होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / 'कहां से बात शुरू करूं? मुलायम सिंह यादव की जिन्दगी के इतने छोर और सब उलझे हुए'

'कहां से बात शुरू करूं? मुलायम सिंह यादव की जिन्दगी के इतने छोर और सब उलझे हुए'

वो गरीबी और परेशानी से निकले तो गरीब का दर्द नहीं भूले. जितने उदार मुलायम थे, निर्णय लेने में उतने ही कठोर थे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

डा. सी पी राय 
(स्वतंत्र राजनीतिक चिंतक एवं वरिष्ठ पत्रकार)

नई दिल्ली: मुलायम सिंह यादव के बारे में कहां से बात शुरू करें? उनकी जिन्दगी के इतने छोर हैं और सब उलझे हुए. एक नितांत गरीब घर में और अभाव में पैदा होकर 1967 में विधायक बन जाना और 1977 की सरकार में सहकारिता मंत्री से चला सफर 1989 मे मुख्यमंत्री बनकर रुकता नहीं है, बल्कि बार-बार सरकार बनाता है.

जब पार्टी के 39 सांसद थे
एक समय ऐसा आता है जब पार्टी के 39 सांसद होते हैं और बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और मध्यप्रदेश में भी विधायक हो जाते हैं और लगता था कि पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच जाएगी. फिर एक समय आता है जब पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा जी, मुख्यमंत्री नितीश कुमार, लालू प्रसाद यादव और अजीत सिंह सहित कई लोग उन्हें नेता मान लेते हैं और समाजवादी पार्टी के नाम और झंडे को भी स्वीकार कर लेते हैं. ऐसा हो गया होता तो देश में एक नया विकल्प बन गया होता, पर कुछ लोगों ने साजिशन फेल कर दिया.

गरीब का दर्द नहीं भूले
वो गरीबी और परेशानी से निकले तो गरीब का दर्द नहीं भूले. पहली सरकार में किसानों को तकलीफ दे रही चुंगी माफ कर दिया तो डा लोहिया का अनुसरण करते हुए गरीब और गांव की महिलाओं के शौचालय का मुद्दा प्रमुखता से उठाया. 'दवा, पढाई मुफ्त होगी, रोटी कपड़ा सस्ती होगी' का डा लोहिया का मंत्र उन्हें याद रहा. समाजवादियों की मांग थी कि रोजगार दो या बेरोजगारी भत्ता दो तो उन्होंने वक्त आने पर 12 हजार भत्ता ही नहीं दिया, बल्कि गरीब कन्याओं को 30 हजार कन्याधन भी दिया. उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों को स्कूल कॉलेज बनाने को सरकारी प्रोत्साहन दिया तो किसान की फसल सुरक्षित रहे, इसके लिए कोल्ड स्टोरेज को भी प्रोत्साहित किया. चिकत्सा के क्षेत्र मे बड़ा काम किया तो अपने समय में नौकरियां भी खूब निकालीं.

निर्णय लेने में कठोर थे
जितने उदार मुलायम थे, निर्णय लेने में उतने ही कठोर थे. वो अयोध्या में कानून व्यव्स्था का सवाल हो या सीमा पर पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई हो, वो विचलित नहीं हुए. उन्होंने वैचारिक विरोध को दुश्मनी नहीं माना और विरोधियों का भी सम्मान किया. उनके भी सभी जायज काम किए. मुलायम सिंह में अहंकार रंच मात्र नहीं था और सभी से जुड़े रहना, अपनों को सहेज कर रखना तथा गैरों को अपना बना लेना उनकी विशेषता थी, इसीलिए उन्होंने गरीबी से निकलकर उस उंचाई को छुआ. राजनीतिक तौर पर वो किसी के साथ जो भी व्यवहार करते थे, पर सामजिक सम्मान का ध्यान रखते थे.

पद छीना गया तो अंदर से टूट गए
जब उनका पद छीन लिया गया, उसके बाद वो अंदर से टूट गए थे, पर फिर संभलकर अपने बेटे और अपनी बनाई पार्टी का साथ दिया, पर कहीं न कहीं पार्टी और परिवार में फूट से वो दुखी थे और क्यों न होते, जब एक समय सभी ने उनका साथ छोड़ दिया था. धरतीपुत्र बिरले ही होते हैं और दिल से जुड़कर रिश्ते निभाने वालों का राजनीति में अभाव है. ऐसे में मुलायम सिंह यादव का चले जाना उनके बिना स्वार्थ जुड़े हुए लोगों के लिए एक सदमे के समान है.

Video : 82 साल की उम्र में मुलायम सिंह यादव का निधन


टैग्स
सम्बंधित खबरें

दुनिया ने बनाया युवा संस्कृति का संग्रहालय, भारत को चाहिए ऐसे दर्जनों संग्रहालय

इस संग्रहालय को अलग बनाने वाली बात इसकी वस्तुओं को संग्रहित करने की सोच है. टीम अपने दृष्टिकोण को "बॉटम-अप क्यूरेशन" कहती है, जिसे जानबूझकर हस्तनिर्मित रखा गया है.

16 hours ago

3C फ्रेमवर्क से बंगाल की आर्थिक पुनर्बहाली को मिलेगी नई दिशा

बंगाल की चुनौती संसाधनों की कमी नहीं है. वास्तविक समस्या यह है कि राज्य अपनी मौजूदा संपत्तियों को एक प्रभावी आर्थिक रणनीति में बदलने में विफल रहा है.

22 hours ago

भारत-जापान साझेदारी और मानव-केंद्रित एआई का भविष्य

प्रोफेसर सी. राज कुमार लिखते हैं, 'भारत और जापान एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां वे AI के लिए चौथा और मौलिक मार्ग विकसित कर सकते हैं.

5 days ago

ईरान को ‘अनफ्रीज’ करना: असली चुनौती अब शुरू होगी

सिद्धार्थ अरोड़ा लिखते हैं, 'अमेरिका-ईरान शांति समझौता अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और रिपोर्टों के अनुसार 60 दिनों की अवधि में लगभग 24 अरब डॉलर जारी किए जा सकते हैं. ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यह पैसा जब ईरान पहुंचेगा, तब उसका क्या होगा?'

6 days ago

2026 की तीसरी तिमाही का ज्योतिष: एआई, संघर्ष और वैश्विक परिवर्तन

ज्योतिषाचार्य विक्रम चन्दीरमानी लिखते हैं कि 2026 के पहले छह महीनों के दौरान इनमें से कई विषय पहले ही उभरने लगे हैं. प्रौद्योगिकी कंपनियों के मूल्यांकन को लेकर चिंताएँ लगातार अधिक स्पष्ट होती जा रही हैं. यह चिंता केवल AI से जुड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की कुछ सबसे मूल्यवान निजी कंपनियों, जैसे स्पेसएक्स, के उच्च मूल्यांकन को लेकर भी देखी जा रही है.

1 week ago


बड़ी खबरें

₹860 करोड़ का कोहिनूर सौदा, राज ठाकरे की चुप्पी

एक राजनेता एक रियल एस्टेट सौदे में प्रवेश करता है. एक सरकारी संस्था से जुड़ी वित्तीय कंपनी ₹225 करोड़ का निवेश करती है. फिर वही संस्था ₹135 करोड़ के नुकसान के साथ उस सौदे से बाहर निकलती है.

15 hours ago

मिडिल ईस्ट प्रैक्टिस के लिए प्राइमस पार्टनर्स ने मोहन दोईफोडे को बनाया MD

पूर्व डेलॉइट कंसल्टिंग लीडर GCC क्षेत्र में कंपनी के विस्तार और क्लाइंट संबंधों को देंगे नई दिशा

15 hours ago

GDP से आगे: क्यों भारत की प्रगति का पैमाना सिर्फ आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि खुशहाली और जीवन गुणवत्ता भी होना चाहिए

पूर्व उत्तर प्रदेश मुख्य सचिव और लेखक आलोक रंजन का मानना है कि भारत की विकास यात्रा को केवल आर्थिक उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उनके अनुसार, खुशहाली, जीवन की गुणवत्ता, शिक्षा, स्वास्थ्य और समावेशी विकास को भी प्रगति का महत्वपूर्ण पैमाना बनाया जाना चाहिए.

20 hours ago

Truhome Finance को 3,000 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए सेबी की मंजूरी

कंपनी के कुल एयूएम में 57.37 प्रतिशत हिस्सा हाउसिंग लोन का है, जबकि 39.22 प्रतिशत हिस्सा लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी का है. अन्य ऋण उत्पादों की हिस्सेदारी 3.41 प्रतिशत है.

16 hours ago

दुनिया ने बनाया युवा संस्कृति का संग्रहालय, भारत को चाहिए ऐसे दर्जनों संग्रहालय

इस संग्रहालय को अलग बनाने वाली बात इसकी वस्तुओं को संग्रहित करने की सोच है. टीम अपने दृष्टिकोण को "बॉटम-अप क्यूरेशन" कहती है, जिसे जानबूझकर हस्तनिर्मित रखा गया है.

16 hours ago