Delhi Liquor Scam: क्या केजरीवाल की मुश्किलों की ये तो बस शुरुआत है?

अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले महीने गिरफ्तार किया था, तब से वह बाहर नहीं आ सके हैं.

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Friday, 12 April, 2024
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) की मुश्किलों की क्या ये महज शुरुआत है? यह सवाल खड़ा हुआ है दिल्ली शराब घोटाले (Delhi Liquor Scam) में सीबीआई के एक्शन से. दरअसल, सीबीआई ने भारत राष्ट्र समिति (BRS) की नेता के. कविता की रिमांड मांगी है. तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी के. कविता (K Kavitha) पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई का सामना कर रही हैं. ऐसे में सीबीआई की एंट्री से उनकी मुसीबत में इजाफा हो गया है.  

जल्द बाहर आना मुश्किल 
अरविंद केजरीवाल भी कथित शराब घोटाले में तिहाड़ जेल में बंद हैं. ED ने उन्हें पिछले महीने गिरफ्तार किया था. माना जा रहा है कि कविता के बाद अब सीबीआई केजरीवाल की हिरासत मांग सकती है और मामले से जुड़े पहलुओं पर उनसे पूछताछ कर सकती है. यदि ऐसा होता है, तो केजरीवाल बड़ी मुश्किल में उलझ जाएंगे. अभी उन्हें एक जांच एजेंसी की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है. फिर उन्हें सीबीआई के सवालों के जवाब भी देने होंगे. ऐसे में उनके जल्द जेल से बाहर आने की संभावनाएं भी कमजोर होती जाएंगी.

केवल संजय को मिली राहत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीबीआई ने राउज एवेन्यू कोर्ट से भारत राष्ट्र समिति (BRS) की विधान परिषद सदस्य (MLC) की सदस्य कविता की  रिमांड मांगी है. ED पहले ही इस मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, विजय नायर सहित 15 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. हालांकि, संजय सिंह को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है, जबकि शेष आरोपियों को अदालत से कोई राहत नहीं मिली है. केजरीवाल को दिल्ली हाई कोर्ट से भी झटका लग चुका है. हाल ही में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.  

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अलग-अलग हो रही जांच
अब सवाल उठता है कि जब ED दिल्ली शराब घोटाले में जांच कर रही है, तो फिर सीबीआई की क्या जरूरत है? दरअसल, दोनों एजेंसियां अलग-अलग जांच कर रही हैं. ईडी जहां शराब नीति को बनाने और लागू करने में धन शोधन यानी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रही है. वहीं, केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) की जांच नीति बनाते समय हुई कथित गड़बड़ी पर केंद्रित है. दोनों एजेंसियां अब तक कई गिरफ्तारी कर चुकी हैं. इस बीच, ED ने राउज एवेन्यू की एक विशेष अदालत से आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक अमानतुल्लाह खान के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी करने की मांग की है. एजेंसी दिल्ली वक्फ बोर्ड में नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें गिरफ्तार करना चाहती है. अदालत ED की याचिका 18 अप्रैल को विचार करेगी.

आखिर क्या है शराब घोटाला?
दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने 17 नवंबर 2021 को एक्साइज पॉलिसी 2021-22 लागू की थी. नई नीति के तहत, सरकार शराब कारोबार से बाहर आ गई और पूरी दुकानें निजी हाथों में सौंप दी गईं. सरकार का दावा था कि नई शराब नीति से माफिया राज पूरी तरह खत्म हो जाएगा और उसके रिवेन्यु में बढ़ोतरी होगी. हालांकि, ये नीति शुरू से ही विवादों में रही. जब बवाल ज्यादा बढ़ गया तो 28 जुलाई 2022 को केजरीवाल सरकार ने इसे रद्द करने का फैसला लिया. इस कथित शराब घोटाले का खुलासा 8 जुलाई 2022 को दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव नरेश कुमार की रिपोर्ट से हुआ था. तब से अब तक ED इस मामले में कार्रवाई कर रही है.
 


चेक बाउंस मामले में नहीं काटने पड़ेंगे कोर्ट के चक्कर, Supreme Court ने दी ये सलाह

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक चेक बाउंस (Cheque Bounce) की सुनवाई करते हुए लोअर कोर्ट और आम लोगों के लिए एक सलाह दी है. इस सलाह को मानते हुए लोग कोर्ट आने के चक्कर से बच सकते हैं.

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Saturday, 20 July, 2024
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आजकल डिजिटल पेमेंट के चलते चेक के आदान-प्रदान का चलन कम हुआ है, लेकिन अभी भी कई मामलों में चेक बाउंस (Cheque Bounce) के चलते लोगों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ते हैं. अगर आपका चेक बाउंस हुआ है, या आपको किसी ने चेक दिया और उसका पेमेंट क्लियर ही नहीं हुआ. तो आपको जानकारी होगी कि चेक बाउंस के मामलों में कितनी बार कोर्ट के चक्कर काटने पड़ते हैं. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने चेक बाउंस के ही एक मामले की सुनवाई के दौरान एक जबरदस्त सलाह दी है, जिसकी वजह से आप चेक बाउंस के मामले में कोर्ट के झंझट से बच सकते हैं. तो आइए जानते हैं सुप्रीम ने क्या सलाह ही है? 

बड़ी संख्या में कोर्ट में लंबित पड़े चेक बाउंस के मामले
देश की विभन्न कोर्ट में चेक बाउंस से जुड़े मामले बड़ी संख्या में लंबित पड़े हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने ‘गंभीर चिंता’ व्यक्त की है. ऐसे ही एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस ए. अमानुल्लाह की पीठ ने चेक बाउंस के मामलों के तेजी से निपटारे के लिए अपनी सलाह भी दी.

कोर्ट ने अभियुक्त की सजा को किया रद्द
जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस ए. अमानुल्लाह की पीठ ने चेक बाउंस मामले की सुनवाई के बाद मामले में अभियुक्त (Accused) पी. कुमारसामी नाम के एक व्यक्ति की सजा रद्द कर दी. पीठ ने अपने आब्जर्वेशन में पाया कि दोनों पक्षों के बीच चेक बाउंस के मामले में समझौता हो चुका है. वहीं, अभियुक्त की ओर से शिकायतकर्ता को 5.25 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है.

सजा देने की जगह निपटान को दी जाए प्राथमिकता

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि देश की विभिन्न कोर्ट में चेक बाउंस से जुड़े मामले बड़ी संख्या में लंबित हैं. ये देश की न्यायिक व्यवस्था के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है. इसे ध्यान में रखते हुए इनका निपटान करने के तरीके को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ना कि सजा देने के तरीके पर फोकस करना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतों को कानून के दायरे में रहते हुए निपटान को बढ़ावा देने के लिए काम करना चाहिए, अगर दोनों पक्ष ऐसा करने के इच्छुक हैं. कोर्ट के अलावा दोनों पक्ष भी आपस में मिलकर चेक बाउंस जैसे मामलों का निपटान कर सकते हैं, जिससे कोर्ट आने से बचा जा सके.

इन सब मामलों में भी काम आएगी ये सलाह
सुप्रीम कोर्ट की ये सलाह सिर्फ चेक बाउंस के केस में ही नहीं बल्कि कानूनी तौर पर लिखे गए सभी तरह के वचन पत्रों में विवाद की स्थिति पैदा होने पर मामलों के निपटारे में काम आ सकती है. पीठ ने 11 जुलाई को जो आदेश पारित किया, उसमें ये भी कहा कि समझौता योग्य अपराध ऐसे होते हैं, जिनमें प्रतिद्वंद्वी पक्षों के बीच समझौता हो सकता है. हमें यह याद रखना होगा कि चेक का बाउंस होना एक रेग्युलेटरी क्राइम है जिसे केवल सार्वजनिक हित को देखते हुए अपराध की श्रेणी में लाया गया है, ताकि संबंधित नियमों की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके.

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NCR में घर खरीदने वालों को Supreme Court ने दी राहत! इस मामले में अब बैंक और बिल्डर नहीं करेंगे परेशान

Supreme Court ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में अपने फ्लैट का कब्जा न मिलने से परेशान घर खरीदारों को बड़ी राहत दी है. अब होम लोन की ईएमआई नहीं चुकाने पर बैंक और बिल्डर उन्हें परेशान नहीं करेंगे.

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Friday, 19 July, 2024
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बैंकों व फाइनेंस कंपनियों से परेशान हो रहे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (National Capital Region-NCR) के घर खरीदारों को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से बड़ी राहत मिली है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इंटेरेस्ट सबवेंशन स्कीम (Interest subvention scheme) के तहत घर खरीदने वाले खरीदारों को बकाए के लिए बैंक या वित्तीाय संस्थान परेशान नहीं कर सकते हैं. इसके अलावा उनके खिलाफ चेक बाउंस का भी कोई मामला नहीं चलेगा. तो आइए जानते हैं ये पूरा मामला क्या है और कोर्ट ने ये फैसला क्यों सुनाया है?

क्या है पूरा मामला
एक सबवेंशन स्कीम (Interest subvention scheme) के तहत, बैंक सीधे बिल्डरों को लोन का अमाउंट देते हैं, जो बदले में खरीदारों द्वारा उनके फ्लैटों का कब्जा लेने तक ईएमआई का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार होते हैं. हालांकि कई बार बिल्डरों ने इन भुगतानों में चूक की है, जिसकी वजह से बैंकों को खरीदारों से दोबारा भुगतान की मांग करनी पड़ी है. ऐसे ही एक मामले में बैंक और बिल्डरों द्वारा परेशान किए जाने पर एनसीआर में घर खरीदने वालों ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उन्हें वहां से राहत नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.

सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ये फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने घर खरीदारों की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि जिन लोगों ने इंटेरेस्ट सबवेंशन स्कीम के तहत फ्लैट बुक किया है और अभी तक उन्हें कब्जा नहीं मिला है, ऐसे स्थिति में उन घर खरीदारों के खिलाफ कोअर्सिव एक्शन नहीं लिए जा सकते हैं. इसका मतलब हुआ कि ऐसे घर खरीदारों को ईएमआई के पेमेंट या चेक बाउंस जैसे मामलों में न तो बिल्डर परेशान कर सकते हैं, न ही बैंक उन्हें परेशान कर सकते हैं.

क्या है इंटेरेस्ट सबवेंशन स्कीम?
इंटेरेस्ट सबवेंशन स्कीम (Interest subvention scheme) के तहत बैंक सीधे बिल्डर को लोन डिस्बर्स करते हैं. जब तक बिल्डर फ्लैट का कब्जा घर खरीदार को नहीं देते हैं, तब तक ईएमआई भरने की जिम्मेदारी बिल्डर की होती है. इस स्कीम के तहत ऐसे कई मामले सामने आ रहे थे, जिनमें बिल्डर ने डिफॉल्ट कर दिया है और उसके बाद बैंक पेमेंट के लिए खरीदारों के पास पहुंच रहे हैं. इसके चलते घर खरीदारों को परेशानियां हो रही थीं.

कोर्ट ने बिल्डर्स को दिया ये आदेश 
सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यों वाली पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए अब तक लिए गए सभी कोअर्सिव एक्शन पर रोक लगाने का आदेश दिया. यह रोक नेगोशिएबल इंस्ट्रुमेंट्स एक्ट, 1881 के सेक्शन 138 के तहत मिलीं शिकायतों पर भी लागू है. सुप्रीम कोर्ट ने घर खरीदारों को राहत देने के साथ ही बिल्डर्स को फटकार भी लगाई है. बिल्डर्स को 2 सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल कर अपने एसेट की जानकारी देने के लिए कहा गया है. अगर बिल्डर इस आदेश का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने एक्शन लेने की भी चेतावनी दी है.

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बिगडैल पूजा खेडकर से छिनेगा IAS का तमगा? UPSC ने दर्ज कराई FIR, पूछा कठिन सवाल

महाराष्ट्र की ट्रेनी आईएस पूजा खेडकर की मुश्किलों में इजाफा हो गया है. संघ लोक सेवा आयोग ने उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई है.

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Friday, 19 July, 2024
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ट्रेनी IAS ऑफिसर पूजा खेडकर (Trainee IAS Officer Puja Khedkar) की नौकरी जाने की पूरे आसार बन गए हैं. तमाम आरोपों में घिरीं खेडकर के खिलाफ पहले से ही जांच चल रही है और इस बीच संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने उन्हें बड़ा झटका दिया है.  UPSC ने इस विवादास्पद IAS के खिलाफ  एफआईआर दर्ज करा दी है. इसके अलावा, संस्था ने नोटिस भेजकर उनसे पूछा है क्यों न आपकी उम्मीदवारी को रद्द कर दिया जाए? पूजा को भविष्य में होने वालीं परीक्षाओं से भी वंचित किया जा सकता है. 

पूजा पर लगे कई आरोप
महाराष्ट्र की ट्रेनी IAS पूजा खेडकर पर तमाम आरोप हैं. इसमें ओबीसी कोटे के लिए धोखाधड़ी और तैनाती के तुरंत बाद नियम विरुद्ध मांगें प्रमुख हैं. पुणे कलेक्टर की शिकायत के बाद जब पूजा खेडकर की फाइल खुली, तो एक के बाद एक गड़बड़ियां सामने आती चली गईं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यूपीएससी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पूजा खेडकर के खिलाफ विस्तृत जांच कराई गई है. इसमें पता चला है कि वह सिविल सेवा परीक्षा-2022 में नियमों का उल्लंघन करके बैठी थीं. जानकारों का मानना है  कि UPSC के एक्शन के बाद पूजा खेडकर की नौकरी बचना बेहद मुश्किल है. अब केवल कोई चमत्कार ही उनसे IAS का तमगा छिनने से रोक सकता है. 

इस तरह की धोखेबाजी
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने बताया है कि पूजा खेडकर की परीक्षा में बैठने की लिमिट पूरी हो गई थी. इसलिए उन्होंने धोखाधड़ी करते हुए अपनी पहचान बदल ली.  उन्होंने अपना, माता-पिता का नाम, अपनी तस्वीर और हस्ताक्षर तक बदल लिए. इसके अलावा, अपना मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पता भी बदल डाला. इस तरह उन्हें निर्धारित सीमा से ज्यादा बार परीक्षा में बैठने का मौका मिला. UPSC ने कहा कि जांच के बाद पूजा खेडकर के खिलाफ FIR दर्ज कराई है. साथ ही नोटिस जारी करके उनसे पूछा गया है कि क्यों न आपके चयन को रद्द कर दिया जाए? इससे पहले, उत्तराखंड के मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एडमिनिस्ट्रेशन एकेडमी ने पूजा खेडकर का महाराष्ट्र से ट्रेनिंग प्रोग्राम रद्द कर दिया था. 

परिवार भी रडार पर
पूजा खेडकर का पूरा परिवार इस समय जांच एजेंसियों के रडार पर है. किसानों पर पिस्टल तानने वालीं पूजा की मां को गुरुवार को पुणे पुलिस ने गिरफ्तार किया है. मनोरमा खेडकर को पुलिस ने रायगढ़ के महाड के एक होटल से गिरफ्तार किया. मनोरमा यहां पहचान बदलकर रह रही थीं. पिस्टल लहराने का वीडियो वायरल होने के बाद से मनोरमा खेडकर गायब चल रही थीं. पुलिस पर उनकी गिरफ्तारी का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था. उधर, पूजा के पिता दिलीप खेडकर के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने जांच शुरू कर दी है. ACB को दिलीप के खिलाफ सबूत मिले हैं कि उन्होंने अपनी सेवा के दौरान आय से अधिक संपत्ति अर्जित की. वह 2020 में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) के डायरेक्टर पद से रिटायर हुए थे. दिलीप लगातार अपनी बेटी का बचाव करते आ रहे हैं.  


फर्जी SEBI एजेंट बनकर एक शख्स ने 500 लोगों से ठगे 170 करोड़ रुपये, आरोपी गिरफ्तार

मुंबई पुलिस की प्रॉपर्टी सेल ने मध्य प्रदेश के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है. जिसने शेयर बाजार में निवेश पर उच्च रिटर्न का वादा करके 400 से अधिक लोगों को ठगा था

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Tuesday, 16 July, 2024
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मुंबई क्राइम ब्रांच के प्रॉपर्टी सेल ने मध्य प्रदेश से आशीष शाह नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो कि लोगों को शेयर मार्केट से मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर उन्हें चुना लगाने का काम करता था. आरोपी ने 500 लोगों के साथ करीब 170 करोड़ का फर्जी इन्वेस्टमेंट स्कैम किया है. पुलिस के मुताबिक, मुंबई के वर्सोवा का रहने वाला आशीष शाह निवेशकों को 84% तक रिटर्न्स देने का वादा करता था और अपने आप को सेबी रजिस्टर्ड एजेंट बताता था. लोगों का भरोसा जीतने के बाद वो ठगी की वारदात को अंजाम देता था.

छतरपुर से गिरफ्तार हुआ आरोपी

जब लोगों को आशीष से मनचाहा रिटर्न नहीं मिला था, तो उन्होंने उसके खिलाफ मई 2024 में वर्सोवा पुलिस स्टेशन में चीटिंग की शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद केस को सीधा क्राइम ब्रांच को सौप दिया. रिपोर्ट्स के अनुसार आरोपी ने करीब 400 लोगों के साथ करीब 170 करोड़ रुपए का चूना लगा चुका है. आशीष शाह को पकड़ने के लिए मुम्बई क्राइम ब्रांच ने करीब 3 टीम तैनात किए थे, जिन्होंने आरोपी को मध्य प्रदेश के छतरपुर से गिरफ्तार किया.

फर्जी कंपनी से लगाया चूना

पुलिस ने जब छानबीन शुरू की तब मालूम हुआ कि आरोपी आशीष शाह, समर्याश ट्रेडर्स एलएलपी नामक कंपनी शुरू की जिसमें, वो निवेशकों से पैसे कोविड के दौरान 2022 से मई 2024 तक लोगों के पैसे निवेश शेयर मार्केट में निवेश करने की बात कही. लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं.शुरुआत में लोगों को रिटर्न्स/मुनाफे के नाम पर अच्छे पैसे दिए गए, लेकिन उसके कुछ दिनों बाद पैसे मिलने रुक गए और लोगों को ठगी का शक होने लगा. 
आरोपी को गिरफ्तार कर पुलिस ने मूवेबल और इमोवेबल प्रॉपर्टीज को आइडेंटिफाई किया है. जिनमें आरोपी के नाम से 2 फ्लैट, 2 लैंड पार्सल, गुजरात में 4 गाडियां और 6 बैंक अकाउंट्स 25 लाख कैश और करीब 2 किलो गोल्ड बार सीज किए हैं. पुलिस ने ब्रीच ऑफ ट्रस्ट, चीटिंग और एमआईडीपी (महाराष्ट्र प्रोटेक्शन ऑफ इंट्रेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स) समेत कई धाराएं लगाई है.

सरकार की ये सलाह जरूर मानें

इन्वेस्टमेंट फ्रॉड के बढ़ते संख्या को देख सरकार, मार्केट रेगुलेटर सेबी, आरबीआई और एक्सचेंज समय समय से लोगों में अवेयरनेस कर रहे हैं कि मार्केट में निवेश करने से पहले सारी जानकारी एक बार खुद जरूर चेक करें और सोच कर, समझ कर निवेश करें.
 


बैंक में साइबर अटैक, सर्वर हैक कर RTGS सिस्टम में लगाई सेंध, 16 करोड़ लड़ा ले गए चोर

हैकरों ने बैंक का RTGS सिस्टम हैक कर 16 करोड़ से ज्यादा की राशि उड़ा दी. साइबर क्राइम थाने में बैंक के आईटी मैनेजर ने शिकायत दर्ज कराई है.

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Monday, 15 July, 2024
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दिल्ली-एनसीआर के नोएडा के सेक्टर 62 स्थित नैनीताल बैंक लिमिटेड में साइबर अटैक का एक बड़ा मामला सामने आया है. हैकरों ने बैंक के रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) चैनल को हैक करके 16 करोड़ 1 लाख 83 हजार 261 रुपये ट्रांसफर कर लिए हैं. जानकारी के मुताबिक, हैकरों ने ये पैसे 89 बैंक खातों में ट्रांसफर किए हैं. इस मामले में साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है. प्राथमिक जांच में पता चला है कि बैंक के सर्वर को हैक कर पूरी जालसाजी की घटना को अंजाम दिया गया. जब बैंक में बैलेंस शीट का मिलान किया गया, तब इस जालसाजी के बारे में पता चला.

बैलेंस सीट के मिलान में हुआ खुलासा

यह खुलासा बैंक की बैलेंस सीट के मिलान के दौरान हुआ. इसके बाद बैंक के आईटी मैनेजर सुमित श्रीवास्तव ने नोएडा के साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज कराया है. इसके अलावा बैंक की ओर मामले की जांच के लिए सर्ट-इन (इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम) से भी आग्रह किया है. आईटी मैनेजर सुमित कुमार श्रीवास्तव ने नोएडा पुलिस को दिए शिकायत में बताया कि पिछले महीने 17 जून को आरटीजीएस खातों के बैलेंस सीट का मिलान किया गया. इस दौरान पाया गया कि मूल रिकार्ड में 36 करोड़ 9 लाख 4 हजार 20 रुपये का अंतर है.

सर्वर में छेड़छाड़ कर वारदात

मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच कराई गई. इसमें बैंक के सर्वर में कुछ संदिग्ध गतिविधियां चिन्हित की गई. शुरूआती जांच में शक हुआ कि सिस्टम लाइन में गड़बड़ी की वजह से रकम का मिलान नहीं हो पा रहा, लेकिन 20 जून को आरबीआई प्रणाली को रिव्यू किया गया तो पता चला कि 84 बार संदिग्ध लेनदेन हुई है. आईटी मैनेजर के मुताबिक यह सारी लेनदेन 17 से 21 जून के बीच हुई हैं. आरटीजीएस सेटलमेंट के जरिए रुपये खाते से निकाले गए हैं.

पुलिस ने दर्ज किया केस

यह राशि कई बैंकों के अलग अलग खातों में ट्रांसफर हुई हैं. इस खुलासे के बाद उन सभी बैंक खातों को फ्रीज कराते हुए खाता धारकों को KYC कराने को कहा गया है. इस प्रक्रिया के तहत बैंक ने 69 करोड़ 49 हजार 960 रुपये तो रिकवर कर लिए हैं, लेकिन अभी 16 करोड़ 1 लाख 83 हजार 261 रुपये की ठगी की रकम रिकवर नहीं हो सकी है. नोएडा साइबर क्राइम विंग के एसीपी विवेक रंजन राय के मुताबिक बैंक प्रबंधन की शिकायत पर अज्ञात जालसाजों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है. पुलिस जालसाजों के कंप्यूटर का आईपी एड्रेस ट्रेस कर बदमाशों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. पुलिस को बदमाशों के कुछ डंप मिले हैं. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
 


Momo की डिलीवरी न करना Zomato को पड़ा भारी, अब चुकाना होगा 60 हजार रुपये का हर्जाना

एक ग्राहक को आर्डर की डिलीवरी नहीं करने के मामले में कंज्यूमर कोर्ट ने जोमैटो (Zomato) को दोषी माना है. कोर्ट ने जोमैटो से ग्राहक को 60 हजार रुपये हर्जाना देने के लिए कहा है.

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Monday, 15 July, 2024
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फूड डिलीवरी ऐप जोमैटो (Zomato) को कर्नाटक में एक महिला ग्राहक को मोमो की डिलीवरी न करने की बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है. दरअसल, ग्राहक ने मोमो की डिलीवरी न करने पर जोमैटो के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट का रूख किया. इसके बाद कोर्ट ने जोमैटो को 60 हजार रुपये का हर्जाना भरने का आदेश दिया है. आइए, आपको पूरे मामले की जानकारी देते हैं. 

कंफर्मेशन आने के बाद भी डिलीवर नहीं हुआ ऑर्डर
जोमैटो (Zomato) को मोमो की डिलीवरी न करने की बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है. दरअसल, कर्नाटक के एक ग्राहक ने जोमैटो पर मोमो आर्डर किए और उसके पास डिलीवरी का कंफर्मेशन भी आया, लेकिन मोमोज की डिलीवरी नहीं हुई. इसके बाद ग्राहक ने जोमैटो के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और ग्राहक की शिकायत पर कोर्ट ने जोमैटो को हर्जाना भरने के आदेश दिए. 

ये है पूरा मामला
यह मामला है कर्नाकट के धारवाड़ इलाके का है. वहां रहने वाली शीतल नाम की महिला ने 31 अगस्त 2023 को जोमैटो प्लेटफार्म पर मोमो का आर्डर दिया. वहां से आर्डर कंफर्म भी हुआ, लेकिन घंटों बीतने के बाद भी उसे मोमो की डिलीवरी नहीं मिली. इसके बाद शीतल ने जोमैटो से और जिस रेस्टोरेंट में आर्डर दिया था, उससे संपर्क किया. बार बार फोन करने पर जोमैटो ने कहा कि वह 72 घंटे वेट करे, कंपनी मामले की जांच कर रही है. उसके बाद भी कोई समाधान नहीं निकला. इसके बाद शीतल ने सितंबर 2023 में जोमैटो के खिलाफ धारवाड़ के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (District Consumer Disputes Redressal Commission-DCDRC) का दरवाजा खटखटाया और इस पूरे मामले की शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की.

9 महीने बाद रिफंड किए ऑर्डर के पैसे

जोमैटो ने कंज्यूमर कोर्ट में अपनी किसी भी तरह की गलती से इनकार किया. हालांकि, कोर्ट ने जोमैटो के महीनों तक कोई कदम ना उठाने पर सवाल उठाए, जबकि शुरुआत में जोमैटो ने मामले को सुलझाने के लिए समय मांगा था. आखिरकार मई 2024 में जोमैटो ने शीतल को मोमोज की कीमत (133.25 रुपये) वापस कर दी. इसके बाद कोर्ट ने माना कि जोमैटो अपनी सेवा में कमी का दोषी है और शीतल को हुई असुविधा के लिए जिम्मेदार है.

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कोर्ट ने जोमैटो को माना दोषी 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कंज्यूमर कोर्ट ने जोमैटो को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए उसे ग्राहक को हुई मानसिक परेशानी के लिए 50 हजार रुपये का हर्जाना भरने को कहा है. इसके साथ ही कानूनी खर्च के लिए 10 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया है. इसका मतलब है कि जोमैटो अब ग्राहक को कुल 60 हजार रुपये की राशि का भुगतान करेगा. कंज्यूमर कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जोमैटो ग्राहकों द्वारा ऑनलाइन दिए गए ऑर्डर पर सामग्री की आपूर्ति का व्यवसाय करता है. खरीद मूल्य प्राप्त होने के बावजूद, जोमैटो ने शिकायतकर्ता को उसका ऑर्डर नहीं दिया. इस मामले के इन तथ्यों को देखते हुए, हमारी राय में, ऑप नंबर 1 (जोमैटो) ही शिकायतकर्ता के दावे का जवाब देने के लिए उत्तरदायी है. 


 


कौन है वो अधिकारी जिसने राज्यपाल के बेटे पर लगाया मारपीट का आरोप, क्या है पूरा मामला?

ओडिशा के राज्यपाल रघुबर दास के बेटे पर एक अधिकारी ने गंभीर आरोप लगाए हैं. अधिकारी का कहना है कि लग्जरी कार न भेजने पर उसके साथ मारपीट हुई.

Last Modified:
Saturday, 13 July, 2024
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ओडिशा के राज्यपाल रघुबर दास को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि राज्यपाल के बेटे ललित कुमार ने राजभवन में कार्यरत एक अधिकारी के साथ मारपीट की. संबंधित अधिकारी का आरोप है कि गवर्नर का बेटा महज इस बात से नाराज था कि पुरी रेलवे स्टेशन से उसे रिसीव करने के लिए 2 लग्जरी कारें क्यों नहीं भेजी गईं. इन आरोपों पर अब तक राजभवन का कोई बयान सामने नहीं आया है. यह घटना पिछले हफ्ते राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की पुरी यात्रा के दौरान की बताई जा रही है.

ASO हैं बैकुंठनाथ प्रधान
राज्यपाल के बेटे पर जिस अधिकारी को मारने का आरोप लगा है, वह राजभवन के स्टेट पार्लियामेंट्री विभाग में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO) बैकुंठनाथ प्रधान हैं. प्रधान ने इस मामले में राज्यपाल के सचिव शाश्वत मिश्रा को अपनी शिकायत भेजी है. 7 जुलाई की इस घटना में पांच अन्य लोगों के भी शामिल होने की बात कही गई है. दरअसल, राष्ट्रपति रथयात्रा महोत्सव में शामिल होने ओडिशा पहुंचीं थीं. वह सात जुलाई की शाम से आठ जुलाई की सुबह तक पुरी राजभवन में थीं. पुरी राजभवन का इंचार्ज होने के नाते प्रधान 5 जुलाई से वहीँ मौजूद थे और राष्ट्रपति के आगमन से जुड़ी तैयारियां संभाल रहे थे. 

अपशब्द भी कहे 
अधिकारी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि ललित कुमार ने उनके ऊपर सात जुलाई को हमला किया, इस दौरान वह ड्यूटी पर थे. प्रधान ने अपनी शिकायत में लिखा है  - रात 11.45 बजे मैं अपने ऑफिस में बैठा हुआ था. तभी ओडिशा के राज्यपाल का निजी कुक आकाश सिंह मेरे पास आया और कहा कि ललित कुमार आपसे सुइट नंबर 4 में मिलना चाहते हैं. जैसे ही मैं वहां पहुंचा, ललित  ने मुझे थप्पड़ मारना शुरू कर दिया. वह मुझे अपशब्द भी कहते रहे. मैं किसी तरह वहां से भागकर एनेक्सी बिल्डिंग के पीछे जाकर छिप गया. लेकिन ललित कुमार के दो सुरक्षा अधिकारी वहां आए और मुझे खींचकर वापस रूम नंबर 4 तक ले गए. सुरक्षा में तैनात जवान और अन्य लोग भी इस घटना के गवाह हैं.

CM भी रहे हैं रघुबर दास 
प्रधान ने आने लिखा है कि इन लोगों ने फिर से मुझे बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया. इतना ही नहीं, ललित ने धमकी भी दी कि अगर किसी से इस घटना के बारे में बताया तो तुम्हारी हत्या हो जाएगी. इस मामले में राजभवन और ललित कुमार की तरफ से अब तक कोई बयान नहीं आया है. वहीं, रघुबर दास की बात करें, तो वह राज्यपाल की कुर्सी संभालने से पहले पहले झारखंड के मुख्यमंत्री भी रहे हैं. 2019 में विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने अपनी संपत्ति की जानकारी दी थी. उन्होंने बताया था कि पिछले पांच सालों में उनकी वार्षिक आय 19 लाख 37 हजार 924 रही है. उस समय उनके पास 41 हजार 600 रुपए कैश था. उनके बैंक जमा, शेयर और जेवरात का कुल मूल्य 66 लाख 57 हजार  रुपए था. उस समय उनके पास न तो कोई जमीन था और न ही कोई मकान. 


केजरीवाल को राहत मिली पर रिहाई नहीं, जेल से कब बाहर आ सकते हैं दिल्ली के CM? 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ED की गिरफ़्तारी वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी है.

Last Modified:
Friday, 12 July, 2024
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कथित दिल्ली शराब नीति घोटाले में अरविंद केजरीवाल को बड़ी राहत मिली है. हालांकि इस 'सुप्रीम'राहत के बावजूद उनकी जेल से  रिहाई नहीं होगी. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें ED वाले मामले में तुरंत रिहा करने के आदेश दिया है. लेकिन केजरीवाल की मुश्किल यह है कि सीबीआई भी उन्हें शराब कांड में गिरफ्तार कर चुकी है. तो जब तक सीबीआई वाले मामले में भी उन्हें जमानत नहीं मिल जाती, तब तक उन्हें जेल में ही रहना होगा. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत को केजरीवाल क लिए बड़ी राहत माना जा रहा ही. वहीं, आम आदमी पार्टी ने कोर्ट के फैसले को सत्य की जीत करार दिया है

सुरक्षित रखा था फैसला
अरविंद केजरीवाल ने  ED द्वारा की गई गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल थी. कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. आज यानी 12 जुलाई को अदालत ने फैसला सुनाते हुए केजरीवाल को अंतरिम जमानत दे दी. साथ ही  कोर्ट ने मामले को बड़ी बेंच यानी तीन जजों की पीठ को भेज दिया. अब तीन जजों की बेंच यह तय करेगी कि ED की गिरफ़्तारी सही थी या नहीं.  केजरीवाल के वकीलों ने बताया कि जब तक बड़ी बेंच सुनवाई करेगी तब तक दिल्ली के सीएम अंतरिम जमानत पर रहेंगे. 

केजरीवाल पर छोड़ा निर्णय 
सुनवाई के दौरान, अदालत ने कहा है कि केजरीवाल पहले ही काफी दिन जेल में रह चुके हैं, इसलिए ईडी मामले में उन्हें तुरंत रिहा किया जाएगा. साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि 'जेल से सरकार' चलाने के निर्णय पूरी तरह से केजरीवाल पर है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केजरीवाल एक निर्वाचित नेता हैं और यह निर्णय उन्हें ही लेना है कि वह दिल्ली के मुख्यमंत्री पद पर बने रहना चाहते हैं या नहीं. गौरतलब है कि इससे पहले हाई कोर्ट भी केजरीवाल को CM पद से हटाये जाने संबंधी याचिकाओं को खारिज कर चुका है.

HC 17 को करेगा सुनवाई
सीबीआई ने पिछले महीने ही अरविंद केजरीवाल को शराब नीति मामले में गिरफ्तार किया था. केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने पहले अदालत से केजरीवाल से पूछताछ की अनुमति मांगी फिर वहीं उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया था . सीबीआई ने अदालत को बताया था कि उसे केजरीवाल को गिरफ्तार क्यों करना पड़ पड़ा. जांच एजेंसी ने कहा कि बतौर मुख्यमंत्री केजरीवाल उस कैबिनेट का हिस्सा थे जिसने विवादित नई शराब नीति को मंजूरी दी. दिल्ली की आबकारी नीति 2021-22 में कुछ खास लोगों को लाभ देने के लिए संशोधन किए गए. शराब के थोक विक्रेताओं के लिए प्रॉफिट मार्जिन 5% से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया. केजरीवाल ने सीबीआई की गिरफ़्तारी को भी चुनौती दी है, जिस पर हाई कोर्ट 17 जुलाई को सुनवाई करेगा. लिहाजा, सीबीआई मामले में जमानत मिलने के बाद ही केजरीवाल जेल से बाहर आ सकेंगे. 

90 दिनों से हैं जेल में 
सुप्रीम कोर्ट ने आज ED की गिरफ़्तारी पर केजरीवाल को राहत देते हुए कहा कि हम अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत दे रहे हैं. साथ ही केस को बड़ी बेंच को भेज दिया गया है. यह जीवन के अधिकार का सवाल है और चूंकि मामला बड़ी बेंच को भेजा गया है, इसलिए हम केजरीवाल को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का निर्देश देते हैं कोर्ट ने कहा कि अरविंद केजरीवाल 90 दिनों से ज्यादा समय से जेल में बंद हैं. वह एक निर्वाचित नेता हैं और यह उन पर निर्भर करता है कि वे इस पद पर बने रहना चाहते हैं या नहीं. उधर, आम आदमी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए इसे सत्य की जीत करार दिया है.
 


थप्पड़ कांड को लेकर Spicejet और CISF आमने-सामने, किसके दावे में है सच्चाई?

जयपुर एयरपोर्ट पर हुए थप्पड़ कांड को लेकर एयरलाइन और सीआईएसएफ अपने स्टाफ के बचाव में उतर आए हैं.

Last Modified:
Friday, 12 July, 2024
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मुश्किलों में फंसी स्पाइसजेट (Spicejet) एयरलाइन और हवाईअड्डों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली  CISF एक घटना के चलते खबरों में हैं. जयपुर एयरपोर्ट पर स्पाइसजेट की एक स्टाफ ने वहां मौजूद CISF कर्मी को चांटा मार दिया. पूरा मामला CCTV में रिकॉर्ड हो गया और उसकी क्लिपिंग पूरे देश में वायरल हो गई. स्पाइसजेट और सेंट्रल इंडस्ट्रियल फ़ोर्स ऑफ इंडिया यानी CISF का इस मुद्दे पर अलग-अलग दावा है. हालांकि, ऑन ड्यूटी जवान को थप्पड़ मारकर  स्पाइसजेट की फूड सुपरवाइजर अनुराधा रानी परेशानी में पड़ सकती हैं. 

ऐसे बिगड़ी बात
जयपुर एयरपोर्ट पर स्पाइसजेट की फूड सुपरवाइजर अनुराधा रानी को कल सहायक उपनिरीक्षक (ASI) गिरिराज प्रसाद ने गेट पर रोका था. ASI का कहना है कि महिला एयरपोर्ट के अंदर एयर साइड से व्हीकल ले जाना चाहती थी, लेकिन उस वक्त गेट पर कोई CISF की महिला कर्मचारी नहीं थी. इसलिए उन्होंने अनुराधा को रुकने को कहा, मगर अनुराधा रानी इसके लिए तैयार नहीं हुईं. इस बात को लेकर दोनों में बहस होने लगी. बहस के दौरान ASI गिरिराज प्रसाद ने कंट्रोल रूम से महिला स्टाफ को भेजने के लिए कहा. उसके बाद दो महिला स्टाफ गेट पर आई और अनुराधा को समझाने लग गईं, तभी अनुराधा ने ASI को थप्पड़ मार दिया. 

दावा: घर आने को कहा
अनुराधा रानी पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. इस मामले में स्पाइसजेट और CISF अपने-अपने स्टाफ का बचाव कर रहे हैं. स्पाइसजेट का कहना है कि अनुराधा के साथ यौन उत्पीड़न किया गया. स्पाइसजेट के प्रवक्ता ने कहा कि कर्मचारी के पास एंट्री के लिए वैध एयरपोर्ट एंट्री पास था. इसके बाद भी CISF अधिकारी ने उनके साथ अनुचित भाषा का प्रयोग किया. इतना ही नहीं CISF कर्मी ने महिला को ड्यूटी के बाद उसके घर आकर मिलने के लिए भी कहा. कंपनी अब CISF कर्मियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के लिए कानूनी कार्रवाई कर रही है. 

दावा: रोकने पर हुई गुस्सा
उधर, CISF के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि महिला को अनिवार्य जांच से गुजरने के लिए कहा गया था. रोके जाने के बाद वह गुस्से में आ गई और उसने ड्यूटी पर मौजूद CISF कर्मी को थप्पड़ मार दिया. अधिकारी ने कहा कि महिला के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है. इस मामले में किसका दावा सही है, फिलहाल कहना मुश्किल है लेकिन यदि स्पाइसजेट अपने आरोपों के संबंध में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई या जांच में इस बारे में कोई सबूत नहीं मिले तो उसकी स्टाफ की मुश्किलें बढ़ जाएंगी.  
 


अब इस मामले में फंसे बाबा रामदेव, बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिया 50 लाख रुपये जमा करने का आदेश

बाबा रामदेव की कंपनी पंतजलि आयुर्वेद को बॉम्बे हाई कोर्ट ने ट्रेडमार्क से जुड़े एक अंतरिम आदेश के उल्लंघन के मामले में लाखों रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया है.

Last Modified:
Thursday, 11 July, 2024
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योग गुरु बाबा रामदेव की मुश्किलें खत्म होने के बजाय बढ़ती ही जा रही हैं. अब उनकी कंपनी पंतजलि आयुर्वेद को बॉम्बे हाई कोर्ट ने ट्रेडमार्क से जुड़े उल्लंघन के मामले में लाखों रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया है. तो आइए जानते हैं आखिर ये क्या मामला है और पतंजलि को कोर्ट ने कितना जुर्माना भरने का आदेश दिया है?

कोर्ड में जमा करने होंगे 50 लाख रुपये
बॉम्बे हाई कोर्ट ने ट्रेडमार्क से जुड़े उल्लंघन के मामले में बाबा रामदेव (Baba Ramdev) की कंपनी पंतजलि आयुर्वेद लिमिटेड (Patanjali Ayurved) को 50 लाख रुपये जमा करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने यह आदेश अदालत के अंतरिम आदेश के उल्लंघन के लिए जारी किया है. कोर्ट ने पतंजलि के कपूर से जुड़े प्रोडक्ट को बेचने और उसके विज्ञापन पर रोक लगाई थी. यह रोक मंगलम ऑर्गेनिक लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई के बाद लगाई गई थी. कंपनी ने याचिका में दावा किया था कि अदालत के आदेश के बावजूद पंतजलि ने खुद के प्रोडक्ट को बेचा है. 

पतंजलि ने की कोर्ट के आदेश की अवहेलना 
कोर्ट में जस्टिस रियाज छागला ने पंतजलि के हलफनामे पर गौर करने के बाद पाया कि उसने अदालत के 30 अगस्त 2023 के आदेश की अवहेलना की है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है, ऐसे में जस्टिस रियाज ने पंतजलि को कोर्ट में 50 लाख रुपये जमा करने का आदेश किया. कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 19 जुलाई 2024 को रखी है. 

इससे पहले भी पतंजलि मांग चुका है माफी
इस मामले को लेकर पहले भी पतंजलि के निदेशक रजनीश मिश्रा ने कोर्ट में हलफनामा दायर किया था, जिसमें उन्होंने बिना शर्त माफी मांगी थी और अदालत के आदेश का पालन करने का आश्वासन दिया था. हलफनामे के मुताबिक, कोर्ट की रोक के बाद 49,57,861 रुपये के कपूर उत्पाद की सप्लाई की गई थी. 

सुप्रीम कोर्ट में भी हलफनामा दायर करने का निर्देश
इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि को एक हलफनामा दाखिल करने को कहा था. इसमें कंपनी को यह बताना होगा कि उत्तराखंड सरकार ने कंपनी के जिन 14 उत्पादों का लाइसेंस निलंबित किया था, उनके विज्ञापन वापस लिए गए या नहीं. उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने 15 अप्रैल को लाइसेंस निलंबित कर दिए थे. हालांकि बाद में इन्हें बहाल कर दिया गया था.

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