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आजादी का अमृत महोत्सव: ये हैं देश के 10 कारोबारी, जिन्होंने बदल दी हिंदुस्तान की किस्मत

आजादी की 75वीं सालगिरह पर हम आपको बताते हैं उन 10 मेहनतकश और विजनरी कारोबारियों के बारे में जिन्होंने देश में नए-नए उद्योगों की नींव रखी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: भारत दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी है और सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था भी. हम आपको बताने जा रहे हैं उन 10 उद्योगपतियों के बारे में जिन्होंने भारत का नाम दुनिया में रौशन किया. जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से कई सर्वश्रेष्ठ कंपनियां खड़ी की. 

1. धीरूभाई अंबानी 
28 दिसंबर 1933 को गुजरात के छोटे से कस्बे में जन्मे धीरूभाई अंबानी ने देश की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक रिलायंस इंडस्ट्रीज की नींव रखी.  उन्होंने ने चचेरे भाई चंपकलाल दिमानी की मदद से रिलायंस कमर्शियल कॉरपोरेशन कंपनी खोली. वो पश्चिमी देशों में अदरक, हल्दी और अन्य मसालों का निर्यात करते थे, यहीं से धीरूभाई अंबानी ने ऐसे कदम बढ़ाए कि फिर कभी पीछे पलटकर नहीं देखा. आज रिलायंस इंडस्ट्रीज  Fortune 500 कंपनियों में शामिल है. रिलायंस आज कई क्षेत्रों में काम करती है. 

2. जे आर डी टाटा 
जे आर डी टाटा का जन्म 29 जुलाई, 1904 को पेरिस में हुआ था. वो अपने पिता रतनजी दादाभाई टाटा और माता सुजैन ब्रियरे की दूसरी संतान थे. उनके पिता रतनजी देश के अग्रणी उद्योगपति जमशेदजी टाटा के चचेरे भाई थे. 1925 में बतौर इंटर्न टाटा एंड संस में काम शुरू किया. अपनी मेहनत के दम पर वो 1938 में भारत के सबसे बड़े औद्योगिक समूह टाटा के अध्यक्ष बन गए. उन्होंने 14 उद्योगों के साथ समूह के नेतृत्व की शुरुआत की थी और जब 26 जुलाई 1988 को उन्होंने अध्यक्ष पद छोड़ा तब तक टाटा समूह 95 उद्यमों का एक विशाल समूह बन चुका था. उन्होंने TATA Airlines की नींव रखी जो आज एयर इंडिया है और वापस टाटा के पास लौट
चुकी है.

3. एन आर नारायणमूर्ति 
एन नारायणमूर्ति को टेक्नोलॉजी सेक्टर में जो मुकाम हासिल है वो शायद ही किसी को हासिल हो. उनका जन्म 20 अगस्त, 1946 को कर्नाटक के मैसूर मे हुआ. उन्होंने IT क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Infosys की शुरुआत की. महज 10,000 रुपये से शुरू हुई ये कंपनी आज 8 लाख करोड़ रुपये की कंपनी बन चुकी है.  
 
4. अजीम प्रेमजी 
अजीम प्रेमजी एक सफल कारोबारी होने के साथ साथ दानवीर भी है, उन्होंने आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी विप्रो (Wipro) की नींव रखी. अजीम प्रेमजी के दादा चावल के व्यापार से जुड़े थे. 1945 में उनके दादा की मौत के बाद अजीम प्रेमजी के पिता मोहम्मद हुसैन हसन प्रेमजी 21 साल की उम्र में कंपनी को सम्भालते हैं. 1966 अजीम प्रेमजी पिता की मौत 51 साल की उम्र में हो जाती है, उसके बाद अजीम प्रेमजी पढ़ाई बीच में छोड़कर कंपनी की कमान अपने हाथ में लेते हैं. अमेरिका से लौटे प्रेमजी समझ चुके थे कि आने वाले समय आईटी का है. यही वजह है कि उन्होंने इस सेक्टर में किस्मत आजमाने का फैसला किया. यही वह समय था जब अजीम प्रेमजी ने विप्रो (Wipro) को शुरू किया. आज ये कंपनी देश की सफलतम कंपनियों में से एक है. 

5. अनिल अग्रवाल 
अगर हिम्मत और जज्बा हो तो क्या कुछ नहीं किया जा सकता. पटना में जन्मे अनिल अग्रवाल की जिंदगी इसकी मिसाल है. 15 साल की उम्र में वो स्कूल छोड़कर अपने पिता के साथ बिजनेस में लग गए. 
1970 के दशक में उन्होंने कबाड़ की धातुओं की ट्रेडिंग शुरू की और 1980 के दशक में उन्होंने स्टरलाइट इंडस्ट्रीज की स्थापना कर ली. स्टरलाइट इंडस्ट्रीज 1990 के दशक में कॉपर को रिफाइन करने वाली देश की पहली प्राइवेट कंपनी बनी. यही कंपनी आगे चलकर वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड बनी. 

6. आर्देशीर गोदरेज  
गोदरेज की नींव रखने वाले आर्देशीर गोदरेज (जन्म- 1868; मृत्यु- 1936) ने अपने भाई पिरोज्शा बुर्जोरजी के साथ गोदरेज ब्रदर्स कंपनी की स्थापना की, जिसे आज हम गोदरेज ग्रुप जानते हैं. इस ग्रुप को अब आदि गोदरेज संभालते हैं जो कि उनके परपोते हैं, ये ग्रुप रियल एस्टेट, कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, सिक्योरिटी, हाउसहोल्ड अप्लायसेंज के क्षेत्र में काम करती है.  

7. शिव नाडर
शिव नाडर का जन्म 14 जुलाई 1945 में मुल्यापोजी गाँव में थुलुकुडी जिले, तमिलनाडु में हुआ था. शिव नाडर ने अपने करियर की शुरुआत 'वालचंद समूह के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पुणे (COEP) से 1967 में की थी. लेकिन उन्होंने नौकरी छोड़कर अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर अगस्त 1976 में एक गैरेज में HCL (हिंदुस्तान कम्प्यूटर्स लिमिटेड) इंटरप्राइजेज की स्थापना की. 1980 में, HCL ने आईटी हार्डवेयर बेचने के लिए सिंगापुर में कंप्यूटर बेचने की शुरुआत के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कदम रखा था. कंपनी को पहले वित्त वर्ष में 10 लाख रुपये की आय हुई थी. इसके बाद कंपनी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. 

8. दिलीप सांघवी
दिलीप शांघवी का जन्म गुजरात के एक छोटे से शहर अमरेली में हुआ था. स्कूली पढ़ाई के बाद शांघवी ने कोलकाता यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में अपना स्नातक पूरा किया. उनके पिता का कोलकाता में ही दवाइयों का बिजनेस था, उनके पिता कोलकाता में जेनेरिक दवाइयों की सप्लाई करते थे. कॉलेज पूरा करने के बाद दिलीप भी दवाइयों के ही काम में लग गए और दवाई डिस्ट्रीब्यूशन शुरू कर दिया. लेकिन दिलीप के दिमाग में आया कि मैं दूसरों की दवाएं क्यों घूम-घूमकर बेचूं, अपनी दवाएं बनाकर क्यों नहीं बेच सकता. इसी सोच के साथ 1982 में उन्होंने गुजरात के वापी से Sun Pharmaceutical की शुरुआत 10,000 रुपये के साथ की. 

9. घनश्यामदास बिड़ला
घनश्यामदास बिड़ला भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति और बिड़ला समूह के संस्थापक थे. घनश्यामदास बिड़ला का जन्म 10 अप्रैल, 1894 में राजस्थान के पिलानी गाँव में एक मारवाड़ी परिवार में हुआ था. उन्होंने शुरुआती पढ़ाई के बाद कोलकाता जाकर अपना कारोबार शुरू किया. ये वो दौर था जब देश अंग्रेजों से आजादी की लड़ाई लड़ रहा था. उन्होंने आजादी की लड़ाई में भी अपना योगदान आर्थिक रूप से मदद पहुंचाकर किया. घनश्यामदास को पारिवारिक व्यापार और उद्योग विरासत में मिला जिसका विस्तार उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में किया. सन 1919 में उन्होंने 50 लाख की पूँजी से ‘बिड़ला ब्रदर्स लिमिटेड’ की स्थापना की और उसी साल ग्वालियर में एक . मिल की भी स्थापना की गयी।

10. लक्ष्मी निवास मित्तल
ArcelorMittal के मालिक लक्ष्मी निवास मित्तल का जन्म 2 जून 1950 को राजस्थान के चुरू शहर में हुआ था. उनके पिता मोहनलाल मित्तल का इस्पात का कारोबार था. लेकिन लक्ष्मी निवास मित्तल ने सन 1976 में अपना पहला स्टील कारखाना पीटी इस्पात इंडो’ इंडोनेशिया के सिदोअर्जो में स्थापित किया. 

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