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एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट की खाई ने बढ़ाया व्यापार घाटा, जानें क्या होगा असर

भारत का निर्यात जून में 16.8% बढ़ा है, जबकि आयात में 51% की बढ़ोतरी हुई है. यानी बाहर से आने वाले सामान में ज़बरदस्त इजाफा दर्ज किया गया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

क्या अगले कुछ सालों में भारतीय अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर की हो पाएगी? ये मौजूदा वक्त में सबसे बड़ा सवाल है. क्योंकि डॉलर के मुकाबले हमारी रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और मजबूती के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे. इसके अलावा हमारे व्यापार घाटे में भी बढ़ोत्तरी हो रही है. 

मुश्किल, पर असंभव नहीं
अभी हमारी अर्थव्यवस्था 2.73 ट्रिलियन डॉलर के साथ छठे नंबर पर है. जबकि 4.97 ट्रिलियन डॉलर के साथ जापान तीसरे और जर्मनी 3.99 ट्रिलियन डॉलर के साथ चौथे नंबर पर है. यानी हमें जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए जापान के करीब जाना है. कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि टारगेट मुश्किल ज़रूर है लेकिन असंभव नहीं. लेकिन इसके लिए कई मोर्चों पर एकसाथ काम करना होगा. जिसमें बढ़ते व्यापार घाटे को रोकना और रुपए की आर्थिक सेहत संभालना भी शामिल है.

क्या है व्यापार घाटा?
सरल शब्दों में कहें तो व्यापार घाटे का मतलब है कि हम अपनी ज़रूरत का सामान लगातार बाहर से मंगवा रहे हैं, लेकिन खुद कुछ ऐसा तैयार नहीं कर रहे, जो दूसरे देशों को खरीदने के लिए प्रेरित करे. यानी कि हम इम्पोर्ट ज्यादा कर रहे हैं और उसकी तुलना में एक्सपोर्ट कम.   

क्या होगा असर?
जब आयात-निर्यात के बीच खाई बढ़ती है तो उसका सीधा असर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है, वो भरने के बजाए खाली होता जाता है. जो अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी स्थिति नहीं है. ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि आखिर विदेशी मुद्रा भंडार क्या है? विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश के केंद्रीय बैंक में रखी गई धनराशि या अन्य परिसंपत्तियों को कहते हैं, जिनसे वह ज़रूरत अनुसार अपनी देनदारियों का भुगतान कर सकता है. विदेशी मुद्रा भंडार ज्यादातर डॉलर और कुछ हद तक यूरो में रखा जाता है. विदेशी मुद्रा भंडार में इजाफे से रुपए को डॉलर के मुकाबले मजबूत करने में भी मदद मिलती है.

इनके आयात में तेजी
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का निर्यात जून में 16.8% बढ़ा है जबकि आयात में 51% की बढ़ोतरी हुई है. यानी बाहर से आने वाले सामान में ज़बरदस्त इजाफा दर्ज किया गया है. अब ये भी समझ लेते हैं कि ये किस के इम्पोर्ट में वृद्धि हुई. वैसे तो देश हमेशा ही कच्चे तेल के आयात पर निर्भर रहा है लेकिन जून में इसका आयात 94.2 % बढ़कर 20.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया. सोने की मांग बढ़ने से जून में इसका आयात 169 फीसदी बढ़कर 2.6 अरब डॉलर हो गया. इसके अलावा, कोयले के आयात में भी इजाफा हुआ जो 248% बढ़कर 6.4 अरब डॉलर रहा. दरअसल, कोयला उत्पादन में कमी के कारण सरकार ने बिजली उत्पादक कंपनियों को देसी कोयले में कम से कम 10 प्रतिशत आयातित कोयला मिलाने का निर्देश दिया था. इसी वजह से इसके आयात में बढ़ोत्तरी हुई.

इनका निर्यात हुआ कम
वहीं, दूसरी तरफ भारत के टॉप-10 निर्यात होने वाले उत्पादों में गिरावट देखने को मिली है. रिपोर्ट बताती है कि पिछले साल इंजीनियरिंग गुड्स का निर्यात में सबसे महत्वपूर्ण योगदान था और इस बार इसमें 1.6% की गिरावट आई है. ड्रग्स और फार्मा उत्पाद के निर्यात में भी 1.3% की कमी रिकॉर्ड की गई है. इसके अलावा, कॉटन और हैंडलूम उत्पाद के निर्यात में 22.5 प्रतिशत, प्लास्टिक और लिनोलियम के निर्यात में 23.2 प्रतिशत की गिरावट आई है.
 


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