₹50 करोड़ के घोटाले में CBI की FIR से सवालों के घेरे में कालनत्री परिवार और The Green Billions

CBI का आरोप है कि TGBL ने ₹25 करोड़ की एक फर्जी परफॉर्मेंस बैंक गारंटी जमा की, लेकिन बैंक ने साफ किया कि वह गारंटी नकली है.

Last Modified:
Tuesday, 22 April, 2025
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मुंबई की कॉरपोरेट और इंडस्ट्री से जुड़ी दुनिया में एक बड़ा घोटाला सामने आने वाला है. यह घोटाला कालनत्री परिवार से जुड़ा है, जिसकी अगुवाई विजय कालनत्री कर रहे हैं. विजय कालनत्री ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज़ (AIAI) के प्रेसिडेंट हैं, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मुंबई के चेयरमैन हैं, बालाजी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के चेयरमैन हैं और पहले कांग्रेस पार्टी के कोषाध्यक्ष भी रह चुके हैं.

CBI (सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) ने ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (BECIL) और द ग्रीन बिलियंस लिमिटेड (TGBL) के अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है. TGBL कंपनी का सीधा संबंध कालनत्री परिवार से है. यह मामला एक बड़ी धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसमें नकली बैंक गारंटी, गुम दस्तावेज़ और करीब ₹50 करोड़ की हेराफेरी का आरोप है. यह FIR CBI की पुलिस इंस्पेक्टर वैशाली घोरपड़े की शिकायत पर दर्ज की गई है.

घोटाले की शुरुआत कैसे हुई

यह मामला तब शुरू हुआ जब इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी लिमिटेड (IREDA) ने BECIL नाम की सरकारी कंपनी को ₹80 करोड़ का लोन दिया. यह पैसा वेस्ट मैनेजमेंट, एलईडी स्मार्ट लाइटिंग और स्मार्ट मीटरिंग जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए था. BECIL ने इसमें से ₹50 करोड़ मुंबई की TGBL नाम की कंपनी को पुणे में कचरा प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट) के एक प्रोजेक्ट के लिए दिए. शुरुआत में यह एक आम सरकारी और निजी साझेदारी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) लग रही थी, लेकिन बाद में इसमें गड़बड़ी और धोखाधड़ी की बातें सामने आने लगीं.

कालनत्री परिवार का संबंध

इस पूरे मामले के बीच में कालनत्री परिवार का नाम है, जिनका TGBL कंपनी से गहरा जुड़ाव है. डॉ. विजय गोवर्धनदास कालनत्री — जो एक जाने-माने उद्योगपति हैं और Dighi Port Limited और Balaji Infra Projects के प्रमोटर भी हैं — TGBL और इसकी ग्रीन हाइड्रोजन योजनाओं का लंबे समय से समर्थन करते आ रहे हैं. उनकी बेटी TGBL की प्रमोटर है और उनका बेटा विशाल विजय कालनत्री पहले इस कंपनी में बड़ा पद संभाल चुका है. अब CBI का आरोप है कि TGBL ने ₹25 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी (Performance Bank Guarantee) जमा की थी. यह गारंटी पंजाब नेशनल बैंक, घाटकोपर ईस्ट ब्रांच की बताई गई थी — लेकिन बैंक ने कहा कि वह गारंटी नकली (फर्जी) है.

FIR और मुख्य आरोपी

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव और चीफ विजिलेंस ऑफिसर संजीव शंकर की शिकायत पर CBI ने एक केस दर्ज किया है. इस केस में कई लोगों के नाम शामिल हैं:

• जॉर्ज कुरुविला – BECIL के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर
• डब्ल्यू.बी. प्रसाद – जनरल मैनेजर
• आशीष प्रताप सिंह – पूर्व लीगल एडवाइजर
• सुधीर चौहान – पूर्व सलाहकार
• प्रतीक कनाकिया – TGBL के सीईओ और फाउंडर
• और कुछ अन्य अज्ञात लोग

CBI का आरोप है कि इन सभी ने मिलकर TGBL को ₹50 करोड़ तीन किश्तों में दे दिए, जबकि कंपनी कुछ ज़रूरी शर्तें पूरी नहीं कर पाई थी. इन शर्तों में शामिल थे, इन्डेम्निटी बॉन्ड (Indemnity Bond) देना, ₹45 करोड़ के ब्लैंक चेक जमा करना, ज़मीन की लीज़ डीड (Land Lease Deed) देना. अब और हैरानी की बात यह है कि इस प्रोजेक्ट से जुड़े अहम दस्तावेज — जैसे फर्जी बैंक गारंटी, इन्डेम्निटी बॉन्ड और हाइपोथिकेशन की सहमति — BECIL के नई दिल्ली ऑफिस से गायब हो गए हैं. इससे सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका बढ़ गई है.

CBI ने इन आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की ये धाराएं लगाई हैं:

• आपराधिक साजिश (धारा 120-B)
• धोखाधड़ी (धारा 420)
• जालसाजी (धारा 467, 468, 471)
• सबूत नष्ट करना (धारा 201)
• इसके अलावा भ्रष्टाचार निरोधक कानून, 1988 की धारा 7 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है.

परेशानियों से भरा वित्तीय इतिहास

यह पहली बार नहीं है जब कालनत्री परिवार विवादों में आया है. विजय कालनत्री, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री एस.बी. चव्हाण के करीबी माने जाते थे और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण से भी जुड़े रहे हैं, पहली बार 2001 में चर्चा में आए थे. उस समय मुंबई के नरीमन पॉइंट में एक कीमती प्रॉपर्टी एस.बी. चव्हाण के नाम पर बने एक ट्रस्ट को दी गई थी, जिसमें विजय कालनत्री और जयंत शाह ट्रस्टी थे. 

2014 में महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना सरकार आने के बाद वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (WTC), कफ परेड को चलाने वाले संगठन MVIRDC में कई वित्तीय गड़बड़ियाँ सामने आईं. विजय कालनत्री WTC के चेयरमैन रहे हैं. कई मीडिया रिपोर्ट्स में कालनत्री, उनके बेटे और अन्य अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे. इनमें एक 80 साल के निदेशक को 2012-13 में ₹50 लाख की सैलरी देने का मामला भी था, जो माना जाता है कि कालनत्री और कमल मोरारका के कहे पर चलते थे. मुंबई मिरर ने तब एक कड़ी रिपोर्ट में WTC को “धोखे की मीनार” कहा था. मोरारका की मृत्यु के बाद WTC में विजय कालनत्री ही अकेले ताकतवर व्यक्ति रह गए.

2019 में, बैंक ऑफ बड़ौदा ने विजय कालनत्री को जानबूझकर लोन न चुकाने वाला (wilful defaulter) घोषित किया. यह मामला ₹3,334 करोड़ का था, जो 16 बैंकों के समूह से लिया गया था, जिसका नेतृत्व बैंक ऑफ इंडिया कर रहा था. यह लोन दिघी पोर्ट से जुड़ा हुआ था. 2021 में भी उनका नाम एक और CBI केस में आया, जिसमें कपड़ा कंपनी एस कुमार्स (Reid & Taylor ब्रांड की मालिक) पर IDBI बैंक ने ₹1,245.15 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप लगाया. उस समय विजय कालनत्री कंपनी के डायरेक्टर थे. आरोप था कि कंपनी ने बैंकों से लिए पैसे फर्जी लेन-देन और फंड की हेराफेरी से इधर-उधर कर दिए. KPMG की एक जांच रिपोर्ट में कई संदिग्ध लेन-देन और गलत तरीके से बकाया पैसे माफ करने की बात कही गई.

संकट में विरासत और नेतृत्व

यह नया मामला विजय कालनत्री के लंबे और विवादों से घिरे करियर पर एक और गहरा साया डाल रहा है. विजय कालनत्री, जो ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज़ (AIAI) के अध्यक्ष और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मुंबई के चेयरमैन हैं, दशकों से भारत के उद्योग, व्यापार और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में एक असरदार शख्सियत रहे हैं. 

अब महाराष्ट्र में फिर से बीजेपी-शिवसेना सरकार के आने के बाद और कुछ नए राजनीतिक और कारोबारी लोगों की नजर MVIRDC (जो WTC को चलाता है) की कीमती संपत्तियों और मैनेजमेंट पर है. ऐसे में कहा जा रहा है कि कालनत्री का इन संस्थाओं पर बना हुआ नियंत्रण खतरे में है. सूत्रों का कहना है कि कम से कम तीन ताकतवर लोग — जिनमें एक MKB से जुड़ा पावर ब्रोकर और एक ग्रुप जो हिन्डेनबर्ग मामले से जुड़ा बताया जा रहा है — इसमें सक्रिय हो गए हैं.

CBI की यह जांच ऐसे समय में शुरू हुई है जब विजय कालनत्री अपनी बेटी संगीता जैन को AIAI और WTC में अपना उत्तराधिकारी (नेतृत्व संभालने वाली) बनाने की तैयारी कर रहे थे. लेकिन अब जब संगीता खुद कानूनी मुसीबतों में फंसी हैं, तो सूत्रों का मानना है कि प्रिय पानसरे — जो विजय कालनत्री (जूनियर) की भरोसेमंद सहयोगी हैं — AIAI और MVIRDC में जल्दी ही बड़ी भूमिका निभा सकती हैं.

आगे क्या हो सकता है

अब जब CBI की मुंबई स्थित एंटी करप्शन ब्यूरो के डीएसपी अरुण भास्कर इस मामले की जांच संभाल चुके हैं और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 17-A के तहत जरूरी मंजूरी भी मिल गई है, तो माना जा रहा है कि CBI अब कालनत्री परिवार की भूमिका की गहराई से जांच करेगी.

(लेखक- पलक शाह, "द मार्केट माफिया - क्रॉनिकल ऑफ इंडिया’s हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कबाल दैट वेंट स्कॉट-फ्री" किताब के लेखक हैं. पलक शाह पिछले दो दशकों से मुंबई में पत्रकारिता कर रहे हैं. उन्होंने द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन जैसे प्रमुख पिंक पेपरों में काम किया है. वह 19 साल की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग से जुड़े थे, लेकिन कुछ सालों में इस क्षेत्र में काम करने के बाद उन्हें यह महसूस हुआ कि अपराध की संरचना बदल चुकी थी और वह संगठित गिरोह, जैसा कि मुंबई ने 80 के दशक में देखा था, अब अस्तित्व में नहीं थे.  'व्हाइट मनी' अर्थव्यवस्था की जटिलताओं को समझने के उनके जुनून ने पलक को वित्त और नियामकों की दुनिया में पहुंचा दिया.)
 


ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच में रिलायंस के दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार

ईडी ने अपनी जांच में पाया कि अनिल अंबानी समूह से जुड़ी कंपनियों ने कथित रूप से 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग की.

Last Modified:
Thursday, 16 April, 2026
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए रिलायंस समूह से जुड़े दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया है. यह मामला कथित लोन फ्रॉड और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है.

ईडी के अनुसार, अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत हिरासत में लिया गया है. यह कार्रवाई केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा पहले दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर की गई है.

किन कंपनियों से जुड़ा है मामला

सीबीआई की जांच में सामने आया कि यह मामला रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से जुड़ा है. इन कंपनियों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और बैंक फंड के दुरुपयोग के आरोप हैं.

₹40,000 करोड़ से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

ईडी ने अपनी जांच में पाया कि अनिल अंबानी समूह से जुड़ी कंपनियों ने कथित रूप से 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग की. एजेंसी ने अब तक लगभग 17,000 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की हैं. इसमें मुंबई स्थित अनिल अंबानी का करीब 3,700 करोड़ रुपये का आवास भी शामिल है.

अनिल अंबानी से भी हो चुकी है पूछताछ

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच एजेंसियों ने अनिल अंबानी से कई बार पूछताछ की है. हालांकि, उनका कहना है कि उन्होंने वर्ष 2017 में संबंधित कंपनियों के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था.

झुनझुनवाला और बापना की भूमिका

अमिताभ झुनझुनवाला, जो रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के पूर्व ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर और रिलायंस कैपिटल के वाइस चेयरमैन रह चुके हैं, पहले भी जांच एजेंसियों के रडार पर रहे हैं. जांचकर्ताओं का मानना है कि उन्होंने RHFL और RCFL से जुड़े वित्तीय फैसलों में अहम भूमिका निभाई. वहीं, अमित बापना रिलायंस फाइनेंस में एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्यरत थे.

कैसे हुआ घोटाला

ईडी के अनुसार, RHFL और RCFL ने कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों से जनता का पैसा जुटाया, जिसमें से 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बाद में एनपीए (Non-Performing Assets) में बदल गई. जांच में यह भी सामने आया कि इस धन को शेल कंपनियों के नेटवर्क के जरिए अन्य रिलायंस समूह की कंपनियों में ट्रांसफर किया गया, जिनकी वित्तीय स्थिति बेहद कमजोर थी और जिनका कोई ठोस व्यवसाय नहीं था.

किन बैंकों ने दर्ज कराई शिकायत

ईडी ने यह मामला जुलाई 2025 में दर्ज किया था, जो यस बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शिकायतों पर आधारित था. सीबीआई ने कंपनियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के उल्लंघन के तहत मामला दर्ज किया है.

ईडी की आगे की कार्रवाई

मार्च 2026 में ईडी ने इस पूरे मामले में पैसे की हेराफेरी के तरीके (मोडस ऑपरेंडी) का खुलासा किया था और संपत्तियों को जब्त करने का आदेश जारी किया था. एजेंसी ने कहा है कि वह वित्तीय अपराधों के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगी और अवैध संपत्तियों को उनके वास्तविक हकदारों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है.
 


ईडी ने I-PAC के सह-संस्थापक विनेश चंदेल को पश्चिम बंगाल कोयला घोटाले में किया गिरफ्तार

ईडी की यह गिरफ्तारी कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की परतें खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. एजेंसी इस मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान और नेटवर्क के विस्तार को समझने की कोशिश कर रही है.

Last Modified:
Tuesday, 14 April, 2026
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राजनीतिक परामर्श फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी के सह-संस्थापक विनेश चंदेल को पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई है. यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा नवंबर 2020 में दर्ज की गई एफआईआर से जुड़ा है. इसमें पश्चिम बंगाल में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों से बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी का आरोप लगाया गया था. जांच में अवैध खनन और कोयले की हेराफेरी से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है.

PMLA के तहत गिरफ्तारी

ईडी ने विनेश चंदेल को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के प्रावधानों के तहत दिल्ली में हिरासत में लिया. उन्हें जल्द ही विशेष अदालत में पेश किया जाएगा. एजेंसी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध कमाई के प्रवाह की जांच कर रही है.

वित्तीय लेन-देन की जांच पर फोकस

ईडी की जांच का मुख्य फोकस कथित अपराध से जुड़े पैसों के लेन-देन और उनकी ट्रेल का पता लगाना है. एजेंसी यह भी जांच रही है कि कोयला चोरी के नेटवर्क और चंदेल से जुड़े संस्थानों के बीच क्या संबंध हैं. इससे पहले ईडी ने दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई सहित कई स्थानों पर छापेमारी की थी, जहां से वित्तीय दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाए गए.

लंबे समय से जांच के दायरे में घोटाला

पश्चिम बंगाल कोयला घोटाला पिछले कई वर्षों से जांच के दायरे में है. इसमें सरकारी खदानों से संगठित तरीके से अवैध कोयला निकालने और बेचने के आरोप हैं. इस मामले में कई व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका की जांच की जा रही है.

ईडी की यह गिरफ्तारी कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की परतें खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. एजेंसी इस मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान और नेटवर्क के विस्तार को समझने की कोशिश कर रही है.


फर्जी बीमा पॉलिसी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, NIC के CMD समेत कर्मचारियों को आरोपी बनाने का आदेश

यह फैसला बीमा क्षेत्र में जवाबदेही तय करने और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

Last Modified:
Friday, 03 April, 2026
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सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी बीमा पॉलिसी से जुड़े एक गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी (NIC) के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) को आपराधिक मामले में आरोपी बनाए जाने का आदेश दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने पूरे मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने का आदेश भी दिया.

यह मामला मोटर दुर्घटना से जुड़े एक क्लेम में कथित रूप से फर्जी बीमा पॉलिसी के इस्तेमाल से संबंधित है. जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने यह आदेश देते हुए बीमा कंपनी की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई.

कंपनी की लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब कंपनी खुद यह दावा कर रही थी कि बीमा पॉलिसी फर्जी है, तब भी उसने कोई आपराधिक शिकायत दर्ज नहीं कराई, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाता है. कोर्ट ने इसे “जिम्मेदारी की घोर कमी” बताया.

कोर्ट ने टिप्पणी की कि अब समय आ गया है कि बीमा कंपनियां अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाएं, क्योंकि वे जो भुगतान करती हैं, वह आम जनता के पैसे से होता है.

SIT को सौंपी गई जांच

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को “राष्ट्रीय महत्व का टेस्ट केस” बताते हुए SIT को निर्देश दिया कि वह नया केस दर्ज करे, जिसमें NIC के CMD से लेकर स्थानीय शाखा प्रबंधक तक सभी संबंधित कर्मचारियों को आरोपी बनाया जाए. साथ ही बस के मालिक को भी आरोपी के रूप में शामिल करने को कहा गया है.

कोर्ट ने SIT को निर्देश दिया कि जांच तेजी और गंभीरता से की जाए तथा फर्जी बीमा दस्तावेज तैयार करने की साजिश की गहराई से पड़ताल की जाए.

DGP ने कोर्ट में मांगी माफी

इस मामले में पहले तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया था. उनके हलफनामे में कहा गया था कि मोटर दुर्घटना मामलों में पुलिस बीमा दस्तावेजों की सत्यता की जांच नहीं करती.

इस पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई. शुक्रवार को DGP ने कोर्ट में पेश होकर बिना शर्त माफी मांगी, जिसे बेंच ने स्वीकार कर लिया. उन्होंने बताया कि अब E-DAR और वाहन पोर्टल के जरिए बीमा विवरण का तुरंत और स्वचालित सत्यापन संभव हो गया है.

पीड़ित को जल्द मुआवजा देने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया कि दुर्घटना पीड़ित को मुआवजा मिलने में और देरी न हो. कोर्ट ने बीमा कंपनी को चार सप्ताह के भीतर सीधे पीड़ित को मुआवजा देने का आदेश दिया. हालांकि, कंपनी को यह राशि बाद में वाहन के नियंत्रण में रहे व्यक्ति (लीजधारक) से वसूलने की अनुमति दी गई है.

मामला कैसे शुरू हुआ

यह मामला के. सरवनन नामक एक सड़क दुर्घटना पीड़ित से जुड़ा है, जो बस हादसे में घायल हो गए थे. लंबा इलाज और सर्जरी के बाद उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी. उन्होंने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) में मुआवजे के लिए याचिका दायर की थी.

बीमा कंपनी ने दावा पूरी तरह खारिज करते हुए पॉलिसी को अमान्य बताया, लेकिन MACT और बाद में मद्रास हाईकोर्ट ने कंपनी की दलीलें खारिज कर दीं और मुआवजा देने का आदेश दिया. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.

 


हनी सिंह के मुंबई कॉन्सर्ट पर FIR दर्ज, अवैध लेजर लाइट और सुरक्षा चिंताओं के आरोप

बताया जा रहा है कि NDTV से जुड़े इस कार्यक्रम की खबर पहले NDTV Profit की वेबसाइट पर प्रकाशित हुई थी, लेकिन बाद में वह खबर वहां से हटा दी गई और लिंक खोलने पर “404 Something Went Wrong” दिखने लगा. 

Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2026
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मुंबई में मशहूर रैपर और सिंगर यो यो हनी सिंह के NDTV GoodTimes से जुड़े ‘My Story India Tour’ के एक कॉन्सर्ट को लेकर विवाद सामने आया है. जानकारी के मुताबिक, कार्यक्रम में लेजर लाइट के इस्तेमाल से जुड़े नियमों के उल्लंघन के मामले में पुलिस ने FIR दर्ज की है. इस FIR ने शहर में बड़े सार्वजनिक आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस को तेज कर दिया है.

कॉन्सर्ट की जानकारी और आयोजन स्थल

यह कॉन्सर्ट 28 मार्च को मुंबई के बांद्रा स्थित एमएमआरडीए ग्राउंड में आयोजित किया गया था. रिपोर्ट्स के अनुसार, शो के दौरान लेजर लाइट्स का इस्तेमाल किया गया, जबकि इसके लिए पहले से निर्धारित सुरक्षा नियमों और दिशानिर्देशों का पालन पूरी तरह नहीं किया गया. स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि संबंधित एजेंसियों की ओर से आयोजकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, लेकिन उनके उल्लंघन की शिकायत सामने आई. इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने FIR दर्ज की.

लेजर लाइट और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन

कानूनी आरोपों में उच्च-तीव्रता वाली लेजर लाइट का उपयोग शामिल है, जिसके लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी. यह स्थल हवाई मार्ग के पास आता है, जहां ऐसी लाइट के उपयोग पर सख्त नियम हैं. इस तरह की अनियंत्रित लाइट्स से हवाई सुरक्षा को खतरा हो सकता है.

भीड़ नियंत्रण और प्रवेश में अव्यवस्था

कॉन्सर्ट में बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे और प्रवेश द्वार पर अव्यवस्था देखी गई. सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में एक महिला फैन गेट पर चढ़ने की कोशिश करती नजर आई, जिससे सुरक्षा कर्मियों के साथ तकरार हुई. इस मामले ने भीड़ नियंत्रण और एंट्री पॉइंट्स के महत्व को उजागर किया. 

मीडिया में चर्चा

इस मामले का सबसे चर्चित पहलू मीडिया इंडस्ट्री में चर्चा का विषय बना हुआ है. बताया जा रहा है कि NDTV से जुड़े इस कार्यक्रम की खबर पहले NDTV Profit की वेबसाइट पर प्रकाशित हुई थी, लेकिन बाद में वह खबर वहां से हटा दी गई और लिंक खोलने पर “404 Something Went Wrong” दिखने लगा. 

FIR में शामिल आरोप

पुलिस ने आयोजकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिसमें निम्नलिखित आरोप शामिल हैं.
1. अवैध लेजर लाइट का उपयोग जो हवाई सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करता है
2. सुरक्षा नियमों और दिशानिर्देशों का पालन न करना
3. भीड़ नियंत्रण में लापरवाही

जांच यह निर्धारित करेगी कि किन परिस्थितियों में नियमों का उल्लंघन हुआ और क्या आयोजकों ने आवश्यक अनुमति ली थी.

आयोजकों और प्रदर्शन की प्रतिक्रिया

कॉन्सर्ट का प्रदर्शन हाई एनर्जी और दर्शकों में लोकप्रिय रहा, जिसमें हनी सिंह ने अपने कई हिट गानों से मनोरंजन किया. लेकिन यह कानूनी मामला अब विवाद का मुख्य केंद्र बन गया है, जिससे कॉन्सर्ट की सफलता पर सवाल उठे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े आयोजन जैसे लाइव कॉन्सर्ट में सुरक्षा मानकों का पालन और भीड़ प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर हवाई मार्ग के पास के क्षेत्रों में.

पुलिस अब अनुमतियों, सुरक्षा प्रोटोकॉल और आयोजन के दौरान निर्णयों के दस्तावेज़ों की गहन जांच करेगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं. जांच के आधार पर आयोजकों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संभावना बनी हुई है. 


अनिल अंबानी ने अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी पर किया मानहानि केस

यह मामला मीडिया, कॉरपोरेट जगत और कानून के बीच संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.

Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2026
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देश के प्रमुख उद्योगपति अनिल अंबानी ने मीडिया जगत से जुड़े एक बड़े विवाद में कानूनी कार्रवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया है. उन्होंने जाने-माने पत्रकार अर्नब गोस्वामी और उनके चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है. यह मामला हाल ही में प्रसारित कुछ टीवी कार्यक्रमों से जुड़ा बताया जा रहा है.

टीवी प्रसारण पर उठे सवाल

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा विवाद उन कार्यक्रमों को लेकर है जिनमें अनिल अंबानी के वित्तीय लेन-देन से संबंधित खबरें दिखाई गई थीं. अंबानी का आरोप है कि इन प्रसारणों में ऐसी सामग्री दिखाई गई, जिससे उनकी छवि और प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा है.

याचिका में क्या कहा गया?

दायर याचिका में दावा किया गया है कि चैनल के कुछ शो में मानहानिकारक बातें प्रसारित की गईं. इसके चलते आम जनता, कारोबारी समुदाय और निवेशकों के बीच उनके प्रति गलत धारणा बनी. अंबानी का कहना है कि इस तरह की रिपोर्टिंग से उनकी साख पर नकारात्मक असर पड़ा है.

कोर्ट से क्या मांग की गई?

अनिल अंबानी ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि अंतिम फैसला आने तक अर्नब गोस्वामी और ‘रिपब्लिक टीवी’ को उनके खिलाफ किसी भी तरह की सामग्री प्रसारित या प्रकाशित करने से रोका जाए. इसके लिए उन्होंने इंटरिम राहत (अस्थायी रोक) की मांग की है.

याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि ऐसे कार्यक्रमों का प्रसारण जारी रहता है, तो उनकी व्यक्तिगत और पेशेवर छवि को और अधिक नुकसान हो सकता है. इस नुकसान की भरपाई करना भविष्य में बेहद कठिन होगा.

अगली सुनवाई कब?

यह मामला 1 अप्रैल को जस्टिस मिलिंद जाधव की बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हो सकता है. फिलहाल केस प्रारंभिक चरण में है और अदालत यह तय करेगी कि अनिल अंबानी को अंतरिम राहत दी जानी चाहिए या नहीं.

 


उच्च न्यायालय के आदेश पर UNI का दिल्ली कार्यालय सील

दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद UNI के राफी मार्ग कार्यालय की भूमि आवंटन रद्द करने के फैसले पर कार्रवाई की गई.

Last Modified:
Saturday, 21 March, 2026
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संयुक्त समाचार एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (UNI) के दिल्ली कार्यालय को 20 मार्च 2026 को सील कर दिया गया. यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस और प्रशासन की टीम द्वारा की गई. पुलिस ने बताया कि यह कदम दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उठाया गया.

UNI के राफी मार्ग कार्यालय की जमीन का आवंटन पहले ही रद्द किया जा चुका था. UNI ने इस फैसले के खिलाफ न्यायालय में अपील की थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने उसकी याचिका खारिज कर दी और जमीन रद्द करने के आदेश को बरकरार रखा. इसके बाद कार्यालय खाली करने का निर्देश दिया गया.

पुलिस ने किया कार्यालय खाली और सील

उच्च न्यायालय के आदेश के आधार पर पुलिस ने कार्यालय को खाली कराकर सील कर दिया. मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी मौजूद थे. अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुसार और वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ की गई.

कार्यालय सील होने के दौरान कर्मचारियों में हलचल रही. कर्मचारियों का कहना था कि उन्हें जबरन बाहर निकाला गया और कुछ कर्मचारियों को अपने सामान इकट्ठा करने का समय नहीं मिला. हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूरी कार्रवाई नियमों के अनुसार की गई.

दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद UNI के राफी मार्ग कार्यालय की भूमि आवंटन रद्द करने के फैसले पर कार्रवाई की गई. अधिकारियों ने सुनिश्चित किया कि सभी कदम कानूनी प्रक्रिया के अनुसार उठाए गए और कार्यालय सील करने की प्रक्रिया पूरी तरह नियंत्रित तरीके से संपन्न हुई.


CBI मामले में प्रणय-राधिका रॉय को राहत, दिल्ली हाई कोर्ट ने LOC किए खारिज

दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले से रॉय दंपति को बड़ी राहत मिली है. हालांकि, 2019 का मामला अभी जारी है, ऐसे में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी रहेगी.

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Friday, 20 March, 2026
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दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व एनडीटीवी (NDTV) प्रमोटर्स प्रणय रॉय और राधिका रॉय को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर (LOC) को रद्द कर दिया है. यह फैसला CBI द्वारा दर्ज दो मामलों के संदर्भ में आया है, जिनमें से एक पहले ही बंद हो चुका है, जबकि दूसरा अभी लंबित है.

न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने शुक्रवार को यह आदेश सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता जांच में सहयोग करेंगे, इस शर्त पर लुक आउट सर्कुलर रद्द किए जाते हैं. हाई कोर्ट को बताया गया कि यह LOC जून 2017 और अगस्त 2019 में दर्ज दो अलग-अलग FIR के संबंध में CBI की सिफारिश पर जारी किए गए थे.

2017 का मामला हो चुका बंद
2017 में दर्ज मामला प्रणय रॉय, राधिका रॉय, RRPR होल्डिंग्स और NDTV के खिलाफ था. यह शिकायत क्वांटम सिक्योरिटी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक संजय दत्त द्वारा की गई थी. आरोप था कि NDTV में 20% हिस्सेदारी खरीदने के लिए लिए गए लोन में ICICI बैंक अधिकारियों के साथ साजिश की गई.

हालांकि, बाद में CBI ने इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी. एजेंसी ने कहा कि उस अवधि में कई लोन खातों पर ब्याज दरों में कमी की गई थी और यह मामला कोई अपवाद नहीं था. हाई कोर्ट ने 23 जनवरी को इस क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था.

2019 का मामला अभी लंबित
वहीं, अगस्त 2019 में दर्ज दूसरा मामला अभी भी लंबित है और इसमें अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है.  प्रणय रॉय और राधिका रॉय की ओर से अधिवक्ता अनुराधा दत्त, पवन शर्मा, सुमन यादव, कुनाल दत्त, सौरभ सिंह और निशांत वरुण ने पैरवी की. वहीं, विशेष वकील अनुपम एस शर्मा ने प्रतिवादियों का पक्ष रखा.


दिल्ली हाई कोर्ट का नोटिस: कांग्रेस मानहानि मामले में अर्नब गोस्वामी को समन

यह मामला मीडिया और राजनीतिक दलों के बीच जिम्मेदारी और अभिव्यक्ति की सीमा को लेकर एक अहम उदाहरण बन सकता है.

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Tuesday, 17 March, 2026
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दिल्ली हाई कोर्ट ने कांग्रेस पार्टी द्वारा दायर मानहानि मामले में रिपब्लिक टीवी के एडिटर अर्णब गोस्वामी को समन जारी किया है. यह मामला उन दावों को लेकर है जिसमें कहा गया था कि कांग्रेस का तुर्की में एक कार्यालय संचालित होता है.

क्या है पूरा मामला

कांग्रेस पार्टी ने अदालत में दायर याचिका में आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ प्रसारित और प्रकाशित सामग्री मानहानिकारक है. पार्टी का कहना है कि यह कंटेंट अब भी ऑनलाइन उपलब्ध है और इससे जुड़े लेख लगातार प्रसारित हो रहे हैं. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पक्षों की दलीलों पर ध्यान देते हुए इसे आगे की सुनवाई के लिए मई महीने में सूचीबद्ध करने का फैसला किया. साथ ही, कोर्ट ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया है कि वे चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करें.

अब इस मामले में अगली सुनवाई मई में होगी, जहां अदालत यह तय करेगी कि आरोपों और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आगे क्या कार्रवाई की जाए. यह मामला मीडिया और राजनीतिक दलों के बीच जिम्मेदारी और अभिव्यक्ति की सीमा को लेकर एक अहम उदाहरण बन सकता है. आने वाले समय में इस पर कोर्ट का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है.


हरदीप सिंह पुरी की बेटी ने 10 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया, एपस्टीन से जोड़ने वाली सामग्री हटाने की मांग

याचिका में अदालत से कहा गया है कि इन डिजिटल मंचों को निर्देश दिया जाए कि वे उन सभी पोस्ट, वीडियो, इंटरनेट लेखों और अन्य डिजिटल सामग्री को हटाएं जिनमें हिमायनी पुरी को एपस्टीन से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है.

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Tuesday, 17 March, 2026
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केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी ने अपने खिलाफ सामाजिक माध्यमों और इंटरनेट पर फैलाए जा रहे आरोपों को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में 10 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया है. याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि उन सभी पोस्ट, वीडियो और इंटरनेट लेखों को हटाने का निर्देश दिया जाए, जिनमें उन्हें बदनाम वित्तीय कारोबारी जेफ्री एपस्टीन से जोड़कर दिखाया गया है. याचिका में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स एक्स, गूगल, मेटा और लिंक्डइन सहित कई अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ स्थायी रोक लगाने की भी मांग की गई है. मामले की सुनवाई मंगलवार को होने की संभावना है.

सोशल मीडिया से सामग्री हटाने की मांग

याचिका में अदालत से कहा गया है कि इन डिजिटल मंचों को निर्देश दिया जाए कि वे उन सभी पोस्ट, वीडियो, इंटरनेट लेखों और अन्य डिजिटल सामग्री को हटाएं जिनमें हिमायनी पुरी को एपस्टीन से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है. साथ ही यह भी मांग की गई है कि भविष्य में यदि इसी तरह की मानहानिकारक सामग्री सामने आती है तो उसे भी तुरंत हटाया जाए.

22 फरवरी से फैलने लगे आरोप

मुकदमे में कहा गया है कि 22 फरवरी 2026 से कई सामाजिक माध्यम खातों ने ऐसे आरोप प्रसारित करना शुरू किया, जिनमें दावा किया गया कि हिमायनी पुरी के एपस्टीन और उसकी आपराधिक गतिविधियों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष व्यावसायिक, वित्तीय या व्यक्तिगत संबंध रहे हैं. कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि जिस कंपनी रियल पार्टनर्स में वह पहले कार्यरत थीं, उसे एपस्टीन या उसके सहयोगियों से आर्थिक लाभ या संदिग्ध धन प्राप्त हुआ था. एक अन्य आरोप में यह भी दावा किया गया कि कारोबारी रॉबर्ट मिलार्ड ने पुरी के साथ मिलकर निवेश बैंक लेहमन ब्रदर्स के पतन की साजिश रची थी.

आरोपों को बताया पूरी तरह निराधार

हिमायनी पुरी ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. याचिका में कहा गया है कि इंटरनेट पर प्रसारित किए जा रहे दावे किसी भी तथ्यात्मक आधार पर आधारित नहीं हैं और उनका उद्देश्य केवल उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना है. याचिका के अनुसार कुछ सामाजिक माध्यम खातों और अज्ञात व्यक्तियों ने सनसनीखेज और भ्रामक तरीकों जैसे संपादित वीडियो, गुमराह करने वाले शीर्षक और बदले हुए चित्रों का इस्तेमाल कर इन आरोपों को फैलाया.

पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश

याचिका में कहा गया है कि यह एक सुनियोजित इंटरनेट अभियान है जिसका उद्देश्य भारत और विदेशों में हिमायनी पुरी की पेशेवर छवि को नुकसान पहुंचाना है. इसमें यह भी कहा गया कि उन्हें समन्वित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है ताकि उनकी विश्वसनीयता को कमजोर किया जा सके.

पिता के राजनीतिक पद से जोड़ा गया मामला

याचिका में यह भी कहा गया है कि यह पूरा अभियान उनके पिता के राजनीतिक पद से जुड़ा हुआ है. चूंकि हरदीप सिंह पुरी केंद्र सरकार में वरिष्ठ मंत्री हैं इसलिए उनकी बेटी को निशाना बनाया जा रहा है.

वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी कर रहे हैं पैरवी

इस मानहानि मुकदमे की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी कर रहे हैं. यह कानूनी कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब एपस्टीन से जुड़ी जांच के दस्तावेजों में हरदीप सिंह पुरी का नाम आने को लेकर चर्चा हो रही है. केंद्रीय मंत्री ने हाल ही में इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते हुए किसी भी प्रकार की गलत गतिविधि से अपना संबंध होने से इनकार किया है.

पुरी ने कहा कि न्यूयॉर्क में अपने कार्यकाल के दौरान उनकी एपस्टीन से केवल कुछ बार मुलाकात हुई थी और बातचीत मुख्य रूप से भारत की आर्थिक पहलों और वैश्विक कारोबारी नेताओं की संभावित भारत यात्रा से संबंधित थी. उन्होंने यह भी कहा कि दस्तावेजों में उनके नाम का उल्लेख मुख्य रूप से संक्षिप्त संदर्भों और दोहराव के रूप में है, न कि किसी अवैध गतिविधि के प्रमाण के रूप में.
 


हरियाणा में 590 करोड़ बैंक घोटाले पर ACB का शिकंजा: मास्टरमाइंड समेत 5 गिरफ्तार

इस बड़े एक्शन के बाद हरियाणा की सियासत और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है, और सभी की नजर अब जांच की अगली कड़ी पर टिकी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 25 February, 2026
Last Modified:
Wednesday, 25 February, 2026
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हरियाणा में सामने आए बहुचर्चित आईएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मंगलवार देर रात मास्टरमाइंड रिभव ऋषि सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. जांच एजेंसियों के मुताबिक फर्जी कंपनियों के जरिए सरकारी खातों से करीब 590 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई. अब इस मामले में कुछ सरकारी अफसरों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जिस पर जल्द नकेल कसने के संकेत हैं.

फर्जी कंपनियां बनाकर रची गई साजिश

जांच में खुलासा हुआ है कि कथित मास्टरमाइंड रिभव ऋषि पहले IDFC First Bank में मैनेजर रह चुका है और फिलहाल जीरकपुर स्थित AU Small Finance Bank में तैनात था. आरोप है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी कंपनियां खड़ी कीं और हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के खातों से बड़ी रकम ट्रांसफर कराई. गिरफ्तार आरोपियों में रिभव ऋषि के अलावा अभिषेक सिंगला, अभय, स्वाति और एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं. ACB ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि इनमें कितने बैंक कर्मचारी हैं और कितने बाहरी लोग, लेकिन शुरुआती जांच में संगठित नेटवर्क के संकेत मिले हैं.

24 घंटे में रिकवरी का दावा

मामले के तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री नायब सैनी ने विधानसभा में बताया कि IDFC First Bank से ब्याज समेत पूरी राशि रिकवर कर ली गई है. सरकार का दावा है कि त्वरित कार्रवाई के चलते सार्वजनिक धन को सुरक्षित कर लिया गया. हालांकि एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी राशि की निकासी कैसे संभव हुई और निगरानी तंत्र कहां चूक गया.

सरकारी अफसरों पर भी शक की सुई

ACB सूत्रों के अनुसार कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है. बड़ा सवाल यह है कि पंचकूला में मुख्यालय होने के बावजूद 18 सरकारी विभागों के खाते चंडीगढ़ स्थित बैंकों में क्यों खोले गए. क्या यह महज प्रशासनिक निर्णय था या इसके पीछे किसी तरह का लाभ जुड़ा था? इन बिंदुओं की हाई लेवल जांच शुरू कर दी गई है.

पिछले साल ही मिली थी गड़बड़ी की भनक

चौंकाने वाली बात यह है कि सरकार को जुलाई 2025 में ही संभावित अनियमितताओं की जानकारी मिल गई थी. वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) ने सभी विभागों को सतर्कता बरतने के निर्देश भी जारी किए थे. इसके बावजूद खातों के संचालन और बैंक इंपैनलमेंट प्रक्रिया पर पर्याप्त सख्ती क्यों नहीं बरती गई, यह भी जांच का अहम हिस्सा है.

सरकार ने IDFC First Bank और AU Small Finance Bank को इंपैनल करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा के आदेश दिए हैं. आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं. ACB की कार्रवाई ने साफ संकेत दे दिया है कि सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में अब सख्त रुख अपनाया जाएगा.