल रहा है.
रिपोर्ट में पाया गया कि मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर हुए रैनसमवेयर हमलों में से केवल 40% मामलों में ही डाटा एन्क्रिप्शन हुआ. यह पिछले वर्ष के 74% से बड़ी गिरावट है और पिछले पांच वर्षों का सबसे कम स्तर है. इसके विपरीत, “सिर्फ एक्सटॉर्शन” वाले हमलों—जहां हमलावर डाटा चुराकर उसे जारी करने की धमकी देते हैं लेकिन सिस्टम एन्क्रिप्ट नहीं करते—का हिस्सा 3% से बढ़कर 10% हो गया.
विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव दिखाता है कि साइबर अपराधी अब चुराए हुए डाटा को ही दबाव बनाने का मुख्य हथियार बना रहे हैं.
सोफोस काउंटर थ्रेट यूनिट की डायरेक्टर ऑफ थ्रेट रिसर्च एलेक्ज़ेंड्रा रोज़ ने कहा, “मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर आपस में जुड़े सिस्टम्स पर निर्भर करता है, जहां थोड़ी देर की डाउनटाइम भी उत्पादन रोक सकती है और सप्लाई चेन पर असर डाल सकती है.”
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि भले ही एन्क्रिप्शन दर घटी है, वित्तीय नुकसान अब भी गंभीर है. रिपोर्ट में बताया गया कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मीडियन फिरौती रकम USD 1 मिलियन तक पहुंच रही है, जो साइबर हमलों की लगातार बढ़ती लागत को दर्शाता है.
विश्लेषकों का कहना है कि बदलते अटैक पैटर्न के बीच, कंपनियों को डाटा सुरक्षा, नेटवर्क मॉनिटरिंग और रियल-टाइम थ्रेट डिटेक्शन पर और अधिक निवेश करना होगा, क्योंकि हमलावरों का फोकस अब सिस्टम लॉक करने से हटकर संवेदनशील डाटा हासिल करने पर होता जा रहा है.
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