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हिंदी दिवस: 'मजबूत हुई हिंदी अब नई आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रही'

आर्थिक शक्ति का मतलब यह है कि व्यक्ति के जीवन स्तर, देश या व्यवसायों में सुधार करने की क्षमता और हिंदी का यह पक्ष काफी अच्छा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

  • प्रेम शुक्ला, राष्ट्रीय प्रवक्ता, बीजेपी

भारत अनेक भाषाओं का देश है पर इसकी पहचान हिंदी ही है जो कि देश की राजभाषा के रूप में मान्यता प्राप्त है. और हाल के सालों में हिंदी एक आर्थिक शक्ति के रूप में तेजी से बढ़ी है. इसी वजह से संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी को कामकाज की भाषा का पिछले दिनों दर्जा मिला है. भाषा व्यक्ति-व्यक्ति के बीच या दो समूहों के मध्य केवल संपर्क का ही माध्यम नहीं होती. वह संपर्क से आगे बढ़कर उनके मध्य स्नेह का सूत्र भी सुदृढ़ करती है, उनमें अंतरंगता स्थापित कर उनके बीच भ्रातृत्व-भाव, मित्र भाव को भी सजाती-संवारती है. लेकिन हिंदी इन सबसे ज्यादा एक और काम कर रही है. वह लोगों के आर्थिक विकास का भी एक मजबूत जरिया बन गई है.

80 करोड़ लोगों की बोली
इस भूमंडलीकरण के दौर में हिंदी का प्रभुत्व कितनी तेजी से बढ़ रहा है, इसे तब समझ सकते हैं जब आप यह जान लेंगे कि हिंदी कैसे एक नई आर्थिक शक्ति के रूप में तेजी से उभर रही है. इस शक्ति को यदि हिंदी बोलने वाले लोगों की संख्या के संदर्भ में महसूस किया जाए तो दुनियाभर में 80 करोड़ के आसपास लोग हिन्दी बोलते हैं. इंटरनेट पर, सोशल मीडिया पर वर्तमान समय में हिंदी का बोलबाला दिखता है. सर्च इंजन गूगल द्वारा कुछ सालों पहले तक जहां अंग्रेजी सामग्री को ही महत्व दिया जाता था, वहीं अब गूगल द्वारा हिंदी को भरपूर महत्व दिया जा रहा है. क्यों दिया जा रहा है? क्योंकि गूगल हो या माइक्रोसॉफ्ट सभी को यह अच्छी तरह से पता चल गया है कि हिंदी वैश्विक शक्ति बनने की ओर अग्रसर है. रही सही कसर व्यापार की दुनिया में, विज्ञापन जगत में हिंदी की बादशाहत ने पूरी कर दी है. आज के जमाने मे यह एक सच्चाई है कि भारत में हिन्दी में इंटरनेट उपयोग करने वालों की संख्या अब अंग्रेजी में इसका उपयोग करने वालों से अधिक हो गई है. 

सुधर रहा रोज़गार फ्रंट
हिंदी के रोजगार फ्रंट की बात करें तो उसका यह पक्ष भी ठीकठाक नजर आता है. आज रोजगार के बाजार में हिंदी एक बहुत बड़ा माध्यम बन कर उभरी है और इसने रोजगार के अनेक नए एवेन्यू भी खोले हैं. कुछ साल पहले डिजिटल माध्यम में हिन्दी समाचार पढ़ने वालों की संख्या करीब साढ़े पांच करोड़ थी, जो इस समय तकरीबन 20 करोड़ है. इंटरनेट पर हिन्दी का जो दायरा कुछ समय पहले तक चंद ब्लॉगों, कुछ हजार पोस्ट और हिन्दी की गिनी चुनी वेबसाइटों तक ही सीमित था, अब पूरी तरह से बदला हुआ है. आज का युवा वर्ग हिंदी की तरफ भी तेजी से झुक रहा है. क्योंकि आज के दौर में हिंदी में रोजगार के अच्छे-खासे अवसर नजर आते हैं. 

अभी और प्रयास हैं बाकी  
आर्थिक शक्ति का मतलब यह है कि व्यक्ति के जीवन स्तर, देश या व्यवसायों में सुधार करने की क्षमता और हिंदी का यह पक्ष काफी अच्छा है. लेकिन इतना भी अच्छा नहीं है कि हम समझ लें कि हमारे काम पूरे हो गए हैं तो हम गाफिल हो जाएं. बिल्कुल नहीं. हिंदी रूपी इस आर्थिक शक्ति को अभी और विमर्श गढ़ने की जरूरत है, तभी हम हिंदी को उसका वास्तविक हक दिला पाएंगे.
 


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