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भारत के आर्थिक हालात श्रीलंका-पाकिस्तान जैसे हो जाएंगे? जानें क्या है इसका आधार!
इस दौरान देश के गोल्ड रिजर्व में 1.339 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई. यह 38.303 अरब डॉलर ही रह गया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
अजय शुक्ला
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)
हमें खुश होना चाहिए कि सकल जीएसटी राजस्व अगस्त 2022 में रिकॉर्ड बढ़ा है. सीजीएसटी 24,710 करोड़ रुपये हो गया, जबकि एसजीएसटी 30,951 करोड़ रुपये हो गया है. आईजीएसटी भी बढ़कर 77,782 करोड़ रुपये (माल के आयात से मिले 42,067 करोड़ रुपये सहित) हो गया है. इसी माह में माल के आयात से 1,018 करोड़ रुपये सहित उपकर 10,168 करोड़ रुपये हो गया है.
जीएसटी का आंकड़ा
नियमित निपटान के बाद अगस्त 2022 में केंद्र और राज्यों का कुल राजस्व सीजीएसटी का 54,234 करोड़ रुपये और एसजीएसटी का 56,070 करोड़ रुपये हो गया है. पिछले साल इसी महीने के मुकाबले जीएसटी 28 फीसदी अधिक एकत्र हुआ है. अगस्त 2022 में कुल जीएसटी संग्रह बढ़कर 1.43 लाख करोड़ रुपये हो गया है. यह पिछले महीने जुलाई 2022 में से भी अधिक है. ऐसा इसलिए हुआ है, क्योंकि खाने-पीने की कई चीजों सहित एक डेढ़ दर्जन वस्तुओं पर जीएसटी जुलाई 2022 से लागू कर दिया गया था. इनमें खाद्य पदार्थ जैसे दाल, चावल, आटा, गेहूं समेत सभी अनाज शामिल हैं, पर पांच परसेंट जीएसटी वसूला गया है. अगर कोरोना महामारी से पहले की स्थिति देखें, तो राजस्व की यह वसूली थोपी हुई अधिक और अपेक्षित नहीं है.
निर्यात के क्षेत्र से क्या खबर
निर्यात के क्षेत्र से भी अच्छी खबर नहीं है. अगस्त महीने में देश का निर्यात 1.15 फीसदी घटकर 33 अरब डॉलर रह गया है. इसके साथ ही आयात में तेज बढ़ोतरी हुई है. इसी वजह से भारतीय रिजर्व बैंक की तमाम कोशिशों के बाद भी व्यापार घाटे पर काबू नहीं पाया जा सका है. पिछले 20 महीनों में पहली बार ऐसा हुआ है, जब व्यापार घाटा दोगुने से भी अधिक 28.68 अरब डॉलर हो गया है. वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से यह जानकारी मिली.
देश का व्यापार घाटा
पिछले साल अगस्त 2021 में देश का व्यापार घाटा 11.71 अरब डॉलर रहा था, जो लगातार बढ़ता जा रहा है. ऐसे वक्त में चावल और गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने का फैसला चिंता का समाधान करने के बजाय, बढ़ाने वाला अधिक प्रतीत होता है. वजह साफ है, क्योंकि खाद्यान्न उत्पादन लगातार घट रहा है. मांग और आपूर्ति का अंतर तथा भंडार गृहों में भंडारण कम होता जा रहा है.
विदेशी कर्ज और भी बढ़ गया
पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले भारत का विदेशी कर्ज और भी बढ़ गया है. सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च, 2022 तक भारत का विदेशी कर्ज 620.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो मार्च 2021 के अंत में रहे 573.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर के कर्ज से 8.2 प्रतिशत अधिक है. इस कर्ज में 53.2 प्रतिशत अमेरिकी डॉलर के मूल्य वर्ग में था. वहीं भारतीय रुपये के मूल्य वर्ग का कर्ज 31.2 प्रतिशत अनुमानित था. इसकी बड़ी वजह सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2022 में देश का आयात तेजी से बढ़ा है. यह एक साल पहले की तुलना में 37 फीसदी बढ़कर 61.68 अरब डॉलर हो गया है. इसके साथ ही निर्यात में गिरावट का रुख जारी है. आयात के मुकाबले निर्यात घट कर लगभग आधा रह गया है. इससे पहले नवंबर 2020 में भी यह 8.74 फीसदी गिरा था.
विदेशी मुद्रा भंडार 23 महीने के सबसे न्यूनतम स्तर पर
वहीं, पिछले सप्ताह भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 23 महीने के सबसे न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया. इस दौरान हफ्ते के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार के सभी घटकों में गिरावट दिखी. सबसे ज्यादा कमी फॉरेन करेंसी एसेट में दिखी. आरबीआई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक दो सितंबर को खत्म हुए सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 553.105 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले सप्ताह की तुलना में 7.941 अरब डॉलर कम है. इससे पहले 26 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में यह 561.046 अरब डॉलर था. यानी लगातार घट रहा है.
गोल्ड रिजर्व में भी बड़ी गिरावट
यही नहीं, इस दौरान देश के गोल्ड रिजर्व में 1.339 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई. यह 38.303 अरब डॉलर ही रह गया. वहीं, दूसरी ओर एसडीआर में भी साप्ताहिक आधार पर पांच अरब डॉलर की गिरावट देखी गई. यह भी 17.782 अरब डॉलर ही रहा. सितंबर के पहले सप्ताह में विश्व मुद्रा कोष (आईएमएफ) में देश की रिजर्व स्थिति 2.4 करोड़ डॉलर की गिरावट के साथ 4.902 अरब डॉलर रह गई है.
प्रधानमंत्री के पूर्व आर्थिक सलाहकार ने क्या कहा
प्रधानमंत्री के पूर्व आर्थिक सलाहकार प्रख्यात अर्थशास्त्री कौशिक बसु कहते हैं कि 10 साल पहले हमने अनुमान लगाया था कि भारत की जनसंख्या और प्रति व्यक्ति आय में तेज वृद्धि के कारण भारत 2020 तक सकल घरेलू उत्पाद के मामले में यूके से आगे निकल जाएगा. 2016 के बाद से भारत की प्रति व्यक्ति आय वृद्धि में तेज मंदी के कारण इसमें 2 साल की देरी हुई. मुझे खुशी है कि अब यह बढ़ रही है मगर उस अनुपात में देश की अर्थव्यवस्था डगमगा रही है, क्योंकि आर्थिक असमानता बेहद तेजी से बढ़ी है. अगस्त में भारत की बेरोजगारी दर बढ़कर 8.3% हो गई. सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक यह 12 महीने में सबसे ज्यादा है. इससे अतिरिक्त कठिनाई हो रही है क्योंकि यह उच्च मुद्रास्फीति के बीच हो रहा है. यह वह जगह है जहां हमें सभी नीतिगत ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है.
श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे हो जाएंगे आर्थिक हालात?
जब देश की आर्थिक स्थिति इन हालात को बयां करें, तो यह चिंता लाजिमी है कि क्या भारत के आर्थिक हालात श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे हो जाएंगे. इस हालात पर भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर अर्थशास्त्री रघुराम राजन कहते हैं कि पाक-श्रीलंका जैसे तो नहीं मगर हालात बुरे हो जाएंगे, अगर रचनात्मक और सकारात्मक अर्थ नीतियों को नहीं अपनाया गया. सार्वजनिक संपत्तियों को बेचकर कब तक खाया जा सकता है.
गलती कहां हो रही है, ये पता करना होगा
निश्चित रूप से सरकार को समग्र नीतियों पर सोचना होगा कि गलती कहां हो रही है. वक्त रहते गलती सुधार कर न सिर्फ देश की माली हालत को सुधारा जाए बल्कि नौजवानों को रोजगार देकर समर्थ बनाया जाये. आय-व्यय के संतुलन के साथ ही महंगाई के अनुपात में प्रति व्यक्ति आय को संतुलित किया जाये, तभी कुछ अच्छा हो सकता है. चंद पूंजीपतियों के हाथ में संपत्ति और धन होने से देश का भला नहीं होता है.
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