Yamuna Expressway: आज सुबह कार में लगी आग, जिंदा जले 2 इनसान

यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे में 2 लोग जिंदा जल गए हैं. कार नोएडा से आगरा की ओर जा रही थी, तभी ये दुर्घटना हो गई.

Last Modified:
Monday, 21 November, 2022
file photo

यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway) पर हादसे की खबर है. जानकारी के अनुसार, सोमवार यानी आज सुबह हुए इस सड़क हादसे में दो लोगों की मौत हो गई है. मृतक दिल्ली के बताए जा रहे हैं. दुर्घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और बचावकर्मी मौके पर पहुंच गए हैं. एक्सीडेंट माइल स्टोन 60 के पास हुआ, इसके तुरंत बाद कार में आग लग गई और उसमें सवार दोनों लोग जिंदा जल गए. 

ऐसे हुआ एक्सीडेंट
जानकारी के मुताबिक, घटना सुबह करीब छह बजे की है. नोएडा से आगरा की ओर आ रही स्विफ्ट डिजायर नौहझील थाना क्षेत्र के चांदपुर गांव के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई. कार एक्सप्रेस वे पर पलटे पड़े ट्रोला से टकरा गई और इसके तुरंत बाद उसमें आग लग गई. सबकुछ इतनी जल्दी हुआ कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला. कार की फ्रंट सीट पर बैठे दोनों यानी जिंदा जल गए.   

गाड़ी नंबर से हुई पहचान
दुर्घटना के चलते एक्सप्रेस वे पर नोएडा से आगरा की ओर आने वाला ट्रैफिक थम गया. सूचना पर पहुंछे दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक कार में बैठे दोनों लोग जिंदा जल चुके थे. मृतकों की पहचान गाड़ी नंबर के आधार पर की गई है. पुलिस ने बताया कि मरने वाले वेस्ट करावल नगर ईस्ट दिल्ली के निवासी लाला और सोनू कुमार हैं. पीड़ित परिवार को इसकी सूचना दे दी गई है.


नेटफ्लिक्स स्टार का पतन: कोर्ट ने सतीश सनपाल की IPL सट्टेबाजी FIR खत्म कराने की कोशिश को किया खारिज

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने दुबई के अरबपति की "बच निकलने की रणनीति" को ध्वस्त कर दिया है, जिसे BW Businessworld की उन स्टोरीज ने व्यवस्थित रूप से उजागर किया था, जिनके बाद UAE में उनकी संपत्तियां फ्रीज होने की खबरें सामने आईं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 13 August, 2026
Last Modified:
Thursday, 13 August, 2026
BWHindia

पलक शाह

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भारत मूल के दुबई के अरबपति सतीश सनपाल के खिलाफ जबलपुर में दर्ज करीब आधा दर्जन FIR को रद्द करने से इनकार कर दिया है. नेटफ्लिक्स (Netflix) के Desi Bling में दिखाई दे चुके उद्यमी सतीश सनपाल के खिलाफ भारत में कथित IPL सट्टेबाजी रैकेट के सिलसिले में ये FIR दर्ज की गई थीं.

12 अगस्त 2026 को याचिकाओं को खारिज करते हुए जस्टिस हिमांशु जोशी ने कहा कि किसी आरोपी की छापेमारी वाली जगह पर भौतिक मौजूदगी उसकी जिम्मेदारी तय करने के लिए जरूरी शर्त नहीं है. उन्होंने कहा कि जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों की सुनवाई के दौरान जांच होनी चाहिए, न कि FIR रद्द करके उससे पहले ही मामले को खत्म कर दिया जाए. इसी राहत की मांग करने वाले चार सह-आरोपियों की याचिकाएं भी खारिज कर दी गईं. इन मामलों में चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है और अदालत ने प्रथम दृष्टया अपराध बनता पाया है, जिससे मामलों को ट्रायल के लिए आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है. सतीश सनपाल के वकीलों ने अपनी दलीलें एक शब्द पर खड़ी की थीं: दूरी.

सतीश सनपाल 14 मार्च 2020 को भारत से चले गए थे और वापस नहीं लौटे. दुबई से उनके वकीलों ने दलील दी कि जो व्यक्ति देश में मौजूद नहीं था, किसी छापेमारी के दौरान नहीं था, किसी जब्त फोन में नहीं था, किसी चैट में नहीं था, उसे जबलपुर से चल रहे सट्टेबाजी रैकेट से नहीं जोड़ा जा सकता. 12 अगस्त 2026 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उन्हें बताया कि दूरी बचाव नहीं है.

जबलपुर में एकल पीठ के रूप में बैठे जस्टिस हिमांशु जोशी ने करीब आधा दर्जन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनके जरिए सनपाल ने जबलपुर के चार पुलिस थानों में उनके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की थी. इसी राहत की मांग करने वाले चार सह-आरोपियों की याचिकाएं भी साथ में खारिज कर दी गईं.

अदालत का मुख्य निष्कर्ष वही पंक्ति है जो सबसे महत्वपूर्ण है. इस तरह के अपराधों में अदालत ने कहा कि छापेमारी वाली जगह पर आरोपी की भौतिक मौजूदगी उसकी जिम्मेदारी तय करने के लिए जरूरी शर्त नहीं है. अदालत ने कहा कि जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री का परीक्षण ट्रायल के दौरान किया जाना चाहिए, FIR रद्द करके उससे पहले ही मामले को खत्म नहीं किया जा सकता. चार्जशीट पहले ही दाखिल हो चुकी थी और अदालत ने प्रथम दृष्टया अपराध बनता पाया.

बचाव की वह दलील जो विफल हुई

सनपाल की याचिकाओं में FIR के खिलाफ हर संभव दलील दी गई थी. याचिकाओं में कहा गया कि उन्हें मास्टरमाइंड केवल गिरफ्तार किए गए आरोपियों के दर्ज बयानों के आधार पर बनाया गया. उनके बैंक खाते से कोई पैसा नहीं गया था; उनसे कुछ बरामद नहीं हुआ था; सह-आरोपी के फोन की फॉरेंसिक जांच में उनके खिलाफ कुछ नहीं मिला; अभियोजन जिन चैट्स पर भरोसा कर रहा था, उनमें न तो उनका नाम था और न ही उनसे जुड़ा कोई मोबाइल नंबर. याचिकाओं में जोर देकर कहा गया कि वह 2020 से दुबई में रह रहे थे और अपराध होने के समय भारत में नहीं थे. यह भी कहा गया कि जिन कंपनियों के इस्तेमाल का आरोप उन पर लगाया गया, वे वास्तविक कंपनियां थीं, उन्होंने अपने वैधानिक रिटर्न दाखिल किए थे और उन्हें गलत तरीके से उनका निदेशक बताया गया.

राज्य ने जवाब दिया कि उचित जांच के बाद याचिकाकर्ता की संलिप्तता दिखाने वाली पर्याप्त सामग्री जुटाई गई है, चार्जशीट पहले ही अदालत में दाखिल की जा चुकी है और उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है. हाई कोर्ट ने अभियोजन का पक्ष माना और ऐसा करते हुए "बच निकलने की रणनीति" की परतें खोल दीं.

BW Businessworld ने इस सीरीज में जिस पूरी व्यवस्था को दस्तावेजों के आधार पर सामने रखा, वह एक ही धारणा पर टिकी थी: विदेश में रहना सतीश सनपाल को मामले की पहुंच से बाहर कर देता है. अब एक हाई कोर्ट ने इसके उलट फैसला दिया है. अदालत ने कहा कि घटनास्थल से अनुपस्थिति जिम्मेदारी खत्म नहीं करती; सबूत भागीदारी साबित करते हैं या नहीं, यह ट्रायल का सवाल है, न कि ट्रायल शुरू होने से पहले FIR खत्म करने का आधार. BW की स्टोरीज के बाद UAE में सनपाल की संपत्तियां फ्रीज होने की खबरें सामने आईं.

इसका क्या मतलब है

व्यावहारिक असर सीधा और गंभीर है. FIR कायम हैं. चार्जशीट कायम है. अब मामले जबलपुर में ट्रायल के लिए आगे बढ़ेंगे. ऐसे व्यक्ति के लिए, जिसने छह साल यह सुनिश्चित करने में बिताए कि किसी काउंटर पर कभी कोई शरीर मौजूद न हो, दुबई में रहकर वह जिस अदालत से बच नहीं सकता था, वह अब उसके मामलों की अगली मंजिल के रूप में तय हो गई है.

हाल के महीनों की घटनाओं की कड़ी में इस फैसले को देखें तो दिशा साफ दिखाई देती है. दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा पुष्टि किया गया लुक-आउट सर्कुलर. पत्नी, जिसे ₹352 करोड़ के साथ घोषित अपराधी बताया गया और जिसे दुबई से मांगा गया पासपोर्ट नहीं दिया गया. UAE द्वारा खुद उनकी संपत्तियां फ्रीज किए जाने की खबर. और अब हाई कोर्ट का उन FIR को रद्द करने से इनकार, जिन्हें वह सबसे ज्यादा खत्म कराना चाहते थे. इनमें से हर घटना अपने आप में एक झटका है; साथ मिलकर वे एक घेरा कसने की तस्वीर पेश करते हैं.

यह फैसला जिस सवाल को और तेज करता है

FIR रद्द करने से इनकार ने उस सवाल को भी और धार दे दी है, जिसे BW पहले उठाता रहा है. अगर एक हाई कोर्ट ने दर्ज किया है कि जांच की सामग्री प्रथम दृष्टया उनकी भागीदारी की ओर इशारा करती है और चार्जशीट पहले ही ट्रायल कोर्ट के सामने है, तो प्रवर्तन निदेशालय द्वारा ECIR दर्ज करने, पैसों के ट्रेल शेल कंपनियों और ऑफशोर रास्तों का पीछा करने और भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम की संभावनाओं पर विचार करने की मांग अब समय से पहले की नहीं लगती. यह लंबित नजर आती है.

इनमें से कोई भी बात दोषसिद्धि नहीं है. FIR रद्द करने से इनकार करना अपराध का दोषी पाए जाने के बराबर नहीं है; यह केवल यह फैसला है कि मामला ट्रायल के योग्य है. सतीश सनपाल अब भी आरोपी हैं, उन्हें निर्दोष माने जाने का अधिकार है और वह ट्रायल के दौरान अपनी याचिकाओं में कही गई बातों को साबित करने के लिए स्वतंत्र हैं. लेकिन जिस दरवाजे को बंद कराने के लिए वह हाई कोर्ट गए थे, उसे खुला रखा गया है और जिस ट्रायल से वह बुर्ज खलीफा के पेंटहाउस में रहकर बच नहीं सकते, अब वही उस दरवाजे से आगे जाने का एकमात्र रास्ता है.

UAE में संपत्तियां फ्रीज किए जाने की खबर को आधिकारिक पुष्टि लंबित रहने तक प्रेस रिपोर्ट्स के हवाले से बताया गया है. सतीश सनपाल को आपराधिक मामलों में जमानत मिल चुकी है, उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है और उन्हें न्यायिक रूप से घोषित अपराधी नहीं माना गया है; वह आरोपों से इनकार करते हैं और मानहानि की कार्यवाही शुरू कर चुके हैं. वह, सोनिया सनपाल और नामित सभी व्यक्ति आरोपी हैं और उन्हें निर्दोष माने जाने का अधिकार है.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
 


डिजिटल अरेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन! RBI को 4 हफ्ते में SOP बनाने का आदेश

अदालत ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को साइबर ठगी की शिकायतों के त्वरित निपटारे और पीड़ितों की रकम वापस दिलाने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 05 August, 2026
Last Modified:
Wednesday, 05 August, 2026
BWHindia

देशभर में बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को चार सप्ताह के भीतर साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने का निर्देश दिया है. साथ ही राज्यों, बैंकों और जांच एजेंसियों को पीड़ितों का पैसा वापस दिलाने, फर्जी खातों पर कार्रवाई और जागरूकता बढ़ाने के लिए कई अहम निर्देश जारी किए हैं.

RBI को 4 हफ्ते में SOP तैयार करने का निर्देश

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने RBI को चार सप्ताह के भीतर ऐसी SOP तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसमें म्यूल अकाउंट (फर्जी खातों) और अन्य बैंक खातों के जरिए होने वाली साइबर ठगी पर रोक लगाने के प्रभावी उपाय शामिल हों.

अदालत ने कहा कि SOP में संदिग्ध खातों से अस्थायी निकासी रोकने, शिकायतों के त्वरित निपटारे, ठगी में गंवाई गई रकम वापस दिलाने की व्यवस्था और इन सुविधाओं के बारे में लोगों को जागरूक करने के प्रावधान होने चाहिए.

क्या होता है म्यूल अकाउंट?

म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी से हासिल रकम को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने के लिए करते हैं. कई मामलों में लोग मामूली पैसे के लालच में अपने बैंक खाते या पहचान संबंधी दस्तावेज दूसरों को उपलब्ध करा देते हैं, जिनका बाद में साइबर अपराध में इस्तेमाल होता है.

डिजिटल अरेस्ट मामलों पर स्वत: संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट से जुड़े साइबर धोखाधड़ी के मामलों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए यह आदेश दिया. डिजिटल अरेस्ट एक ऐसा साइबर फ्रॉड है, जिसमें ठग खुद को पुलिस, CBI, ED या किसी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के जरिए लोगों को डराते हैं और उन्हें ऑनलाइन 'नजरबंद' जैसा माहौल बनाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं.

राज्यों और एजेंसियों को भी दिए निर्देश

अदालत ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को साइबर ठगी की शिकायतों के त्वरित निपटारे और पीड़ितों की रकम वापस दिलाने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा कि पीड़ितों को जल्द राहत मिलनी चाहिए.

बनेगी अंतर-विभागीय समिति

सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा देने और विभिन्न एजेंसियों की साझा जिम्मेदारी तय करने के लिए एक अंतर-विभागीय समिति गठित करने का भी निर्देश दिया है. यह समिति सरकार और संबंधित विभागों को डिजिटल अरेस्ट जैसी धोखाधड़ी रोकने, बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने और केंद्र की SOP को प्रभावी तरीके से लागू करने के संबंध में सुझाव देगी.

बैंकों के साथ मिलकर बनेगी रणनीति

अदालत ने कहा कि यह समिति बैंकों के साथ मिलकर साइबर धोखाधड़ी रोकने, चोरी हुए पैसे की रिकवरी तेज करने और जांच एजेंसियों को बेहतर सहयोग देने की दिशा में काम करेगी.

हजारों पीड़ितों को वापस मिले 18 करोड़ रुपये

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्टेटस रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत ने बताया कि 57 बैंकों और सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से 36,290 मामलों में पीड़ितों को अब तक 18.05 करोड़ रुपये वापस दिलाए जा चुके हैं.

CBI भी कर रही बड़े नेटवर्क की जांच

सुप्रीम कोर्ट ने संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क के खिलाफ CBI की कार्रवाई का भी उल्लेख किया. एजेंसी ने डिजिटल अरेस्ट से जुड़े कई मामले दर्ज किए हैं, 67 बैंक खातों के जरिए हुए लेनदेन के आधार पर पीड़ितों की पहचान की है और 16 राज्यों में 93 स्थानों पर छापेमारी की है.

बैंक AI की मदद से कर रहे निगरानी

एक सरकारी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, बैंक अब साइबर अपराध से जुड़े मोबाइल नंबरों की निगरानी, संदिग्ध ट्रांजैक्शन का विश्लेषण और AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके अलावा रियल-टाइम ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग, बड़ी रकम के ट्रांसफर पर कॉलबैक वेरिफिकेशन, OTP आधारित प्रमाणीकरण और मजबूत KYC प्रक्रिया के जरिए सुरक्षा बढ़ाई जा रही है.

हालांकि, बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों से है, जो थोड़े से पैसे के लालच में अपने बैंक खाते या पहचान पत्र दूसरों को इस्तेमाल करने के लिए दे देते हैं. यही खाते बाद में साइबर अपराधियों के लिए मनी ट्रांसफर का माध्यम बन जाते हैं.
 


महादेव बेटिंग ऐप केस: स्काईएक्सचेंज की कमाई से हुई थी Ebix डील? ED का बड़ा दावा

जांच एजेंसी का कहना है कि अवैध धन को विदेशी पोर्टफोलियो निवेश, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट और अन्य विदेशी निवेश माध्यमों के जरिए भारत में लाया गया.

Last Modified:
Thursday, 16 July, 2026
BWHindia

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने महादेव ऑनलाइन बुक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ा खुलासा करने का दावा किया है. एजेंसी के अनुसार, अवैध ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म स्काईएक्सचेंज (Skyexchange) से अर्जित धन का इस्तेमाल अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी Ebix के अधिग्रहण के लिए किया गया. ED का कहना है कि इस धन को विदेशी निवेश के जरिए वैध निवेश का रूप देकर भारत लाया गया.

ED का क्या है आरोप?

ED के मुताबिक, कारोबारी विकास गर्ग ने स्काईएक्सचेंज के जरिए कमाई गई अवैध रकम को Eraaya Lifespaces के माध्यम से Ebix के अधिग्रहण में लगाया. एजेंसी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जारी अपने अंतरिम कुर्की आदेश में यह दावा किया है.

जांच एजेंसी का कहना है कि अवैध धन को विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI), प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड (FCCBs), क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) और अन्य विदेशी निवेश माध्यमों के जरिए भारत में लाया गया.

765.77 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमाई का इस्तेमाल

ED के अनुसार, लगभग 765.77 करोड़ रुपये की कथित अपराध से अर्जित राशि को विकास गर्ग, उनके परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों तक पहुंचाया गया. इन पैसों का इस्तेमाल Eraaya Lifespaces में हिस्सेदारी खरीदने और बाद में Ebix के अधिग्रहण के लिए किया गया.

एजेंसी का दावा है कि Eraaya Lifespaces ने अगस्त 2024 में अमेरिकी दिवालिया अदालत (US Bankruptcy Court) के जरिए Ebix में 57.58% हिस्सेदारी खरीदी थी.

कैसे हुई फंडिंग?

ED के मुताबिक, Ebix के अधिग्रहण के लिए कई स्रोतों से धन जुटाया गया, जिनमें लगभग 250 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश, करीब 374.4 करोड़ रुपये का QIP और FCCBs के जरिए जुटाई गई राशि शामिल थी.

जांच में यह भी सामने आया कि अगस्त 2024 में Eraaya के QIP एस्क्रो खाते में विदेशी निवेशकों से 248.5 करोड़ रुपये आए, जिन्हें बाद में कंपनी के मुख्य खाते में ट्रांसफर कर Ebix अधिग्रहण में इस्तेमाल किया गया.

इसके अलावा, जांचकर्ताओं ने विकास लाइफकेयर से जुलाई 2024 से जुलाई 2025 के बीच Ebix को लगभग 292.4 करोड़ रुपये के ट्रांसफर का भी पता लगाया. एजेंसी का आरोप है कि इन लेन-देन को कंपनी के वित्तीय विवरणों में ऋण, अग्रिम और निवेश के रूप में दर्ज किया गया.

कोलकाता के एंट्री ऑपरेटर का भी नाम

ED का आरोप है कि कोलकाता स्थित कथित एंट्री ऑपरेटर अमित सरावगी ने लगभग 526 करोड़ रुपये की फर्जी लेखा प्रविष्टियों (एंट्री) की व्यवस्था की. एजेंसी के मुताबिक, इनमें से करीब 175 करोड़ रुपये विकास गर्ग से जुड़ी कंपनियों में भेजे गए, जिनमें GG Engineering जैसी कंपनियां भी शामिल हैं.

हर महीने 450 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमाई

ED का दावा है कि महादेव ऑनलाइन और स्काईएक्सचेंज नेटवर्क हर महीने 450 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई कर रहे थे. इस धन को शेल कंपनियों, फर्जी दस्तावेजों और कई स्तरों वाले वित्तीय लेन-देन के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग कर विभिन्न संपत्तियों में निवेश किया गया.

940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच

डिजिटल सबूतों, बैंक रिकॉर्ड और PMLA के तहत जुटाए गए दस्तावेजों के आधार पर ED ने निष्कर्ष निकाला कि विकास गर्ग से जुड़ी संस्थाओं में निवेश किए गए 765.77 करोड़ रुपये अपराध से अर्जित आय हैं.

इसी आधार पर एजेंसी ने Ebix में Eraaya Lifespaces की 163.8 करोड़ रुपये की शेयरहोल्डिंग और लगभग 47.74 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों समेत कुल 940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है.

जांच अभी जारी

ED ने कहा है कि महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज नेटवर्क के संचालकों, प्रमोटरों और सहयोगियों के खिलाफ छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में दर्ज मामलों के आधार पर जांच जारी है. एजेंसी का कहना है कि संपत्तियों को कुर्क करने का उद्देश्य उन्हें बेचे जाने या स्थानांतरित किए जाने से रोकना है, ताकि जांच और कानूनी कार्रवाई प्रभावित न हो.
 


महादेव बेटिंग केस: ईबिक्स चेयरमैन विकास गर्ग को राहत नहीं, कोर्ट ने 24 घंटे की ट्रांजिट रिमांड दी

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने मंगलवार को ED की याचिका स्वीकार करते हुए विकास गर्ग की 24 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मंजूर की. एजेंसी ने अदालत से कहा था कि रायपुर स्थित विशेष PMLA अदालत में पेश करने के लिए गर्ग को वहां ले जाना जरूरी है.

Last Modified:
Tuesday, 14 July, 2026
BWHindia

महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार ईबिक्स (Ebix) के चेयरमैन विकास गर्ग को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट से राहत नहीं मिली. कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को 24 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मंजूर कर दी है, जिसके बाद उन्हें छत्तीसगढ़ के रायपुर ले जाया जाएगा. वहां उन्हें धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गठित विशेष अदालत में पेश किया जाएगा. यह कार्रवाई महादेव बेटिंग सिंडिकेट से जुड़े कथित अवैध धन के लेनदेन की जांच के तहत की गई है.

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विजय शंकर ने मंगलवार को ED की याचिका स्वीकार करते हुए विकास गर्ग की 24 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मंजूर की. एजेंसी ने अदालत से कहा था कि रायपुर स्थित विशेष PMLA अदालत में पेश करने के लिए गर्ग को वहां ले जाना जरूरी है.

940.7 करोड़ रुपये की संपत्तियां पहले ही हो चुकी हैं अटैच

गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले ही ED ने PMLA के तहत विकास गर्ग, उनके परिवार और उनसे जुड़ी संस्थाओं की करीब 940.7 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) की थीं. एजेंसी के मुताबिक इनमें आवासीय संपत्तियां, जमीन, इक्विटी शेयर और अन्य प्रतिभूतियां शामिल हैं. ED का आरोप है कि ये सभी संपत्तियां अवैध बेटिंग नेटवर्क से अर्जित अपराध की आय (Proceeds of Crime) से खरीदी गईं.

जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा

10 जुलाई को जारी अपने बयान में ED ने कहा था कि विकास गर्ग के खिलाफ "महादेव ऑनलाइन बुक या स्काईएक्सचेंज अवैध ऑनलाइन बेटिंग मामले" में PMLA के तहत कार्रवाई की जा रही है. जांच के दायरे में महादेव बुक ऐप और दुबई स्थित बेटिंग प्लेटफॉर्म स्काईएक्सचेंज भी शामिल हैं.

अप्रैल 2025 में ED ने विकास गर्ग के आवास और उनकी कंपनियों के कार्यालयों पर छापेमारी की थी. उस समय उनकी कंपनियों ने शेयर बाजार को दी जानकारी में कहा था कि जांच कुछ तीसरे पक्ष और उनके लेनदेन से जुड़ी है. बाद में नियामकीय फाइलिंग में कंपनियों ने PMLA के तहत चल रही कार्रवाई की पुष्टि की, लेकिन सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि वे कानूनी मंचों पर इसका विरोध कर रही हैं.

कई सूचीबद्ध कंपनियों से जुड़े हैं विकास गर्ग

विकास गर्ग, विकास लाइफकेयर और विकास इकोटेक के प्रमोटर हैं. दोनों कंपनियां नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में सूचीबद्ध हैं. इसके अलावा ईबिज (Ebiz) बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में सूचीबद्ध है. अगस्त 2024 में उन्हें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली इकाई के आर्थिक प्रकोष्ठ का संयोजक भी नियुक्त किया गया था.

क्या है महादेव बेटिंग ऐप मामला?

महादेव बेटिंग ऐप मामले में आरोप है कि सिंडिकेट ने हवाला, क्रिप्टोकरेंसी और बेनामी बैंक खातों के जरिए अवैध कमाई को वैध दिखाने की कोशिश की. ED के अनुसार यह नेटवर्क टाइगर एक्सचेंज, गोल्ड365 और लेजर247 जैसे कई ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए फ्रेंचाइजी मॉडल पर पूरे भारत में संचालित होता था. एजेंसी का दावा है कि इसका संचालन दुबई से कथित मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल करते थे.

ओमान में मिला सौरभ चंद्राकर

इस मामले में एक अन्य बड़ी कार्रवाई के तहत महादेव बेटिंग ऐप के कथित प्रमोटर और लगभग 6,000 करोड़ रुपये के घोटाले के प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर का ओमान में पता लगाया गया है. ED और छत्तीसगढ़ पुलिस के अनुरोध पर जारी इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया है. भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण (Extradition) की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है.

ED इससे पहले सौरभ चंद्राकर से जुड़ी लगभग 1,700 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी कुर्क कर चुकी है, जिनमें दुबई स्थित लग्जरी विला और प्रीमियम अपार्टमेंट शामिल हैं.

2022 से जारी है जांच

महादेव बेटिंग ऐप मामले की जांच 2022 से चल रही है और समय के साथ इसका दायरा काफी बढ़ गया है. ED के अनुसार अब तक देशभर में 175 से अधिक स्थानों पर तलाशी ली जा चुकी है, 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, 74 आरोपियों के खिलाफ पांच अभियोजन शिकायतें (Prosecution Complaints) दायर की गई हैं और भारत व विदेशों में हजारों करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं.


NEET-UG री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम पर रोक बरकरार, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के फैसले को दी मंजूरी

NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून को प्रस्तावित है. ऐसे में सरकार ने किसी भी संभावित पेपर लीक या परीक्षा संबंधी अनियमितता को रोकने के लिए टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया था. यह प्रतिबंध 22 जून तक लागू रहेगा.

Last Modified:
Friday, 19 June, 2026
BWHindia

दिल्ली हाईकोर्ट ने NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले भारत में टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को बरकरार रखा है. अदालत ने केंद्र सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यह कदम परिस्थितियों के अनुसार सबसे कम प्रतिबंधात्मक और उचित उपाय था. इसके साथ ही टेलीग्राम की ओर से दायर चुनौती को खारिज कर दिया गया.

22 जून तक बंद रहेगा Telegram

न्यायमूर्ति तेजस करिया ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि केंद्र सरकार का आदेश अनुपातिकता की कसौटी पर खरा उतरता है. अदालत ने माना कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उठाया गया यह कदम आवश्यक था. NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून को प्रस्तावित है. ऐसे में सरकार ने किसी भी संभावित पेपर लीक या परीक्षा संबंधी अनियमितता को रोकने के लिए टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया था. यह प्रतिबंध 22 जून तक लागू रहेगा.

NTA और शिक्षा मंत्रालय की सिफारिश पर हुई कार्रवाई

केंद्र सरकार ने यह कदम राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की सिफारिशों के आधार पर उठाया. इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A का इस्तेमाल करते हुए भारत में टेलीग्राम की सेवाओं को अस्थायी रूप से ब्लॉक करने का आदेश जारी किया.

सरकार ने टेलीग्राम को 30 जून तक पुराने संदेशों में एडिटिंग फीचर भी निष्क्रिय करने का निर्देश दिया है.

सरकार का दावा- लीक सामग्री फैलाने में अहम भूमिका

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि टेलीग्राम की तकनीकी संरचना बड़ी मात्रा में सामग्री के प्रसार की अनुमति देती है. उन्होंने कहा कि एक बार किसी बॉट या चैनल को बंद करने के बाद भी उसकी कॉपी या मिरर बॉट्स तेजी से सक्रिय हो जाती हैं और आपत्तिजनक सामग्री का प्रसार जारी रखती हैं.

सरकार का कहना था कि परीक्षा से जुड़ी लीक सामग्री के प्रसार में टेलीग्राम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, इसलिए यह कदम जरूरी था.

Telegram ने फैसले का किया विरोध

टेलीग्राम ने अदालत में प्रतिबंध का विरोध करते हुए कहा कि केवल उसी को निशाना बनाना उचित नहीं है, जबकि अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बिना किसी रोक के काम कर रहे हैं. टेलीग्राम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता ने कहा कि कंपनी लगातार सरकारी एजेंसियों के संपर्क में रही है और अवैध सामग्री के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करती रही है.

कंपनी के अनुसार, 9 जून को अधिकारियों से सूचना मिलने के एक घंटे के भीतर चिह्नित URLs हटा दिए गए थे. साथ ही NEET से जुड़ी अवैध सामग्री वाले 900 से अधिक लिंक भी हटाए गए. टेलीग्राम ने दावा किया कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और मैनुअल मॉडरेशन के जरिए नियमों के उल्लंघन वाली सामग्री की पहचान करता है.

अदालत में उठे कानूनी सवाल

सुनवाई के दौरान टेलीग्राम ने यह सवाल भी उठाया कि क्या किसी परीक्षा से जुड़ी चिंताओं के आधार पर देश की संप्रभुता और अखंडता के हित में ब्लॉकिंग आदेश जारी किया जा सकता है. हालांकि, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए टेलीग्राम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है.

जांच और निगरानी जारी

फिलहाल टेलीग्राम पर लगा प्रतिबंध 22 जून तक प्रभावी रहेगा. सरकार का मानना है कि पुनर्परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी रोकने और परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह कदम आवश्यक है. वहीं, टेलीग्राम का कहना है कि वह कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग जारी रखेगा और अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करता रहेगा.
 


यस बैंक लोन असाइनमेंट मामले में ED का एक्शन, पूर्व कर्मचारी जांच के घेरे में; 17 ठिकानों पर छापेमारी

इस मामले में ED दिल्ली, मुंबई और खंडाला में एक साथ रेड, लोन ट्रांजैक्शंस में वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही है.

Last Modified:
Wednesday, 17 June, 2026
BWHindia

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को कथित बैंक लोन असाइनमेंट मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली, मुंबई और खंडाला में 17 स्थानों पर छापेमारी की. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच एजेंसी की यह कार्रवाई YES Bank से जुड़े कथित फर्जी ऋण हस्तांतरण (Loan Assignment) मामले में की गई है. जांच के दायरे में बैंक का एक पूर्व कर्मचारी भी आया है.

किन कंपनियों पर है ED की नजर?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी ने अपनी तलाशी कार्रवाई के दौरान सुरक्षा एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी (SARCL), सुरक्षा रियल्टी, ख्याति रियल्टर्स और उनसे जुड़े प्रमोटर्स, निदेशकों तथा कर्मचारियों के परिसरों को निशाना बनाया. एजेंसी इन संस्थाओं और व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है.

क्या है पूरा मामला?

यह जांच वित्त वर्ष 2016-17 और 2017-18 के दौरान मैक्स्टार मार्केटिंग और उससे जुड़ी अन्य कंपनियों के लोन खातों के असाइनमेंट से संबंधित है. ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन ऋणों के हस्तांतरण की प्रक्रिया में वित्तीय अनियमितताएं हुईं या फिर धन शोधन निवारण कानून (PMLA) के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया.

दस्तावेजों और डिजिटल डेटा की जांच

जांच एजेंसी कथित लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा और संचार माध्यमों की बारीकी से जांच कर रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, एक साथ कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाकर साक्ष्य जुटाने की कोशिश की गई है.

बैंक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

ईडी यह भी जांच कर रही है कि लोन असाइनमेंट प्रक्रिया में कंपनी अधिकारियों, बैंक कर्मचारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की क्या भूमिका रही. एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या किसी बैंक अधिकारी या बाहरी संस्था को इन लेन-देन से अनुचित लाभ पहुंचा या उन्होंने कथित अनियमितताओं को बढ़ावा दिया.

अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं

फिलहाल इस मामले में किसी गिरफ्तारी की सूचना नहीं है. ईडी ने तलाशी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों और अन्य सामग्रियों की जांच शुरू कर दी है. एजेंसी के अनुसार, साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा. जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं.


लाल किला विस्फोट मामले में NIA का आरोपपत्र दाखिल, अल-कायदा की साजिश का दावा

एनआईए का कहना है कि यह नेटवर्क देश में बड़े पैमाने पर हमलों की योजना बना रहा था, लेकिन समय रहते इसे रोक दिया गया. अब तक इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

Last Modified:
Saturday, 16 May, 2026
BWHindia

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली के लाल किला इलाके में हुए कार बम विस्फोट मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ लगभग 7,500 पन्नों का आरोपपत्र विशेष अदालत में दाखिल किया है. एजेंसी के अनुसार यह हमला पिछले वर्ष हुआ था, जिसमें 11 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे.

विस्फोट की साजिश और जांच

जांच एजेंसी का कहना है कि यह विस्फोट 10 नवंबर 2025 को हाई-इंटेंसिटी व्हीकल-बॉर्न इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (VBIED) के जरिए किया गया था. धमाके से क्षेत्र में भारी तबाही और जान-माल का नुकसान हुआ.

आरोपपत्र पटियाला हाउस कोर्ट स्थित विशेष एनआईए अदालत में दाखिल किया गया. एजेंसी ने आरोप लगाया है कि सभी 10 आरोपी आतंकी संगठन “अंसार गजवत-उल-हिंद” (Ansar Ghazwat-ul-Hind) से जुड़े थे, जिसे वह अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (Al-Qaeda in the Indian Subcontinent) की शाखा बताती है.

‘जिहादी साजिश’ का आरोप

एनआईए के अनुसार यह पूरा मामला एक बड़े “जिहादी षड्यंत्र” का हिस्सा है, जिसकी योजना और क्रियान्वयन वैज्ञानिक और फॉरेंसिक जांच के जरिए सामने आया. एजेंसी का यह भी दावा है कि कुछ आरोपी “कट्टरपंथी मेडिकल प्रोफेशनल्स” थे, जिन्हें अंसार गजवत-उल-हिंद और अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट की विचारधारा से प्रभावित किया गया था.

मुख्य आरोपी और नेटवर्क

आरोपपत्र में मुख्य साजिशकर्ता के रूप में डॉ. उमर उन नबी का नाम शामिल है. वह पुलवामा के निवासी और पहले Al-Falah University में सहायक प्रोफेसर रह चुके थे. हालांकि उनकी मृत्यु हो चुकी है, इसलिए उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त करने की सिफारिश की गई है.

अन्य आरोपियों में आमिर राशिद मीर, जसिर बिलाल वानी, डॉ. मुज़म्मिल शकील, डॉ. आदिल अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, सोयाब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार शामिल हैं.

जांच में दावा किया गया है कि 2022 में एक गुप्त बैठक श्रीनगर में हुई थी, जिसके बाद यह समूह फिर से सक्रिय हुआ. यह बैठक उस समय हुई जब सदस्य तुर्किए के रास्ते अफगानिस्तान जाने की कोशिश में असफल रहे थे.

हथियार, विस्फोटक और ड्रोन प्रयोग

एनआईए के अनुसार आरोपी समूह ने हथियार इकट्ठा किए, प्रचार फैलाया और रसायनों की मदद से विस्फोटक तैयार किए. जांच में यह भी सामने आया कि उन्होंने कई तरह के IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) विकसित और परीक्षण किए.

एजेंसी का दावा है कि रेड फोर्ट हमले में इस्तेमाल विस्फोटक TATP (Triacetone Triperoxide) था, जिसे रासायनिक पदार्थों के जरिए प्रयोगात्मक रूप से तैयार किया गया था.

इसके अलावा आरोपियों पर AK-47, Krinkov राइफल और देसी पिस्तौल जैसे हथियारों की अवैध खरीद का भी आरोप है.

जांच में यह भी सामने आया कि समूह ने ड्रोन आधारित और रॉकेट-आधारित IED बनाने के प्रयोग किए, खासकर जम्मू-कश्मीर और अन्य क्षेत्रों में, जिनका उद्देश्य सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना था.

जांच का दायरा

एनआईए ने बताया कि यह जांच हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली एनसीआर सहित कई राज्यों में की गई. मामले में 588 गवाहों के बयान, 395 से अधिक दस्तावेज और 200 से ज्यादा जब्त वस्तुएं शामिल हैं. एजेंसी ने यह भी कहा कि डॉ. उमर उन नबी की पहचान डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के जरिए की गई. जांच अभी जारी है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है.

एनआईए का कहना है कि यह नेटवर्क देश में बड़े पैमाने पर हमलों की योजना बना रहा था, लेकिन समय रहते इसे रोक दिया गया. अब तक इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
 


ईडी का बड़ा एक्शन: फर्जी GST बिल मामले में पंजाब सरकार के मंत्री संजीव अरोड़ा गिरफ्तार

सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई कथित फर्जी GST खरीद, मनी लॉन्ड्रिंग और निर्यात से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच के तहत की गई.

Last Modified:
Saturday, 09 May, 2026
BWHindia

पंजाब सरकार में स्थानीय निकाय एवं संसदीय कार्य मंत्री संजीव अरोड़ा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. सूत्रों के मुताबिक 100 करोड़ रुपये से अधिक के कथित फर्जी जीएसटी (GST) बिल, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने चंडीगढ़, दिल्ली और गुरुग्राम समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की. लंबी पूछताछ के बाद अरोड़ा को हिरासत में लिए जाने की चर्चा तेज है, हालांकि एजेंसी की ओर से आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है.

सुबह 7 बजे शुरू हुई छापेमारी

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब सात बजे ईडी की कई टीमों ने एक साथ कार्रवाई शुरू की. चंडीगढ़ स्थित सेक्टर-2 आवास के अलावा दिल्ली, गुरुग्राम और अन्य ठिकानों पर भी तलाशी अभियान चलाया गया. सुरक्षा व्यवस्था के लिए सीआईएसएफ और सीआरपीएफ के जवान तैनात रहे. ईडी अधिकारियों ने कई घंटों तक वित्तीय दस्तावेजों, कारोबारी लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच की.

फर्जी GST बिल और ITC घोटाले की जांच

सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई कथित फर्जी GST खरीद, मनी लॉन्ड्रिंग और निर्यात से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच के तहत की गई. जांच एजेंसी को संदेह है कि मोबाइल फोन कारोबार से जुड़े फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और GST रिफंड हासिल किया गया. ईडी अब दुबई से जुड़े कथित फंड ट्रांजैक्शन और राउंड ट्रिपिंग एंगल की भी जांच कर रही है.

देर रात हिरासत की चर्चा तेज

दिनभर चली कार्रवाई के बाद देर शाम राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि ईडी ने संजीव अरोड़ा को हिरासत में ले लिया है. हालांकि आधिकारिक स्तर पर न तो गिरफ्तारी की पुष्टि की गई और न ही विस्तृत बयान जारी किया गया. सूत्रों का कहना है कि आगे की पूछताछ के लिए उन्हें दिल्ली ले जाया जा सकता है.

पंजाब की राजनीति में बढ़ी हलचल

ईडी की कार्रवाई के बाद पंजाब की राजनीति गरमा गई है. आम आदमी पार्टी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है. वहीं विपक्षी दल लगातार सरकार पर सवाल उठा रहे हैं. मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले भी केंद्र सरकार और भाजपा पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगा चुके हैं. दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि यदि जांच हो रही है तो सच्चाई सामने आनी चाहिए.

अगले 24 घंटे अहम

सूत्रों के अनुसार, आने वाले 24 घंटों में ईडी इस मामले में आधिकारिक जानकारी साझा कर सकती है. फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर पंजाब की राजनीति और कारोबारी जगत की नजरें टिकी हुई हैं.
 


ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच में रिलायंस के दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार

ईडी ने अपनी जांच में पाया कि अनिल अंबानी समूह से जुड़ी कंपनियों ने कथित रूप से 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग की.

Last Modified:
Thursday, 16 April, 2026
BWHindia

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए रिलायंस समूह से जुड़े दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया है. यह मामला कथित लोन फ्रॉड और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है.

ईडी के अनुसार, अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत हिरासत में लिया गया है. यह कार्रवाई केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा पहले दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर की गई है.

किन कंपनियों से जुड़ा है मामला

सीबीआई की जांच में सामने आया कि यह मामला रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से जुड़ा है. इन कंपनियों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और बैंक फंड के दुरुपयोग के आरोप हैं.

₹40,000 करोड़ से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

ईडी ने अपनी जांच में पाया कि अनिल अंबानी समूह से जुड़ी कंपनियों ने कथित रूप से 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग की. एजेंसी ने अब तक लगभग 17,000 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की हैं. इसमें मुंबई स्थित अनिल अंबानी का करीब 3,700 करोड़ रुपये का आवास भी शामिल है.

अनिल अंबानी से भी हो चुकी है पूछताछ

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच एजेंसियों ने अनिल अंबानी से कई बार पूछताछ की है. हालांकि, उनका कहना है कि उन्होंने वर्ष 2017 में संबंधित कंपनियों के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था.

झुनझुनवाला और बापना की भूमिका

अमिताभ झुनझुनवाला, जो रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के पूर्व ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर और रिलायंस कैपिटल के वाइस चेयरमैन रह चुके हैं, पहले भी जांच एजेंसियों के रडार पर रहे हैं. जांचकर्ताओं का मानना है कि उन्होंने RHFL और RCFL से जुड़े वित्तीय फैसलों में अहम भूमिका निभाई. वहीं, अमित बापना रिलायंस फाइनेंस में एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्यरत थे.

कैसे हुआ घोटाला

ईडी के अनुसार, RHFL और RCFL ने कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों से जनता का पैसा जुटाया, जिसमें से 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बाद में एनपीए (Non-Performing Assets) में बदल गई. जांच में यह भी सामने आया कि इस धन को शेल कंपनियों के नेटवर्क के जरिए अन्य रिलायंस समूह की कंपनियों में ट्रांसफर किया गया, जिनकी वित्तीय स्थिति बेहद कमजोर थी और जिनका कोई ठोस व्यवसाय नहीं था.

किन बैंकों ने दर्ज कराई शिकायत

ईडी ने यह मामला जुलाई 2025 में दर्ज किया था, जो यस बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शिकायतों पर आधारित था. सीबीआई ने कंपनियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के उल्लंघन के तहत मामला दर्ज किया है.

ईडी की आगे की कार्रवाई

मार्च 2026 में ईडी ने इस पूरे मामले में पैसे की हेराफेरी के तरीके (मोडस ऑपरेंडी) का खुलासा किया था और संपत्तियों को जब्त करने का आदेश जारी किया था. एजेंसी ने कहा है कि वह वित्तीय अपराधों के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगी और अवैध संपत्तियों को उनके वास्तविक हकदारों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है.
 


ईडी ने I-PAC के सह-संस्थापक विनेश चंदेल को पश्चिम बंगाल कोयला घोटाले में किया गिरफ्तार

ईडी की यह गिरफ्तारी कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की परतें खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. एजेंसी इस मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान और नेटवर्क के विस्तार को समझने की कोशिश कर रही है.

Last Modified:
Tuesday, 14 April, 2026
BWHindia

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राजनीतिक परामर्श फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी के सह-संस्थापक विनेश चंदेल को पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई है. यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा नवंबर 2020 में दर्ज की गई एफआईआर से जुड़ा है. इसमें पश्चिम बंगाल में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों से बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी का आरोप लगाया गया था. जांच में अवैध खनन और कोयले की हेराफेरी से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है.

PMLA के तहत गिरफ्तारी

ईडी ने विनेश चंदेल को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के प्रावधानों के तहत दिल्ली में हिरासत में लिया. उन्हें जल्द ही विशेष अदालत में पेश किया जाएगा. एजेंसी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध कमाई के प्रवाह की जांच कर रही है.

वित्तीय लेन-देन की जांच पर फोकस

ईडी की जांच का मुख्य फोकस कथित अपराध से जुड़े पैसों के लेन-देन और उनकी ट्रेल का पता लगाना है. एजेंसी यह भी जांच रही है कि कोयला चोरी के नेटवर्क और चंदेल से जुड़े संस्थानों के बीच क्या संबंध हैं. इससे पहले ईडी ने दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई सहित कई स्थानों पर छापेमारी की थी, जहां से वित्तीय दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाए गए.

लंबे समय से जांच के दायरे में घोटाला

पश्चिम बंगाल कोयला घोटाला पिछले कई वर्षों से जांच के दायरे में है. इसमें सरकारी खदानों से संगठित तरीके से अवैध कोयला निकालने और बेचने के आरोप हैं. इस मामले में कई व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका की जांच की जा रही है.

ईडी की यह गिरफ्तारी कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की परतें खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. एजेंसी इस मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान और नेटवर्क के विस्तार को समझने की कोशिश कर रही है.