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हिंदी दिवस: हिंदी के रथ पर सवार, आज के कारोबार

हर तरह का सामान तथा सेवा बेचने वाली कंपनियों को हिंदी की ताकत का अंदाज़ा है, इसीलिए ज़्यादातर कंपनियां अपने यूजर-इंटरफ़ेस को हिंदी में भी बना रही हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

  • शैलेश भारतवासी, संपादक- हिंद युग्म


इन दिनों किसी भी क़िस्म की वस्तु या सेवा को बेचने का सबसे बड़ा तरीका इंटरनेट ही है. रोजमर्रा की ज़रूरतों के साथ-साथ सहूलियत और लग्जरी से जुड़े सामानों और सेवाओं को ख़रीदने का सबसे सरल रास्ता भी इंटरनेट ही है. ऐप आधारित सेवाओं ने बहुत से नए बिजनेस को जन्म दिया है. भारतीयों में इंटरनेट तथा इंटरनेट आधारित सेवाओं की घुसपैठ का आकलन करने वाले तमाम सर्वेक्षण इस बात की तस्दीक करते हैं कि इंटरनेट और इंटरनेट आधारित सेवाओं को इस्तेमाल करने के मामले में भारतीय यूजर बहुत मज़बूत स्थिति में हैं. तमाम तरह के सर्वेक्षणों का औसत निकालें तो इस समय इंटरनेट पर 20 करोड़ से अधिक ऐसे यूजर हैं, जो हिंदी में ही काम करना पसंद कर रहे हैं. लगभग सभी तरह के सर्वेक्षणों का आकलन है कि आने वाले समय में इंटरनेट पर हिंदी सामग्रियों का शेयर तथा उसे इस्तेमाल करने वालों की संख्या दोनों ही बढ़ेंगे. भारत में 50 करोड़ से अधिक लोगों की पहली भाषा हिंदी है, जो आने वाले समय में बढ़ेगी ही. ऐसे में हिंदी और इंटरनेट का संबंध अभी और प्रगाढ़ होने वाला है.

हिंदी की ताकत का अंदाजा
हर तरह का सामान तथा सेवा बेचने वाली कंपनियों को हिंदी की ताकत का अंदाज़ा है, इसीलिए ज़्यादातर कंपनियां अपने यूजर-इंटरफ़ेस को हिंदी में भी बना रही हैं. मैं अपने आसपास ऐसे बहुत सारे लोगों को देख रहा हूं, जो अमेज़न ऐप को हिंदी में इस्तेमाल करना पसंद करते हैं. मुझे ऐसा लगता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बाज़ार इंटरनेट के रथ पर सवार होकर ही तेज़ी से दौड़ लगा सकता है. इन दिनों शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की घुसपैठ अधिक तेज है, इसलिए ई-कॉमर्स के विस्तार की संभावना ग्रामीण क्षेत्रों में ही अधिक है और बिना हिंदी को अपनाए हिंदीभाषी ग्रामीण क्षेत्रों में किसी भी क़िस्म के कारोबार को बढ़ाना लगभग असंभव है. जबकि ई-कॉमर्स व्यवासय या यूं कह लें कि ऐप आधारित व्यवसाय अभी पूरी तरह से शहरी इलाक़ों में भी व्याप्त नहीं हो पाए हैं, तो हम इस बात का अंदाज़ा लगा सकते हैं कि पूरा ऑनलाइन कारोबार कितना ज़्यादा बड़ा होने वाला है और हिंदी कैसे इन सबमें एक ड्राइविंग फ़ोर्स का काम करने वाली है.

धीरे-धीरे बढ़ रहा है दायरा 
हालांकि, इंटरनेट पर हिंदी की मौज़ूदगी अभी मूल रूप से मनोरंजन या मनोरंजनीय सूचना के रूप में ही अधिक है. यहां मौजूद ज़्यादातर कंटेंट यूजर जनरेटेड हैं और वीडियो फॉरमैट में हैं, लेकिन जनसुलभ सेवाओं के इंटरफ़ेस धीरे-धीरे हिंदी में भी हो रहे हैं, तो बहुत संभव है कि आने वाले समय में इस कारण कारोबार को बल मिले. कोविड-काल ने गांव से लेकर शहर तक इंटरनेट से ख़रीदारी करने के आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी की है, लोगों के मन से डिजिटल भुगतान के साथ-साथ पूर्व भुगतान की हिचक कम हुई है. दुनियाभर में ख़र्च करने की प्रवृत्ति में तेजी ही आई है. ई-कॉमर्स और ऐप आधारित सेवाओं का कारोबार बढ़ा है.

उज्ज्वल है हिंदी का भविष्य
मुझे लगता है कि नए समय के सभी बिजनेस जो भारत में अपने कारोबार को गुणात्मक रूप से बढ़ाना चाहते हैं, उन्हें भारतीय भाषाओं की व्याप्ति को समझना होगा और अपने प्रयोक्ताओं-ख़रीदारों को यह अहसास कराना होगा कि किसी वस्तु, सेवा या तकनीक तक पहुंचने में उनकी भाषा कोई रोड़ा नहीं है. हिंदी का भविष्य कारोबारी दृष्टि से उज्ज्वल दिख रहा है.
 


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