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बंद होने के कगार पर पहुंची MSME कंपनियां, जानिए इसके पीछे का बड़ा कारण क्या है?

इस वृद्धि को घटा भी नहीं सकते हैं, जिसकी वजह से भारत में थोक महंगाई दर 17 साल के इतिहास में बहुत तेजी से बढ़ गई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्लीः विश्व स्तर पर जारी यूक्रेन संकट और डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमतों के बीच बिजली और कच्चे माल की कीमतों में बेहताशा वृद्धि हुई है, जो छोटे कारोबारियों के लिए काफी बड़ा खतरा लेकर के आई है. इस वृद्धि को घटा भी नहीं सकते हैं, जिसकी वजह से भारत में थोक महंगाई दर 17 साल के इतिहास में बहुत तेजी से बढ़ गई है.

कोरोना की वापसी भी एक मुद्दा

महंगाई के बढ़ने और कोरोना के रह-रहकर वापस आने के डर की वजह से भी छोटे उद्योगों पर असर पड़ा है. भारत की थोक महंगाई दर इस साल मई के महीने में 15.88 फीसदी रही जो पिछले साल इसी दौरान 13.11 फीसदी रही थी. यह अप्रैल 2013 के बाद जो नई सीरीज शुरू हुई है के इतिहास में सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ गई है. भारत के SME Forum के अध्यक्ष विनोद कुमार के मुताबिक बड़े उद्योग जहां अपने प्रॉफिट मार्जिन को स्थिर रखने के लिए कीमतों में वृद्धि कर सकते हैं, वैसा छोटे उद्योग नहीं कर सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि उनको अपने प्रोडक्ट की डिमांड और बिक्री कम होने का खतरा रहता है. ऐसे में उनको मुनाफा न के बराबर रह जाता है, जो उनको व्यापार चलाने में मदद नहीं करता है.

ओपरेटिंग खर्चों में 24 फीसदी का उछाल

कच्चे माल की कीमतों में उछाल की वजह से छोटे उद्योगों की ऑपरेटिंग कॉस्ट में 24 फीसदी का उछाल आ गया है. वहीं कच्चे माल की कीमतों में चालू वित्त वर्ष में 37 फीसदी का उछाल देखने को मिला है. GoBolt के को-फाउंडर सुमित शर्मा का कहना है कि प्रॉफिट मार्जिन कीमतों में उछाल के कारण काफी कम हो गया है. नुकसान को कम करने के लिए हमें भी अपनी कीमतों में वृद्धि करनी होगी, ताकि व्यापार करने में ज्यादा घाटा न हो.

58 फीसदी खर्चा कच्चे माल की खरीद पर

ज्यादातर छोटे उद्योगों का 58 फीसदी खर्चा केवल कच्चे माल की खरीद में होता है. मैटेरियल कॉस्ट में खर्चा फिलहाल 58 फीसदी से बढ़कर 69 फीसदी हो गया है. ICCS के मार्केटिंग और कम्यूनिकेशन हेड फैसल करीम ने बताया कि छोटे उद्योगों के लिए पिछले कुछ साल बहुत खराब रहे हैं. पहले कोरोना के चलते लगा लॉकडाउन और फिर अब यह महंगाई. छोटे उद्योगों ने अपने खर्चों पर लगाम लगानी शुरू कर दी है ताकि उनका बिजनेस कम लागत पर भी चलता रहे. हालांकि ये लंबे समय तक नहीं चल सकता है, देर-सवेर ऐसी कंपनियों को भी अपने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी करने पर विचार करना होगा.

क्यों हुई है कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी

कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह ये है कि फिलहाल मिनरल ऑयल, क्रूड ऑयल, खाद्य पदार्थ, बेसिक मेटल्स, केमिकल प्रोडक्ट और नॉन फूड आर्टिकल की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई है. रुपये में भी कमजोरी है जो कि इकोनॉमी में और गिरावट लेकर के आ रहा है. इसलिए छोटे उद्योगों को भविष्य में रहने के लिए अपनी नीतियों में बदलाव लाना पड़ेगा तभी वो इस मुश्किल भरे दौर से निकल सकेंगे.


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