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घर-घर में दिखाई देगी ‘डर’ का मतलब समझाने वाले ‘रामसे ब्रदर्स’ की कहानी

‘डर’ का मतलब समझाने वाले ‘रामसे ब्रदर्स’ पर बायोपिक बन रही है. हॉरर फिल्मों का ट्रेडमार्क बन चुके ‘रामसे ब्रदर्स’ के सफर को वेबसीरीज द्वारा दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

‘डर’ का मतलब समझाने वाले ‘रामसे ब्रदर्स’ पर बायोपिक बन रही है. हॉरर फिल्मों का ट्रेडमार्क बन चुके ‘रामसे ब्रदर्स’ के सफर को वेबसीरीज द्वारा दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा. पहले ‘रामसे ब्रदर्स’ के संघर्ष, परिश्रम, सफलता और शिखर पर पहुंचने की दास्तां को बड़े पर्दे पर पेश करने की तैयारी थी, लेकिन परिवार की गौरव गाथा को महज तीन घंटे में समेटना आसमान छूने जैसा है, इसलिए इसे वेबसीरीज की शक्ल देने का फैसला लिया गया. अजय देवगन और निर्माता प्रीति सिन्हा की टीम यह बायोपिक तैयार कर रही है. 

बिना खास टेक्नोलॉजी के कारनामा
70 से 90 के दशक के बीच ‘रामसे ब्रदर्स’ हॉरर फिल्मों के बेताज बादशाह थे. ‘वीराना’, ‘पुराना मंदिर', ‘पुरानी हवेली’, ‘बंद दरवाजा’ जैसे तमाम फिल्मों ने असल मायनों में बताया कि डर क्या होता है. थियेटर में फिल्म देखते हुए बीतने वाले वो 3 घंटे पर्दे के काल्पनिक डर को कुछ देर के लिए हकीकत में बदल देते थे. कैमरे के साथ घूमती निगाहें, बढ़ती दिल की धड़कनों के बीच अक्सर चीख पर आकर रुक जाती थीं. ‘रामसे ब्रदर्स’ उस ज़माने में बिना किसी खास टेक्नोलॉजी के अपनी क्रिएशन से लोगों की रौंगटे खड़े कर दिया करते थे, और यही हॉरर फिल्मों का उद्देश्य होता है. 

फैन्स के लिए अच्छी खबर
आज तमाम टेक्नोलॉजी मौजूद है, करोड़ों के बजट से हॉरर फ़िल्में बन रही हैं और चल भी रही हैं, लेकिन ‘रामसे ब्रदर्स’ वाले अंदाज की कमी कहीं न कहीं खलती हैं. जिस ऑडियंस ने ‘रामसे ब्रदर्स’ की फिल्मों को देखा है, वो इस कमी को साफतौर पर महसूस कर सकते हैं. हालांकि, अच्छी बात ये है कि इस ‘कमी’ को दूर करने की कोशिश शुरू हो चुकी है. ‘रामसे ब्रदर्स’ कुछ प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं. दीपक रामसे ने ‘बिज़नेस वर्ल्ड’ को बताया कि ‘पुराना मंदिर' के रीमेक पर काम चल रहा है. इसके अलावा भी कुछ प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं, जिनके बारे में जल्द घोषणा की जाएगी. 

98% हॉरर और  2% हंसी
डराना और हंसना मुश्किल काम है, खासकर जब बात बड़े पर्दे की हो, तो ये मुश्किल कई गुना बढ़ जाती है. ‘रामसे ब्रदर्स’ को इन दोनों में ही महारथ हासिल है. उनकी फिल्में, जहां डराती हैं, वहीं बीच-बीच में कुछ पल के लिए लोगों को हंसने का मौका भी देती हैं. हालांकि, फिर भी इन फिल्मों को पूरी तरह से हॉरर-कॉमेडी नहीं कहा जाएगा. वैसे भी हॉरर कॉमेडी का कांसेप्ट भारत में बीते कुछ सालों में ही पसंद किया जाने लगा है, इससे पहले तक हॉरर फिल्में देखने लोग सिर्फ डरने ही जाते थे. ‘रामसे ब्रदर्स’ की फिल्मों में 98% हॉरर था, तो 2% हंसी-मजाक और ये कॉम्बिनेशन दर्शकों को खूब पसंद आता था. 

वेबसीरीज का बेसब्री से इंतजार
‘रामसे ब्रदर्स’ की फिल्मों को लेकर एक अलग ही क्रेज रहता था, तो ऐसे में यह सवाल भी बनता है कि परिवार में अपनी बायोपिक को लेकर कितना उत्साह है? इस सवाल के जवाब में दीपक रामसे कहते हैं, ‘निश्चित रूप से सभी बेहद उत्साहित हैं. फिल्म इंडस्ट्री में शुरूआती संघर्ष से लेकर परिवार के एक अलग मुकाम पर पहुंचने की कहानी अब घर-घर पहुंचेगी. ‘रामसे ब्रदर्स’ ने उस ज़माने में हॉरर फिल्मों का निर्माण किया, जब इन फिल्मों को बेहद कठिन, चुनौतीपूर्ण और कम लाभ वाले प्रोजेक्ट के रूप में देखते थे. अमूमन हॉरर फ़िल्में एडल्ट कैटेगरी में आ जाती थीं, जिनकी वजह से ऑडियंस सीमित हो जाती थी और बड़े कलाकार भी उनमें काम करने से बचते थे. इसके बाबजूद ‘रामसे ब्रदर्स’ ने न केवल डराने वाली फ़िल्में बनाने का रिस्क उठाया, बल्कि इस शैली को अपनी एक अलग पहचान दिलाई. ऐसे में उनकी कहानी से दर्शकों को रू-बरू कराना तो बनता है. 

क्या बायोपिक में आएंगे नज़र? 
‘रामसे ब्रदर्स’ की बायोपिक में क्या परिवार का कोई सदस्य अभिनय करता नजर आएगा? इस पर दीपक रामसे ने कहा, ‘अभी इस पर कोई फैसले नहीं हुआ है, लिहाजा फिलहाल इस सवाल का जवाब ‘हां’ या ‘ना’ में नहीं दिया जा सकता’. रामसे भाइयों ने सालों तक हॉरर फिल्मों की दुनिया पर राज किया है, ऐसे में यह जानना दिलचस्प होगा कि यदि अभी ‘रामसे ब्रदर्स’ कोई फिल्म बनाएं तो बतौर हीरो किसे कास्ट करेंगे? दीपक रामसे इसके जवाब में कहते हैं – कार्तिक आर्यन.

2019 में हुई थी घोषणा
बता दें कि अजय देवगन ने 2019 में प्रीति सिन्हा के साथ मिलकर ‘द रामसे बायोपिक’ की घोषणा की थी. फिर कोरोना महामारी के चलते फिल्म का निर्माण अधर में लटक गया. अब फिर से अजय इस प्रोजेक्ट पर काम में लग गए हैं. हालांकि, द रामसे बायोपिक' अब फिल्म नहीं वेबसीरीज के रूप में आएगी. इसकी वजह यह है कि रामसे ब्रदर्स की कहानी को महज ढाई-तीन घंटे में नहीं दिखाया जा सकता.
 


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