राजेश बादल ने इस किताब को इतनी गहन रिसर्च और बारीकियों के साथ लिखा गया है कि हाल के दिनों में उसकी दूसरी मिसाल नहीं मिलती.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
दिनेश काण्डपाल, वरिष्ठ टीवी पत्रकार
कहां तुम चले गए... ये जगजीत सिंह की उस मशहूर गजल की लाइन है, जिसे तब तक गुनगुनाया जाएगा जब तक दुनिया में दर्द और उम्मीद ज़िंदा रहेगी. प्रख्यात गजल गायक जगजीत सिंह से सवाल पूछती ये जीवनी लिखी है वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने. इस किताब को इतनी गहन रिसर्च और बारीकियों के साथ लिखा गया है कि हाल के दिनों में उसकी दूसरी मिसाल नहीं मिलती. 14 चैप्टर वाली ये किताब श्रीगंगानगर से मुंबई तक के सफर में जगजीत के संघर्ष और स्टारडम के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व की वो खास बातें बताती हैं, जो आज तक सार्वजनिक नहीं थीं. इस पुस्तक को पढ़ने के बाद आप जगजीत सिंह के जीवन के कई नए पहलुओं से वाकिफ होते हैं. पुस्तक के लेखक ने जीवनी लेखन की नई शैली सृजित की है, चूंकि लेखक ने एक लंबा वक्त टीवी पत्रकारिता में बिताया है इसलिये उस तरह की स्क्रिप्ट की छाप उनके लेखन पर भी पड़ती है.
भावनाओं का ज्वार भाटा
जगजीत सिंह का बचपन, जवानी, उनकी गायकी, तोड़ कर रख देने वाला संघर्ष, चित्रा जी का उनके जीवन में आना, शोहरत की ऊंचाइयां और जीवन का सागर से भी गहरा दुख, ये सब इस किताब में इस कदर पिरोया हुआ है कि आप पुस्तक पढ़ना शुरू करते हैं तो भावनाओं के ज्वार भाटे में ऐसे बह जाते हैं कि किनारा तभी मिलता है जब किताब खत्म हो जाती है. पुस्तक शुरू होती है जगजीत के पिता अमीन चंद से जो बाद में अमृत छक कर सिख हो गए. जगजीत के पिता के पंजाब से राजस्थान के श्रीगंगानगर आने में ही राजेश जी ने इतनी रिसर्च की है कि पाठक हैरान हो जाता है. जगजीत सिंह का जन्म जिस घर में हुआ केवल उसका फोटो ही नहीं है बल्कि उस दाई का नाम भी है जिसने जगजीत की मां का प्रसव करवाया. जगजीत सिंह के हुनर को बचपन से ही कैसे उनके पिता ने पहले पहचाना और फिर तराशा, मां ने कैसे आगे बढ़ाया, भाइयों ने किस तरह का सहयोग किया वो एक एक बात इस किताब का हिस्सा है. राजेश बादल तो जगजीत के बचपन के उन दोस्तों से भी मिल आए जो उनके साथ पतंग लूटने में होड़ लगाते थे.

बेटे की मौत का भी जिक्र
पहले पढ़ाई फिर गायकी, घर के इस सिद्धांत में कैसे जगजीत धारा के विपरीत बह चले, कैसे श्रीगंगानगर में उनके नाम के चर्चे होते थे, किस तरह से कॉलेज में अपनी धाक जमाने वाले जगजीत अचानक मुंबई का रुख कर लेते हैं और फिर कैसे संघर्षों का एक लंबा दौर चलता है, वो सब पढ़ते हुए लगता है मानो आप जगजीत सिंह के साथ साथ चल रहे हों. ये लेखक का कौशल ही है. मायानगरी में कैसे जगजीत सिंह का मुकद्दर बना, ज़िंदगी में चित्रा जी कैसे आईं और फिर कैसे ये जोड़ी शिखर पर पहुंची उसे लेखक ने अपने शब्दों में इस तरह गुंथा है कि भावनाएं उमड़ कर आंखों से बरस पड़ती हैं. जीवन में हुए वज्रपात के बाद कैसे जगजीत बाहर निकले और चित्रा का क्या हुआ वो तो ये किताब बताती है, साथ ही लेखक ने उनके बेटे के विषय में कुछ ऐसे तथ्य भी बताए हैं जो अभी भी बहुत कम लोग ही जानते हैं. कैसे जगजीत और चित्रा के बेटे विवेक की मौत से जुड़ा सच सामने लाने के लिए उनकी बहन ने जद्दोजहद की, इसकी पूरी रिपोर्ट इस किताब में लिखी है.
दिल के मरीज सावधान
किताब का 10वां चेप्टर पढ़ने से पहले दिल के मरीज सावधानियां बरतें, क्योंकि इसमे वो कहानी है जो शर्तिया तौर पर आपको रुला देगी. एक तो जगजीत और चित्रा की ज़िंदगी में आया भूचाल ऊपर से लेखक ने शब्दों को पीड़ा के धागे में इस तरह पिरोया है कि मेरे जैसे पाठक इसे पढ़ते वक्त गहरे आकाश की ओर देखने लगते हैं. किताब में बहुत दुर्लभ फोटोग्राफ्स हैं, जो इसे बेहद खास बना देतें हैं. बड़े-बड़े गायकों के साथ जगजीत सिंह की केमिस्ट्री तो बताई ही है, लता जी कैसे जगजीत सिंह के लिए एक बार वरदान साबित हुईं वो भी आपको इसमें मिलेगा.
अपने आप में नई किताब
जगजीत सिंह की चुनिंदा गजलों का ज़िक्र किताब में है. हालांकि जगजीत सिंह के गाये मीरा के भजनों ने कैसे उन्हें गजल और फिल्मी गीत न सुनने वालों के बीच भी पहुंचा दिया इसका जिक्र शायद आने वाले एडिशन में राजेश जी करेंगे. जगजीत सिंह का गाया हे राम करो़ड़ों भजन प्रेमियों के घरों में आज भी हर रोज बजता है. ये अपने आप में नई किताब है, क्योंकि जीवनी लेखन की ऐसी शैली कहीं और नहीं मिलती. जगजीत सिंह के नाम भर को जानने वाला हर शख्स इसे पढ़ना शुरू करेगा तो फिर आखिरी पेज पर ही रुकेगा. मंजुल प्रकाशन से छपी इस पुस्तक की कीमत महज 699 रुपए है.
यह किताब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले 25 वर्षों के राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन को तस्वीरों और विश्लेषण के साथ प्रस्तुत करती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वरिष्ठ पत्रकार और पद्मश्री सम्मानित आलोक मेहता आज अपनी नई कॉफी-टेबल बुक “Revolutionary Raj – Narendra Modi’s 25 Years” का लोकार्पण करने जा रहे हैं. यह किताब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले 25 वर्षों के राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन को तस्वीरों और विश्लेषण के साथ प्रस्तुत करती है. कार्यक्रम शाम 4 बजे नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित होगा. यह किताब गुरुग्राम की शुभी पब्लिकेशंस द्वारा प्रकाशित की गई है. कार्यक्रम का संचालन बिजनेस वर्ल्ड और एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा करेंगे.
कार्यक्रम में शामिल होंगे कई बड़े नेता
इस कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रहेगी. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, अर्थशास्त्री और 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एन. के. सिंह, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंहऔर पूर्व केंद्रीय मंत्री के. जे. अल्फोंस मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे. किताब की भूमिका (Foreword) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लिखी है, जो इसे और भी विशेष बनाती है.
किताब की खासियत
“Revolutionary Raj” नरेंद्र मोदी के 25 साल के राजनीतिक और प्रशासनिक सफर को विस्तार से पेश करती है. इसमें उनके नेतृत्व, निर्णय, और देश में आए बदलावों को तस्वीरों और विश्लेषण के माध्यम से समझाया गया है.
किताब में पंचायत स्तर पर हुए सुधार, ग्रामीण विकास, बिजली और पानी की उपलब्धता, औद्योगिक विकास, सामाजिक सुधार, स्वास्थ्य योजनाएं जैसे आयुष्मान भारत, शिक्षा, और विदेश नीति समेत अन्य प्रमुख पहलुओं को शामिल किया गया है.
आलोक मेहता का संदेश
आलोक मेहता देश के जाने-माने पत्रकार हैं और कई बड़े अखबारों व संस्थानों से जुड़े रहे हैं. उन्होंने कार्यक्रम में आमंत्रित सभी लोगों को शामिल होने का न्यौता दिया है और कहा कि यह किताब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और देश के परिवर्तन के 25 वर्षों का संकलित दस्तावेज है.
किताब में धर्म, कानून और समाज के संगम को दर्शाया गया; बताई गई वह कानूनी यात्रा जो सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले तक पहुंची
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
Rupa Publications ने अनिरुद्ध शर्मा और श्रीधर पोटाराजु द्वारा लिखी गई नई किताब Case for Ram: The Untold Story of Faith, Law, and a Legal Battle that Shaped a Nation के आने वाले विमोचन की घोषणा की.
प्रकाशक के अनुसार, यह किताब धर्म, कानून और समाज के बीच के जटिल संबंधों का विश्लेषण करती है. इसमें वह कानूनी यात्रा विस्तार से बताई गई है, जो भारत के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले तक पहुंची और देश के न्यायिक परिदृश्य को आकार दिया.
अनिरुद्ध शर्मा और श्रीधर पोटाराजु ने इस किताब में मामले के सामाजिक, सांस्कृतिक और कानूनी आयामों का समग्र चित्रण किया है, जिससे पाठकों को न केवल कानूनी प्रक्रिया बल्कि उसके पीछे की संवेदनशीलताओं की भी समझ मिलती है.
Rupa Publications का कहना है कि यह किताब देशभर के पाठकों के लिए उपलब्ध होगी और यह समाज, कानून और धर्म के जटिल मेल को समझने का एक महत्वपूर्ण स्रोत साबित होगी.
यह किताब मैनेजमेंट के रणनीति (Strategy) विषय पर आधारित है और बिज़नेस की जरूरतों को समझने के लिए एक मजबूत सिद्धांतिक ढांचा (Theoretical Framework) प्रस्तुत करती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
Westland Books, अपने बिज़नेस इम्प्रिंट Westland Business के तहत, " Atypical: नई दुनिया के लिए पाँच रणनीतिक नियम" नामक किताब लॉन्च कर रहा है. यह किताब UCL और IIMB के प्रोफेसर प्रतीक राज द्वारा लिखी गई है और यह दिखाती है कि कंपनियां पारंपरिक तरीकों से अलग सोचकर और नए रास्ते अपनाकर कैसे सफल हो सकती हैं.
"Atypical" में प्रतीक राज ने वास्तविक जीवन की कहानियों के ज़रिए यह बताया है कि बिज़नेस तेजी से बदलती दुनिया में कैसे बदलाव लाते हैं, नए विचार अपनाते हैं और आगे बढ़ते हैं. यह किताब मैनेजमेंट के रणनीति (Strategy) विषय पर आधारित है और बिज़नेस की जरूरतों को समझने के लिए एक मजबूत सिद्धांतिक ढांचा (Theoretical Framework) प्रस्तुत करती है. खासतौर पर, यह किताब बिज़नेस लीडर्स और मैनेजर्स के लिए बहुत उपयोगी है;
प्रतीक राज का कहना है कि "मैंने IIM बैंगलोर में MBA छात्रों को Strategic Stewardship कोर्स पढ़ाया, जिसमें हम कार्यस्थल संस्कृति, कॉर्पोरेट व्यवहार, सार्वजनिक सेवाएँ, स्वास्थ्य, पूंजीवाद और काम के भविष्य जैसे विषयों पर चर्चा करते थे. जब Westland Books के कमीशनिंग एडिटर, औरोदीप ने मुझसे संपर्क किया, तो मुझे लगा कि यह सही समय है. मेरे पास कोर्स की संरचित नोट्स तो थे, लेकिन मैं केवल उन्हें किताब में बदलना नहीं चाहता था.
उन्होंने कहा कि मैं चाहता था कि यह किताब क्लासरूम चर्चाओं को वास्तविक दुनिया से जोड़े और नए विचारों को जन्म दे. इस किताब में बताया गया है कि 21वीं सदी की जटिलताओं का सामना करने के लिए संगठनों को कैसे विकसित होना चाहिए.यह किताब उन असामान्य और अक्सर अनदेखे किए गए हितधारकों (Stakeholders) पर केंद्रित है, जो भविष्य की इनोवेटिव और प्रभावी रणनीतियों की कुंजी हो सकते हैं."
दिल्ला के सांस्कृतिक सम्राट डॉ. हरीश भल्ला का 10 जनवरी 2025 को निधन हो गया. ‘इंडिया न्यूज’ चैनल पर हरीश भल्ला का शो ‘एक कहानी विद डॉ. हरीश भल्ला काफी लोकप्रिय था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
महानगर दिल्ली की निष्ठुर आत्मा में लगातार हलचल मचाए रखने वाली शानदार इंदौरी टीम से जुड़ी हुई एक और शख्सियत इस दुनिया को अलविदा कह गई. करीब दो साल पहले डॉ. वेदप्रताप वैदिक अचानक चले गए थे. अब हाल ही में दिल्ली के सांस्कृतिक सम्राट के रूप में पहचाने जाने वाले डॉ हरीश भल्ला भी हमें छोड़कर चले गए. राजेंद्र माथुर और प्रभाष जोशी के जाने का दुख खत्म ही नहीं हुआ था कि अब डॉ. भल्ला का निधन हो गया. दिल्ली की गुल्लक में बिना किसी ब्याज के जमा इंदौर के खरे सिक्के जैसे एक-एक करके नियति का शिकार हो रहे हैं. मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के जावरा में जन्मे डॉ. भल्ला ने इंदौर के महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त की. दिल्ली में चिकित्सक और नशामुक्ति विशेषज्ञ के रूप में अपनी सेवाएं देने के साथ-साथ, वे कला, संस्कृति, संगीत और थिएटर के प्रति अपने जुनून के लिए प्रसिद्ध थे.
डॉ भल्ला सिर्फ एक कुशल मनोचिकित्सक ही नहीं थे और भी बहुत कुछ थे. वे केंद्र की राजधानी में इंदौर-मालवा के स्वयं-नियुक्त सांस्कृतिक राजदूत थे. मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ से दिल्ली की यात्रा पर जाने वाली मालवी आत्माओं के लिए एक ठिकाना थे, आत्मीयता का खजाना थे, मदद का सहारा थे. साल 1971 में जब प्रभाष जोशी जी के साथ काम करने के लिए दिल्ली में राजघाट कॉलोनी स्थित गांधी स्मारक निधि को मैंने अपना ठिकाना बनाया तो सबसे नजदीक उपलब्ध जिस दूसरे परिचित व्यक्ति का ख्याल आया वे डॉ हरीश भल्ला थे. डॉ भल्ला तब राजघाट कॉलोनी से सिर्फ पंद्रह मिनिट की पैदल दूरी पर स्थित पंत हॉस्पिटल में कार्यरत थे. डॉ वैदिक तब दूर सफदरजंग एंक्लेव में रहते थे.
इंदौर मेडिकल कॉलेज के एक चर्चित छात्र नेता थे डॉ. भल्ला
डॉ भल्ला से जुड़ी यादों को 1971 से भी पीछे ले जाना हो तो इंदौर मेडिकल कॉलेज के एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में छवि मन में उभरती है, जो कलरफुल शर्ट्स पहने हुए घूमता था और एक चर्चित छात्र नेता के तौर पर कॉलेज और जिला प्रशासन की नाक में दम किए रहता था. मेडिकल कॉलेज में हरीश भल्ला की तूती बोलती थी. कॉलेज का प्रिंस हॉस्टल जिसकी रियासत थी. इंदौर के निकट रतलाम जिले के छोटे से शहर जावरा से निकलकर पहले इंदौर और फिर राजधानी में ‘दिल्ली के सांस्कृतिक जार ’(Cultural Czar of Delhi) के रूप में स्वयं को स्थापित करने वाले डॉ भल्ला ने अपने घर का नाम ही ‘जावरा हाउस’ रखा हुआ था. ‘हुसैन टैकरी’ के लिए मशहूर जावरा ब्रिटिश भारत में जावरा रियासत की राजधानी था.
डॉ भल्ला से जुड़ा जावरा का एक अन्य परिचय यह है कि पंडित जवाहर नेहरू के निकटस्थ रहे कश्मीरी राजनेता और 1957 से 1962 तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे डॉ कैलाशनाथ काटजू का जन्म भी जावरा में ही हुआ था. जावरा से लगा मंदसौर डॉ काटजू का चुनाव क्षेत्र था. डॉ. काटजू के मुख्यमंत्रित्वकाल में पंडित नेहरू ने जावरा की यात्रा भी की थी. उस दौरान हुए एक कार्यक्रम में तब स्कूली छात्र हरीश भल्ला ने एक सराहनीय सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी थी. जावरा के कारण डॉ भल्ला काटजू परिवार के सभी सदस्यों के साथ अंत तक जुड़े रहे. सांसद विवेक तनखा के साथ तो वे कई संस्थाओं और गतिविधियों में संबद्ध थे.
डॉ. भल्ला से मिलने का ठिकाना था इंडिया इंटरनेशनल सेंटर
दिल्ली में प्रसाद नगर स्थित डॉ भल्ला का छोटा सा फ्लैट मालवा के लोगों के लिए सराय था और लोदी रोड स्थित प्रतिष्ठित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर बाहर से मिलने पहुँचे लोगों से मिलने का ठिकाना. वे दिल्ली में मालवा की कला-संस्कृति और संगीत की धड़कन थे. मेडिकल, राजनीति और सांस्कृतिक क्षेत्रों से जुड़ा मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का ऐसा कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति नहीं था जो डॉ भल्ला के संपर्क में नहीं आया हो.
संगीत के क्षेत्र में नाम कमाने वाली भारत और पाकिस्तान की ऐसी कोई हस्ती नहीं थी, जिससे डॉ भल्ला के आत्मीय संबंध नहीं रहे हों. ग़ुलाम अली को मित्रों ने उनके घर की महफ़िलों में सुना है. चार दशक होने आए डॉ भल्ला के हवाले से लोक गायिका रेशमा के साथ मैंने खुद इंदौर में एक लंबी बातचीत अपने अंग्रेजी अखबार ‘फ्री प्रेस जर्नल’ के लिए की थी.
शास्त्रीय संगीत की प्रसिद्ध गायिका शुभ मुदगल तो डॉ भल्ला को बड़ा भाई मानती थीं और नवोदित कलाकारों को मंच और आवाज देने के लिए उनके साथ मिलकर ‘इंटरनेशनल मेलोडी फाउंडेशन’ की स्थापना की थी.
डॉ हरीश भल्ला और भी बहुत कुछ थे, बहुत कुछ करते थे, काफी कुछ करना चाहते थे. सब कुछ दूसरों के लिए, अपने लिए न तो किसी सम्मान की मांग की और न किसी पुरस्कार के लिए संघर्ष किया. जीवन भर दूसरों के लिए ही सिफारिशें करते रहे, लड़ते रहे. मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया में भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी अदालती लड़ाई तो तब देश भर में चर्चा का विषय बन गई थी.
नशामुक्ति के लिए किया काम
डॉ भल्ला मूलतः एक मनोचिकित्सक थे. इस नाते वे एक बड़ी संख्या में ऐसे मरीजों के संपर्क में आए जो दिल्ली की गलियों में चलने वाले नशे के अवैध व्यापार के शिकार हो रहे थे. ऐसे लोगों की व्यथा का अध्ययन कर उन्होंने नशामुक्ति के लिए काम किया. इस दिशा में उनका सबसे बड़ा योगदान दूरदर्शन के लिए ‘ अंधी गलियाँ ‘ नामक शृंखला की प्रस्तुति था, जिसमें नशे के व्यापार और उससे पीड़ित लोगों की सच्ची कहानियों को उन्होंने देश के सामने उजागर किया.
ऐसे याद आएंगे डॉ. भल्ला
डॉ भल्ला की कमी उन तमाम स्नेहियों को अब खलने वाली है, जो राजधानी पहुँचते ही पहला फोन उन्हें करके कहते थे : ‘भैया मैं दिल्ली पहुँच गया हूँ. मुलाकात कब और कहाँ हो सकती है?’ शेर उर्दू का यह है कि शमा हर रंग में जलती है सहर होने तक, डॉ भल्ला ऐसे परवाने थे जो जिंदगी की शाम होने तक अपने आपको हर रंग में जलाते रहे. डॉ भल्ला के बिना दिल्ली में इंदौर और मालवा की सांस्कृतिक खुशबू की कल्पना नहीं की जा सकेगी.
लेखक-श्रवण गर्ग
पूर्व केंद्रीय वित्त और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा और संदीप भामर द्वारा लिखित 'India’s Green Startups' भारत के ग्रीन नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र पर एक गहरी नजर डालती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में ग्रीन स्टार्टअप्स का तेजी से बढ़ता हुआ इकोसिस्टम जलवायु संकट से निपटने और देश को एक टिकाऊ भविष्य की ओर ले जाने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है. इस संदर्भ में पूर्व केंद्रीय वित्त और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा और ग्रीन फ्रंटियर कैपिटल के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर संदीप भामर ने मिलकर 'India’s Green Startups' पुस्तक लिखी है. यह पुस्तक ग्रीन नवाचार की दिशा में भारत की कोशिशों को प्रदर्शित करती है. यह पुस्तक इस बात पर ध्यान केंद्रित करती है कि कैसे ग्रीन स्टार्टअप्स जलवायु परिवर्तन के समाधान में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और भारत की अर्थव्यवस्था को टिकाऊ बनाने में मदद कर रहे हैं.
भारत के ग्रीन स्टार्टअप्स की दिशा
भारत के ग्रीन स्टार्टअप्स' पुस्तक को 21 जनवरी, 2024 को लॉन्च किया गया. इसे चिकी सरकार की लीडरशिप वाले जगर्नॉट बुक्स (Juggernaut Books) ने प्रकाशित किया है और इसमें इंफोसिस (Infosys) के सह-संस्थापक और यूआईडीएआई आधार के संस्थापक अध्यक्ष नंदन निलेकणी का एक प्रेरक प्रस्तावना है. पुस्तक में ग्रीन स्टार्टअप्स के साथ-साथ उनके उद्यमियों की यात्रा का भी वर्णन किया गया है, जिन्होंने व्यवसायिक समझ और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को एक साथ जोड़ा है. इसमें 14 ऐसे अग्रणी उद्यमियों की कहानियाँ हैं जिन्होंने पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान किया और व्यापार को एक स्थिर मार्ग पर रखा.
जलवायु संकट से निपटने के लिए ग्रीन स्टार्टअप्स जरूरी
जयंत सिन्हा, जिन्होंने 2021 में भारत का पहला नेट-जीरो विधेयक पेश किया था, पुस्तक में नीति और सततता पर गहरी अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं. वहीं, संदीप भामर ने प्रारंभिक स्तर के ग्रीन निवेश अनुभव और सतत उद्योगों में नवाचार को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता साझा करते हैं. दोनों मिलकर भारत के ग्रीन क्रांति की दिशा में स्टार्टअप्स की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करते हैं और यह दर्शाते हैं कि कैसे ग्रीन स्टार्टअप्स जलवायु संकट से निपटने के लिए सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं. यह पुस्तक उन उद्यमियों की यात्रा को दर्शाती है जिन्होंने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संकट से निपटने के लिए नए दृष्टिकोण और अभिनव समाधान प्रस्तुत किए हैं.
पुस्तक को लेकर प्रतिक्रिया
इस पुस्तक को व्यापार, शिक्षा और खेल जगत के कई प्रमुख व्यक्तियों से सराहना मिली है, जिनमें रजत गुप्ता, विनोद खोसला, अमिताभ कांत, प्रोफेसर तरुण खन्ना, महेन्द्र सिंह धोनी, और ऋतु मर्त्या जैसी प्रमुख हस्तियाँ शामिल हैं. पूर्व क्रिकेटर और एंजल निवेशक महेन्द्र सिंह धोनी ने टिप्पणी की है कि यह पुस्तक उन साहसी विचारों को उजागर करती है जो भारत के युवाओं के लिए एक सतत कल का निर्माण कर रहे हैं. जयंत सिन्हा ने कहा कि भारत के ग्रीन स्टार्टअप्स जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में साहसिक दृष्टिकोण और अभूतपूर्व समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं. यह पुस्तक उनके महत्वपूर्ण योगदान का प्रमाण है जो हमारे लिए एक सतत भविष्य सुनिश्चित कर रहे हैं. संदीप भामर ने कहा, यह पुस्तक उन उद्यमियों का उत्सव है जो नवाचार और दृढ़ता के साथ जलवायु संकट का समाधान कर रहे हैं, यह साबित करते हुए कि लाभ और सततता साथ-साथ चल सकते हैं. जगर्नॉट बुक्स की संस्थापक चिकी सरकार ने कहा, "भारत के ग्रीन नवप्रवर्तकों की यात्राओं को chronicling करते हुए, जयंत और संदीप ने एक ऐसी कथा तैयार की है जो प्रेरणादायक, समयसिद्ध और गहरे प्रभाव वाली है.
यहां मिलेगी पुस्तक
'India’s Green Startups' अब अमेजन और SapnaOnline पर उपलब्ध है, और यह पुस्तक बुकस्टोर्स में भी उपलब्ध है. बता दे, जयंत सिन्हा एक प्रतिष्ठित निवेशक और विचारशील नेता हैं. वह भारत के पूर्व केंद्रीय मंत्री और दो-बार के लोकसभा सांसद रह चुके हैं, जिनका सार्वजनिक नीति और सततता में व्यापक अनुभव है. वहीं संदीप भामर ग्रीन फ्रंटियर कैपिटल के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर हैं, जो प्रारंभिक चरण के क्लाइमेट-टेक निवेशों पर ध्यान केंद्रित करने वाली एक वेंचर कैपिटल फर्म है.
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केरल के कोझिकोड के समुद्र तट पर आयोजित होने वाले केरल साहित्य महोत्सव के आठवें संस्करण में साहित्य, कला और सांस्कृतिक आदान-प्रदान होगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जनवरी 2025 में केरल साहित्य महोत्सव (KLF) के आठवें संस्करण का आयोजन केरल के कोझीकोड में होगा. इस महोत्सव में 500 से अधिक वक्ताओं की उपस्थिति की उम्मीद है और यह 6,00,000 से अधिक आगंतुकों को आकर्षित करने का अनुमान है. हाल ही में इस महोत्सव की शुरुआत दिल्ली में लेखक और राजनेता डॉ. शशि थरूर द्वारा आयोजित एक 'कर्टन रेजर' इवेंट के साथ की गई. इस दौरान फ्रांस को अतिथि राष्ट्र के रूप में नामित किया गया है, जो महोत्सव के अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण को प्रदर्शित करता है.
कर्टेन रेजर इवेंट में इन लोगों ने की शिरकत
कर्टेन रेजर इवेंट में राजनयिकों, प्रकाशकों और लेखक मौजूद हुए और उन्होंने आगामी महोत्सव के वैश्विक महत्व पर ध्यान केंद्रित किया. यूनेस्को के अधिकारी, जिनमें संस्कृति विभाग की प्रमुख जूनही हान और र्यक्रम अधिकारी आनंद कानितकर भी मौजूद रहे. कोझीकोड का यूनेस्को सिटी ऑफ लिटरेचर के रूप में दर्जा इस अवसर की प्रतिष्ठा को और बढ़ाता है, जो शहर की सांस्कृतिक महत्ता को उजागर करता है. इस दौरान फ्रांस, यूएई, लिथुआनिया, मोरक्को, तुर्की, श्रीलंका, न्यूजीलैंड, नॉर्वे, आयरलैंड, कनाडा और रूस जैसे देशों के राजदूत भी मौजूद रहे.
ये देश और वक्ता होंगे शामिल
यह महोत्सव 15 अन्य देशों के प्रतिभागियों की मेजबानी करेगा, जिनमें यूके, स्पेन, जर्मनी, श्रीलंका, यूएसए, सिंगापुर, यूएई, सऊदी अरब, ग्रीस, मिस्र, तुर्की, इज़राइल, लातविया और स्वीडन शामिल हैं. सत्रों में साहित्य, विज्ञान, राजनीति से लेकर स्वास्थ्य, सिनेमा, लिंग मुद्दों और अर्थव्यवस्था तक के विषयों पर चर्चा की जाएगी. वहीं, वक्ताओं में प्रसिद्ध इतिहासकार रामचंद्र गुहा और विलियम डलरिंपल, बांसुरी वादक हरिप्रसाद चौरसिया, वायलिनिस्ट डॉ. एल. सुब्रमणियम, लेखक फ्रांसेस मिराल्लेस और गोंकौर्ट अकादमी के सदस्य फिलिप क्लाउडेल जैसे लोग शामिल हैं. इस सूची में नोबेल पुरस्कार विजेता, बुकर पुरस्कार विजेता और अन्य अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक व्यक्तित्व भी होंगे.
फ्रांस होगा अतिथि देश
इस वर्ष फ्रांस अतिथि देश होगा, जो उत्सव की अंतर्राष्ट्रीय अपील को बढ़ाएगा. महोत्सव का फोकस अंतर-सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर होगा, विशेष रूप से फ्रांस की कला और साहित्यिक योगदानों पर जोर दिया जाएगा. उपस्थित लोग फ्रांसीसी संस्कृति के रोमांचक प्रदर्शन का आनंद ले सकते हैं, जिसमें विशेष सत्रों में प्रसिद्ध फ्रांसीसी लेखक, बुद्धिजीवी और कलाकार भाग लेंगे. यह उत्सव प्रेरक साहित्यिक पैनल और आकर्षक सांस्कृतिक चर्चाएँ प्रदान करेगा, जो फ्रांस की समृद्ध कलात्मक विरासत को देखने का अवसर प्रदान करेगा. आगंतुक देश की गहरी साहित्यिक और कलात्मक परंपराओं को उजागर करने वाली वार्ता और कार्यक्रमों की एक श्रृंखला के माध्यम से खुद को फ्रांसीसी भाषा, कला और दर्शन में डुबो सकते हैं, जिससे केएलएफ द्वारा पोषित वैश्विक संवाद समृद्ध होगा.
वैश्विक साहित्य और सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा
यह महोत्सव वैश्विक साहित्यिक और सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में देखा जाता है. केएलएफ के मुख्य आयोजक रवि डीसी के अनुसार, इस इवेंट का उद्देश्य एक समावेशी स्थान प्रदान करना है, जहां विचारों का आदान-प्रदान सीमाओं को पार करता है.
01 अप्रैल 1928 को प्रकाशित, यह प्रमुख कॉमिक मगही उपन्यास हाल ही में कवि और राजनयिक अभय के द्वारा अंग्रेजी में अनुवादित किया गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
काफी समय से समलाल के मन में राय बहादुर बनने का सपना पल रहा था. हालांकि वह भली-भांति जानता था कि वह इस पद के योग्य नहीं है, फिर भी उसे अपने चापलूसी की कला पर पूरा विश्वास था. यह उद्धरण मगही साहित्य के रत्न ‘फूल बहादुर’ (Fool Bahadur) से है, जो मूल रूप से भारतीय लेखक जयनाथ पति द्वारा मगही भाषा में लिखा गया है. यह उपन्यास ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बिहार शरीफ के शहरी जीवन पर एक व्यंग्य है, जो कानून और नौकरशाही में कार्यरत लोगों की मूर्खतापूर्ण आकांक्षाओं और जीवन को दर्शाता है.
नौकरशाही और न्यायपालिका में फैले भ्रष्टाचार को उजागर करता उपन्यास
कहानी का केंद्र है मुख्य पात्र मुख्तार बाबू समलाल की महत्वाकांक्षाएं और उनका वह सफर, जिसमें वह तत्कालीन चर्चित 'राय बहादुर' का खिताब प्राप्त करने की कोशिश करता है. उपन्यास में अन्य महत्वपूर्ण पात्रों में एक नवाब, एक सर्कल अधिकारी और एक दरबारी महिला हैं. लेखक ने अपनी सजीव और हास्यपूर्ण लेखनी से एक छोटे और बेईमान मुख्तार के जीवन को पेश किया है, जो किसी भी हाल में यह खिताब हासिल करना चाहता है. कहानी उस समय की नौकरशाही और न्यायपालिका में व्याप्त व्यापक भ्रष्टाचार को उजागर करती है, जैसा कि नवाब के शब्दों से स्पष्ट होता है: "मैं वादा करता हूं कि तुम्हें राय बहादुर बना दूंगा, और अगर ऐसा नहीं हुआ, तो मैं अपने हाथ काट लूंगा. इसके बदले, तुम्हें मेरी मदद करनी होगी." यह दिलचस्प है कि लेखक ने यह सुनिश्चित किया कि अंत हास्यपूर्ण और मनोरंजक हो, जबकि यह जीवन के पूर्ण चक्र को दर्शाते हुए एक शिक्षा भी दे कि आखिरकार न्याय मिलता है.
उपन्यास में वर्णित भ्रष्टाचार और पितृसत्ता आज भी प्रासंगिक
यह उपन्यास 01 अप्रैल 1928 को पहली बार प्रकाशित हुआ था और हाल ही में इसे कवि और राजनयिक अभय के द्वारा अंग्रेजी में अनुवादित किया गया. यह पहला मगही उपन्यास है जो अंग्रेजी में अनुवादित हुआ है, और अब पेंगुइन मॉडर्न क्लासिक के रूप में प्रकाशित होने के बाद, यह साहित्य के इस अमूल्य खजाने को नए जीवन के साथ एक बड़ी दर्शक वर्ग तक पहुंचाएगा. लेखक के ही गृह राज्य से आने वाले, उनकी मातृभाषा में रुचि रखने वाले और एक नौकरशाह के रूप में अभय का इस विशिष्ट क्लासिक में गहरी रुचि होना स्वाभाविक है. उपन्यास में ब्रिटिश राज काल में एक युवा वकील की सामाजिक ऊँचाइयों को छूने की दौड़, वही आज के समय की तरह ही है. उपन्यास में वर्णित न्यायिक और नौकरशाही भ्रष्टाचार और पितृसत्ता आज भी प्रासंगिक है, जिससे यह जयनाथ पति द्वारा लिखा गया व्यंग्य आज भी हमारे समाज में असर डालता है. उस समय की पितृसत्ता का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि जब फूल बहादुर का पहला संस्करण प्रकाशित हुआ था, तो उपन्यास के कवर पेज पर "महिलाओं और बच्चों के लिए नहीं" लिखा था. हालांकि हम इस मामले में काफी आगे बढ़ चुके हैं, फिर भी समाज के हर स्तर पर भ्रष्टाचार को रोकने में अभी लंबा रास्ता तय करना है.
राजा अशोक के दरबार की आधिकारिक भाषा थी मगही
इस किताब का एक और दिलचस्प हिस्सा है उसका विस्तृत अनुवादक नोट, जो उपन्यास की प्रस्तावना के रूप में दिया गया है. यह नोट पाठकों को मगही साहित्य के महान इतिहास और उत्पत्ति के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करता है. यह भी बताता है कि कैसे अनुवादक को जून 2020 के बाद ही मगही साहित्य के अस्तित्व का पता चला, जो अब तक उनके लिए अज्ञात था. यह घटना उस समय की है जब उन्होंने अपनी मातृभाषा से जुड़ने के प्रयास में एक कविता लिखी थी, जिसके बाद लोगों ने उन्हें मगही साहित्य के उस खजाने के बारे में बताया जो अब तक अनुवादित और खोजा नहीं गया था. यह माना जाता है कि बुद्ध और महावीर ने मगधी प्राकृत में अपने उपदेश दिए थे, जो बाद में मगही भाषा का रूप बन गई. इसके अलावा, मगही राजा अशोक के दरबार की आधिकारिक भाषा भी थी. इस समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई धरोहर का हिस्सा होना वाकई गर्व की बात है और इसे दुनिया के सामने लाने का श्रेय अभय के ही पास है, जिन्होंने सबसे पहले मगही उपन्यास का अंग्रेजी अनुवाद प्रस्तुत किया.
लेखक का परिचय
अभय एक राजनयिक कवि, अनुवादक और मुस्कुराते हुए संपादक हैं और उन्होंने कई काव्य संग्रह लिखे हैं. उनकी कविताएं एशिया लिटरेरी रिव्यू और पोएट्री साल्जबर्ग रिव्यू जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं. उन्हें 2020-21 में कालिदास की ऋतु संहार और मेघदूत के अनुवादों के लिए केएलएफ पोएट्री बुक ऑफ द ईयर पुरस्कार भी मिला. उन्हें 2013 में साउथ एशियन आर्ट्स एंड कल्चर के लिए साअर्क साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया और उनकी कविताएं वॉशिंगटन डीसी स्थित लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस में रिकॉर्ड की गईं. इस योग्यता और मातृभाषा के साहित्य को दुनिया के मानचित्र पर लाने की इच्छा के साथ, हम उम्मीद कर सकते हैं, कि वह दिन दूर नहीं जब मगही को अपनी उचित पहचान मिलेगी और साहित्य का यह अमूल्य खजाना सभी के लिए सुलभ होगा. अभय के शब्दों में यह भावना स्पष्ट रूप से व्यक्त होती है, जब वह अनुवादक नोट में लिखते हैं: "मुझे आशा है कि फूल बहादुर का अंग्रेजी अनुवाद प्रकाशित होने से मागही साहित्य की समृद्ध दुनिया पर अधिक ध्यान दिया जाएगा और आने वाले वर्षों में मागही साहित्य के और भी काव्य कार्यों का अनुवाद किया जाएगा."
सैमसंग को भारत में कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, खासतौर पर कंपनी का मोबाइल कारोबार प्रभावित हुआ है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय मोबाइल बाजार में कई विदेशी कंपनियां मौजूद हैं. दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग (Samsung) भी काफी समय में भारत में कारोबार कर रही है. हालांकि, पिछला कुछ समय उसके लिए परेशानियों भरा रहा है. कंपनी की सेल्स के आंकड़े लगातार नीचे आ रहे हैं और अब इस इसका असर उसके कर्मचारियों पर पड़ने वाला है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो सैमसंग ने भारत में छंटनी का फैसला लिया है.
यहां चलेगी कैंची
छंटनी की जद में कंपनी के सेल्स, मार्केटिंग और ऑपरेशंस से जुड़े कर्मचारी आ सकते हैं. कहा तो यहां तक जा रहा है कि सैमसंग के भारत में जितने कर्मचारी हैं, उनमें से 20 फीसदी तक की छुट्टी हो सकती है. हालांकि, Samsung की तरफ से इस बारे में अब तक कोई बयान सामने नहीं आया है. रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सैमसंग अपने स्मार्टफोन, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और होम एप्लाएंसेज कारोबार के ढांचे में बदलाव कर रही है. इसके चलते कंपनी कुछ प्रमुख एग्जीक्यूटिव्स की भी छुट्टी कर सकती है. गौर करने वाली बात यह है कि एग्जीक्यूटिव्स के जो पद खाली पड़े हैं उन्हें भी नहीं भरा जा रहा है.
चेन्नई प्लांट में हड़ताल
सैमसंग में छंटनी की खबर ऐसे समय सामने आई है जब उसके चेन्नई स्थित मैनुफैक्चरिंग प्लांट के कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. इस हड़ताल के चलते कंपनी का उत्पादन प्रभावित हो रहा है. फेस्टिवल सीजन में मोबाइल के साथ-साथ टीवी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसे उत्पादों की जमकर बिक्री होती है. यदि हड़ताल जल्द खत्म नहीं होती, तो सैमसंग को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा. स्थिति की गंभीरता को समझते हुए सैमसंग के मैनेजमेंट ने भारतीय अधिकारियों को दक्षिण कोरिया बुलाया है.
कई परेशानियां एक साथ
मोबाइल सेक्टर में सैमसंग को भारत में मौजूद चीनी कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल रही है. एक मार्केट रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून 2024 तिमाही में वॉल्यूम के हिसाब से सैमसंग तीसरे स्थान पर खिसक गई है. इस दौरान कंपनी के स्मार्टफोन शिपमेंट्स में 15.4% की कमी आई है. सैमसंग एक साथ कई मोर्चों पर परेशानियों का सामना कर रही है. शाओमी और वीवो जैसे ब्रैंड उसके सामने कड़ी प्रतियोगिता पेश कर रहे हैं. ऑफलाइन रिटेलर्स के साथ कंपनी का विवाद चल रहा है. इसके अलावा, सेल्स और मार्केटिंग के कुछ टॉप एग्जीक्यूटिव्स से कंपनी छोड़ने से सैमसंग की दिक्कतें बढ़ी हैं.
RBI गवर्नर ने बैंकों और फाइनेंशियल सेक्टर में महिला कर्मचारियों की संख्या में इजाफा करने के लिए महिलाओं को और अधिक रोजगार देने पर जोर दिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अगर आप एक महिला हैं और नौकरी की तलाश में तो ये खबर आपके लिए बहुत जरूरी है. दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों में महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा नौकरी देने की बात कही है. इसके लिए आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने खुद बैंकों को निर्देश दिए हैं. तो चलिए जानते हैं आरबीआई ने ऐसा क्यों कहा है और इससे महिलाओं को कितना फायदा होगा?
हर नागरिक को वित्तीय साक्षरता हासिल हो
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने एक बयान में कहा कि वित्तीय क्षेत्र महिलाओं को अधिक रोजगार के अवसर देकर और महिला-संचालित उद्यमों के लिए खास योजनाएं लाकर महिला-पुरुष असमानता को कम करने में मदद कर सकता है. दास ने इंडियन बैंक एसोसिएशन और फिक्की के एक संयुक्त सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर नागरिक की सामाजिक-आर्थिक स्थिति से परे वित्तीय सेवाओं तक पहुंच हो और उसे जरूरी वित्तीय साक्षरता भी हासिल हो.
वर्क फोर्स में महिलाओं की संख्या बढ़ाने के लिए करना होगा ये काम
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारत में महिलाओं की वर्क फोर्स में भागीदारी वैश्विक औसत की तुलना में काफी कम है, ऐसे में उन्हें अधिक रोजगार देने की जरूरत है. इस फासले को कम करने के लिए लड़कियों की शिक्षा, कौशल विकास, कार्यस्थल पर सुरक्षा और सामाजिक बाधाएं दूर करने की दिशा में प्रयास करने होंगे. आरबीआई गवर्नर ने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मझोली इकाइयों (MSMEs) का पांचवां हिस्सा महिलाओं के नियंत्रण में होने के बावजूद महिला उद्यमियों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. वित्तीय क्षेत्र को महिला-पुरुष असमानता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है. मददगार नीतियां लाकर, महिलाओं के लिए खास वित्तीय उत्पाद पेश कर और वित्तीय-प्रौद्योगिकी नवाचार के सहारे वित्तीय पहुंच को आसान बनाकर ऐसा किया जा सकता है.
अधिक संख्या में बैंक सखियों को जोड़ने का काम करें बैंक
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि इस काम को वित्तीय संस्थानों में अधिक महिलाओं को रोजगार देकर और महिला-संचालित उद्यमों के लिए खासतौर पर तैयार वित्तीय उत्पाद लाकर पूरा किया जा सकता है. उन्होंने बैंकों को अधिक संख्या में बैंक सखियों को अपने साथ जोड़ने का सुझाव भी दिया.
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सोशल मीडिया पर वायरल हुए उनके वीडियो में लोग ये भी सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर उन्हें होम कैडर कैसे मिल सकता है. लोग कई तरह के सवाल उठा रहे हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
महाराष्ट्र बैच की ट्रेनी आईएएस अधिकारी डॉ. पूजा खेड़कर इन दिनों सोशल मीडिया में अपनी मांगों और पिता की आय को लेकर गलत जानकारी देने को लेकर विवादों में बनी हुई हैं. उनकी इस मांग और व्यवहार के बाद पूजा का तबादला कर दिया है. उन्होंने पुणे में तैनाती के दौरान अपनी गाड़ी के वीआईपी नंबर और सेपरेट ऑफिस की मांग की थी जिसे पूरा नहीं किया जा सकता था. वहीं दूसरी ओर उनके मॉक इंटरव्यू का वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें पता चलता है कि पॉलिटिकल पार्टी के नेता बेटी होने के बावजूद उन्होंने उनकी आय को जीरो बताया है.
आखिर क्या है ये पूरा मामला?
2023 बैच की महाराष्ट्र कैडर की आईएएस अधिकारी पूजा ने 821वीं रैंक हासिल की है. पूजा पर अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगा है. उन पर आरोप है कि वो अपनी ऑडी कार में लाल और नीली बत्ती के साथ-साथ महाराष्ट्र सरकार का चिन्ह लगाकर चलती हैं. सोशल मीडिया पर उनका ये वीडियो वायरल होते ही पूणे कलेक्टर ने उनका तबादला वाशिम में कर दिया. एक ट्रेनी प्रशासनिक अधिकारी होने के साथ उन्होंने सरकार से इन सुविधाओं की मांग की थी. उन्हें इस साल मार्च में ही पुणे कलेक्टर कार्यालय में ज्वॉइन किया था. उनका कार्यकाल जुलाई 2025 में खत्म होना था.
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पिता की आय को लेकर भी पूजा सवालों के घेरे में
पूजा खेड़कर के विवादों का समाधान यही नहीं होता है. पूजा के मॉक इंटरव्यू का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें इंटरव्यू करने वाले अधिकारी उनसे कह रहे हैं कि आपने अपने पिता की आय जीरो बताई है. इसका जवाब देते हुए पूजा कहती हैं कि उनके माता पिता अब अलग हो चुके हैं और उनके पिता एक सिविल सर्वेंट हैं और वो उनके संपर्क में नहीं हैं. उनके इस वीडियो पर सोशल मीडिया में जबरदस्त प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. कोई उनके चयन को फर्जी बता रहा है तो कोई उनकी डिसएबिलिटी सर्टिफिकेट पर सवाल उठा रहा है.
IAS Officer Dr.Pooja Khedkar issue needs to be investigated as the huge anger amongst the UPSC/MPSC aspirants. Now this video clip (of her mock interview taken by her coaching academy) gets viral on social media. If what’s she says is true then, she might have escaped the crème… pic.twitter.com/sKJTBgQGdE
— Ashish Jadhao (@ashish_jadhao) July 10, 2024
लेकिन पिता के पास है 40 करोड़ की संपत्ति
पूजा खेड़कर ने भले ही अपने पिता की आय को जीरो बताया हो लेकिन हाल ही में उनके पिता ने लोकसभा का चुनाव लड़ा था. उनके पिता ने चुनाव आयोग में जमा कराए अपने हलफनामे में अपनी 40 करोड़ रुपये की अनुमानित संपत्ति और 49 लाख रुपये की आय दिखाई है. पूजा पर ये भी आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने अपनी विक्लांगता से लेकर अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र जमा की थी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जब पूजा को उनकी विक्लांगता को साबित करने के लिए एम्स द्वारा सत्यापन के लिए बुलाया गया तो उन्होंने कोविड का हवाला देकर जाने से मना कर दिया.